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गुजरात: जब बीजेपी सांसद के घर में टिकट को लेकर हुआ सास-बहू का झगड़ा

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सास और बहू के रिश्ते तो जगजाहिर हैं. जिनको नहीं पता था, उनको सास-बहू वाले टीवी सीरियलों ने बता दिया है. घर में उनके बीच कैसी तल्खी होती है, अगर नहीं पता तो क्योंकि सास भी कभी बहू थी, कहानी घर-घर की, कसौटी जिंदगी की और ऐसे टीवी सीरियलों को यू-ट्यूब पर सर्च करो और देखो. अगर इससे भी बचना चाहते तो एक आसान सा उपाय बताते हैं. इसी साल मार्च में यूपी में विधानसभा चुनाव बीते हैं. वहां के कुछ नेताओं की पत्नियों और उनके बहुओं की कहानी देख लीजिए. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली के हरचंदपुर सीट पर बीजेपी के विधायक थे शिवगणेश लोधी. उनका देहांत हुआ तो पार्टी ने उनकी बहू को टिकट दे दिया. अब सास तो सास ठहरी, उसने निर्दलीय ही बहू के खिलाफ पर्चा दाखिल कर दिया. यूपी में ऐसे कई मामले सामने आए थे.

लेकिन चुनाव तो गुजरात में है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी तक गुजरात के दौरे कर रहे हैं. ऐसे में यूपी के चुनाव के चुनाव के जिक्र की क्या ज़रूरत है? तो छोड़िए यूपी को, आपको गुजरात का ही वाकया बता देते हैं.

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प्रभात सिंह चौहान ने अपनी पत्नी रंगेश्वरी के लिए टिकट मांगा था.

गुजरात में लोकसभा की एक सीट है पंचमहल. वहां से बीजेपी के सांसद हैं प्रभात सिंह चौहान. गुजरात चुनाव के लिए कलोल सीट से अपनी पत्नी रंगेश्वरी के लिए टिकट चाहते थे. पार्टी उनकी पत्नी को टिकट नहीं देना चाहती थी. इससे प्रभात सिंह चौहान नाराज़ भी हो गए थे. पार्टी छोड़ने तक की धमकी दी थी. पत्नी को निर्दलीय चुनाव लड़ाने का एेलान कर दिया था. अपनों की बगावत झेल रही बीजेपी एक और बगावत झेलने के मूड में नहीं थी, लेकिन प्रभात सिंह चौहान की पत्नी को टिकट भी नहीं देना चाहती थी. फिर निकला बीच का रास्ता और पार्टी ने प्रभात सिंह चौहान की बहू सुमन चौहान को टिकट दे दिया. इससे प्रभात सिंह चौहान और पार्टी के बीच का तो विवाद थम गया, लेकिन घर में नया विवाद शुरू हो गया.

टिकट पाने की उम्मीद में लगीं रंगेश्वरी को जब पता चला कि टिकट उन्हें नहीं, उनकी बहू सुमन को मिला है तो उन्होंने बगावत कर दी. फेसबुक पर पोस्ट लिखकर उन्होंने पति और बहू दोनों को ही खुलेआम धमकी दे दी. रंगेश्वरी ने लिखा-

“अब देखती हूं, बहू प्रचार कैसे करने जाती है. मैं उसे घर के बाहर कदम भी नहीं रखने दूंगी.”

अपने पति और बीजेपी सांसद प्रभात सिंह चौहान को भी रंगेश्वरी ने धमकी देते हुए कहा-

“अगर प्रभात सिंह ने अपनी मां का दूध पिया है तो कलोल में चुनाव प्रचार के लिए आकर दिखाएं. ये मेरा चैलेंज है.”

रंगेश्वरी की नाराज़गी से हो रहे नुकसान को देखते हुए पार्टी ने उन्हें मनाने की कोशिश की. इसके बाद रंगेश्वरी ने अपना फेसबुक पोस्ट डिलीट कर दिया और कहा कि वो बीजेपी और प्रधानमंत्री मोदी के लिए काम करती रहेंगी.

