Submit your post

Follow Us

संत रविदास के 10 दोहे, जिनके नाम पर दिल्ली में दंगे हो रहे हैं

रविदास. 15वीं शताब्दी के कवि. “मन चंगा तो कठौती में गंगा”, लिखा. और साफ़ किया कि भगवान और मंदिर की ज़रुरत इंसान को रोटी और मानवीयता से ज्यादा नहीं है. कई बातें और कई चीज़ें हैं. अपने लिखे में ईश्वर को मानने की बाध्यता और आडंबर से समाज को मुक्त किया. और देखते-देखते रविदास को संत रविदास कहा जाने लगा. बहुत से लोग उनके समर्थक हो गए. और समर्थकों को कहा गया रैदासी. यूपी, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब तक रैदासियों की रिहाईश हुई. और हर साल देश भर से तमाम रैदासी रविदास जयन्ती के दिन उनके घर बनारस में जुटते हैं. रविदास ने आंदोलन के तहत कविताएं लिखीं. अभी बात उनके कुछ फेमस दोहों की-

1.

ब्राह्मण मत पूजिए जो होवे गुणहीन,

पूजिए चरण चंडाल के जो होने गुण प्रवीण

[ किसी व्यक्ति को सिर्फ इसलिए नहीं पूजना चाहिए क्योंकि वह किसी ऊंचे कुल में जन्मा है. यदि उस व्यक्ति में योग्य गुण नहीं हैं तो उसे नहीं पूजना चाहिए, उसकी जगह अगर कोई व्यक्ति गुणवान है तो उसका सम्मान करना चाहिए, भले ही वह कथित नीची जाति से हो. ]

2.

कह रैदास तेरी भगति दूरि है, भाग बड़े सो पावै

तजि अभिमान मेटि आपा पर, पिपिलक हवै चुनि खावै

[ ईश्वर की भक्ति बड़े भाग्य से प्राप्त होती है. यदि आदमी में थोड़ा सा भी अभिमान नहीं है तो उसका जीवन सफल होना निश्चित है. ठीक वैसे ही जैसे एक विशाल शरीर वाला हाथी शक्कर के दानों को नहीं बीन सकता, लेकिन एक तुच्छ सी दिखने वाली चींटी शक्कर के दानों को आसानी से बीन सकती है. ]

3.

जा देखे घिन उपजै, नरक कुंड में बास

प्रेम भगति सों ऊधरे, प्रगटत जन रैदास

[ जिस रविदास को देखने से लोगों को घृणा आती थी, जिनके रहने का स्थान नर्क-कुंड के समान था, ऐसे रविदास का ईश्वर की भक्ति में लीन हो जाना, ऐसा ही है जैसे मनुष्य के रूप में दोबारा से उत्पत्ति हुई हो. ]

4.

मन चंगा तो कठौती में गंगा

[ जिस व्यक्ति का मन पवित्र होता है, उसके बुलाने पर मां गंगा भी एक कठौती (चमड़ा भिगोने के लिए पानी से भरे पात्र) में भी आ जाती हैं. ]

5.

करम बंधन में बन्ध रहियो, फल की ना तज्जियो आस

कर्म मानुष का धर्म है, सत् भाखै रविदास

[ आदमी को हमेशा कर्म करते रहना चाहिए, कभी भी कर्म के बदले मिलने वाले फल की आशा नही छोड़नी चाहिए, क्‍योंकि कर्म करना मनुष्य का धर्म है तो फल पाना हमारा सौभाग्य. ]

6.

मन ही पूजा मन ही धूप,

मन ही सेऊं सहज स्वरूप

[ निर्मल मन में ही ईश्वर वास करते हैं, यदि उस मन में किसी के प्रति बैर भाव नहीं है, कोई लालच या द्वेष नहीं है तो ऐसा मन ही भगवान का मंदिर है, दीपक है और धूप है. ऐसे मन में ही ईश्वर निवास करते हैं. ]

7.

