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नाम से नहीं किरदार से जाने जाते हैं ये कलाकार

हिंदी सिनेमा स्टार सेंट्रिक सिनेमा है. हीरो के इर्द-गिर्द ही घूमती है पूरी फिल्म. कोई एक बार स्टार बन जाए, उसके बाद तो उसका कूड़ा भी बिकता है. लेकिन एक कतार ऐसे लोगों की भी है, जो वाकई अभिनय करना जानते हैं. जिन्हें लोग नोटिस करते हैं. ये बात अलग है कि ज़्यादातर लोग उनका नाम नहीं जानते. फिल्म के क्रेडिट्स में उनका नाम पढ़ कर उनके ज़हन में कोई घंटी नहीं बजती. लेकिन अगर उनके किरदार की याद दिलाई जाए, तो झट से पहचान जाते हैं. आज ऐसे ही कलाकारों की बात करेंगे अपन. जिनके असल नाम से ज़्यादा जिनका स्क्रीन नेम याद रहता है.


1. मनु ऋषि

नाम से नहीं याद आएगा कुछ. बताते हैं ये कौन हैं. ‘ओए लक्की लक्की ओए’ देखी है? उसमें जो अभय देओल के साथ उनका साथी होता है, वही है मनु ऋषि. चोरियों में लक्की के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलता बंगाली. इसके अलावा आपको सरप्राइज़ हिट ‘फंस गए रे ओबामा’ भी याद ही होगी. उसमें बराक ओबामा के कोट ‘यस वी कैन’ को देशज हावभाव के साथ पेश कर के मनु ऋषि ने लोगों के पेट में बल डाल दिए थे. अन्नी नाम के किडनैपर की भूमिका में मनु सबको याद रह गए. अभिनय की सहजता उनकी खासियत रही है.

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यूं तो उनका एक्टिंग करियर 2002 में फिल्म साथिया के साथ ही शुरू हो गया था, लेकिन उन्हें पहचान ‘ओए लक्की..’ के बाद भी मिली. मनु ऋषि ना सिर्फ एक्टर हैं, बल्कि स्क्रिप्ट राइटर भी हैं. डायलॉग भी लिखते हैं. गीत भी. ‘ओए लक्की..’ के डायलॉग भी इन्होने ही लिखे थे, जिसके लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला. मनु ऋषि बेसिकली थिएटर से आते हैं. शायद यही वजह है उनके सहज अभिनय की. दिल्ली के मशहूर अस्मिता थिएटर ग्रुप के साथ वो काफी लंबे अरसे तक जुड़े रहे हैं. बहुत से मशहूर प्ले हैं, जिनमें उन्होंने काम किया. जैसे स्वदेश दीपक का ‘कोर्ट मार्शल’, धर्मवीर भारती का ‘अंधा युग’, शेक्सपीयर का ‘जूलियस सीज़र’.

इसके अलावा देसी वेब सीरीज के दीवानों ने उनको ‘परमानेंट रूममेट्स’ में भी देखा होगा.


2. राजेश शर्मा

राजेश शर्मा बरसों से फिल्मों में छोटे-मोटे रोल करते आए हैं, लेकिन उन्हें पहचान पिछले कुछ सालों से ही मिलनी शुरू हुई है. ‘स्पेशल छब्बीस’ में अक्षय और अनुपम की टीम में एक और आदमी है. जोगिंदर. वही है राजेश शर्मा. वही जो तनु वेड्स मनु रिटर्न्स में दत्तो के भाई बने हैं. हरियाणा का जाट, जो अपनी बहन की खुदमुख्तारी को प्रोटेक्ट करने के लिए सारे गांव से भिड़ जाता है. बजरंगी भाईजान का पाकिस्तानी पुलिस अफसर हामिद ख़ान भी याद ही होगा, जो सलमान को रिहा कर देता है.

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इन फिल्मों के अलावा राजेश शर्मा ने ‘खोसला का घोंसला’, ‘इश्किया’, ‘नो वन किल्ड जेसिका’, ‘बी ए पास’ जैसी फिल्मों में भी याद रखने लायक काम किया है.


3. कीर्ति कुल्हारी

इस तरह की फेहरिस्त में हालिया इज़ाफ़ा किया है कीर्ति ने. नाम से उन्हें याद करना मुश्किल होगा कई लोगों के लिए. पिछले साल आई फिल्म ‘पिंक’ याद कीजिए. उसका कोर्ट सीन याद कीजिए. वो लड़की जो कोर्ट में चीख़-चीख़ कर कहती है, “हां हमने लिए थे पैसे”. ‘फलक’ का वो आउटब्रेक ‘पिंक’ का सबसे आला सीन है. वही है कीर्ति कुल्हारी.

