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दुनियाभर में चीन के सीक्रेट पुलिस स्टेशन, JNU प्रोफेसर का सनसनीखेज दावा
प्रोफेसर श्रीकांत कोंडापल्ली ने बताया कि चीन को पाकिस्तान की डेमोक्रेसी, ज्यूडिशियरी और मीडिया में कोई विशेष भरोसा नहीं है. इसलिए चीन ने ज्यादातर आर्थिक, सैन्य और रणनीतिक मदद पाकिस्तान की सेना को दी.
चीन का पाकिस्तान की सरकार में दबदबे को लेकर अहम चर्चा हुई. (तस्वीर-इंडिया टुडे)
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जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर ईस्ट एशियन स्टडीज के प्रोफेसर श्रीकांत कोंडापल्ली ने पाकिस्तान और चीन को लेकर कई अहम जानकारियां दी हैं. वे हाल में लल्लनटॉप स्टूडियो में आए थे. बातचीत के दौरान उन्होंने भारत के पड़ोसी देशों के बारे में ऐसी जानकारियां दीं जिन्हें ज्यादातर लोग नहीं जानते होंगे.
प्रोफेसर कोंडापल्ली ने बताया कि कैसे पाकिस्तान की सेना के माध्यम से चीन ने वहां की सरकार को कब्जे में ले रखा है. उन्होंने आगे बताया कि चीन CPEC परियोजना के जरिए पाकिस्तान की सेना को हथियार और पैसों की मदद करता है. इसके अलावा चीन दुनिया भर में अपने सीक्रेट पुलिस स्टेशन बना रहा है.
प्रोफेसर श्रीकांत कोंडापल्ली से सवाल किया गया, "पाकिस्तान के मिलिट्री इस्टैब्लिशमेंट और पॉलिटिकल इस्टैब्लिशमेंट में चीन का किस तरह का दखल रहता है. कभी इमरान खान को सत्ता में ले आए. तो कभी शरीफ को कितने दखल विज़िबल होते हैं. और कितने इनविज़िबल?"
इसका जवाब देते हुए JNU प्रोफेसर ने कहा,
“1963 से चीन और पाकिस्तान के बीच जो संस्थागत समझौते (Institutional Arrangements) हुए. उन्हें 'ऑल वेदर फ्रेंडशिप' कहा जाता है. इसमें चीन की सोच साफ रही है कि पाकिस्तानी आर्मी ही सबसे भरोसेमंद साझेदार है. चीन को पाकिस्तान की डेमोक्रेसी, ज्यूडिशियरी और मीडिया में कोई विशेष भरोसा नहीं है. इसलिए चीन ने ज्यादातर आर्थिक, सैन्य और रणनीतिक मदद पाकिस्तान की सेना को दी. इसमें CPEC (चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर), हथियारों की आपूर्ति और लोन शामिल हैं. जिन पर सीधा नियंत्रण पाकिस्तान की मिलिट्री का है.”
CPEC- चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर
पाकिस्तान में चीन के हस्तक्षेप को लेकर प्रोफेसर ने कहा,
“ये एक ब्लैक बॉक्स है. हमें कभी प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिले कि चीन ने पाकिस्तान की राजनीति में डायरेक्ट इंटरफेयर किया हो. लेकिन मिलिट्री के जरिए चीन का प्रभाव राजनीतिक फैसलों तक जाता है. हालांकि चीन की सैन्य मौजूदगी को लेकर कुछ सूचनाएं उपलब्ध हैं उनके CPEC प्रोजेक्ट्स के बारे में. कहा जाता है कि इन प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा के लिए लगभग 36 हजार सिक्योरिटी गार्ड्स तैनात किए गए हैं. जो इनकी रक्षा करते हैं.”
कोंडापल्ली ने आगे बताया कि ये 36 हजार सिक्योरिटी गार्ड्स असल में पैरा-मिलिट्री बलों और पुलिस फोर्स के कैडर से हैं. जिन्हें CPEC प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है. ये सुरक्षा बल मुख्य रूप से हाइड्रो प्रोजेक्ट्स, सड़कों और रेलवे जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं.
चीन दुनिया भर में बना रहा पुलिस स्टेशन
प्रोफेसर श्रीकांत कोंडापल्ली ने बताया कि पाकिस्तान में 35 से ज्यादा चीनी नागरिकों की हत्या हो चुकी है. इनमें से कई में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी का हाथ है. इसके चलते चीन ने पाकिस्तान से यहां चीनी पुलिस स्टेशनों बनाने की मांग की है. प्रोफेसर कोंडापल्ली का दावा है कि फिलहाल दुनिया भर में चीन के कुल 16 पुलिस स्टेशन मौजूद हैं. ये पुलिस स्टेशन यूनाइटेड किंगडम, यूनाइटेड स्टेट्स जैसे देशों में भी पाए गए हैं. हालांकि ये देश इस पर सहमत नहीं हैं. वे इन पुलिस स्टेशनों को गैरकानूनी मानते हैं.
उन्होंने कहा, “ये सभी गतिविधियां क्लासिफाइड होती हैं. यह साफ तौर पर दिखाई नहीं देता कि चीन का यह 'पुलिस स्टेशन' कहां पर है. ट्रम्प प्रशासन ने इसे कंट्रोल करने की कोशिश की थी. बर्मिंघम में स्थित चीनी वाणिज्य दूतावास (Chinese Consulate) के बाहर एक बार भारी प्रदर्शन हुआ था. इस प्रदर्शन में हांगकांग का एक नागरिक भी शामिल था. इसे कथित तौर पर दूतावास के अंदर ले जाकर बुरी तरह पीटा गया.”
बातचीत में प्रोफेसर श्रीकांत कोंडापल्ली ने बताया कि चीन ने हांगकांग में जो नया 'नेशनल सिक्योरिटी लॉ' लागू किया है उसे बहुत खतरनाक माना जा रहा है. इसी कानून के विरोध में वे प्रदर्शन हो रहे थे.
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