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'ए बाबू...समोसा इंपॉर्टेंट है', रवि किशन ने बताया क्यों उठाया संसद में ये मुद्दा

Ravi Kishan On Samosa: जब रवि किशन से पूछा गया कि वह इस मुद्दों को कैसे आगे लेकर जाएंगे तो उन्होंने बताया कि संबंधित मंत्री से मिलकर इस पर चर्चा करेंगे क्योंकि यह जन स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है.

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5 अगस्त 2025 (अपडेटेड: 5 अगस्त 2025, 12:42 PM IST)
Ravi Kishan On Samosa Size and Rate
रवि किशन ने समोसे के साइज का मुद्दा संसद में भी उठाया था. (फाइल फोटो)
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बीते हफ्ते बीजेपी के गोरखपुर से सांसद रवि किशन ने संसद में समोसे का साइज और कीमतों का मुद्दा उठाया था. समोसे जैसी मामूली चीज के मुद्दे को संसद से जैसे सीरियस प्लेटफॉर्म से उठाने को लेकर वह ट्रोल भी हुए थे. अब इस पर रवि किशन का कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ ‘समोसे’ तक सीमित नहीं है. यह उससे आगे की बात है. हमें खाने-पीने की चीजों की क्वालिटी, साइज और कीमतों पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत है.

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान रवि किशन ने कहा कि यह मुद्दा आम जनता से जुड़ा हुआ है. उनका कहना था कि विदेशों में खासकर विकसित देशों में खाने में तेल की क्वालिटी और अन्य जानकारियां पैकिंग पर लिखी होती हैं. लेकिन हमारे देश में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है. उन्होंने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि एक बार उन्होंने खराब क्वालिटी के तेल में बनी चीज खा ली थी. इसकी वजह से उनकी आवाज खराब हो गई थी. 

वहीं समोसा का मुद्दा उठाने के लिए उनकी खिल्ली उड़ाए जाने पर रवि किशन का कहना था कि वह एक कलाकर हैं इसलिए अपनी बातों में हास्य का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन कथित हाई क्लास लोग देहाती हास्य को नहीं समझते.

इस तरह के खाने-पीने की चीजों को लेकर सांसद रवि किशन ने कहा कि यह एक ऐसा मुद्दा है जो लोगों के लिए मायने रखता है. जहां से वह आते हैं वहां के 98 फीसदी लोग गरीब हैं इसलिए 1 रुपये या 10 रुपये की कीमत भी गरीबों के लिए मायने रखती है. उनका कहना था कि लोग यह जानना चाहते हैं कि वे जो खा रहे हैं, उसमें क्या है? चाहे वह ढाबा हो या पांच स्टार होटल, हर जगह खाने की चीजों की कीमत और साइज एक जैसा होना चाहिए. 

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक ही सड़क पर पांच अलग-अलग ढाबे एक जैसा खाना अलग-अलग कीमतों पर बेचते हैं. यह मुद्दा जब उन्होंने संसद से उठाया तो उनका वीडियो वायरल हो गया. इसके बाद देशभर के लोग उनसे इस मुद्दों को लेकर संपर्क कर रहे हैं. 

जब उनसे पूछा गया कि यह मुद्दा उनके दिमाग में कैसे आया तो उन्होंने बताया कि यह मुद्दा काफी वक्त से उनके मन में था. वह इसे उठाना चाहते थे. लेकिन शून्यकाल में इसका मौका नहीं मिल रहा था. पिछले दिनों जब लोकसभा अध्यक्ष ने शून्यकाल के दौरान इसकी इजाजत दी तो उन्हें भी मौका मिला और उन्होंने यह मुद्दा सदन के पटल पर रखा. अब यह मामला बहस का विषय बन गया है.

आगे जब उनसे पूछा गया कि वह इस मुद्दों को कैसे आगे लेकर जाएंगे तो उन्होंने बताया कि वह सत्ताधारी दल के सदस्य हैं इसलिए सीधे तौर पर सरकार के बारे में टिप्पणी नहीं करेंगे. लेकिन वह संबंधित मंत्री से मिलकर इस पर चर्चा करेंगे क्योंकि यह जन स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है.

वीडियो: समोसा, जलेबी पर वार्निंग बोर्ड को लेकर सरकार ने अब क्या कहा?

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