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बोटाद, जहां आपसी खींचतान से परेशान है बीजेपी के बड़े नेता!

गुजरात चुनाव-2017 के दौरान हम बता रहे हैं अलग-अलग विधानसभाओं के हाल, वहां का जीवन और ऐसी कहानियां जो कम ही जानने में आती हैं.

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गुजरात में सौराष्ट्र का इलाका है. वहां पर भावनगर और अहमदाबाद जिले के कुछ हिस्सों को अलग कर एक नया जिला बनाया गया. नाम रखा गया बोटाद. नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तो उन्होंने 15 अगस्त 2013 को विवेकानंद विकास यात्रा के दौरान इस जिले के बनने की घोषणा की थी. उस वक्त दो तहसीलें भावनगर से और दो तहसीलें अहमदाबाद से निकाली गईं और चार तहसीलों का एक जिला बनाया गया. चार तहसीलें हैं बोटाद, गधदा, बरवाला और रनपुर. गुजरात में गधदा स्वामीनारायण मंदिर और सालंगपुर हनुमान मंदिर के लिए ख्यात इस जिले में दो विधानसभाएं हैं. गधदा और बोटाद.

बोटाद, जहां हार्दिक ने किया था कांग्रेस प्रत्याशी का विरोध

Saurabh Vs DM
सौरभ पटेल (बाएं) बीजेेपी से, जबकि डीएम पटेल कांग्रेस से उम्मीदवार हैं.

बोटाद में 2012 में चुनाव हुए तो बीजेपी के ठकरसीभाई मनिया ने कांग्रेस के कुंवरजी भाई बवालिया को 10, 000 वोटों से हराकर चुनाव जीत लिया था. इससे पहले 2007 के चुनाव में ये सीट कांग्रेस के पास थी और उस वक्त पंकज राठौड़ इस सीट से चुनाव जीते थे. बीजेपी इस सीट को हर हाल में जीतना चाहती है, इसलिए बीजेपी ने अकोटा के विधायक रहे सौरभ भाई पटेल को बोटाद से उम्मीदवार बना दिया. कांग्रेस ने एनसीपी छोड़कर पार्टी में शामिल हुए मनहर पटेल को चुनावी मैदान में उतार दिया. इसके बाद पाटीदार संगठन ने कांग्रेस का विरोध कर दिया. पाटीदार नेता किसी कीमत पर मनहर पटेल को उम्मीदवार नहीं बनाना चाहते थे. इसे देखते हुए हार्दिक पटेल ने 21 नवंबर को होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस भी टाल दी. विरोध को देखते हुए कांग्रेस ने अंतिम वक्त में अपना उम्मीदवार बदल दिया. अब इस सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी डीएम पटेल हैं.

गधदा (एससी), जहां दो बार से जीत रही है बीजेपी

Atmaram Vs Pravin
बीजेपी से लगातार दो बार के विधायक आत्माराम (बाएं) के सामने कांग्रेस के प्रवीन मारू हैं.

गधदा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है. यहां से बीजेपी के आत्माराम परमार ने 2012 में कांग्रेस के प्रवीन मारू से लगभग 9 हजार वोटों से चुनाव जीत लिया था. 2007 में भी आत्माराम ही विधायक बने थे और उस वक्त भी उनके सामने प्रवीन मारू ही थे. आत्माराम 1995 और 1998 में भी विधायक रह चुके हैं. 2002 में जब चुनाव हुए थे तो प्रवीन मारू ने आत्माराम परमार से सीट छीन ली थी. अब 2017 में जब फिर से चुनाव होने जा रहा है, तो कांग्रेस ने एक बार फिर से प्रवीन मारू को ही उम्मीदवार बनाया है.

बोटाद जिले की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार खेती है, लेकिन हीरों की कटाई, रियल एस्टेट का कारोबार और कपास की प्रोसेसिंग-पैकिंग के काम में भी लोग लगे हुए हैं. इसके अलावा स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी काम हो रहा है. जिले का मुख्य व्यापार कपास, गुड़, राधनपुरी घी के साथ ही अहमदाबाद और जामनगर से आने वाला सिल्क का है. ये सिल्क प्लेन और नक्काशीदार दोनों ही होता है.

बोटाद अपने हीरों के लिए मशहूर है.
बोटाद अपने हीरों के लिए मशहूर है.

राजनीति के लिहाज से बोटाद जिला बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण रहा है. इस जिले के बनने की घोषणा खुद प्रधानमंत्री और तब के गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी. बोटाद की दोनों सीटों पर बीजेपी के काबिज होने के बाद भी पार्टी को मई 2017 में हुए स्थानीय एग्रिकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमिटी (APMC) के चुनाव में हार मिली. हार के बाद बीजेपी में आपसी खींचतान भी सामने आई थी और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच हाथापाई हो गई. बोटाद जिले के मार्केटिंग यार्ड के चेयरमैन भीखा भाई को उनकी ही पार्टी के एक सदस्य अजित वाला ने बीजेपी कार्यकर्ताओं के सामने ही थप्पड़ मार दिया था. ये हार बीजेपी के लिए इसलिए भी बड़ा झटका थी, क्योंकि एपीएमसी पर पिछले 15 सालों से बीजेपी का कब्जा था.

Modi Sauni
पीएम मोदी ने अप्रैल 2017 में सिंचाई योजना की शुरुआत की थी.

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बोटाद में 17 अप्रैल को ही सिंचाई परियोजना सौवानी की शुरुआत की थी. मोदी ने जिले में सौराष्ट्र नर्मदा अवतरण इरिगेशन (SAUNI) योजना की शुरुआत की थी, तो पार्टी को एएमपीसी चुनाव में जीत हासिल करने की उम्मीद थी. हार के बाद बीजेपी की कलह और पाटीदार आंदोलन के वक्त बोटाद में हुए प्रदर्शन बीजेपी को नुकसान पहुंचा सकते हैं.


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