कोरोना के बाद हंता, नोरो, इबोला वायरसों से सहमी दुनिया, क्या भारत को डरना चाहिए?
जिस तरह एक के बाद एक वायरस फैल रहे हैं, उससे लोग परेशान हैं. उन्हें डर है कि कहीं इनमें से कोई वायरस पूरी दुनिया में न फैल जाए. बिल्कुल वैसे ही, जैसे कोरोनावायरस फैला था.

पिछले कुछ दिनों में अलग-अलग जगहों पर कई वायरस फैल चुके हैं. पहले MV हॉन्डियस क्रूज़ शिप पर हंतावायरस फैला. जिसमें 3 लोगों की मौत हुई. कई बीमार पड़े. इसके बाद कैरेबियन प्रिंसेज़ क्रूज़ शिप पर नोरोवायरस फैल गया. जिसमें 200 से ज़्यादा पैसेंजर्स और क्रू-मेंबर्स बीमार हो गए.
अब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो में इबोला वायरस से कम से कम 131 मौतें हो चुकी हैं और 500 से ज़्यादा संदिग्ध मामले सामने आए हैं. इबोला वायरस से एक मौत युगांडा में भी हुई है. जो कॉन्गो का पड़ोसी है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन ने इबोला आउटब्रेक को ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न’ घोषित कर दिया है. यानी ये लोगों की सेहत से जुड़ी ऐसी इमरजेंसी है. जिस पर पूरी दुनिया को तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है.
जिस तरह एक के बाद एक वायरस फैल रहे हैं. लोग भी परेशान हैं. उन्हें डर है कि कहीं इनमें से कोई वायरस पूरी दुनिया में न फैल जाए. बिल्कुल वैसे ही, जैसे कोरोनावायरस फैला था. अब लोगों के मन का ये डाउट क्लियर करने के लिए हमने बात की नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम में पल्मोनोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट, डॉक्टर पियूष गोयल से. उनसे इन सारे वायरसेज़ के बीच का फर्क भी जाना.

डॉक्टर पियूष कहते हैं कि फिलहाल इबोला, नोरोवायरस और हंतावायरस के कोरोना जैसी वैश्विक महामारी बनने की आशंका कम है. कोरोनावायरस हवा के ज़रिए बहुत तेज़ी से फैलता था. इसलिए ये दुनियाभर में महामारी बन गया. लेकिन इबोला वायरस मुख्य तौर पर संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों से फैलता है. जैसे पसीना, थूक, लार, पेशाब वगैरा. इसलिए इसका फैलाव सीमित है. वहीं, हंतावायरस आमतौर पर संक्रमित चूहों से फैलता है. इसका इंसान से इंसान में फैलना बहुत रेयर है. नोरोवायरस की बात करें, तो ये ज़रूर तेज़ी से फैलता है. खासकर बंद जगहों जैसे क्रूज़ शिप, हॉस्टल या अस्पतालों में, लेकिन इसकी मृत्यु दर बहुत कम होती है. इसलिए फिलहाल भारतीयों को इससे डरने की ज़रूरत नहीं है.
ये वायरस जिन इलाकों में फैल रहे हैं, वो हमारे देश से काफी दूर हैं, और भारत की हेल्थ एजेंसियां लगातार हालातों पर नज़र रखे हुए हैं. एयरपोर्ट स्क्रीनिंग, निगरानी और आइसोलेशन जैसी व्यवस्थाएं पहले के मुकाबले काफी मजबूत हुई हैं. हालांकि फिर भी थोड़ी सावधानी ज़रूरी है. लोग खाना बनाने या खाने से पहले हाथ ज़रूर धोएं. कहीं बाहर से आएं, तो भी हाथों को सैनिटाइज़ करें. किसी भीड़भाड़ वाली जगह पर जा रहे हैं, तो मास्क लगाएं. कॉन्गो, युगांडा और जिन भी जगहों पर ये वायरस फैल रहे हैं, वहां ट्रैवल करने से बचें. और अगर इन वायरसेज़ से जुड़ा कोई भी लक्षण हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं.

कोरोनावायरस के आम लक्षण हैं- बुखार, खांसी, गले में खराश, सांस लेने में दिक्कत, शरीर में दर्द, थकान, स्वाद और गंध महसूस न होना, सिरदर्द और नाक बहना या बंद होना. कोरोनावायरस के इलाज के लिए वैक्सीन और दवाएं मौजूद हैं.
वहीं हंतावायरस के आम लक्षण हैं- तेज़ बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और सांस लेने में गंभीर दिक्कत. इसका कोई खास इलाज नहीं है. बस लक्षणों को कंट्रोल किया जाता है. गंभीर स्थिति में ICU या वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है.
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अब बात नोरोवायरस की. इसके लक्षण हैं- बार-बार उल्टी, दस्त, उबकाई, पेटदर्द और पेट में ऐंठन. कुछ लोगों को इसके साथ बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, थकान या मांसपेशियों में दर्द भी हो सकता है. नोरोवायरस के इलाज में इस बात का ध्यान रखा जाता है कि शरीर में पानी की कमी न हो.

वहीं इबोला वायरस के आम लक्षणों में शामिल हैं- तेज़ बुखार, कमजोरी और थकान, बेचैनी, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और गले में खराश. इसके बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द, स्किन पर चकत्ते और किडनी व लिवर से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. कुछ मामलों में शरीर के अंदर या बाहर खून बहना भी शुरू हो सकता है. जैसे मसूड़ों से खून आना या स्टूल में खून दिखना. इसके इलाज के लिए कुछ वैक्सीन और दवाएं मौजूद हैं. लेकिन कॉन्गो और युगांडा में इबोला वायरस का बुंडीबुग्यो स्ट्रेन फैला हुआ है. जिससे निपटने के लिए कोई अप्रूव्ड वैक्सीन या कोई खास इलाज मौजूद नहीं है. इसलिए बचाव सबसे ज़रूरी है.
कोरोना महामारी ने दुनिया को ये सिखाया है कि किसी वायरस को हल्के में नहीं लेना चाहिए. लेकिन हर वायरस कोरोना नहीं बनता. इसलिए इंफेक्शन से डरने के बजाय उसे समझें. ताकि बचने का तरीका पता चल सके.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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