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कैसे तय होती है आपकी Gratuity, जो Budget 2019 में बढ़कर 20 लाख हो गई

पियूष गोयल ने 2019 का बजट पेश करने के दौरान कहा कि Gratuity की सीमा 10 लाख से बढ़कर 20 लाख कर दी गई है.

ये तो हो गई खबर. हमने बता दी, आपने पढ़ ली. लेकिन क्या फायदा अगर आपको यही न पता हो कि ग्रेच्युटी होती क्या है, ये किसे मिलती है, कैसे तय की जाती है. परेशान न होवें, हम बताते हैं.

#1. ग्रेच्युटी क्या होती है?

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किसी एक कंपनी में लगातार कई बरसों तक काम करने पर आपको सैलरी, पेंशन और प्रॉविडेंट फंड (पीएफ) के अलावा जो पैसा मिलता है, उसे ग्रेच्युटी कहते हैं. हालांकि, इसका छंटाक भर हिस्सा आपकी सैलरी से भी कटता है, लेकिन आपकी ग्रेच्युटी का बड़ा हिस्सा कंपनी अपनी तरफ से देती है.

यूं समझ लीजिए कि ग्रेच्युटी कंपनी का बनाया लॉन्ग टर्म बेनिफिट प्लान है. जैसे प्रॉविडेंट फंड यानी पीएफ. पीएफ आपको किसी कंपनी में दो-तीन महीने काम करने पर भी मिल जाएगा. उतने दिनों का जितना पीएफ बनता होगा, उतना बन जाएगा. लेकिन ग्रेच्युटी के लिए आपको एक तयशुदा वक्त तक नौकरी करनी ही होती है.

#2. किसे मिलती है ग्रेच्युटी और कौन देता है?

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मिलती उस एम्प्लॉई को है, जिसने कंपनी में लगातार कम से कम पांच साल तक काम किया हो. और देने वाली है कंपनी. ग्रेच्युटी एक्ट के मुताबिक जिस कंपनी में 10 से ज्यादा एंप्लॉयी होते हैं, वहां ग्रेच्युटी का प्रावधान होता है.

#3. ग्रेच्युटी तय कैसे की जाती है?

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ये टेक्निकल चीज है. अमित शाह की जीडीपी जितनी नहीं, उससे कम टेक्निकल. मान लीजिए अनोखेलाल किसी कंपनी में 30 साल तक क्लर्क की नौकरी किए. आखिरी सैलरी जो उनके अकाउंट में आई थी, उसमें बेसिक सैलरी और डियरनेस अलाउंस (डीए) कुल 50 हजार रुपए था. ग्रेच्युटी का हिसाब लगाने समय महीने के 30 में से 26 दिन ही गिने जाते हैं, क्योंकि बचे चार दिन छुट्टी में गिने जाते हैं.

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तो 50 हजार को 26 से भाग दे देंगे. मिलेगा 1923.07 रुपए. फिर सर्विस के कुल वर्षों का 15 से गुणा करेंगे. 15 से इसलिए, क्योंकि ग्रेच्युटी एक साल के 15 दिन के हिसाब से ही जोड़ी जाती है. तो 30 और 15 का गुणा हो गया 450. अब इस 450 को 1923.07 से गुणा करेंगे. ये मोटा-माटी 8,65,381 रुपए निकलेगा. 30 साल की नौकरी के बाद यही रकम अनोखेलाल की ग्रेच्युटी होगी. याद रखिएगा, ग्रेच्युटी बेसिक सैलरी और डीए पर ही काउंट की जाती है. इनके अलावा आपकी सैलरी के जितने भी कंपोनेंट होंगे, उनका ग्रेच्युटी से कोई लेना-देना नहीं होगा.

#4. ग्रेच्युटी कितनी मिलती है?