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कीर्ति ने अपना करियर टीवी कमर्शियल्स करते हुए शुरु किया था. फिल्मों में पहला ब्रेक उन्हें 2010 में मिला. ‘खिचड़ी’ फिल्म में. 2011 की बेहतरीन फिल्म ‘शैतान’ में भी उनका दमदार रोल था. ‘पिंक’ के बाद कीर्ति के करियर का ग्राफ तेज़ी से ऊपर जाने के चांसेस हैं.


4. आदित्य श्रीवास्तव

सच-सच बताना कितने लोगों को पता है कि सीआईडी सीरियल के ‘इंस्पेक्टर अभिजीत’ का नाम आदित्य श्रीवास्तव है? हालांकि आदित्य अब बॉलीवुड और टेलीविज़न में एस्टैबलिश हो चुके हैं, लेकिन उन्हें उनके नाम से जाना जा रहा हो, ऐसे हालात अब भी नहीं हैं.

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आदित्य ने बहुत सी हिंदी फिल्मों में काम किया है, लेकिन उनका सबसे शानदार काम है अनुराग कश्यप की फिल्म ‘ब्लैक फ्राइडे’. मुंबई बम ब्लास्ट के आरोपी बादशाह ख़ान की मानसिक उथल-पुथल को बेहद बारीकी से पेश किया था उन्होंने परदे पर. 1995 में ‘बैंडिट क्वीन’ में एक सशक्त रोल के साथ उनका सिनेमाई आगाज़ हुआ था. इसके अलावा ‘गुलाल’, ‘मातृभूमि’, ‘लक्ष्य’ जैसी फिल्मों में भी वो चमके. सीआईडी तो है ही.


5. मुहम्मद जीशान अय्यूब

कंधा बिरादरी का फ्लैग बियरर. ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्स’ में एक किरदार है. तनुजा त्रिवेदी से एकतरफा प्यार करता और उसके लिए दबंग राजा अवस्थी से भिड़ जाने वाला एडवोकेट अरुण कुमार सिंह उर्फ़ चिंटू जी. ये चिंटू जी ही मुहम्मद जीशान है. ‘रांझना’ में धनुष के दोस्त मुरारी की भूमिका में  उनके एक-एक डायलॉग आज भी मुस्कुराने पर मजबूर करते हैं.

“प्यार न हुआ यूपीएससी का एग्जाम हो गया, साला दस साल से क्लियर ही नहीं हो रहा!”

“अबे पंडित, मोहल्ले के लौंडों का प्यार अक्सर डॉक्टर और इंजीनियर उठा के ले जाते हैं.”

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जीशान नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा के प्रॉडक्ट हैं. उनके करियर की शुरुआत ‘नो वन किल्ड जेसिका’ से हुई थी जिसमें उन्होंने नेगेटिव भूमिका की थी. उसके बाद वो ‘मेरे ब्रदर की दुल्हन’ में इमरान ख़ान के बेस्ट फ्रेंड के रूप में नज़र आए. अभी हाल ही में वो किंग ख़ान के साथ ‘रईस’ में उसके पार्टनर इन क्राइम बने थे. नो डाउट, जीशान का भविष्य उज्ज्वल है.


6. विपिन शर्मा

‘गैंग्स ऑफ़ वासेपुर’ के मुरीदों को भले ही इनका नाम याद न हो, लेकिन इनका किरदार एहसान कुरैशी ज़रूर याद होगा. वही एहसान कुरैशी जिसके हाथों रामाधीर सिंह के दुश्मन का बेटा सरदार ख़ान बच निकला है. लेकिन रामाधीर के डर से उसने झूठ बोल दिया है कि मैंने उसे मार के गाड़ दिया. बाद में कई सालों बाद जब सरदार ख़ान रामाधीर सिंह की ज़िंदगी में चरस बोने लौट आता है, तो रामाधीर एहसान कुरैशी को बुलवाकर एक बहुत ही मासूम सवाल पूछता है,

“कहां गाड़े थे?”

आगे का सीन तो सबको याद ही आ गया होगा.

