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मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह का इस्तीफा, हिंसा शुरू होने के 20 महीने बाद लिया फैसला

Manipur के CM N Biren Singh ने राज्यपाल अजय भल्ला को अपना इस्तीफा सौंप दिया है. इस मौके पर उनके साथ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ए शारदा, भाजपा के मणिपुर प्रभारी संबित पात्रा और कम से कम 19 विधायक मौजूद थे. इस बीच गृह मंत्रालय ने सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने को कहा है. Manipur में अब आगे क्या होने वाला है?

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Manipur CM resignation
मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने इस्तीफा दे दिया है. (तस्वीर: इंडिया टुडे)
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रवि सुमन
9 फ़रवरी 2025 (अपडेटेड: 9 फ़रवरी 2025, 07:21 PM IST)
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मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इस्तीफा (Manipur CM N Biren Singh Resigned) दे दिया है. उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यपाल अजय भल्ला को सौंपा है. रिपोर्ट है कि राज्यपाल ने उनसे नई सरकार के कार्यभार संभालने तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में काम करते रहने को कहा है. संभावना है कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व एक या दो दिन में नए नेतृत्व पर फैसला कर लेगा. इस बीच गृह मंत्रालय ने सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने को कहा है.

CM Biren Singh ने इस्तीफे में क्या लिखा?

राज्यपाल को इस्तीफा सौंपने के दौरान बीरेन सिंह के साथ प्रदेश BJP अध्यक्ष ए शारदा, BJP के मणिपुर प्रभारी संबित पात्रा और कम से कम 19 विधायक मौजूद थे. उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा है,

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इससे एक दिन पहले ही बीरेन सिंह ने कहा था कि उनकी सरकार राज्य में शांति बहाल करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है.

कौन हैं एन बीरेन सिंह?

एक जनवरी 1961 को मणिपुर में जन्मे एन बीरेन सिंह राजनीति में आने से पहले पत्रकार और फुटबॉलर रहे हैं. शुरू से उनकी दिलचस्पी फुटबॉल में थी. कम ही लोग जानते हैं कि 18 साल की उम्र में बीरेन सिंह बीएसएफ की एक फुटबॉल टीम के लिए चुन लिए गए थे. वे 1981 में कोलकाता के मोहन बागान फुटबॉल क्लब को डूरंड कप में हराने वाली बीएसएफ टीम का हिस्सा भी थे. बाद में उन्होंने राज्य टीम के लिए खेलना जारी रखा. खेल के साथ एन बीरेन सिंह पत्रकारिता से भी जुड़े रहे. इसके लिए उन्होंने पहले बीएसएफ से इस्तीफा दिया और स्थानीय भाषा के अखबार की शुरुआत की.

बताया जाता है कि इसके लिए उन्हें अपने पिता से विरासत में मिली एक जमीन भी बेचनी पड़ी थी. बाद में बीरेन सिंह राजनीति में उतरे और यहां भी सफल रहे. बीरेन सिंह ने साल 2002 में राजनीति में कदम रखा था. तब उन्होंने डेमोक्रेटिक रिवोल्यूशनरी पीपुल्स पार्टी को ज्वाइन किया था. उसी साल वो हिंगांग (Heingang) विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे.

साल 2007 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा था. बाद में उन्हें मणिपुर सरकार में कैबिनेट मंत्री नियुक्त किया गया. लेकिन 2017 के चुनाव से कुछ महीने पहले बीरेन सिंह की तत्कालीन मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह से ठन गई. उन्होंने पूर्व सीएम का विरोध करना शुरू कर दिया और अक्टूबर 2016 में कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए.

हालांकि, फिर पार्टी बदलने से हिंगांग में बीरेन सिंह की जीत का सिलसिला नहीं रुका. 2017 के चुनाव में बीरेन फिर यहां से जीते और अपने सियासी सफर के सबसे मुकाम पर पहुंच गए. वैसे उस चुनाव में बीजेपी को बहुमत हासिल नहीं हुआ था, लेकिन फिर भी पार्टी सरकार बनाने में सफल रही थी. एन बीरेन सिंह को विधायक दल का नेता चुना गया था और वे मणिपुर में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बने थे.

ये भी पढ़ें: शांति वार्ता के अगले दिन ही मणिपुर में हिंसा, जिरीबाम में मैतेई परिवार का घर जलाया

2022 में मणिपुर मे फिर से चुनाव हुए. विधानसभा सीटों में 32 पर BJP को जीत मिली. एन बीरेन सिंह दूसरी बार मणिपुर के मुख्यमंत्री बन गए. 21 मार्च, 2022 को राज्यपाल ला गणेशन ने उन्हें इंफाल स्थित राजभवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई. 

मणिपुर हिंसा के लिए जनता से माफी मांगी थी

लंबे समय से मणिपुर हिंसा का शिकार रहा है. इसके कारण कुछ समय से बीरेन सिंह को CM पद से हटाए जाने की मांग हो रही थी. दिसंबर 2024, में उन्होंने हिंसा के लिए मणिपुर के लोगों से माफी भी मांगी थी. उन्होंने कहा था,

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उन्होंने आगे बताया था कि हिंसा में विस्थापित हुए 2058 परिवारों को उनके अपने घरों में फिर से बसाया गया है. इन जगहों में इम्फाल वेस्ट, इम्फाल ईस्ट, कांगपोकपी और चुराचांदपुर शामिल हैं. उन्होंने ये भी बताया था कि राज्य में बड़ी मात्रा में लूटे गए हथियारों को बरामद भी किया गया है. 625 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया गया है. और 12,247 FIR दर्ज की गई हैं.

वीडियो: "मणिपुर की पुलिस मैतेई पुलिस..." इस बयान पर विवाद, राज्य की पुलिस ने जवाब दिया

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