कुछ दिन पहले खबर आई थी कि विदेशों से बेशकीमती आर्ट पीस और मूर्तियां इंडिया आ रहीहैं. जो कभी चोरी हो गई थी. पर मोदी जी के पास उनको रखने की जगह नहीं है. वजह हैसिक्योरिटी. मूर्तियां महंगी हैं और ऐतिहासिक भी. एक बार गुम गई है, दोबारा कुछ हुआतो मोदी जी वापस नहीं ला पाएंगे. लंबे समय से इंडिया के कुछ मास्टर पीस दूसरे देशोंमें स्मगल किए गए हैं. सरकार इन एंटिक पीस को लाने की कोशिशें कर रही हैं. 2007 मेंअमेरिका वालों ने एक ऑपरेशन हिडन आइडल चलाया था. इस ऑपरेशन में भगवान गणेश औरबाहुबली की ब्रॉन्ज मूर्तियां मिली थीं. इसके अलावा भी कुछ मूर्तियां मिली हैं. जोइंडिया लाई गई हैं. पता ये मैजिक कब शुरू हुआ. साल 2014 में. जब ऑस्ट्रेलिया केपीएम टोनी एबॉट दो दिन के लिए इंडिया आए थे. दो परमाणु समझौते हुए. जाते-जाते एबॉटने मोदी जी को दो मूर्तियां गिफ्ट की. जो 9 सौ साल पुरानी थी. जिसे चुरा कर किसी नेऑस्ट्रेलियन आर्ट गैलरी में बेचा था. कुछ तो आ गई हैं और कुछ नंबर में लगी हैं आनेको.1. शिव नटराजनटराज की ये मूर्ति बृहदेश्वर मंदिर से चोरी हो गई थी. ये मंदिर तमिलनाडु केश्रीपुराथन गांव में हैं. यहां पर शिव की ब्रॉन्ज की मूर्ति स्थापित थी. जो 11वींसेंचुरी की थी. जिसे 2008 में एनजीए ने लगभग 40 करोड़ देकर वापस लिया था. ये मूर्तिऑस्ट्रेलिया के पीएम ने 2014 में मोदी जी को गिफ्ट किया था.2. अर्धनारीश्वरये मूर्ति 10वीं सेंचुरी की है. चोल पीरियड की. एक ही मूर्ति में शिव भी हैं औरपार्वती भी. ये तमिलनाडु के विरुधाचलम मंदिर से चोरी हो गई थी. साल 2004 में इसेन्यू साउथ वेल्स की आर्ट गैलरी ने खरीदा थी. वो भी लगभग 2 करोड़ में. ये भी गिफ्टेडहै.3. द पैरेट लेडी12वीं सेंचुरी की मूर्ति है. एक वक्त खजुराहो मंदिर की सुदंरता में चार चांद लगाताथा. बहुत ही इरोटिक था. किसी को नहीं पता ये 3 फीट की मूर्ति कनाडा पहुंची कैसे.कनाडा के उस वक्त के पीएम स्टेफेन हार्पर ने अप्रैल 2015 में इसे मोदी जी कोहैंडओवर किया था.4. दुर्गा महिषासुरमर्दिनीसाल 1991 में ये मूर्ति श्रीनगर के टेंग पोरा मंदिर से चोरी हो गई थी. कहते हैं मांदुर्गा की 10 हाथों वाली ये मूर्ति 10वीं सदी की है. इसे साल 2000 में जर्मनी केस्टुटगार्ट शहर के लिंडेन स्टेट म्यूजियम को बेचा गया था. वो भी लगभग डेढ करोड़में. पिछले साल अक्टूबर में इंडिया आई है.5. उमा परमेश्वरी11वीं सदी की चोल वंश की है ये कांसे की मूर्ति. तमिल नाडु के अरियालुर जिले मेंस्थित शिवा के पुराने मंदिर से चोरी हो गई थी. साल 2007 में सिंगापुर के एशियनसिविलाइजेशन म्यूजियम से साढे चार करोड़ में लिया गया था. पिछले साल दिसंबर मेंइंडिया आया है. 6. गणेशशिव के बेटे की ये मूर्ति हजारों साल पुरानी है. बोले तो चोल वंश की. उस टाइम केकारीगर ने गणेश जी को कांसे से बनाया था. इनके पप्पा के साथ लोग इनको भी भर ले गएथे अपने साथ. तमिलनाडु के श्रीपुराथन मंदिर से. अमरीका के टोलेडो म्यूजियम ने इसकोलगभग सवा करोड़ में खरीदा था. ये बात 2006 की है. जून 2016 में इसे अमरीका नेइंडिया को लौटाया था.ये मूर्तियां अभी आने को हैं.1. कुषाण बुद्धबुद्ध की ये मूर्ति बलुआ पत्थर से बनी है. 18 सौ साल पुरानी और 130 सेमी ऊंची. यूपीके मथुरा के एक आर्कलॉजिकल साइट से चोरी हो गई थी. 2007 में मैनहटन आर्ट स्पेशलिस्टने इसे बेच दिया था. जिसे बाद में एनजीए ने लगभग 12 करोड़ रुपये देकर अपने कब्जेमें लिया था. इस साल सितंबर तक ये मूर्ति अपने यहां आ जाएगी. आर्ट गैलरी ने इसेवापस करने का मन बनाया है.2. वर्शिपर्स ऑफ द बुद्धबुद्धा की ये मूर्ति तीसरी सेंचुरी BC से तीसरी सेंचुरी AD के बीच की है. आंध्रप्रदेश के अमरावती में से चोरी हो गई थी. 2005 में एनजीए ने लगभग 4 करोड़ में इसेअपने कब्जे में लिया था. इंडिया ने एनजीए को प्रूफ दिखाकर यकीन दिलाया कि ये हमारीधरोहर है.3. देवी प्रत्यंगिराये काली की मूर्ति है. चोल वंश की. 12वीं सेंचुरी में बनी थी. माना जाता है कि देवीकी ये मूर्ति सेना की रक्षक और उनको जीत देने वाली है. दुख-दर्द दूर कर सुख-समृद्धिप्रदान करती हैं. तमिलनाडु से ये चोरी हो गई थी. साल 2005 में एनजीए ने लगभग डेढकरोड़ में कब्जाई थी. इस साल ये मूर्ति हमारे यहां आ जाएगी.