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24 बातों में जानें कंगना रनोट की नई फिल्म 'सिमरन' की पूरी कहानी

वो लुटेरी लड़की जिसने दो महीने में चार अमेरिकी बैंक लूटे, वो भी बिना किसी हथियार के.

‘शाहिद’ और ‘अलीगढ़’ के डायरेक्टर हैं हंसल मेहता जिनकी अगली फिल्म है ‘सिमरन’. इसमें कंगना रनोट लीड रोल में हैं. उनका किरदार एक गुजराती लड़की का बताया जाता है जो अमेरिका में बैंक लूटती है. फिल्म की शूटिंग अमेरिका में हुई. सह-निर्माता शैलेष सिंह ने पिछले साल दिसंबर में ही बता दिया था कि ‘सिमरन’ 15 सितंबर, 2017 को रिलीज होगी.

‘शिप ऑफ थिसीयस’ और ‘तलवार’ जैसी फिल्मों में अभिनय कर चुके सोहम शाह भी फिल्म में महत्वपूर्ण किरदार कर रहे हैं.

बहुत लोग नहीं जानते कि ‘सिमरन’ की स्क्रिप्ट जिस लुटेरी युवती को आधार बनाकर लिखी गई है उसकी कहानी क्या है? हालांकि हंसल और कंगना ने कहा है कि उस असल बैंक रॉबर लड़की से सिर्फ प्रेरणा ली गई है और कहानी में कई तब्दीलियां भी हैं. लेकिन सूत्र बताते हैं कि मूल रूप से फिल्म उसी युवती की कहानी है.

फिल्म सिमरन में लुटेरी युवती के रोल में कंगना रनोट.
फिल्म सिमरन में लुटेरी युवती के रोल में कंगना रनोट.

इस फिल्म की स्क्रिप्ट अपूर्व असरानी ने लिखी है . ‘सिमरन’ इस वजह से भी चर्चा में है कि फिल्म के डायलॉग्स में राइटर का एक क्रेडिट कंगना रनोट को भी दिया गया है. इससे अपूर्व नाराज हैं क्योंकि कंगना को क्रेडिट देने से पहले उन्हें बताया तक नहीं गया था. यही वजह है कि अब आगे से अपूर्व हंसल के साथ कोई फिल्म नहीं करेंगे. उनकी टीम जिस फिल्म से टूट जाएगी वो ‘सिमरन’ होगी.

फिल्म का ट्रेलर मंगलवार को मुंबई में लॉन्च किया गया. पहली नजर में ये बहुत उत्साहजनक नहीं लग रहा. उम्मीद है फिल्म अच्छी जाए.

लेकिन ये फिल्म जिस युवती की असली कहानी से प्रेरित है वो बहुत एक्साइटिंग है जिसे यहां पढ़ सकते हैं.

#1.
नाम है संदीप कौर. उन पर आधारित फिल्मी किरदार का नाम सिमरन रखा गया है और इसे गुजराती लड़की का कैरेक्टर बना दिया गया है. जबकि संदीप पंजाबी हैं. उनका जन्म 11 नवंबर 1989 को चंडीगढ़ में हुआ था. पिता अमेरिका में टैक्सी चलाते थे. जब संदीप सात साल की थीं तब भाई और मां के साथ उनके पास कैलिफोर्निया चली गईं.

#2.

उन्हें अमेरिका में बॉम्बशेल बैंडिट के नाम से जाना जाता है. क्योंकि संदीप ने 2014 के जून-जुलाई महीनों में अमेरिका के तीन राज्यों में चार बैंक लूटे. लूट की रकम करीब 40,000 डॉलर थी.

#3.
संदीप की आखिरी डकैती के दौरान पुलिस को सूचना मिल गई. 31 जुलाई 2014 को उनकी गाड़ी का एक लंबा चेस चला. पुलिस ने तीन राज्यों में वहां की टीमों के साथ 65 मील, 130 किमी की रफ्तार से पीछा करके संदीप को गिरफ्तार किया.

