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क्या शीला दीक्षित ने कहा कि सरकारी स्कूल में बूथ न बनें, वरना लोग स्कूल देख AAP को वोट दे देंगे?

सोशल मीडिया पर एक ट्वीट काफी वायरल हो रहा है जिसमें शीला दीक्षित की एक उदास तस्वीर है और उनका एक कथित बयान है. इस ट्वीट के अनुसार शीला दीक्षित ने कहा है-

दिल्ली के सरकारी स्कूलों को पोलिंग बूथ ना बनाया जाए वरना लोग सरकारी स्कूल देखकर केजरीवाल को ही वोट देंगे.

लेकिन आज हम इसकी पड़ताल नहीं करने जा रहे. क्यूंकि ये कोई फेक न्यूज़ है ही नहीं. ये तो एक पॉलिटिकल सटायर है. मतलब ये एक ऐसी पोस्ट/ट्वीट है जिसके बारे में पढ़ने वाले को पता होता है कि ये झूठ है, लेकिन फिर भी केवल मज़े के लिए ट्वीट करने वाला ट्वीट करता है, रीट्वीट करने वाला रीट्वीट करता है और पढ़ने वाला या देखने वाला क्रमशः देखता या पढ़ता है.

तो सवाल ये कि ये एक फेक न्यूज़ न होकर पॉलिटिकल सटायर है ये कैसे पता चला?

इसलिए क्यूंकि जिस हैंडल से ये ट्वीट किया गया है वो फेक अकाउंट नहीं पैरोडी अकाउंट है. मतलब एक ऐसा अकाउंट जिसके बारे में देखने वाले को पता होता है कि ये झूठ है, लेकिन फिर भी केवल मज़े के लिए ये अकाउंट बनाने वाला बनाता है और देखने वाला देखता है.

अब आप देखिए इस अकाउंट से हुआ एक और मज़ेदार ट्वीट जिसमें तैमूर अली खान एक स्टेटमेंट दे रहे हैं-

अब पढ़ने वाले को पता ही है कि तैमूर अली खान अभी इतने बड़े नहीं हुए हैं कि ऐसा कोई स्टेटमेंट, इनफैक्ट कोई भी स्टेटमेंट दे सकें.

इसी अकाउंट से हुआ एक और ट्वीट आपकी नज़र –

तो दोस्तो निष्कर्ष ये निकलता है कि बेशक ये ट्वीट सच नहीं है, लेकिन ये किसी को भरोसा दिलाने के लिए भी नहीं है कि ये सच है. मतलब इस और ऐसे ही अन्य ट्वीट्स को पढ़ने और इनका आनंद लेने की सबसे पहली शर्त ही ये है कि आपको पता होना चाहिए कि इस ट्वीट में कही गयी सभी बातें ‘वर्क ऑफ़ फिक्शन’ है तथा इनका किसी भी जीवित अथवा मृत से कोई लेनाना देना नहीं. यदि ऐसा पाया जाता है तो ये मात्र एक व्यंग्य होगा.

और वैसे भी अगर ये बात सच होती तो अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी ‘आप’ इसे एक ब्लैंक चेक की तरह हर जगह कैश करवाती फिरती.

चलिए तो तब जबकि हमको पता चल गया कि शीला ने कभी ऐसा नहीं कहा कि – दिल्ली के सरकारी स्कूलों को पोलिंग बूथ ना बनाया जाए वरना लोग सरकारी स्कूल देखकर केजरीवाल को ही वोट देंगे, तो फिर अब सवाल ये उठता है कि इस व्यंग्य को समझने के लिए हमें पहले से किस बात की जानकारी होनी चाहिए?

इस बात की कि कई लोगों का मानना है कि अरविंद केजरीवाल के कार्यकाल में स्कूलों और अस्पतालों को लेकर बहुत अच्छा काम हुआ है. और यूं अगर वहां पर पोलिंग बूथ बने तो स्कूल की छठा देखकर ‘आप’ का एक कट्टर विरोधी भी पिघलकर आप के पक्ष में वोट दे आएगा/आएगी.

लेकिन ये सब कोई सर्वमान्य ‘तथ्य’ नहीं केवल ‘कुछमान्य’ राय है, और यही राय ‘ज़ी रिपब्लिक’ नाम का हैंडल बनाने वाले या वालों की भी है.

अब अंत में बात करते हैं इस हैंडल के नाम की – जी, ज़ी रिपब्लिक की. ये दो न्यूज़ चैनलों के नाम को मिलाकर बनाया गया नाम है. इट्स अ मेड अप नेम. ये भी आपको पता ही होगा – ज़ी न्यूज़ और रिपब्लिक टीवी.

पैरोडी अकाउंट की यही तो विशेषता होती है, कि वो किसी फेमस या कंट्रोवर्शियल या फेमस और कंट्रोवर्शियल व्यक्ति या संस्था के नाम सा लगता है, इसलिए ही तो उसे पैरोडी अकाउंट या पैरोडी हैंडल कहते हैं. रोफ़ल गांधी, सर जडेजा और अनऑफिशियल सुब्रमण्यम स्वामी जैसे कई ऐसे पैरोडी अकाउंट ट्विटर में आपके मनोरंजन के लिए उपलब्ध हैं.


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