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बॉलीवुड में औरतों को नीचा दिखाने वाले वो 22 डायलॉग्स जिनकी जगह सिर्फ गटर में है

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बॉलीवुड वो फिल्म इंडस्ट्री है, जो साल में 400 से ज्यादा यानी दुनिया में सबसे ज्यादा फिल्में बनाती है. मतलब खूब सारे गाने और कैची डायलॉग. लेकिन बॉलीवुड में जो चीज अब तक नहीं बदली वो है ‘तू चीज बड़ी है मस्त-मस्त’ और ‘तू हां कर या न कर तू है मेरी किरन’ वाला दौर. ‘कहानी’, ‘वीरे दी वेडिंग’, ‘पिंक’, ‘लिप्सटिक अंडर माय बुर्का’ जैसी कुछेक फिल्मों को छोड़ दें, तो ‘अब भी तू मेरी बंदी है’ और ‘अकेली लड़की खुली तिजौरी’ जैसे डायलॉग्स कहानी में जबरदस्ती ठूंसे जाते हैं. और इनपर तालियां भी पीटी जाती हैं, जो ये दिखाता है कि सिनेमा सिर्फ तकनीकी तौर पर आधुनिक हुआ है.

ऐसे ही सेक्सिस्ट और हीरोइन को ऑब्जेक्ट की तरह इस्तेमाल करने वाली फिल्मों के डायलॉग्स के बारे में बताने जा रहे हैं. आइए एक नज़र डालते हैं.

# कबीर सिंह (2019)

‘तू मेरी बंदी है. इससे पहले तुझे कौन जानता था कॉलेज में.’

# प्यार का पंचनामा 2 (2015)

‘लड़कियों की तो जात ही कमीनी होती है.’

प्यार का पंचनामा (2011) का 5.15 मिनट का मोनोलॉग 'दिक्कत ये है कि वो लड़की है' काफी फेमस हुआ था.
प्यार का पंचनामा (2011) का 5.15 मिनट का मोनोलॉग ‘दिक्कत ये है कि वो लड़की है’ काफी फेमस हुआ था.

# हैप्पी न्यू ईयर (2014)

‘मैं तुम्हारी इज्जत करता हूं. तुम्हारी जांघें, हिप्स, आंखें झूठ नहीं बोलती. यू आर सिंपली ब्रेस्ट टेकिंग, आई मीन ब्रेथ-टेकिंग.’

# 2 स्टेट्स (2014)

‘बुड्ढी हो या जवान, मेलोड्रामा इस दुनिया की सारी औरतों के खून में है.’

# रेस 2 (2013)

‘ऊपर वाले ने तुम्हें आगे से और पीछे से बहुत कुछ दिया है, लेकिन ऊपर कुछ नहीं दिया है.’

# ग्रैंड मस्ती (2013)

‘बलात्कार से याद आया, मेरी बीवी कहां है.’

ग्रांड मस्ती (2013) फिल्म में डायलॉग्स और कई सीन बेहद सेक्सिस्ट हैं.
ग्रैंड मस्ती (2013) फिल्म में डायलॉग्स और कई सीन बेहद सेक्सिस्ट हैं.

# राउडी राठौड़ (2012)

‘औरत का खास ख्याल दो ही उम्र में बहुत रखना पड़ता है, एक जब उसकी उम्र 17 होती है, तब खतरा बढ़ जाता है और जब औरत होती है 30, तो बन जाती है चीज.’

# क्या सुपर कूल हैं हम (2012)

‘तुम लड़की में सबसे पहले क्या देखते हो? वो तो डिपेंड करता है न कि वो आ रही है कि जा रही है.’

# मेरे ब्रदर की दुल्हन (2011)

‘ये होती है असली लड़की, चुटकी में बिपाशा, चुटकी में मधुबाला.’

# दबंग (2010)

‘कमीनी से याद आया, तिवारी जी भाभी कैसी हैं?’

# दबंग (2010)

‘प्यार से दे रहे हैं रख लो, वरना थप्पड़ मार के भी दे सकते हैं.’

दबंग (2010) के 'मुन्नी बदनाम हुई डार्लिंग तेरे लिए' गाने के लिरिक्स बेहद भद्दे हैं.
दबंग (2010) के ‘मुन्नी बदनाम हुई डार्लिंग तेरे लिए’ गाने के लिरिक्स बेहद भद्दे हैं.

# कमबख्त इश्क (2009)

‘मैरिज से पहले लड़कियां सेक्स ऑब्जेक्ट होती हैं और मैरिज के बाद वो सेक्स से ही ऑब्जेक्ट करती हैं’

‘तुम लड़कियां सिर्फ एक चीज के लिए अच्छी होती हो.’

# वॉन्टेड (2009)

‘तू लड़की के पीछे भागेगा, लडकी पैसों के पीछे भागेगी, तू पैसों के पीछे भागेगा, लड़की तेरे पीछे भागेगी.’

# जब वी मेट (2007)

‘अकेली लड़की खुली तिजोरी की तरह होती है.’

# चश्मे बद्दूर (2003)

‘व्हेन यू कांट चेंज द गर्ल, चेंज द गर्ल’

# हम तुम्हारे हैं सनम (2002)

‘तुम एक पत्नी हो, तुम्हरा पति जैसा चाहेगा वैसा ही होगा. मर्द औरत का भगवान होता है.’

# चोरी-चोरी चुपके-चुपके (2001)

‘औरत के एक नहीं तीन जन्म होते हैं. पहला जब वो किसी की बेटी बनकर इस दुनिया में आती है… दूसरा जब वो किसी की पत्नी बनती है… और तीसरा जब वो मां बनती है.’

# हम दिल दे चुके सनम (1999)

‘बेटी तो होती ही है पतंग की तरह, शादी के पहले अपने छत पर उड़ती है और शादी के बाद डोर किसी और के हाथ में.’

'हम दिल दे चुके सनम' में एश्वर्या राय के पिता के कैरेक्टर काफी डॉमिनेटिंग थे.
‘हम दिल दे चुके सनम’ में एश्वर्या राय के पिता के कैरेक्टर काफी डॉमिनेटिंग थे.

# दिल वाले दुल्हनियां ले जाएंगे (1995)

‘सपने देखो, जरूर देखो, बस उनके पूरे होने की शर्त मत रखो.’

# मैं खिलाड़ी-तू अनाड़ी (1994)

‘या तो रेप के इल्ज़ाम में सात साल की सजा काट ले, या उसके साथ सात फेरे ले ले.’

# मैंने प्यार किया (1989)

‘वो इसलिए के इस गेम (बेडमिंटन) में अक्ल और फुर्ती की ज़रूरत होती है, जो लड़कियों के बस की बात नहीं.’

# मर्द (1985)

‘मर्द को दर्द नहीं होता.’

ये तो वो कुछ चुनिंदा फिल्में हैं, जिनके सिर्फ डायलॉग्स सेक्सिस्ट और महिलाओं को ऑब्जेक्ट की तरह पेश करने वाले हैं. वरना ‘डर’, ‘जूली’, ‘एतराज’, ‘मर्डर’, तेरे नाम और ‘संजू’ से ‘कबीर सिंह’ तक फिल्मों की स्टोरी लाइन ही सेक्सिस्ट है.


वीडियो-

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