एक लड़की है. बड़ौदा में रहती है. 6 साल की थी तो उसकी मां ने उसके लिए गिटार ला दियाथा. तबसे गिटार बजा रही है. गाती है तो लोग काम-धंधा छोड़कर उसका गाना सुनने लगतेहैं. मां कहती है कि वो दुनिया की बेस्ट सिंगर है. लेकिन बाप चूंकि 17 घन्टे कामकरता है और थककर रात के दो बजे आता है, इसलिए दाल में नमक कम होने पर बीवी के मुंहपर थाली फेंकना अपना अधिकार समझता है. बेटी की हिम्मत नहीं होती उसके सामने कुछबोलने की. वो अकेली कुढ़ रही होती है. सब कुछ देख रही होती है और बस इस आस में जीरही होती है कि एक दिन ये सब कुछ ठीक हो जाएगा. गाने का जूनून पीछा नहीं छोड़ता है.बुर्का पहन यूट्यूब पर वीडियो अपलोड करती है. फ़ेमस हो जाती है. फ़िल्म सीक्रेटसुपरस्टार हमारी-आपकी ज़िन्दगी में शामिल छुपे हुए सुपरस्टार्स की ही कहानी है.चेतावनी: गति सीमा में रहें. आगे तारीफ़ों के पुल हैं.मिडल क्लास यानी छोटे घर और उससे भी ज़्यादा छोटे लोग. सभी की अपनी अपनी दिक्कतें.मिडल क्लास की महिलाओं की दिक्कत - परिवार. जो हो रहा है, होने दो. उसे अपनी किस्मतसमझ झेलते जाओ. किसी एक इंसान (ज़्यादातर शौहर) पर इतना निर्भर हो जाओ कि उसकीपरछाईं से निकलना ही नामुमकिन हो जाए. अगला आपका पति नहीं बल्कि आक़ा बन जाए. और फिरवही नियम कि गीज़र ऑन करने की भूल का खामियाज़ा आपको हाथ तुड़वाकर भुगतना पड़ेगा. कोईआपके सामने तर्क पेश भी करना चाहे तो वही सवाल मुंह बाए खड़ा हो कि "कहां जाएंगेहम?" बच्चों को कहीं घुमाना भी हो तो सोते हुए पति के बटुए से पैसे चुराकर उनकीफ़रमाइश पूरी करनी पड़े या फिर गहने बेचकर लैपटॉप लाना पड़े. और बिना बात गहने बेचनेका ताप झेलना होगा सो अलग. ये सब कुछ यहां देखने को मिलता है. और सच तो ये है किहमने इन चीज़ों से आंखें मिलाई हैं. अपने आस-पास होते हुए देखा है ये सब कुछ. उसवक़्त शायद ये सब कुछ समझ में नहीं आता था. लेकिन जब इसे आप पर्दे पर घटित होता हुआदेखते हैं तो खुद को कोसने लगते हैं. बेवजह.मिडल क्लास की मांमिडल क्लास बापों की दिक्कत - मालिकाना हक़. बच्चे के नम्बर कम आये, उसका गिटार तोड़दिया. क्यूं? क्यूंकि वो बाप है. वो कुछ भी कर सकता है. वो उसे एक दिन अपनी दसवींक्लास में पढ़ने वाली लड़की को मोबाइल पर एक लड़के की तस्वीर दिखा सकता है और कह सकताहै कि वो उसकी बेटी का होने वाला शौहर है. क्यूं? क्यूंकि वो बाप है. वो कुछ भी करसकता है. वो अपनी बीवी को जब मर्ज़ी आये, तमाचे जड़ सकता है. क्यूं? क्यूंकि वो उसकेबच्चों का बाप है, उसका पति है. वो कुछ भी कर सकता है. उसके हिसाब से बच्चे कीदुनिया स्याही से सने सफ़ेद काग़ज़ों से इधर या उधर नहीं होनी चाहिए. उसे सिर्फ पढ़ाईकरनी चाहिए और दुनिया में बाकी का हर काम कूड़ा है. जो उसके हिसाब से उसके घर मेंरहने वाले हर शख्स के दिमाग में भरा हुआ है. मिडल क्लास का बाप निष्ठुर होता है. वोहाथ ऐसे छोड़ता है जैसे सामने वाले को कल का दिन ही नहीं देखने देगा. उसकी बीवी उसकेलिए गरम खाना बनाने वाली मशीन होती है और बच्चे नम्बर लाने वाले रोबोट.मिडल क्लास का बापमिडल क्लास के प्यार की दिक्कत - उलझनें. होता ये है कि मिडल क्लास के बच्चों कीसबसे पहली दोस्ती अभाव और मुसीबतों से होती है. वो उसी में इतना उलझे रहते हैं किबाकी चीज़ों के लिए वक़्त नहीं निकल पाता. बात भले ही छुटपन की हो लेकिन सब कुछ उनपरडिपेंड कर रहा होता है जिन्हें उस प्यार की भनक भी नहीं होती. इसके अपने एडवेंचर औरमज़े हैं लेकिन काफी कुछ है जो एक छुट्टी, एक ट्रांसफर, एक रिपोर्ट कार्ड की वजह सेछूट जाता है. एक झटके में सब कुछ यों ख़त्म होता है जैसे उसकी शुरुआत ही अंत के लिएहुई हो.