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जब भीमसेन जोशी के सामने गाने से डर गए थे मन्ना डे

बॉलीवुड के गानों में फूल और दिल बहुतायत में इस्तेमाल किए जाते हैं. जनता भी फूल देख-देखकर कितनी चंट हो गई है कि बगिया में दो फूल टकराते ही समझ जाती थी. कहीं दो दिल मिल रहे होंगे. दिलों के मिलने के लिए फूलों की अनिवार्यता के बीच वो गाने सुनिए. जिनमें फूल ही फूल हैं. उन्हीं के आड़े कुछ किस्से भी सुनिए-पढ़िए.

  • फुल गेंदवा न मारो लगत कलेजवा पर चोट

गेंदे के साथ मजे ये कि गेंदे का फूल, फूलय नहीं है. गेंदा एक फूल न होकर फूलों का पूरा गुच्छा है. गेंदे का फूल तमाम भदेसी इस्तेमाल समेटे, विदेशी फूल है. यहां प्रचलित तमाम गेंदे मूलत: दक्षिण अमेरिकी हैं. गेंदे से चोट भी लगती है. मन्ना डे बता रहे हैं. ‘दूज का चांद’ का ये गाना साहिर लुधियानवी ने लिखा है. संगीत दिया संगीतकार रौशन ने. राग भैरवी पर आधारित ये गाना सुनने में तो बड़ा क्लासिकल है लेकिन स्क्रीन पर इसे देखना अलग फील देता है. सच्ची.

  • केतकी, गुलाब, जूही

केतकी, गुलाब और जूही के पहले केतकी का किस्सा. एक बार ब्रह्मा और विष्णु में बहस हुई. बड़ा कौन? तभी एक शिवलिंग प्रकट हुआ दोनों ने तय किया जो इसका छोर ढूंढ लेगा वही बड़ा. न विष्णु जी को छोर मिला न ब्रह्मजी को. ब्रह्मा जी को केतकी का फूल नीचे गिरते मिला. ब्रह्मा जी और केतकी के फूल ने मिलकर झूठ कहा. झूठ ये कि केतकी शिवलिंग के सिर पर था ब्रह्मा जी वहां तक जाकर देख आए हैं. शिव प्रकट हुए झूठ पकड़ा गया केतकी को सजा मिली. वो दिन है और आज का दिन केतकी को शिवलिंग पर नहीं चढ़ाया जाता.

बड़प्पन की दूसरी कहानी सुनिए. बसंत बहार के गाने ‘केतकी गुलाब जूही’ का ऑफर जब मन्ना डे को मिला तो पहले उन्होंने मना कर दिया. इस गाने में मन्ना डे के सामने थे महान शास्त्रीय संगीतकार पंडित भीमसेन जोशी. जिनका 4 फरवरी को जन्मदिन होता है. मन्ना डे को लगा इतने बड़े कलाकार के सामने वो कैसे गा सकेंगे. भीमसेन जोशी के साथ गाने के नाम पर मन्ना डे इतना घबराए कि उन्होंने मन बना लिया था कि कुछ दिन के लिए मुंबई से गायब होकर पुणे चले जाएंगे. और ये बात आई-गई होने पर लौटेंगे. बाद में उन्होंने इस बात को चुनौती के रूप में लिया और भीमसेन जोशी के साथ गाना गाया. म्यूजिक दिया था शंकर-जयकिशन ने.

  • जूही की कली मेरी लाडली

‘दिल एक मंदिर’ 1962 में आई तमिल फिल्म ‘नेंजिल ओर आलयम’ का हिन्दी रीमेक थी. ‘जूही की कली मेरी लाडली’ सुमन कल्याणपुर ने गाया था. संगीतकार शंकर-जयकिशन थे. इस गाने में मीना कुमारी के साथ ठुमकती नजर आ रही बच्ची बेबी पद्मिनी थी. जो साउथ की फिल्मों में जाकर कुट्टी पद्मिनी के नाम से मशहूर हुईं. फिल्मों के साथ उनने टीवी शो भी किए और फ़िल्में भी प्रोड्यूस कीं.

  • रजनीगंधा फूल तुम्हारे

रजनीगंधा मैक्सिको या दक्षिण अफ्रीका में कहीं हुआ था. भारत में ये सोलहवीं सदी में यूरोप से आया-पहुंचा. इतनी भली भीनी-भीनी खुशबू के बावजूद रजनीगंधा का इस्तेमाल इत्र से ज्यादा गोनोरिया की दवाई, दांत की दवाई, तेल और पान मसाला जैसी चीजें बनाने में होता है. बात रजनीगंधा की चली तो ये गाना देखिए स्क्रीन पर जो नजर आ रही हैं वो विद्या सिन्हा हैं. वही विद्या सिन्हा जिन्हें आपने ‘क़ुबूल है’ में बड़ी बी बने देखा होगा. अगर ये याद करना चाहें कि इन्हें और कहां देखा था तो हम बताते हैं आपने इन्हें ‘छोटी सी बात’ में अमोल पालेकर के साथ देखा था.

  • ससुराल गेंदा फूल

1965-70 के समय छत्तीसगढ़ में सास गारी देवे ने खूब धूम मचाई, तब एच.एम.वी. ने इसका रिकॉर्ड भी निकला था. बाद में इसे खूब कॉपी किया गया. कुछ स्थानीय प्राइवेट एलबम्स में इसका इस्तेमाल किया गया. हबीब तनवीर भी अपने नाचा में इसका इस्तेमाल किया करते थे. 2009 में जब राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने ‘दिल्ली 6’ बनाई तब फिल्म में यही गाना गाया था. रेखा भारद्वाज, श्रद्धा पंडित और सुजाता मजूमदार ने. कहना न होगा गाना खूब चला और बाद में इसी नाम से एक सीरियल भी बना.


 

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