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फ़ोटो में दिख रहे शख्स ने पहलगाम अटैक में इतनी घटिया हरकत की!

लश्कर का कमांडर फ़ारूक़, रास्ते पहचानने वाला फ़ारूक़, घुसपैठ कराने वाला फ़ारूक़ - असली कहानी क्या?

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30 अप्रैल 2025 (अपडेटेड: 30 अप्रैल 2025, 02:55 PM IST)
Pahalgam attack Baisaran
फ़ारूक़ अहमद बाएं, बैसारन का मैदान दाएं
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अली तलहा
हाशिम मूसा 
आदिल हुसैन ठोकर

ये वो तीन नाम थे, को 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले में शामिल थे. तीनों का जुड़ाव लश्कर के संगठन दी रेसिस्टेंस फ़ोर्स से. इनके स्केच जारी हुए. और इनमें से दो के बारे में खबर आई कि वो कश्मीर के रहने वाले थे. अली तलहा अनंतनाग का, और हाशिम मूसा, त्राल का. आदिल की शिनाख्त अब भी जारी. सुरक्षा बलों ने कार्रवाई शुरू की. अनंतनाग और त्राल में मौजूद दो घरों को नेस्तनाबूद कर दिया.

लेकिन ये वो अपडेट थे, जो आपको मालूम थे. एक अपडेट और था, जिसकी खबर कम लोगों को हुई. जब अनंतनाग और त्राल में कार्रवाई चल रही थी, उस समय यहां से लगभग डेढ़ सौ किलोमीटर दूर कुपवाड़ा जिले में भी बुलडोजर घनघना रहे थे. निशाना था एक घर, मालिक का नाम - फ़ारूक़ अहमद. काम - लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर. पता - अब पाकिस्तान.

रक्षा सूत्रों के हवाले से आ रही हैं खबरें. उनकी मानें तो फ़ारूक़ अहमद ही वो शख्स है, जिसने पहलगाम हमले की योजना बनाने में अहम भूमिका निभाई. इंडिया टुडे में छपी जितेंद्र बहादुर सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, फ़ारूक़ ने पहलगाम हमले में शामिल आतंकियों को जरूरी मदद भी मुहैया कराई.

फ़ारूक़ सबसे पहले साल 1990 में पाकिस्तान गया. उसके बाद से लेकर साल 2016 तक वो पाकिस्तान और भारत में आवाजाही करता रहा.

इसके अलावा कुछ और इनपुटस भी हैं. जैसे - फ़ारूक़ अहमद ने कश्मीर में बीते दो सालों के भीतर हुए आतंकी हमलों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है. एक इनपुट ये भी है कि जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के बीच मौजूद सरहद के तीन सेक्टर्स के जरिए भारत में घुसपैठ करवाने में भी फारूक ने भूमिका निभाई है. ऐसा क्यों? क्योंकि कहा जा रहा है कि लश्कर के इस कमांडर को पाकिस्तान से भारत में घुसने के रास्तों का अच्छा ज्ञान है.

पहलगाम में हुए हमलों के बाद कई लोगों को हिरासत में लिया गया है. इनमें से आधा दर्जन से ज्यादा लोग फ़ारूक़ अहमद के करीबी बताए जा रहे हैं.

बता दें कि ये सबकुछ सूत्रों के हवाले से आई जानकारियाँ हैं. और जब स्थिति टकराव या संघर्ष की हो, तो कोई भी तथ्य आखिरी सच नहीं हो सकता. सूचनाओं में बदलाव होते रहते हैं.

इसके अलावा इस केस की जांच में जुटी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के फ्रन्ट से भी कुछ अपडेट्स हैं. 29 अप्रैल को NIA की टीम ने ओडिशा के कटक में एक परिवार से पूछताछ की. यहाँ एक रहने वाले रंजीत भोल और शशि नायक का परिवार भी 22 अप्रैल को हमले वाले दिन पहलगाम की बैसारन घाटी में मौजूद था.

 

वीडियो: पहलगाम हमले के बाद कश्मीर में टूरिस्ट स्पॉट्स पर नो एंट्री

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