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टिकट न मिलने पर प्रभात सिंह ने पार्टी छोड़ने और निर्दलीय चुनाव लड़ने की धमकी दी थी.

असल में रंगेश्वरी का ये गुस्सा पार्टी पर कम और परिवार पर ज्यादा है. सुमन प्रभात सिंह के बेटे प्रवीन सिंह की पत्नी हैं. प्रवीन सिंह प्रभात सिंह की पहली पत्नी रानीबेन के बेटे हैं, जिनका पांच साल पहले देहांत हो गया था. चार साल पहले प्रभात सिंह ने रंगेश्वरी से शादी कर ली थी. प्रवीन सिंह ने मीडिया से कहा कि उन्हें खुशी है कि उनकी पत्नी को बीजेपी ने टिकट दिया है. प्रवीन सिंह ने ये भी साफ तौर पर कहा है कि रंगेश्वरी उनकी मां नहीं हैं और उन्हें वो मां नहीं मानते हैं.

रंगेश्वरी ने फेसबुक पर प्रवीन सिंह पर आरोप लगाया है कि प्रवीन सिंह शराबबंदी वाले राज्य में अवैध तरीके से शराब बेचता है. प्रवीन सिंह 2012 में गोधरा से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े थे, लेकिन हार गए थे. इसके बाद दिसंबर 2016 में प्रवीन सिंह कांग्रेस में शामिल हो गए. इस साल प्रवीन सिंह और उनकी पत्नी सुमन ने बीजेपी जॉइन की थी, जिसके बाद बीजेपी ने सुमन को टिकट दिया है. अप्रैल 2017 में ही गुजरात पुलिस ने प्रवीन सिंह को आईपीएल में सट्टेबाजी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था.

बेटे के खिलाफ उतरे प्रभात सिंह

टिकट को लेकर पत्नी रंगेश्वरी की नाराजगी झेल रहे प्रभात सिंह ने पहले तो ये कहकर अपना बचाव किया था कि पार्टी का टिकट तो घर में ही है. लेकिन 25 नवंबर की शाम होते-होते वो भी अपनी पत्नी के पक्ष में आ गए. अपनी बहू को टिकट देने का विरोध करते हुए प्रभात सिंह ने बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह को एक पत्र लिखा. पत्र का मजमून कुछ यूं था-

 

“मेरा बेटा प्रवीन अपनी पत्नी सुमन के साथ जेल भी जा चुका है. हाल ही में गोधरा से जो 300 बॉक्स दारू पकड़ी गई थी वो भी मेरे बेटे की थी. ऐसे में उसे इस कालोल सीट से विधानसभा के लिए टिकट ना दिया जाए.  जब 2007 के विधानसभा चुनाव में प्रवीन निर्दलीय खड़ा हुआ था तो खुद उस वक्त के मुख्यमंंत्री और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कहने पर उसे हराने के लिए मैंने यहां एक बड़ी जनसभा की थी.”

प्रभात सिंह ने पत्र में गोधरा से बीजेपी उम्मीदवार और राज्यसभा चुनाव के वक्त बीजेपी जॉइन करने वाले सीके राउलजी का जिक्र करते हुए लिखा है

“जब उन्हें लगा था कि वो बीजेपी में हार जाएंगे, तो मेरे बेटे को लेकर कांग्रेस में चले गए. जब राज्यसभा चुनाव के वक्त वो खुद बीजेपी में आए उसके साथ मेरे बेटे प्रवीन को भी बीजेपी में लेकर आ गए.”

इस चुनाव का नतीजा चाहे कुछ भी हो, लेकिन एक बात तो तय है कि अब ये लड़ाई पार्टी से ऊपर उठकर बाप-बेटे और सास-बहु के बीच की हो गई है, जिसमें नुकसान जनता का ही होना है.


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