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सपा-रालोद को समर्थन के तुरंत बाद टिकैत ने कहा, 'हम थोड़ा फ़ालतू बोल गए, यह नहीं कहना था'

यूपी चुनाव में सपा-रालोद गठबंधन के प्रत्याशी को जिताने की अपील करने के 24 घंटे बाद ही भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत (Naresh Tikait) ने यू-टर्न ले लिया है. नरेश टिकैत ने अब कहा है कि वे और उनका संगठन आगामी विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी का समर्थन नहीं करेगा.

क्या कहा है नरेश टिकैत ने?

सोमवार को मीडिया से बातचीत में BKU के राष्ट्रीय अध्यक्ष के कहा,

“हम थोड़ा फालतू बोल गए थे, हमें ऐसा नहीं कहना चाहिए था…हमारा किसी भी पार्टी के प्रत्याशी को कोई समर्थन नहीं है. क्योंकि संयुक्त किसान मोर्चा ने तय किया है कि हम किसी भी राजनीतिक दल को समर्थन नहीं देंगे. हम इसका उल्लंघन नहीं कर सकते, वरना वे हमें भी मोर्चे से अलग कर देंगे.”

हालांकि, इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक नरेश टिकैत के इस यूटर्न की वजह उनके छोटे भाई राकेश टिकैत हैं. BKU के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने नरेश के बयान के बाद किसी भी राजनीतिक दल या गठबंधन को समर्थन देने पर आपत्ति जताई थी.

नरेश टिकैत ने पहले क्या कहा था?

15 जनवरी शनिवार को मुजफ्फरनगर की बुढ़ाना सीट से सपा-रालोद गठबंधन के प्रत्याशी राजपाल बालियान नरेश टिकैत के गांव सिसौली पहुंचे थे. सिसौली के किसान भवन में राजपाल को नरेश टिकैत ने अपने हाथों से रालोद का सिम्ब्ल दिया था. इस दौरान हुई बैठक में टिकैत ने सपा-रालोद गठबंधन को अपना समर्थन देते हुए उसके प्रत्याशियों को जिताने की अपील की थी. आजतक की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस बैठक में नरेश टिकैत ने कहा था,

अच्छी तरह से इस चुनाव को लड़ो, ये आप लोगों की प्रतिष्ठा की बात है. ये (बुढ़ाना) सीट ऐतिहासिक सीट है, यह लोगों की परीक्षा की घड़ी है. गठबंधन से अलग जो कोई भी जाए, उसे किसी तरह मनाओ. इस गठबंधन को सफल बनाओ. जय हिंद-जय भारत.

केंद्रीय मंत्री ने की थी नरेश टिकैत से मुलाकात

नरेश टिकैत के सपा-रालोद गठबंधन को समर्थन देने के ऐलान के बाद 17 जनवरी सोमवार की सुबह केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान (Sanjeev Balyan) ने उनसे मुलाकात की थी. दोनों की साथ में बैठे हुए फोटो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुईं. इस मुलाकात को लेकर कहा गया कि संजीव बालियान चुनाव में समर्थन मांगने के लिए नरेश टिकैत से मिले हैं. हालांकि, नरेश टिकैत ने इस मुलाकात को लेकर कहा कि हाल ही उनके कंधे की सर्जरी हुई है, इसलिए संजीव बालियान उनका हाल जानने आए थे.

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संजीव बालियान (बाएं) नरेश टिकैत (बीच में) से मिलने पहुंचे थे (फोटो: आजतक)

क्या वाकई SKM का डर है?

नरेश टिकैत ने मीडिया से कहा कि अगर उनके संगठन भारतीय किसान मोर्चा (BKU) ने किसी राजनीतिक दल को सपोर्ट किया तो संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) उनसे नाता तोड़ लेगा. नरेश टिकैत का ये डर लाजमी है, क्योंकि बीते शनिवार को पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ने वाले किसान संगठनों को संयुक्त किसान मोर्चा से अलग कर दिया गया. केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन की अगुवाई करने वाले इस मोर्चे के नेता युद्धवीर सिंह ने बताया,

“संयुक्त किसान मोर्चा पंजाब में चुनाव लड़ रहे किसान संगठनों से सहमत नहीं है और वे अब मोर्चे का हिस्सा नहीं होंगे…हम आगामी दिनों में संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में उनके साथ अपने संबंधों के बारे में फैसला करेंगे.”

गुरनाम सिंह चढूनी और बलबीर सिंह राजेवाल लड़ रहे हैं चुनाव

संयुक्त किसान मोर्चा ने दिल्ली की सीमाओं पर साल भर से ज्यादा समय तक कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन किया था. मोर्चे में किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी और बलबीर सिंह राजेवाल की भूमिका भी काफी अहम थी. लेकिन अब इन दोनों ने पंजाब में चुनावी मुकाबले में उतरने की घोषणा की है. चढूनी ने अपनी राजनीतिक पार्टी बनाई है. जबकि बलबीर सिंह राजेवाल कई किसान संगठनों का ‘संयुक्त समाज मोर्चा’ बनाकर चुनाव मैदान में हैं.


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