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मणिपुर हिंसा के बाद पहली बार मैतेई-कुकी नेता एक साथ बैठे, केंद्र की बैठक का नतीजा क्या निकला?

Manipur Violence: केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली में ये बैठक बुलाई गई. इसका नेतृत्व उत्तर पूर्व मामलों पर गृह मंत्रालय के सलाहकार ए.के. मिश्रा ने किया. दिल्ली में हुई इस बैठक में क्या-क्या बातचीत हुई? और इसके बाद नेताओं ने क्या बताया?

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केंद्र की तरफ़ से बैठक का नेतृत्व उत्तर पूर्व मामलों पर गृह मंत्रालय के सलाहकार ए.के. मिश्रा ने किया. (फ़ोटो - PTI)
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हरीश
6 अप्रैल 2025 (अपडेटेड: 6 अप्रैल 2025, 10:54 AM IST)
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दिल्ली में केंद्र सरकार के अधिकारियों और मणिपुर के मैतेई और कुकी-जो संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक हुई है. ये बैठक लगभग 2 साल पहले शुरू हुई जातीय हिंसा से त्रस्त मणिपुर में आगे का रास्ता निकालने के मकसद से हुई है. ये बैठक इसलिए भी अहम है, क्योंकि दोनों पक्षों के संगठनों ने पहली बार औपचारिक रूप से बातचीत की है. हालांकि, ये अब भी नहीं कहा जा सकता कि पूरी तरह से कोई हल निकल गया है.

केंद्र की तरफ़ से 5 अप्रैल को हुई इस बैठक का नेतृत्व उत्तर पूर्व मामलों पर गृह मंत्रालय के सलाहकार ए.के. मिश्रा ने किया. उनके साथ क़रीब सात-आठ अन्य अधिकारी भी थे. इनमें मणिपुर के मुख्य सचिव पी.के. सिंह और एक एडिशनल DGP भी मौजूद थे.

वहीं, घाटी के दो नागरिक समाज संगठनों- ऑल मणिपुर यूनाइटेड क्लब्स ऑर्गनाइजेशन (AMUCO) और फेडरेशन ऑफ सिविल सोसाइटी ऑर्गनाइजेशन (FOCS) के प्रतिनिधियों ने इसमें हिस्सा लिया. कुकी-जो संगठनों- कुकी-जो काउंसिल और ज़ोमी काउंसिल के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में भाग लिया. टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के मुताबिक़, बैठक में छह मैतेई प्रतिनिधि और नौ कुकी प्रतिनिधि शामिल हुए.

मणिपुर पर क्या समझौता हुआ?

इस बैठक में अधिकारियों ने दोनों पक्षों के सामने एक ड्राफ़्ट 'एग्रीमेंट' या संयुक्त प्रस्ताव पेश किया. इस एग्रीमेंट के लब्बो-लुआब को इन छह पॉइंट्स में समझा जा सकता है-

1. प्रत्येक पक्ष अपने लोगों से दूसरे समुदाय के सदस्यों के ख़िलाफ़ हिंसा से दूर रहने की अपील करेगा. प्रशासन हिंसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा.

2. दोनों पक्ष हथियारों की बरामदगी में सहयोग का आश्वासन दें.

3. हाईवे पर लोगों की आसानी से आवाजाही हो सके, इसके लिए अपनी कोशिशों में इजाफा करें.

4. दोनों पक्ष विस्थापितों की घर वापसी के लिए सरकार की किसी भी पहल का स्वागत करेंगे, बशर्ते सरकार द्वारा रसद और सुरक्षा व्यवस्था की जाए.

5. दोनों पक्षों ने राज्यपाल से संघर्ष के दौरान उपेक्षित (ध्यान नहीं दिये गए) क्षेत्रों में विकास को प्राथमिकता देने की अपील की.

6. दोनों पक्ष सभी दीर्घकालिक और विवादास्पद मुद्दों को बातचीत के ज़रिए समाधान के लिए केंद्र के सामने उठाए जाने पर सहमत हैं.

बैठक से जुड़े सूत्रों ने PTI को बताया,

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ऊपर हमने जिन नागरिक समाज संगठनों का ज़िक्र किया, उनमें से एक - AMUCO - के अध्यक्ष फ़ेरोइजम नांडो लुवांग ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया,

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ये भी पढ़ें- बीरेन सिंह ने क्यों छोड़ा मणिपुर CM का पद?

वहीं, कुकी-ज़ो काउंसिल के अध्यक्ष हेनलियानथांग थांगलेट ने बैठक को 'ऐतिहासिक बताया. लेकिन उन्होंने ये भी कहा,

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बता दें, कुकी-ज़ो ग्रुप्स वर्तमान संघर्ष के हल के रूप में घाटी स्थित राज्य सरकार से अलग प्रशासनिक ढांचे की मांग पर जोर दे रहे हैं. हेनलियानथांग थांगलेट ने आगे कहा,

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इससे पहले, मैतेई संगठन COCOMI ने वार्ता को ‘दिखावा’ बताकर खारिज कर दिया. 5 अप्रैल को COCOMI ने कहा- ‘शांति पहल सिर्फ़ राजनीतिक दिखावे के लिए बनाई गई एक खोखली कवायद है.’

बताते चलें, मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू है, जो 13 फरवरी को लगाया गया था. उसके चार दिन पहले ही बीरेन सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. राज्य विधानसभा सस्पेंडेड है.

वीडियो: मणिपुर में क्यों लगा राष्ट्रपति शासन? गृहमंत्री अमित शाह ने आधी रात संसद में क्या बताया?

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