कैलिफोर्निया के बैंक ऑफ वेस्ट के सर्वेलेंस कैमरा की फोटोग्राफ्स में संदीर कौर फोटोज़़, 3 जुलाई 2014.
कैलिफोर्निया के बैंक ऑफ वेस्ट के सर्वेलेंस कैमरा की फोटोग्राफ्स में संदीर कौर, 3 जुलाई 2014.

#4.
किसी भी लूट के दौरान संदीप के पास कभी कोई हथियार नहीं रहा. वे विग लगाकर और ओवरसाइज़ चश्मे पहनकर या सिर्फ स्वेटशर्ट और कैजुअल्स-चप्पल में बैंक में दाखिल होती थीं. काउंटर पर जाती थीं. एक पर्ची कैशियर को देती थी जिसमें लिखा होता था कि मेरे पास बम है रुपये दो नहीं तो विस्फोट कर दूंगी. एक बार उन्होंने पर्ची में लिखा कि उनके पास पिस्टल है और उन्होंने जेब में अंगुली लगा रखी थी. एक बार पर्ची में लिखा कि कुछ लोग उनसे ये काम करवा रहे हैं और उन्हें ये करना ही पड़ेगा. उनकी किसी भी लूट के दौरान किसी को चोट नहीं पहुंची.

#5.
अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई के मुताबिक संदीप के प्रोफाइल की कोई डकैत उनके मुल्क में नहीं हुई है. डकैतियों में शामिल रही औरतों का प्रतिशत कुल मिलाकर बहुत कम रहा है और जितना रहा है वे भी या तो सहयोगी थीं या ड्राइवर जैसे छोटे-मोटे काम कर रही थीं.

#6.
संदीप समृद्ध परिवार से नहीं थीं. उनकी हसरतें कभी पूरी नहीं हुईं. मां वही कपड़े खरीदती थी जो सेल में लगे होते थे. रूढ़िवादी पंजाबी परिवार से होने के कारण हर चीज में टोका जाता था और धीरे-धीरे इसके विपरीत काम करने की इच्छा उनमें घर करती गई. जब अमेरिका में 2001 में आतंकी हमला हुआ तो स्कूल में संदीप और उनके भाई को नस्लभेद और तानों का सामना करना पड़ा. तंग आकर दोनों स्कूल बंक करने लगे तो उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया. घर में मोबाइल फोन, टीवी और दोस्तों का आना बंद था. गलती होने पर पेरेंट्स छड़ी से पिटाई करते थे.

संदीप कौर. (फोटोः अमनदीप कौर)
संदीप कौर. (फोटोः अमनदीप कौर)

#7.
जब संदीप 14 साल की थी तो उनकी मां बीमार पड़ीं. अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा. वहां एक नर्सिंग मैनेजर ने उन्हें नर्सिंग पढ़ने के लिए प्रेरित किया, किताबें दीं. 19 की उम्र तक संदीप लाइसेंसशुदा नर्स हो चुकी थीं.

#8.
नर्स के रूप में संदीप महीने के 6,000 डॉलर कमा रही थी. एक से ज्यादा जगह जॉब कर रही थीं. 2008 में जब अमेरिकी अर्थव्यवस्था चरमराई और शेयरों के दाम कम थे तब उन्होंने अपनी और माता-पिता की बचत के पैसे शेयर बाजार में लगाए और 2 लाख डॉलर कमा लिए.

#9.

उनकी लाइफस्टाइल कुछ बदलने लगी. छुपकर वे ऐसी लाइफ जीने लगीं जो उनकी पारंपरिक सिख फैमिली में मना थी. जैसे, पार्टियां करना और बॉयफ्रेंड बनाना.

संदीप कौर (फोटोः अमनदीप कौर)
संदीप कौर (फोटोः अमनदीप कौर)

#10.
तब 20 की उम्र में उन्होंने घर छोड़ दिया और कैलिफोर्निया की राजधानी सेक्रामेंटो में रहने लगीं.