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विपिन शर्मा 2007 में आई ‘तारे ज़मीन पर’ से ही नोटिस में आने शुरू हो गए थे. एक डिसलेक्सिक बच्चे के पिता के रोल में बेहतरीन अदाकारी की थी विपिन ने. तबसे आज तक वो कई सारी मेनस्ट्रीम की हिंदी फिल्मों में नज़र आ चुके हैं. नाम नहीं किरदारों से पहचाने जानेवाले कलाकारों की लिस्ट में उनका नाम बहुत ऊपर है.


7. ब्रिजेन्द्र काला

‘पान सिंह तोमर’ फिल्म का वो रिपोर्टर याद है, जो इरफ़ान ख़ान का इंटरव्यू करने जाता है! वही है ब्रिजेन्द्र काला. या फिर ‘जब वी मेट’ का वो टैक्सी ड्राईवर याद कीजिए, जो करीना-शाहीद की छूटी ट्रेन पकड़वाने के लिए उसका पीछा करता है. वही है ब्रिजेन्द्र काला.

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या पीके का वो मूर्ती बेचने वाला आदमी ध्यान में लाइए जो 10, 20, 50 रुपए में भगवान बेच रहा होता है. इन छोटी-छोटी भूमिकाओं में भी ब्रिजेन्द्र काला याद रह जाते हैं.


8. कुमुद मिश्रा

‘टूटे हुए दिल से ही संगीत निकलता है.’ फिल्म ‘रॉकस्टार’ में कही गई इन पंक्तियों ने ही हरियाणा के छोरे जनार्दन जाखड़ को ‘जॉर्डन’ बनने की राह पर धकेला था. इन शब्दों को रणबीर कपूर से कहने वाला शख्स ‘खटाना’ ही कुमुद मिश्रा हैं.

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कुमुद ‘रांझना’ में सोनम कपूर के पिता बने हैं, तो जॉली LLB 2 में करप्ट पुलिस अफसर इंस्पेक्टर सिंह. एक क्यूट फिल्म ‘फिल्मिस्तान’ में तो आतंकवादी का बड़ा ही दिलकश रोल किया था उन्होंने. ‘सुलतान’, ‘एम एस धोनी’, ‘रुस्तम’, ‘एयरलिफ्ट’ जैसी बड़ी फिल्मों में उन्होंने महत्वपूर्ण रोल निभाए हैं. वो उन कलाकारों की जमात में शामिल है जिन पर बॉलीवुड भरोसा करता है.


9. अभिमन्यु सिंह

‘गुलाल’ के रणंजय सिंह रणसा का नाम लेने की देर है, आपको अभिमन्यु सिंह याद आ जाएंगे. अनुराग कश्यप के इस मास्टरपीस में ढेर सारी पावरपैक्ड परफॉरमेंसेस होने के बावजूद, अभिमन्यु सिंह याद रह जाते हैं. इस रोल के लिए उन्हें ब्रेकथ्रू परफॉरमेंस का अवॉर्ड भी मिला था.

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इसके अलावा उनकी जिस रोल में बहुत ज़्यादा तारीफ़ हुई, वो था राम गोपाल वर्मा की फिल्म रक्त-चरित्र में बुक्का रेड्डी का. निखत काज़मी ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अपने रिव्यू में उनके अभिनय की तुलना ‘दी डार्क नाईट’ के जोकर से की थी. अभिमन्यु सिंह साउथ की फिल्मों में खासे मशहूर हो रहे हैं आजकल.


10. डी. संतोष

ये नाम ज़्यादातर लोगों को एलियन ही लगेगा, जब तक की हम आपकी याददाश्त को लोबान न दे दें. 2002 में राजकुमार संतोषी ने भगत सिंह पर एक फिल्म बनाई, ‘दी लीजेंड ऑफ़ भगत सिंह’. इसमें भगत सिंह बने थे अजय देवगन, सुखदेव थे सुशांत सिंह और राजगुरु के किरदार में एक नया लड़का था. वही है डी संतोष. अपने मराठी एक्सेंट में कहे गए चुटीले संवादों से वो लोगों की नज़र में आ गए.

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उसके बाद वो कुछ अच्छी भूमिकाओं में परदे पर नज़र आते रहे. ‘ज़मीन’, ‘खाकी’, ‘दीवार’, ‘आहिस्ता-आहिस्ता’ जैसी फिल्मों में उनके शॉर्ट लेकिन स्वीट रोल रहे हैं. उनका सबसे प्यारा किरदार था ‘रॉकेट सिंह’ में रणबीर कपूर के साथी टेक्नीशियन गिरीश रेड्डी का. इस रोल के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर इन कॉमिक रोल का अवॉर्ड भी मिला था.


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