221-बी, बेकर स्ट्रीट. लंडन शहर का ये पता क्राइम फिक्शन के दीवानों को याद दिलानेकी ज़रूरत नहीं है. उनको पता है कि यहां मशहूर-ओ-मारूफ जासूस शेरलॉक होम्स रहा करताथा. इस काल्पनिक पते की ऐसी दीवानगी थी कि यहां सैकड़ों ख़त आते थे. लोग लंडन जाते तोबेकर स्ट्रीट की 221 नंबर इमारत देखने की ख्वाहिश जताते. सत्तर-अस्सी के दशक मेंऐसी ही दीवानगी मराठी जासूसी साहित्य के प्रशंसकों में भी देखी गई है. और आश्चर्यये कि यहां का जासूस कोई हाई-फाई डिटेक्टिव नहीं बल्कि एक किशोर है.शेरलॉक होम्स का पता.बनेश फेणे उर्फ़ फास्टर फेणे के गांव 'फुरसुंगी' लोग ख़ासतौर से उसका घर ढूंढते हुएजाते थे.फुरसुंगी पुणे के पास एक छोटा सा कस्बा है. सेवंटीज़ के महाराष्ट्र में फास्टर फेणेकी लोकप्रियता का आलम ही अलग था. कहने को ये बाल साहित्य था लेकिन इसको पसंदकरनेवालों में बड़ों की भरमार थी. किसी ज़माने में फास्टर फेणे को इंडिया का टिनटिनबोला जाता था. अब इस पर फिल्म आ गई है, जिसने धूम मचा रखी है.बहुत ज़्यादा पॉपुलर रही थी ये सीरीज़.क्या है कहानी?बनेश फेणे उर्फ़ फास्टर फेणे के मुकद्दर में ही लिखा है पंगे को आमंत्रित करना. वोजहां भी जाता है, कोई न कोई बवाल उसके गले आ पड़ता है. इस बार भी वो एक ऐसे सुसाइडकेस में जा उलझा है, जो सुसाइड से ज़्यादा कुछ प्रतीत होता है. नर्मदिल लेकिन ज़िद्दीबनेश केस की तह तक जाने का इरादा कर लेता है. क्योंकि आदत से मजबूर है. सवालों केजवाब हासिल करने का जो चस्का उसे लगा है, वो उसे खामोश बैठने ही नहीं देता. एककिशोर बड़े-बड़े लोगों से जा उलझता है और केस सॉल्व करके ही दम लेता है.अमेय वाघ मुख्य भूमिका में हैं.किसने लिखी है मूलरूप से?इस सीरीज के लेखक भा. रा. भागवत मराठी साहित्य का बड़ा नाम है. भास्कर रामचंद्रभागवत. बाल-साहित्य में उन्होंने ज़बरदस्त काम किया है. जासूसी साहित्य के साथ-साथविज्ञान कथाओं की दुनिया को भी समृद्ध किया. 2001 में उनकी मौत हो गई. अब उनके जानेके 16 साल बाद उनके सबसे चहेते किरदार पर फिल्म आई है. फिल्म में उनके नाम काकिरदार भी है. वेटरन एक्टर दिलीप प्रभावळकर ने उनका रोल किया है.किसने बनाई फिल्म?हिंदी सिनेमा में आंशिक सफल अभिनेता रितेश देशमुख मराठी सिनेमा के लिए बेहतरीन कामकर रहे हैं. कई अच्छी फिल्मों के निर्माण में उनका और उनकी पत्नी जेनेलिया का हाथहै. इस फिल्म को भी उन्होंने ही बनाया है. डायरेक्टर हैं आदित्य सरपोतदार जिन्होंने'नारबाची वाडी' और 'क्लासमेट्स' जैसी शानदार फ़िल्में बनाई हैं.कौन-कौन है फिल्म में?फास्टर फेणे का रोल अमेय वाघ निभा रहे हैं. वो तो शानदार हैं ही, लेकिन मराठीसिनेमा के दो अद्भुत अदाकारों पर ख़ास नज़र रहेगी. तजुर्बेकार एक्टर दिलीप प्रभावळकरने दर्जनों बार साबित किया है कि अभिनय उनकी नस-नस में भिना हुआ है. गिरीश कुलकर्णीनई पौध का वो नुमाइंदा है, जो किसी भी पिच पर सेंचुरी मारने में सिद्धहस्त हो गयाहै. इन दोनों को एक ही फिल्म में देखना ज़बरदस्त अनुभव रहेगा.ट्रेलर जब्बर है बॉस!--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:क्या दलित महिला के साथ हमबिस्तर होते वक़्त छुआछूत छुट्टी पर चला जाता है?जोगवा: वो मराठी फिल्म जो विचलित भी करती है और हिम्मत भी देती हैमहाराष्ट्र की लोककला ‘तमाशा’, जिसे अगर बच्चे देखने की ज़िद करें तो मांएं कूट देतीथींवो गाना जिसने इतिहास बनायाइन 5 किरदारों से पता चलता है कि अतुल कुलकर्णी की एक्टिंग रेंज कितनी ज़बरदस्त हैनाम से नहीं किरदार से जाने जाते हैं ये कलाकारवीडियो: इरशाद जैसे मीठे आदमी ने कैसे लिखा 'साड्डा हक' जैसा गाना