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बारिश में सिर्फ काई-फफूंद और दाद-खाज ही नहीं होती, रोमांस भी होता है

फुहारों के घोड़े दौड़ पड़े हैं. काली घटाएं उमड़ रही हैं. बारिश में असल मौज लेने के 10 तरीके जान लीजिए.

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सुमेर रेतीला
10 जून 2016 (अपडेटेड: 10 जून 2016, 05:39 AM IST)
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मॉनसून केरल पधार चुका है. जल्द ही आपके उधर भी आ जाएगा. साइंटिस्ट लोग भी बता रहे हैं कि इस बार तो खूब मेह बरसेगा झिरमिर-झिरमिर वाला.

बारिश के इंतज़ार में अनुराग वत्स
का लिखा याद आता है,


''बारिश इतना और यह करती है कि सब एक छत के नीचे खड़े हो जाएं.वह मेरे बगल में आकर खड़ी रही. मुझे पहली बार ऐसा लगा कि उसे यहीं ऐसे ही बहुत पहले से होना चाहिए था और अभी इसे दर्ज करते हुए यह इच्छा मेरे भीतर बच रहती है कि हर बारिश में वह मेरे साथ हो.''

जब मेह वाली बूंदें चेहरे को छूती हैं ना, तो सारी यादें पिक्चर की तरह घूमने लगती है. बचपन की छई-छप्पा-छई, जवानी का छतरी वाला इश्क, कुल्फी-पकोड़े, साइकिल की छींटें, गांव की गलियां और ऑफिस की कांच वाली दीवारों पर तैरती बूंदें. हर किसी की अपनी अलग-अलग बारिश वाली कहानियां हैं. कुछ कहानियां हम लेकर आए हैं. पढ़िए, इन तस्वीरों में.


1.

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फुहारों के घोड़े दौड़ पड़े हैं. काली घटाएं उमड़ रही हैं. शाम और गीली मिट्टी की साझा-सोंधी खुशबू आने लगी है. बारिश से पहले संदेसा लेकर कीट-पतंगे आ गए हैं. हम भी जल्द ही भीगने वाले हैं. तैयार रहिए.

2.

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छोटे बच्चे होते हैं ना बारिश शुरू और दौड़ पड़ते हैं भीगने. पर मां की डांट. बेटा बीमार हो जाओगे भीगो मत. अब बारिश में दौड़ना है. मिट्टी वाला घर बनाना है और भीगना भी नहीं है. फिर क्या छतरी वतरी तो रखते नहीं. सीमेंट वाली प्लास्टिक की बोरी को झटका. फोल्ड करके ओढ़ा और दौड़ पड़े.

3.

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बाहर निकलते ही पूरी टोली तैयार मिलती. फिर मेंढ़क वाला खेल. मिट्टी के घर और उसकी सजावट. जहां पानी इकट्ठा वहीं पैर पटकना शुरू. दौड़-दौड़ कर पूरा गांव नाप लेते. और वापस लौटते तो गर्मागर्म पकौड़े मां की डांट के साथ.

4.

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थोड़े बड़े हुए तो बारिश में गांव से दूर निकल जाते. नदी की ओर. लम्बी-लम्बी दौड़ लगाकर पानी में छलांगें लगाते. तैरते, पानी वाले खेल खेलते. नदी किनारे मौज करते. दाल-बाटी, चूरमे वाली पार्टी. गांव के दोस्तों वाली पार्टी.  बारिश के बाद वाली सारी दोपहरें तो नदी के पानी में ही गुजरती थीं.

5.

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6.

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कुल्फीवाले अब लौट रहे हैं. मौसम तो गर्म चुस्कियों का आने वाला है. तो इस मौसम की लास्ट आईसक्रीम खा ली जाए. बटर स्कॉच वाली. और कुल्फीवाले को ये भी बोल देना भईया स्कॉच ज्यादा डालना. थोड़ी गर्माहट मिल जाएगी. स्कॉच ना सही हंसने का तो बहाना मिल ही जाएगा.

7.

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बारिश में दौड़ने में बहुत मजा आता है. पर साइकिल रिक्शा की सवारी भी कम मजेदार नहीं. शहर में घूम आइये साइकिल रिक्शा पर अकेले या किसी प्यारे दोस्त के साथ, फुहारों के बीच सड़क पर यूं ही बेवजह. हाथों को बाहर निकालकर बूंदों को समेटते हुए.

8.

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अगर गांव में हों और हल्की हल्की झिरमिर बूंदें बरस रही हैं. साइकिल निकालिये और निकल पड़िये खेतों की ओर. सड़क पर आती गाड़ियों की भीड़ को पीछे छोड़ते हुए .पगडंडियों पर. तालाबों के किनारे से पानी पर पड़ती बूंदों से बनते घेरों को निहारते हुए. हरे होने को आतुर सूखे पौधों की चमक निहारते हुए.

9.

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हल्की बूंदाबादी हो रही है और ऑफिस जाना है. टैक्सी को बाय बाय कह दो. बस से जाओ. सूटकेस से सिर ढंककर थोड़ा पैदल चलना फुहारों में भीगते हुए. मन भीग जाएगा. और भीगे हुए मन को जब ताजा भीगी हुई हवा छुएगी ना तो दिल हरियल हो जायेगा.

10.

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और तब कितना बुरा लगता है. बाहर बारिश हो रही हो और बूंदें कांच की दूसरी तरफ से सरक रही होती है. ऑफिस के बाहर भीगते लोग दिखते हैं. मन करता है बाहर निकलकर नंदू के यहां अदरक वाली चाय पी आएं. पर हर कोई ऑफिस 'दी लल्लनटॉप' की तरह थोड़ी होता है. कि निकल पड़े काफिला लेकर चुस्कियां लेने.

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