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'कुत्तों का भी आभारी हूं, मुझे दुनियाभर में फेमस कर दिया...', बोले जस्टिस विक्रम नाथ

Justice Vikram Nath On Stray Dog Order: जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली तीन जजों की स्पेशल बेंच ने 22 अगस्त को दो जजों की बेंच के 11 अगस्त के आदेश को पलट दिया था. अब वो इसी फैसले पर बोले हैं.

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31 अगस्त 2025 (अपडेटेड: 31 अगस्त 2025, 03:37 PM IST)
Justice Vikram Nath On Stray Dog Order
CJI बीआर गवई(बाएं) का आभार जताते हुए जस्टिस विक्रम नाथ(दाएं) ने और भी कई बातें कही हैं. (फाइल फोटो- PTI/इंडिया टुडे)
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अपने मजाकिया लहजे के लिए मशहूर सुप्रीम कोर्ट के जज, जस्टिस विक्रम नाथ ने आवारा कुत्तों पर दिए अपने फैसले पर बात की है. उन्होंने कहा कि इस मामले ने उन्हें दुनिया भर की सिविल सोसाइटी में फेमस कर दिया है. इस मामले को उन्हें सौंपने के लिए उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई को भी धन्यवाद दिया.

जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली तीन जजों की स्पेशल बेंच ने 22 अगस्त को दो जजों की बेंच के 11 अगस्त के आदेश को पलट दिया था. इसमें दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों से पकड़े गए आवारा कुत्तों को शेल्टर होम्स में डालने पर रोक लगा दी गई थी.

लाइव लॉ की खबर के मुताबिक, केरल के तिरुवनंतपुरम में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) ने मानव-वन्यजीव संघर्ष पर शनिवार, 30 अगस्त को एक सम्मेलन आयोजित किया था. यहां बोलते हुए जस्टिस विक्रम नाथ ने पूरे मामले पर कहा,

लंबे समय से कानूनी बिरादरी में मैं अपने छोटे-मोटे कामों के लिए जाना जाता रहा हूं. लेकिन मैं आवारा कुत्तों का भी आभारी हूं. जिन्होंने मुझे न सिर्फ इस देश में, बल्कि दुनिया भर के पूरे नागरिक समाज (civil society) में पहचान दिलाई.

जस्टिस विक्रम नाथ ने इस मामले को उन्हें सौंपने के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई को धन्यवाद देते हुए कहा,

हाल ही में हम एक समिट में थे. वकीलों के संघ के अध्यक्ष वहां मौजूद थे. इसलिए उन्होंने आवारा कुत्तों के मामले पर सवाल पूछना शुरू कर दिया. मुझे बहुत खुशी हुई. क्योंकि भारत के बाहर भी लोग मुझे जानते हैं. इसलिए मुझे ये सम्मान देने के लिए मैं उनका (CJI गवई) आभारी हूं.

बताते चलें, 11 अगस्त को आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से देश में आवारा कुत्तों को लेकर चिताएं बढ़ गई थीं. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि 8 हफ्ते के अंदर दिल्ली एनसीआर के सभी आवारा कुत्तों को शेल्टर होम्स में शिफ्ट किया जाए. ये फैसला देने वाली दो जजों की बेंच में जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस आर महादेवन शामिल थे. लेकिन आला अदालत के इस फैसले का काफी विरोध हुआ.

13 अगस्त को कुत्तों के नसबंदी कार्यक्रम को लेकर एक पुरानी याचिका पर सुनवाई के दौरान वकील ननिता शर्मा ने यह मुद्दा सीजेआई गवई के सामने उठाया. ऐसे में CJI ने कहा कि वो इस मामले को देखेंगे. अगले दिन सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर फिर सुनवाई हुई. 14 अगस्त को इन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. बेंच का नेतृत्व कर रहे थे, जस्टिस विक्रम नाथ. इस बेंच में उनके साथ दो और जज थे- जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन. वी. अंजारिया.

इसके बाद, 22 अगस्त को कोर्ट ने साफ कर दिया कि सभी कुत्तों को पकड़ा तो जाएगा. लेकिन सिर्फ नसबंदी और टीकाकरण के लिए. बाद में उन्हें छोड़ दिया जाएगा. शेल्टर होम में सिर्फ बीमार और हिंसक आवारा कुत्तों को ही रखे जाने का आदेश दिया.

वीडियो: तारीख: आवारा कुत्तों पर क्या सोचते थे महात्मा गांधी?

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