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अमित शाह के इरादों पर पानी फेरने वाला आदमी चुनाव जीत गया है

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विधानसभाः झगड़िया (भरूच)

भारतीय ट्रायबल पार्टी 48,948 वोटों से जीती.

भारतीय ट्रायबल पार्टी के छोटू वसावा कोः 1,13,854 वोट

बीजेपी के रवजीभाई वसावा कोः 64,906 वोट

जनता दल (यूनाइटेड) के छोटू वसावा कोः 5,055 वोट

गुजरात के सबसे बड़े आदिवासी नेता छोटू वसावा की सीट है ये. राज्यसभा चुनाव के समय उन्होंने अपनी पार्टी JD (U) से बगावत करके कांग्रेस के अहमद पटेल को वोट दिया था. वसावा शरद यादव खेमे के हैं. चुनाव लड़ने के लिए ‘भारतीय ट्रायबल पार्टी’ नाम से अपनी पार्टी बनाई. कांग्रेस के साथ हुए समझौते के तहत उनकी पार्टी को पांच सीटें मिलीं. इन सीटों पर कांग्रेस ने उन्हें समर्थन दिया. छोटू वसावा का ये 7वां चुनाव था. 2002 के अलावा बाकी सारे चुनावों में वो जीते. वो छठी बार भी जीत गए.

वसावा का कद बड़ा है, लेकिन जिस तरह जिग्नेश मेवानी दलित नेता और हार्दिक पाटीदार नेता के तौर पर उभरे हैं, वैसा दर्जा नहीं है फिलहाल उनका. उनकी पुरानी पार्टी JD (U) ने मुकाबले को दिलचस्प बनाते हुए उनके खिलाफ उनकी ही नाम वाला उम्मीदवार खड़ा किया. तो मुकाबला हो गया था छोटू वसावा बनाम छोटू वसावा. वैसे वोटर्स को उलझाने का JD (U) का दांव कामयाब नहीं हुआ. हालांकि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि इतने लंबे समय तक विधायक रहने के बाद भी छोटू वसावा अपने इलाके के विकास के लिए ज्यादा कुछ नहीं कर सके.

ये हैं बीजेपी के प्रत्याशी रावजी वसावा.
बीजेपी के प्रत्याशी रावजी वसावा.

क्यों जीती भारतीय ट्रायबल पार्टी?
1. आदिवासी समाज के सबसे बड़े नेता छोटू वसावा का असर.
2. कांग्रेस ने समर्थन दिया, तो वोट भी नहीं कटे.
3. बीजेपी वसावा को ठीक से काउंटर नहीं कर सकी.

क्यों हारी बीजेपी?
1. छोटू वसावा की काट नहीं खोज सकी बीजेपी.
2. झगड़िया के पिछड़ेपन को मुद्दा बनाने में भी नाकाम रही पार्टी.


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