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'अंग्रेजों से डरकर भाग गए थे सुभाष चंद्र बोस', चौथी क्लास के टेक्स्टबुक ड्राफ्ट से खलबली

केरल में चौथी क्लास के लिए तैयार की जा रही टेक्स्टबुक में सुभाष चंद्र बोस के लिए ये बातें लिखी गई थीं. राज्य की सरकार ने इसे ऐतिहासिक भूल बताया है.

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18 अगस्त 2025 (पब्लिश्ड: 12:00 AM IST)
 Subhas Chandra Bose
केरल सरकार का कहना है गलती को सुधार दिया गया है. (India Today)
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केरल में चौथी क्लास के लिए तैयार किए जा रहे स्कूल टेक्स्टबुक के एक ड्राफ्ट में यह लिखा गया कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ब्रिटिशों के डर से जर्मनी भाग गए थे. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक जब इस विवादास्पद अंश को लेकर बवाल मचा तो राज्य सरकार ने सफाई देते हुए कहा कि यह एक 'ऐतिहासिक गलती' थी, जिसे सुधार दिया गया है.

यह विवादास्पद अंश राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) द्वारा तैयार किए गए शिक्षकों की हैंडबुक में सामने आया था. शिक्षा विभाग ने अब इस ड्राफ्ट को सुधार दिया है और किताब तैयार करने वाली समिति के सदस्यों को आगे किसी भी शैक्षणिक गतिविधि से निलंबित कर दिया है.

राज्य के शिक्षा मंत्री और CPI(M) नेता वी शिवनकुट्टी ने मीडिया से कहा,

“टेक्स्टबुक के ड्राफ्ट में कुछ ऐतिहासिक गलतियां सामने आई थीं. जब मामला सामने आया तो तुरंत सुधार करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि किताब केवल ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर ही छपे. केरल सरकार केंद्र सरकार के इस रुख से सहमत नहीं है कि इतिहास को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए तोड़ा-मरोड़ा जाए. SCERT को निर्देश दिया गया है कि इस किताब की समिति के सदस्यों को डिबार कर दिया जाए.”

इस RSS के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने दावा किया कि किताब में और भी गलतियां हैं. ABVP के राष्ट्रीय सचिव श्रवण बी राज ने बयान जारी कर कहा,

“इतिहास से छेड़छाड़ करना CPI(M) सरकार की सोची-समझी साज़िश है, ताकि छात्रों तक विकृत इतिहास पहुंचाया जा सके. इसके अलावा, इसी टेक्स्टबुक के दूसरे अध्याय में छपे नक्शे से असम और झारखंड जैसे राज्यों के नाम जानबूझकर हटा दिए गए हैं.”

ABVP का कहना है कि यह देश की अखंडता को नष्ट करने और गुप्त रूप से चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की असम पर कब्ज़े की कोशिशों का समर्थन करने की राजनीतिक साज़िश का हिस्सा है. हालांकि, इन आरोपों पर अब तक केरल सरकार की तरफ से कोई बयान नहीं आया है.

वीडियो: आख़िरी सालों में सुभाष चंद्र बोस 'गुमनामी बाबा' बनकर रहे थे? सच ये है

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