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सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल एक्सेस को मौलिक अधिकार बताया, KYC नियमों को लेकर भी दिए निर्देश

कोर्ट ने कहा कि केंद्र के 'डिजिटल इंडिया' के प्रयास में विकलांग व्यक्तियों और हाशिए पर पड़े समूहों की पहुंच को नजरअंदाज किया गया है.

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Supreme Court recognises right to digital access in landmark judgement
कोर्ट ने ई-केवाईसी प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए 20 निर्देश भी जारी किए. (फोटो- X)
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प्रशांत सिंह
30 अप्रैल 2025 (पब्लिश्ड: 08:09 PM IST)
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सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल एक्सेस को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता देने की दिशा में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. कोर्ट का ये बयान एसिड अटैक सर्वाइवर और अन्य दिव्यांग व्यक्तियों द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान आया. याचिकाकर्ताओं ने डिजिटल सेवाओं, विशेष रूप से बैंकिंग और मोबाइल सिम कार्ड के लिए KYC नियमों में छूट की मांग की है. क्योंकि चेहरे की विकृति या अन्य शारीरिक अक्षमताओं के कारण वे बायोमेट्रिक और फेस रेकग्निशन की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाते.

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई की. लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक बेंच ने सरकार को ये सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि डिजिटल प्रक्रियाएं सभी के लिए सुलभ हों. इसके साथ ही कोर्ट ने ई-केवाईसी प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए 20 निर्देश भी जारी किए. इन 20 निर्देशों वाला विस्तृत निर्णय अभी अपलोड होना बाकी है.

रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने कहा कि केंद्र के 'डिजिटल इंडिया' के प्रयास में विकलांग व्यक्तियों और हाशिए पर पड़े समूहों की पहुंच को ‘नजरअंदाज’ किया गया है. बेंच ने कहा,

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अदालत का ये आदेश आंखों और चेहरे पर गंभीर क्षति वाले एसिड हमले के पीड़ितों की याचिका पर आया. इन सभी ने ई-केवाईसी प्रक्रिया पर नए दिशानिर्देश तैयार करने के निर्देश देने की मांग की थी. अदालत ने आगे कहा,

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याचिकाओं में से एक एसिड अटैक सर्वाइवर से संबंधित थी. जिसे 2023 में बैंक खाता खोलने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. चूंकि उसकी आंखों में कुछ विकृत थीं, इसलिए वो अपनी आंखें झपकाकर "लाइव फोटो" खींचने जैसे काम करने में असमर्थ थी. RBI ने बैंक खाते खोलने के लिए इन नियमोें को अनिवार्य कर रखा है. इस वजह से महिला अपना बैंक खाता नहीं खोल सकी. हालांकि, बाद में सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर नाराजगी के बाद बैंक ने इसमें छूट दे दी.

बेंच ने इस बात को भी उठाया कि किस प्रकार ग्रामीण आबादी, वरिष्ठ नागरिक और आर्थिक रूप से कमजोर समुदायों का एक बड़ा हिस्सा ‘डिजिटल डिवाइड’ से प्रभावित हो रहा है. कोर्ट ने कहा कि कई कल्याणकारी योजनाएं और सरकारी सेवाएं अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रदान की जा रही हैं, इसलिए सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल डिवाइड को पाटना आवश्यक है.

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