मिडल क्लास का प्यारये सब कुछ फ़िल्म सीक्रेट सुपरस्टार में ठीक उसी तरीके से दिखाए गए हैं जैसे ये असलज़िन्दगी में मौजूद रहते हैं. कोई सजावट नहीं. कोई काट-छांट नहीं. कोई कॉम्प्रोमाइज़नहीं. ख़ालिस मिडल क्लास समस्याएं अपने सबसे कुरूप अवतार में. और यहीं सीक्रेटसुपरस्टार सब में सब नम्बर ले आती है.--------------------------------------------------------------------------------दो तरीके हैं. पहला ये कि आप एक फ़िल्म बनाइये या उसमें काम कीजिये और फिर हल्लाकाटने लगिए. एक वर्ग विशेष के स्वघोषित ध्वजवाहक बन जाइए. टीवी पर एक दो मज़ेदार शोमें आ जाइए. खुद की अदालत लगवाइये. ख़बरों में जमे रहिये. तब तक पालक खिलाते रहियेजब तक पिछवाड़े से सरिया न निकल आए. दूसरा ये कि सीक्रेट सुपरस्टार जैसा कुछ बनाइयेऔर वहां मारिये जहां सबसे ज़्यादा दर्द होता है. कि उसके बारे में कोई सोचे भी तोसिहर जाए. कि उसके ज़हन में वो सब कुछ वापस लौट आए जो उसने कहीं किसी कोने में तालालगाकर रख दिया था और न भूलते हुए भी भूल गया था.--------------------------------------------------------------------------------आमिर खान इस फ़िल्म के हीरो नहीं हैं. न ही वो लीड ऐक्टर हैं. ऐसे वक़्त में जब एकऐक्टर की मौजूदगी मात्र फ़िल्म के रिलीज़ होने से पहले ही उसे हिट फ़िल्म का तमगादिलवा देती है, आमिर को थैंक यू कहा जाना चाहिए साइड ऐक्टर बनने के लिए. आमिर खान नबने रहने के लिए. ऐक्टिंग में वो कभी कसर छोड़ते नहीं हैं बशर्ते वो 1990 में आईफ़िल्म 'तुम मेरे हो' न हो. ;) ज़ायरा वसीम. फ़िल्म में इन्सिया. इन्सिया यानी औरत.शानदार काम. ज़ायरा ने अपनी पिछली फ़िल्म में कहा था, "अब दंगल होगा." सही कहा था.दंगल इस फ़िल्म में किया है. मेहर विज. इन्सिया की मां. इनसे प्यार हो जाना तय है.नहीं हुआ तो अपने दिमाग के साथ कुछ गड़बड़ समझिये. राज अर्जुन. फ़ारुख. इन्सिया काबाप. महाखड़ूस बाप जिससे आप 2 मिनट के अन्दर नफ़रत करने लगते हैं. यहीं राज अर्जुनजीत जाते हैं. उन्हें पिछले कुछ वक़्त में बाप की बेस्ट ऐक्टिंग का अवॉर्ड दे दियाजाना चाहिए.राज अर्जुन, मेहर विज, ज़ायरा वसीम और आमिर खानफ़िल्म न्यूटन पर इंटेलेक्चुअल होने के आरोप लगे. लेकिन शायद दिवाली पर देश को सालकी सबसे बेहतरीन फ़िल्म मिल गई है. सीक्रेट सुपरस्टार. डायरेक्टर और स्क्रीनराइटरअद्वैत चन्दन का डेब्यू. कमाल का काम. फ़िल्म पूरी तरह से अपनी कहानी और इमोशन परचलती रहती है जिसके लिए अद्वैत को ढेर सारी बधाई दी जानी चाहिए. इस फ़िल्म के बादअद्वैत के ऊपर अब गज़ब का प्रेशर आने वाला है.बस एक बात जो इस फ़िल्म के साथ नहीं होनी चाहिए थी. वो ये कि इसकी शुरुआत में गोलमालकी (?)वीं किस्त का ट्रेलर आता है. शुरुआत ही गड़बड़ होती मालूम देती है. लेकिन फिरमुझे वो मिट्टी की हांडी याद आ जाती है जिसे काला पोत कर उसपर राक्षस की शकल बनाघरों के ऊपर बुरी नज़र से बचाने के लिए टांग दिया जाता है.-------------------------------------------------------------------------------- ये भी पढ़ें:SRFTI में चल रहे स्टूडेंट प्रोटेस्ट की सच्चाई ये हैपीयूष मिश्राः मुझे 'गुलाल' के गाने लिखने के लिए मंडी हाउस का शोर चाहिए थाआमिर खान पत्रकारों को जवाब कैसे देते हैं, ज़ायरा वसीम ने मिमिक्री कर के बताया