#11.
नवंबर 2010 में उनका 21वां बर्थडे था और वहां से उनकी लाइफ पूरी तरह बदल गई. इस उम्र में शराब पीने के लिए बच्चे बालिग़ होते हैं. तो संदीप की कज़िन ने सेलिब्रेट करने के लिए आउटिंग रखी. लड़कियां माता-पिता से झूठ बोलकर इसमें गईं. वे लोग लास वेगास गए थे.

#12.
वेगास बड़े-बड़े ब्रैंड, चमचमाती इमारतों, रोशनियों, धन, स्वच्छंदता और आजादी का शहर है. इसे अमेरिका का ‘पाप का शहर’ भी कहा जाता है. संदीप को यहां ऐसी आज़ादी महसूस हुई जैसी पहले कहीं नहीं हुई. उन्हें यहां वो चीज़ भी मिली जिसका उन्हें नशा हो गया था. वो चीज जिसके लिए वेगास फेमस है. वो चीज थी – जुआ.

#13.

संदीप ने पहली बार वहां गैंबलिंग की. उस रात वो 4,000 डॉलर जीतीं जो उनकी महीने भर की सैलरी होती थी. बस, फिर वो जुए के आकर्षण में हमेशा के लिए बंध गईं.

#14.
उसके बाद वे वेगास के चक्कर बार-बार लगाने लगीं. खेलने लगीं. डिजाइनर कपड़े, चश्मे और जूतों का उन्हें चस्का था. कभी-कभी बड़ा ब्रैंड खरीदने के लिए ही बाज़ी लगातीं और जीतने पर उस पैसे से वो चीज खरीद लेतीं. जल्द ही उन्होंने अपने पसंदीदा कसीनो में 20,000 डॉलर का मार्कर बनवा लिया. मार्कर चैक की तरह होता है जो बिना रकम के रकम का काम करता है. संदीप नियमित ग्राहक थीं तो उनके लिए ऐसा किया गया.

#15.
ठीक एक साल बाद नवंबर 2011 तक वे 60,000 डॉलर हार चुकी थीं. इतना ही नहीं उन्होंने नर्स का काम भी छोड़ दिया था. पढ़ाई भी छोड़ दी. वे फुल टाइम गैंबलिंग करने लगीं. उनका कहना था कि वे जुए के अलावा किसी भी काम पर ध्यान नहीं लगा पा रही थीं. मार्च 2012 तक वे 2.5 लाख डॉलर हार चुकी थीं और ये कसीनो की उन पर उधारी थी.

संदीप कौर.
संदीप कौर.

#16.
इस हार की रात वे कसीनो से बाहर निकलीं तो संदीप के मुताबिक एक अजनबी उनसे मिला. उसने कहा कि वो कुछ पैसे दे सकता है. उसने ऊंची ब्याज दर पर 20,000 डॉलर दिए. संदीप को लगा कि कुछ पलों में वो रकम दोगुनी-तिगुनी कर देंगी. वो 38,000 तक जीत भी चुकी थीं लेकिन उनका लालच और आगे ले गया और फिर वे पूरी रकम हार गईं.

#17.
अब कसीनो और उस आदमी की उधारी चुकाने के लिए संदीप के पास कुछ नहीं था. इसलिए दो महीने बाद वो मां के साथ यूनियन सिटी में नए पते पर रहने लगीं. फिर नर्स का काम करने लगीं. काम के घंटे बढ़ा लिए ताकि कुछ पैसे जल्द से कमा लें. लेकिन दिसंबर 2012 में कसीनो वालों ने उनकी गिरफ्तारी का वारंट निकलवा दिया.

#18.
उनकी मां को पता चल गया और वे बिफर गईं. वे परेशान थीं कि इंडियन कम्युनिटी में सबको पता चला तो उनकी इज्जत का क्या होगा. संदीप के मुताबिक वे फिर एक साल लास वेगास नहीं गईं लेकिन उनकी बहन अमनदीप का कहना है कि संदीप का मोह नहीं गया था. वो जाती रहती थी. उधर मां शादी के लिए लड़के देखने लगी.