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ये तो इसी बात से तय होगा कि आपकी आखिरी सैलरी में से बेसिक सैलरी और डीए कितना है. उसी के हिसाब से जोड़-घटाना होगा. ग्रेच्युटी का जो हिस्सा आपकी सैलरी से काटा जाता है, वो आपकी CTC (सालाना कॉस्ट टू कंपनी) के आधार पर तय किया जाता है.

#5. जैसे PF मैनेज करने के लिए संस्था है, वैसे ग्रेच्युटी के लिए भी कोई संस्था है?

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नहीं. इसके लिए कोई संस्था नहीं है. बस ग्रेच्युटी एक्ट है. हालांकि, लेबर यूनियन ग्रेच्युटी को लेकर सरकार से मांगें उठा सकता है. लेबर यूनियन ग्रेच्युटी की पांच साल की ये मियाद तीन साल करने की मांग की थी, लेकिन सरकार नहीं मानी. अभी जो 10 लाख की लिमिट 20 लाख की गई है, वो सातवें वेतन आयोग ने रेकमेंड किया था.

#6. ग्रेच्युटी का कॉन्सेप्ट कहां से आया और क्यों आया?

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ग्रेच्युटी सिस्टम 1972 में शुरू हुआ था. इसका मकसद ये था कि कर्मचारी कंपनी के वफादार बने रहें, टिकाऊ बने रहें. साथ ही, उन्हें एक कंपनी के लिए लंबे वक्त तक काम करने का रिवॉर्ड मिले. प्राइवेट और पब्लिक कंपनियों के जो कर्मचारी सेंट्रल सिविल सर्विसेस के पेंशन नियम के दायरे में नहीं आते हैं, उन्हें रिटायर होने पर ग्रेच्युटी की शक्ल में अच्छी-खासी रकम मिल जाती है. तो ये सिस्टम कंपनी और कर्मचारियों, दोनों के फायदे सोचकर शुरू किया गया था.

कर्मचारियों के लंबा टिकने की वजह से कंपनी भी मजे में रहती है. साथ ही, अगर कोई कर्मचारी उम्र से पहले रिटायरमेंट ले लेता है या उसे विकलांगता या दूसरी वजहों से रिटायरमेंट लेना पड़ता है, तो ग्रेच्युटी उसके लिए बड़ी राहत होती है.

#7. क्या सबको ग्रेच्युटी मिलती है?

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जैसा पहले बताया, जो शख्स कंपनी में पांच साल पूरे कर लेगा, वो ग्रेच्युटी का हकदार हो जाएगी. फिर जितने और वक्त काम करते रहेंगे, ग्रेच्युटी उतनी ही बढ़ती रहेगी. अभी सातवां वेतन आयोग लगने से भी ग्रेच्युटी की रकम में बढ़ोतरी होगी.

#8. अभी नियम में जो बदलाव हुआ है, उससे किसे फायदा होगा?

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फायदे की पहली शर्त तो यही है कि आप ग्रेच्युटी के हकदार हों. बाकी आंकड़ों की बात करें, तो पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर कंपनियों के करीब पांच करोड़ कर्मचारियों को टैक्स-फ्री ग्रेच्युटी का फायदा 1 जनवरी 2016 से मिलेगा. 1 जनवरी के बाद रिटायर हुए सभी कर्मचारियों को उनकी ग्रेच्युटी का बकाया मिलेगा. 1 जुलाई से लागू हो रही टैक्स-छूट से केंद्र के 49.26 लाख कर्मचारियों और 61.17 लाख पेंशन लेने वालों को फायदा होगा.

#9. क्या ग्रेच्युटी नियमों में किसी बदलाव की ज़रूरत है?

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लेबर यूनियन पांच साल की मियाद को तीन साल का करने के लिए कह रही है, वो हो जाए. बाकी तो सब ठीक-ठाक सा है.

#10. इस पॉइंट में कोई सवाल नहीं है. राइटर ने 9 सवाल लिख लिए थे. ये 10वां पॉइंट उसकी ग्रेच्युटी है.


ग्रेच्युटी के अलावा भी हमारे पास ढेर सारी काम की चीजें हैं, जान लीजिए:

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