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कानपुर, सीतापुर, लखीमपुर... यूपी में पानी की टंकियां क्यों ढह रहीं?

Jal Jeevan Mission के तहत बनाई गई टंकियां ढह रही हैं. UP में ऐसी कम से कम पांच घटनाएं हुई हैं.

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1 जून 2025 (पब्लिश्ड: 04:04 PM IST)
UP Jal Jeevan Mission
सीतापुर में पानी की टंकी ढह गई. (तस्वीर: सोशल मीडिया)
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उत्तर प्रदेश (UP) के सीतापुर में पिछले दिनों पानी की एक टंकी ढह गई. इस टंकी को जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) के तहत 5.32 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया था. जनवरी 2024 में इसे चालू किया गया. 29 मई, 2025 को तेज धमाके के साथ ये टंकी फट गई. 

लेकिन ये इस तरह का पहला मामला नहीं है. बिहार से जैसे पुल गिरने की खबरें आती हैं, वैसे ही यूपी से पानी की टंकी ढहने की खबरें आ रही हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, जल जीवन मिशन के तहत बनाई गई कई टंकियां ढह रही हैं. लखीमपुर और कानपुर में भी टंकियां ढही हैं. सीतापुर में ये दूसरी टंकी थी और पूरे उत्तर प्रदेश में ऐसी कम से कम पांच टंकियां ढह चुकी हैं. 

एडिशनल चीफ सेक्रेटरी और जल जीवन मिशन के डायरेक्टर अनुराग श्रीवास्तव ने सीतापुर में सभी टंकियों के ऑडिट का आदेश दिया है. मामले का संज्ञान लेते हुए राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन (SWSM) ने 12 कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है. ग्रामीण जल निगम और इस मिशन के जूनियर इंजीनियरों से लेकर असिस्टेंट इंजीनियरों को या तो निलंबित किया गया है या बर्खास्त किया गया है. 

टंकी बनाने वाली कंपनी एनसीसी लिमिटेड को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है. साथ ही जिस थर्ड पार्टी कंपनी को निरीक्षण का काम दिया गया था, उसे भी ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है. एनसीसी पर 5 प्रतिशत का ‘लिक्विडेटेड डैमेज पेनल्टी’ लगाया गया है. ये पहले से निर्धारित जुर्माना होता है जो अधूरा काम करने, समय पर पूरा नहीं करने या खराब काम करने पर लगाया जाता है.

SWSM के प्रवक्ता ने बताया कि विभाग के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं. एग्जीक्यूटिव इंजीनियर राजीव कुमार को नोटिस दिया गया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है. असिस्टेंट इंजीनियर संजीत यादव और जूनियर इंजीनियर सौरभ सिंह यादव को सस्पेंड कर दिया गया है.

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क्यों ढह रही हैं टंकियां?

इन टंकियों में एक समानता ये है कि ये सब जिंकएल्यूम टंकी हैं. इन टैंक को जिंक, एल्यूमिनियम और सिलिकॉन को मिलाकर बनाए गए शीट से तैयार किया जाता है. माना जाता है कि इनका रखरखाव और इनको इंस्टॉल करना आसान होता है. हालांकि, आमतौर पर RCC यानी सीमेंटेड टंकी का इस्तेमाल किया जाता है.

दैनिक भास्कर ने जानकारों के हवाले से लिखा है कि जिंकएल्यूम टंकी की कीमत, RCC टंकी की कीमत से 30 प्रतिशत तक कम होती है. लेकिन इस योजना में टंकी बनाने के लिए राशि की कटौती सिर्फ 0.76 प्रतिशत की ही हुई. दूसरी सवाल है कि कौन-सी टंकी कितने दिनों तक टिकती है. जानकारों का कहना है कि दोनों के लाइफ में 15 साल का अंतर है. जिंकएल्यूम टंकियां 10 से 15 साल तक चलती हैं, तो वहीं RCC टंकियां 30 साल तक चलती हैं. भास्कर ने अपने इंवेस्टिगेशन के आधार पर दावा किया है कि जिंकएल्यूम टंकियों का चुनाव दो कारणों से किया गया. पहला कि इससे कंपनियों को ज्यादा फायदा हो रहा था. दूसरा कारण है कि जिंकएल्यूम टंकी को कम समय में इंस्टॉल किया जा सकता है. इससे टेंडर को जल्दी खत्म किया जा सकता है.

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