जू वालों की लोगों से अपील- 'अपने पालतू जानवर हमें दीजिए, शेर-भेड़ियों को खिलाना है'
चिड़ियाघर ने पालतू जानवरों के मालिकों (Pet Owners) से अनचाहे गिनी पिग, खरगोश, मुर्गियों और यहां तक कि छोटे घोड़ों को दान करने का आग्रह किया है. ताकि उन्हें चिड़ियाघर के मांसाहारी जानवरों को खिलाया जा सके

डेनमार्क के उत्तरी शहर आल्बोर्ग में स्थित आल्बोर्ग चिड़ियाघर (Denmark zoo) की तरफ से एक अनोखी अपील की गई है. इस अपील की काफी आलोचना की जा रही है. चिड़ियाघर ने पालतू जानवरों के मालिकों (Pet Owners) से अनचाहे गिनी पिग, खरगोश, मुर्गियों और यहां तक कि छोटे घोड़ों को दान करने का आग्रह किया है. ताकि उन्हें चिड़ियाघर के मांसाहारी जानवरों को खिलाया जा सके. दान किए गए जानवरों को कम से कम तकलीफ देते हुए मारा जाएगा (यूथेनाइज) और फिर भोजन के रूप में उपयोग किया जाएगा.
सीएनएन ने बताया कि चिड़ियाघर ने ये जानकारी अपने एक फेसबुक पोस्ट में दी. इसमें कहा गया कि वो जानवरों की नैचुरल फूड साइकिल की नकल करना चाहते हैं, ताकि उनके शिकारी जानवरों का प्राकृतिक व्यवहार, पोषण और कल्याण सुनिश्चित हो.
CNN वर्ल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक चिड़ियाघर की डिप्टी डायरेक्टर पिया नील्सन ने कहा कि ये प्रथा डेनमार्क में आम है और कई वर्षों से आल्बोर्ग चिड़ियाघर में अपनाई जा रही है. उन्होंने बताया,
हालांकि, इस अपील ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है. कुछ लोगों ने इसे पालतू जानवरों के प्रति क्रूर बताते हुए चिड़ियाघर की आलोचना की. जबकि अन्य ने नैचुरल फूड साइकिल को बनाए रखने के प्रयास की सराहना की.
हालांकि ये पहली बार नहीं है. डेनमार्क के चिड़ियाघर पहले भी अपने पशुओं को खिलाने और उनकी आबादी को नियंत्रित करने के तरीके को लेकर जांच के दायरे में आए हैं.
2014 में डेनमार्क की राजधानी के कोपेनहेगन चिड़ियाघर ने प्रजनन से बचने के लिए मारियस नाम के एक स्वस्थ जिराफ को मार डाला था. जबकि इस कदम को रोकने के लिए एक याचिका भी दायर की गई थी. उसके शव का इस्तेमाल रिसर्च के लिए और चिड़ियाघर में मांसाहारी जानवरों को खिलाने के लिए किया गया था. इसके कुछ हफ्ते बाद एक और मामला सामने आया, जिसकी खूब आलोचना हुई. चिड़ियाघर ने चार शेरों को मार डाला, जिससे कि नए नर शेरों को जन्म दिया जा सके, ताकि नई पीढ़ी की ब्रीडिंग में मदद मिले.
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