हंतावायरस के बाद नोरोवायरस, बड़े क्रूज़ के यात्री चपेट में, सब जान लेने में ही भलाई
कैरिबियन प्रिंसेज़ क्रूज़ शिप पर नोरोवायरस फैल गया है. 150 पैसेंजर्स और क्रू मेंबर्स बीमार पड़ गए हैं. ये क्रूज़ शिप 28 अप्रैल 2026 को फ्लोरिडा के पोर्ट एवरग्लेड्स से चला था.

आजकल जहाज़ों पर अलग मुसीबत आई हुई है. पहले MV हॉन्डियस में हंतावायरस फैला. 3 लोगों की मौत हुई. कई बीमार पड़े. अब कैरिबियन प्रिंसेज़ क्रूज़ शिप पर नोरोवायरस फैल गया है. 150 पैसेंजर्स और क्रू मेंबर्स बीमार पड़ गए हैं. ये क्रूज़ शिप 28 अप्रैल 2026 को फ्लोरिडा के पोर्ट एवरग्लेड्स से चला था. फिर 7 मई को लोगों के बीमार पड़ने की जानकारी VSP यानी Vessel Sanitation Program को दी गई. ये एक सरकारी कार्यक्रम है. जो अमेरिका के समुद्री क्षेत्र में चलने वाले क्रूज़ जहाज़ों पर पेट की बीमारियों को फैलने से रोकने में मदद करता है.
बीती 11 मई को ये पोर्ट कैनावेरल पर पहुंच गया. यहां इस क्रूज़ शिप को पूरी तरह सैनिटाइज़ और डिसइन्फेक्ट किया गया है, ताकि इंफेक्शन को आगे फैलने से रोका जा सके. साथ ही, बीमार यात्रियों के सैंपल लिए गए हैं. संक्रमित लोगों को आइसोलेट किया गया है. और इंफेक्शन के सोर्स का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है.
कैरिबियन प्रिंसेज़ क्रूज़ शिप पर मौजूद 3,116 यात्रियों में से 145 लोग बीमार पड़े हैं. वहीं, 1,131 क्रू मेंबर्स में से 15 बीमार हैं. जिस नोरोवायरस की वजह से इनकी तबियत बिगड़ी है, वो बहुत ही तेज़ी से फैलता है. इसे विंटर वॉमिटिंग बग भी कहते हैं, क्योंकि इसके मामले ठंड में ज़्यादा आते हैं.

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन यानी WHO के मुताबिक, हर साल नोरोवायरस के 68.5 करोड़ मामले सामने आते हैं. इनमें करीब 20 करोड़ मामले 5 साल से कम उम्र के बच्चों में आते हैं. शरीर पर नोरोवायरस का असर बहुत गंभीर होता है. इसकी वजह से हर साल लगभग 2 लाख मौतें होती हैं. इनमें करीब 50 हज़ार बच्चे भी शामिल हैं.
नोरोवायरस क्या है? ये इतनी तेज़ी से कैसे फैलता है? इसके लक्षण, इलाज और बचाव का तरीका हमने पूछा ग्लेनीगल्स हॉस्पिटल, मुंबई में इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट की कंसल्टेंट, डॉ. मंजुषा अग्रवाल से. ये भी जाना कि आखिर क्रूज़ शिप पर इतने वायरस क्यों फैल रहे हैं?

