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लखनऊ KGMU वालों ने 'मस्जिद' गिरवा दी? पूरी बात ये है

Lucknow की किंग्स जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में Bulldozer Action के जरिए अतिक्रमण हटाया गया. आरोप है कि KGMU कैंपस में एक मजार के पास कुछ लोगों ने मकान और दुकानें बना ली थीं. इस मामले में प्रभावित लोगों और KGMU प्रशासन का क्या कहना है?

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मौ. जिशान
| संतोष शर्मा
28 अप्रैल 2025 (अपडेटेड: 28 अप्रैल 2025, 06:29 PM IST)
KGMU Lucknow, Bulldozer Action
KGMU में बुलडोजर से अतिक्रमण हटाया गया. (ANI)
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लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में बुलडोजर एक्शन हुआ है, जिसके तहत जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया. यह कार्रवाई नेत्र विभाग के पीछे मौजूद ऐतिहासिक 'मामा-भांजे की मजार' के आसपास हुई. आरोप है कि मजार के आसपास कुछ लोगों ने दुकानें और घर बना लिए थे. KGMU प्रशासन का कहना है कि ये सभी निर्माण अवैध रूप से अस्पताल की जमीन पर किए गए थे. वहीं, यहां रह रहे लोगों ने आरोप लगाया कि KGMU प्रशासन ने एक 'मस्जिद' को भी गिरा दिया, जिसे अधिकारियों ने खारिज कर दिया है.

इंडिया टुडे से जुड़े संतोष शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, 26 अप्रैल को भी KGMU प्रशासन बुलडोजर लेकर पहुंचा था. उस समय मजार के आसपास के लोगों ने विरोध किया था. अब 27 अप्रैल की कार्रवाई में KGMU प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर जमीन को कब्जा मुक्त करा लिया है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि मजार ‘600’ साल से ज्यादा पुरानी है और यह केजीएमयू के बनने से भी पहले की है. बीते 35-40 सालों से लोग मजार के पास के मकानों में रह रहे थे. यहीं से उन्होंने अपने आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसे दस्तावेज भी बनवा लिए थे. अब जब प्रशासन ने कार्रवाई की, तो कई लोगों का आरोप है कि बिना नोटिस दिए ही उनका आशियाना उजाड़ दिया गया.

मजार से जुड़े मोहम्मद शानू का कहना है कि KGMU वाले नोटिस भेजते थे. शानू ने कहा,

“वे जब तारीख को आते थे, तो हम लोग भी खड़े होकर अपना पक्ष रखते थे. लेकिन बीते कुछ महीनो से लगातार वकील की तरफ से नोटिस आ रहे थे. हमें उम्मीद नहीं थी कि अचानक बुलडोजर चल जाएगा.”

वहीं, केजीएमयू प्रशासन ने साफ किया कि मजार को किसी भी प्रकार से नुकसान नहीं पहुंचाया गया है. केवल उसके चारों ओर बने अवैध चबूतरे और अतिरिक्त निर्माण हटाए गए हैं.

KGMU प्रवक्ता प्रोफेसर डॉ. केके सिंह ने बताया,

"नेत्र विभाग के पीछे हमारी बहुत बड़ी जमीन थी. उस पर लोगों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया था. उनको कई बार नोटिस दिया गया. जब उसके बाद (खाली) नहीं हुआ, तो कल पुलिस-प्रशासन की मदद से उस जगह को खाली कराया जा रहा है. करीब-करीब पूरी जगह खाली हो चुकी है. मजार को बिल्कुल नहीं छुआ गया है. लेकिन मजार के चारों तरफ कुछ चबूतरे और कुछ चीजें, बहुत बाद में बढ़ा ली गईं, जो मजार का हिस्सा नहीं थी. उनको भी हटाया जा रहा है. सारी दुकानें और घर चारों तरफ के हटा दिए गए हैं."

डॉ. केके सिंह ने आगे कहा कि यह केजीएमयू की जमीन है. इसमें मजार है, लेकिन मजार को छुआ नहीं जा रहा है. इसके आसपास की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त करा लिया गया है. उन्होंने बताया कि यहां सर्वे कराया जाएगा. कुलपति और अन्य अधिकारी मुआयना करने आएंगे. उसके बाद तय किया जाएगा कि इस जमीन का इस्तेमाल मरीजों को सुविधाएं देने के लिए कैसे किया जा सकता है.

KGMU प्रशासन का कहना है कि KGMU में रोजाना 10,000 से ज्यादा मरीज इलाज के लिए आते हैं. हजारों की संख्या में छात्र विभिन्न कोर्स में पढ़ाई कर रहे हैं. ऐसे में हमारे परिसर में डॉक्टर के रहने, मरीजों को भर्ती और इलाज करने के लिए जगह कम पड़ रही है. लिहाजा हमने अपना परिसर खाली कराया है. इसमें किसी भी तरीके की मस्जिद या मदरसा नहीं था. सिर्फ कुछ दुकान और मकान जो अवैध ढंग से बनाए गए थे, उनको खाली कराया गया है. धार्मिक आधार पर अस्पताल प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की है.

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