कृस्न, करीम, राम, हरि, राघव, जब लग एक न पेखा

वेद कतेब कुरान, पुरानन, सहज एक नहिं देखा

[ राम, कृष्ण, हरि, ईश्वर, करीम, राघव सब एक ही परमेश्वर के अलग-अलग नाम हैं. वेद, कुरान, पुराण आदि सभी ग्रंथों में एक ही ईश्वर की बात करते हैं, और सभी ईश्वर की भक्ति के लिए सदाचार का पाठ पढ़ाते हैं. ]

8.

हरि-सा हीरा छांड कै, करै आन की आस

ते नर जमपुर जाहिंगे, सत भाषै रविदास

[ हीरे से बहुमूल्य हैं हरि. यानी जो लोग ईश्वर को छोड़कर अन्य चीजों की आशा करते हैं उन्हें नर्क जाना ही पड़ता है. ]

9.

रविदास जन्म के कारनै, होत न कोउ नीच

नकर कूं नीच करि डारी है, ओछे करम की कीच

[ कोई भी व्यक्ति किसी जाति में जन्म के कारण नीचा या छोटा नहीं होता है, आदमी अपने कर्मों के कारण नीचा होता है. ]

10.

जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात,

रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात

[ जिस प्रकार केले के तने को छीला तो पत्ते के नीचे पत्ता, फिर पत्ते के नीचे पत्ता और अंत में कुछ नही निकलता, लेकिन पूरा पेड़ खत्म हो जाता है. ठीक उसी तरह इंसानों को भी जातियों में बांट दिया गया है, जातियों के विभाजन से इंसान तो अलग-अलग बंट ही जाते हैं, अंत में इंसान खत्म भी हो जाते हैं, लेकिन यह जाति खत्म नही होती. ]


वीडियो- एक कविता रोज़: याद नहीं

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

पोस्टमॉर्टम हाउस

नसीरुद्दीन शाह और अनुपम खेर की रगों में क्या है?

एक लघु टिप्पणी दोनों के बीच विवाद पर. जिसमें नसीर ने अनुपम को क्लाउन यानी विदूषक कहा था.

पंगा: मूवी रिव्यू

मूवी देखकर कंगना रनौत को इस दौर की सबसे अच्छी एक्ट्रेस कहने का मन करता है.

फिल्म रिव्यू- स्ट्रीट डांसर 3डी

अगर 'स्ट्रीट डांसर' से डांस निकाल दिया जाए, तो फिल्म स्ट्रीट पर आ जाएगी.

कोड एम: वेब सीरीज़ रिव्यू

सच्ची घटनाओं से प्रेरित ये सीरीज़ इंडियन आर्मी के किस अंदरूनी राज़ को खोलती है?

जामताड़ा: वेब सीरीज़ रिव्यू

फोन करके आपके अकाउंट से पैसे उड़ाने वालों के ऊपर बनी ये सीरीज़ इस फ्रॉड के कितने डीप में घुसने का साहस करती है?

तान्हाजी: मूवी रिव्यू

क्या अपने ट्रेलर की तरह ही ग्रैंड है अजय देवगन और काजोल की ये मूवी?

फिल्म रिव्यू- छपाक

'छपाक' एक ऐसी फिल्म है, जिसके बारे में हम ये चाहेंगे कि इसकी प्रासंगिकता जल्द से जल्द खत्म हो जाए.

हॉस्टल डेज़: वेब सीरीज़ रिव्यू

हॉस्टल में रह चुके लोगों को अपने वो दिन खूब याद आएंगे.

घोस्ट स्टोरीज़ : मूवी रिव्यू (नेटफ्लिक्स)

करण जौहर, अनुराग कश्यप, ज़ोया अख्तर और दिबाकर बनर्जी की जुगलबंदी ने तीसरी बार क्या गुल खिलाया है?

गुड न्यूज़: मूवी रिव्यू

साल की सबसे बेहतरीन कॉमेडी मूवी साल खत्म होते-होते आई है!