डॉक्टर मंजुषा कहती हैं कि नोरोवायरस, विषाणुओं का एक ग्रुप है. जो अचानक खूब उल्टी और दस्त की वजह बनता है. इसका इंफेक्शन दुनियाभर में एक्यूट गैस्ट्रोएंटेराइटिस का सबसे आम कारण है. एक्यूट गैस्ट्रोएंटेराइटिस यानी पेट और आंतों में अचानक सूजन आ जाना. नोरोवायरस बहुत कम समय में तेज़ी से फैलकर ज़्यादा लोगों को संक्रमित करता है. ये संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने. उनके साथ खाना या बर्तन शेयर करने. उनके द्वारा बनाया या छुआ खाना खाने से फैल सकता है.
नोरोवायरस दूषित खाने और पानी से भी फैल सकता है. इसके साथ ही, ये संक्रमित सतहों और चीज़ें से भी फैलता है. अगर कोई व्यक्ति वायरस लगी सतह छूकर बिना हाथ धोए अपना मुंह छू ले तो ये वायरस उसके शरीर में पहुंच सकता है. दरवाज़ों के हैंडल, टेबल, रेलिंग, लिफ्ट के बटन और बाथरूम जैसी जगहों पर वायरस कई दिनों तक जिंदा रह सकता है.
क्रूज़ शिप पर इतने वायरस क्यों फैल रहे?नोरोवायरस भीड़भाड़ वाली जगहों पर ज़्यादा तेज़ी से फैलता है. जैसे स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल और क्रूज़ शिप वगै़रा. अगर सिर्फ़ क्रूज़ शिप की बात करें, तो वहां बहुत सारे लोग कई दिनों तक एक ही जगह पर साथ रहते, खाते-पीते और घूमते हैं. लोग एक ही सतह को बार-बार छूते हैं. एक-दूसरे से लगातार संपर्क में रहते हैं. साथ में स्विमिंग करते हैं. थिएटर और डाइनिंग एरिया जैसी जगहों का साझा इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में अगर एक व्यक्ति संक्रमित हो जाए, तो वायरस बहुत तेज़ी से दूसरे लोगों तक पहुंच सकता है. उस पर जहाज़ों में मेडिकल सुविधाएं सीमित होती हैं. जिससे बड़े आउटब्रेक को संभालना मुश्किल हो जाता है.

जब कोई व्यक्ति नोरोवायरस से संक्रमित होता है, तो उसे लक्षण दिखने में 12 से 48 घंटे लगते हैं. नोरोवायरस के लक्षणों में शामिल हैं- बार-बार उल्टी, दस्त, उबकाई, पेटदर्द और पेट में ऐंठन. कुछ लोगों को इसके साथ बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, थकान या मांसपेशियों में दर्द भी हो सकता है. लक्षणों की गंभीरता हर व्यक्ति में अलग हो सकती है. लेकिन कई मरीज़ संक्रमण के दौरान बहुत कमज़ोरी और थकावट महसूस करते हैं.
नोरोवायरस से जुड़ी सबसे बड़ी दिक्कत डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी होना है. क्योंकि व्यक्ति को दिन में कई बार उल्टी या दस्त लग सकते हैं. इससे शरीर में तरल पदार्थों की कमी हो जाती है. ऐसा होने पर मुंह और गला सूखने लगता है. खड़े होने पर चक्कर आते हैं. यूरिन कम पास होता है. बहुत थकान और कमज़ोरी लगती है.
नोरोवायरस आंतों में सूजन, कुपोषण और लंबे समय तक पेट से जुड़ी परेशानियां दे सकता है.
नोरोवायरस से इलाज और बचावइस वायरस का कोई खास इलाज नहीं होता. डॉक्टर लक्षणों को कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं. इसके लिए दवाएं देते हैं. पर्याप्त मात्रा में लिक्विड पीने की सलाद देते हैं. जैसे ORS. ज़रूरत पड़ने पर हॉस्पिटल में ड्रिप लगाते हैं. साथ ही, हल्का खाना खाने और खूब आराम करने को कहते हैं. ज़्यादातर लोग 1 से 3 दिनों में ठीक हो जाते हैं.
देखिए, व्यक्ति ठीक महसूस करने के बाद भी 2 हफ्तों या उससे ज़्यादा समय तक वायरस फैला सकता है. इसलिए ठीक होने के बाद भी साफ़-सफ़ई और हाथ धोना बहुत ज़रूरी है. नोरोवायरस से बचना है तो बार-बार और अच्छे से हाथ धोएं. टॉयलेट इस्तेमाल करने के बाद, और खाना खाने या बनाने से पहले हाथ ज़रूर साफ़ करें. फल-सब्ज़ियां अच्छी तरह धोकर पकाएं. घर और आसपास की सतहों को साफ और डिसइन्फेक्ट रखें. और लक्षण खत्म होने के बाद भी कम से कम 48 घंटे तक घर पर ही रहें. ताकि बाकी लोग वायरस की चपेट में न आएं.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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