अमेरिका की जांच एजेंसी एफबीआई ने संदीप कौर को पकड़ने के लिए जो रिलीज़ जारी की.
अमेरिका की जांच एजेंसी एफबीआई ने संदीप कौर को पकड़ने के लिए जो रिलीज़ जारी की.

#19.
लेकिन सितंबर 2013 में संदीप अपने बॉयफ्रेंड के साथ भाग गईं. दोनों ने शादी कर ली. लेकिन बाद में दोनों में खिटपिट होने लगी. पति हर हफ्ते उन्हें 1000 डॉलर का गुजारा दे रहा था और वो उसे वेगास में जुए में आजमा रही थीं. बिल नहीं भरे इसलिए अगले साल जनवरी में संदीप की कार जब्त कर ली गई. अप्रैल में उनकी शादी टूट गई. पति ने पैसे देने बंद कर दिए. अब संदीप के लिए चारों तरफ से मुसीबतें खड़ी थीं.

अमेरिका की जांच एजेंसी एफबीआई ने संदीप कौर को पकड़ने के लिए जो रिलीज़ जारी की.
अमेरिका की जांच एजेंसी एफबीआई ने संदीप कौर को पकड़ने के लिए जो रिलीज़ जारी की.

#20.
यहां से बैंक लूटने की स्थिति बनी. मई, 2014 के आखिरी हफ्ते में वे गाड़ी में गैस भरवा रही थीं कि दो लोग उन्हें मिले. ये लोग दूसरे थे लेकिन उन्होंने कहा कि वे अपना 20,000 डॉलर का कर्ज वापस चाहते हैं जो संदीप ने कसीनो के बाहर लिया था. और उन्हें ब्याज समेत 35,000 डॉलर चाहिए.

#21.

संदीप कौर के पास पैसे जुटाने का कोई जरिया नहीं बचा था. इस पर उन दोनों ने कहा कि वो बैंक लूट लें. संदीप के मुताबिक उन्होंने गन देने की कोशिश भी की. खैर, ये करो या मरो की स्थिति थी. तो उन्होंने तय किया कि वे बैंक लूटेंगी.

सेन डियेगो के कॉमेरिका बैंक में 14 जुलाई 2014 को डाका डालते हुए संदीप कौर. FBI ने रिलीज की थी फोटोज़.
सेन डियेगो के कॉमेरिका बैंक में 14 जुलाई 2014 को डाका डालते हुए संदीप कौर. FBI ने रिलीज की थी फोटोज़.

#22.
ग्यारह दिन बाद संदीप ने अपनी पहली डकैती डाली और बच निकलीं. लेकिन लूट की रकम पर्याप्त नहीं थी. उन्हें और पैसे चाहिए थे उधारी चुकाने के लिए तो तीन डकैतियां और डालीं. आखिरी डकैती के दौरान पुलिस ने उनका पीछा किया और पकड़ लिया. पहली डकैती के दो महीने में ही वे जेल में थीं.

#23.
अगले साल, अप्रैल 2015 में अदालत ने उन्हें पांच साल से ज्यादा की कैद की सजा सुनाई. साथ ही ये भी कहा कि वे सारा उधार चुकाएं. संदीप ने आंसू पोंछते हुए कहा था कि गिरफ्तारी उनके लिए सुकून की बात थी.

संदीप कौर.
संदीप कौर.

#24.
जेल में वे धार्मिक हो गईं. कैदियों की मदद करने लगीं. एक जर्नलिस्ट ने जेल में उनका इंटरव्यू लेते वक्त पूछा था कि बैंक लूटने के बजाय उन्होंने पुलिस को जाकर सबकुछ सच-सच क्यों नहीं बता दिया? इस पर संदीप का कहना था कि ‘हम छोटे बच्चे थे तब से हमें हर बात पर झूठ बोलना पड़ा.’ माता-पिता की पिटाई से लेकर, पार्टी करने तक या पेरेंट्स के तलाक की बात या बॉयफ्रेंड्स या जो भी समाज में शर्मिंदगी देने वाली चीज है उसे हमेशा छुपाकर रखना ही सिखाया गया.

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