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"अंतर्जातीय विवाह करने वालों की सरकारी गेस्ट हाउस में रखकर करें सुरक्षा", HC का अहम निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के राज्यों को अंतर्जातीय या अंतर्धार्मिक विवाह के कारण सुरक्षा समस्याओं का सामना करने वाले कपल्स के लिए सेफ हाउस स्थापित करने का निर्देश दिया था. महाराष्ट्र सरकार ने अभी तक ऐसे स्थानों की पहचान नहीं की है और इसकी सूची जारी नहीं की है.

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9 दिसंबर 2024 (अपडेटेड: 9 दिसंबर 2024, 08:50 PM IST)
Consider State guest houses as safe houses for couples facing security Bombay high court
SOP में ये भी बताया गया है कि अगर कपल सेफ हाउस में नहीं रहना चाहते हैं, तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए. (फोटो- X)
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने अंतर्जातीय विवाह करने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिया है. 9 दिसंबर को एक मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि अंतर्जातीय या अंतर्धार्मिक विवाह के कारण सुरक्षा समस्याओं का सामना करने वाले कपल्स राज्य के सरकारी गेस्ट हाउस में पनाह ले सकते हैं. कोर्ट ने इस संबंध में महाराष्ट्र सरकार को एक ड्राफ्ट तैयार करने का निर्देश दिया है. साथ ही कहा कि महाराष्ट्र के हर जिले में बने स्टेट गेस्ट हाउस ऐसे लोगों के लिए ‘सेफ हाउस’ के रूप में नामित किए जा सकते हैं.

 मामले की सुनवाई जस्टिस रेवती मोहिते-डेरे और जस्टिस शिवकुमार डिगे की बेंच ने की. इंडिया टुडे से जुड़ीं विद्या की रिपोर्ट के मुताबिक बेंच ने कहा,

“क्योंकि प्रत्येक जिले में स्टेट गेस्ट हाउस हैं, इसलिए उनके कुछ कमरों को 'सुरक्षित घर' के रूप में नामित किया जा सकता है. ऐसे मुद्दों का सामना करने वाले लोगों की संख्या इतनी बड़ी नहीं है. आपको बस ये सुनिश्चित करना होगा कि इसे इस उद्देश्य के लिए नामित किया गया है. और ये हर जगह होना चाहिए, सिर्फ मुंबई या पुणे में नहीं हो सकता. राज्य के गेस्ट हाउस में पुलिस सुरक्षा हमेशा होती है, इसलिए आपको अतिरिक्त बल भी तैनात नहीं करना होगा.”

मामले में याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील मिहिर देसाई और लारा जेसानी ने भी कुछ सुझाव सौंपे. इनमें बताया गया कि कैसे दिल्ली और चंडीगढ़ प्रशासन ने ऐसे मुद्दों से निपटने के लिए SOP बनाया हुआ है. वहां किसी हेल्पलाइन पर कॉल कर सहायता मांग सकते हैं. एक निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करना होता है, जहां कपल्स को सुरक्षित घरों में रखा जाता है. इन जगहों पर उनके लिए खाने से लेकर व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुएं उपलब्ध कराई जाती हैं. इसके साथ ही कानूनी सहायता के साथ-साथ काउंसलिंग भी दी जाती है.

SOP में ये भी बताया गया है कि अगर कपल सेफ हाउस में नहीं रहना चाहते हैं, तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए. वो जिस स्थान पर रहें वहां खतरे के अनुसार उन्हें पुलिस सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए.

बेंच ने राज्य को निर्देश दिया कि वो देसाई और जेसानी द्वारा दिए गए SOP को देखें और इसका अध्ययन करें. कोर्ट ने कहा है कि 20 दिसंबर तक इस पर विचार करने के बाद एक ड्राफ्ट पॉलिसी बनाई जाए. हालांकि, एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने इसके लिए कुछ और समय की मांग की. उन्होंने अगले हफ्ते से नागपुर में शुरू होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा सत्र की वजह से और समय मांगा. इस पर बेंच ने कहा,

"पहले आचार संहिता. फिर विधानसभा. ये सब नहीं चलेगा. हम आपको और समय नहीं देंगे. हमें विधानसभा का बहाना मत बताएं. पहले चुनाव था और अब विधानसभा. यदि वो कोई नीति लेकर आते हैं तो उप सचिव (गृह) और उप सचिव (सामाजिक न्याय विभाग) की उपस्थिति की आवश्यकता नहीं है. आप हमें ड्राफ्ट दिखाएं, यदि उसमें कोई कमी हो तो हम आपको बता सकते हैं."

बता दें कि लगभग छह साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के राज्यों को अंतर्जातीय या अंतर-धार्मिक विवाह के कारण सुरक्षा समस्याओं का सामना करने वाले कपल्स के लिए सेफ हाउस स्थापित करने का निर्देश दिया था. महाराष्ट्र सरकार ने अभी तक ऐसे स्थानों की पहचान नहीं की है और इसकी सूची जारी नहीं की है. 

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