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मिलिए दिल्ली में आम आदमी पार्टी की बंपर जीत के पांच नायकों से

अरविंद केजरीवाल ने वो कर दिखाया जो इससे पहले दिल्ली में सिर्फ शीला दीक्षित ने किया था. केजरीवाल तीसरी बार सीएम बनने जा रहे हैं. 2013 में कांग्रेस के साथ मिलकर 49 दिनों की सरकार चलाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगा. फिर 2015 में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की 70 में से 67 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया. पांच साल बाद एक बार फिर 11 फरवरी, 2020 को आम आदमी पार्टी ने बड़ी जीत हासिल की है. इस जीत के बाद केजरीवाल ने ट्वीट किया,

अपने बेटे को इतना प्यार देने के लिए दिल्लीवासियों का तहे दिल से शुक्रिया. आज दिल्लीवालों ने एक नई राजनीति को जन्म दिया “काम की राजनीति”. ये भारत माता की जीत है. जय हिंद.

आम आदमी पार्टी की इस जीत के कई नायक हैं. एक छोटे से कार्यकर्ता से लेकर टीवी और सोशल मीडिया पर दिखने वाले चेहरों तक. मिलिए इस जीत के पांच सबसे बड़े नायकों से.

अंकित लाल-सोशल मीडिया हेड

यह चुनाव मीडिया से ज्यादा सोशल मीडिया पर लड़ा गया. और आम आदमी पार्टी की ओर से ये कमान संभाली अंकित लाल ने. अंकित आंदोलन के समय से ही केजरीवाल से जुड़े रहे हैं. दी लल्लनटॉप ने उनसे फोन पर बात की. ये जानने के लिए उन्होंने सोशल मीडिया पर बीजेपी का सामना कैसे किया. क्या रणनीति बनाई जिससे पार्टी को इतनी बड़ी जीत मिली? अंकित ने बताया कि हर साल ढेड़ साल में सोशल मीडिया का स्वरूप बदल जाता है. जो चीज 2013 में की वो 2015 में काम नहीं आई. जो 2015 में की वो 2017 में काम नहीं आई. और 2017 की की रणनीति 2020 में काम नहीं आई.


आम आदमी पार्टी ने 2017 में ही ये तय कर लिया था कि चुनाव काम पर ही लड़ना है. अंकित बताते हैं कि 2017 में ही तय कर लिया गया था कि कैंपेन विकास पर आधारित होगा. उस समय तक दिल्ली के एजुकेशन और हेल्थ मॉडल के बारे में बात होने लगी थी. सोशल मीडिया पर इसकी शुरुआत फोटो से हुई. मोहल्ला क्लीनिक और स्कूलों के फोटो आने लगे. लोग उसके बारे में बात करने लगे. हालांकि 2020 आते-आते चीजें बदलीं और हमें फोटो से वीडियो की तरफ शिफ्ट होना पड़ा.

इस चुनाव में आम आदमी पार्टी के मीम्स, फोटो और वीडियो की खूब चर्चा हुई. इसके पीछे एक लंबी चौड़ी टीम थी. कैंपेन तय करने वाली कोर टीम में 20 से 25 लोग थे. इसके बाद 200 लोगों की टीम थी जो इंडिया के बाहर भी फैली हुई थी. इसके अलावा 7000 लोग वॉलिटिंयर्स के तौर पर जुड़े थे. आम आदमी पार्टी सोशल मीडिया पर बीजेपी के ट्रैप में फंसे बिना अपना काम कर गई. और दिल्ली में केजरीवाल को इतनी बड़ी जीत मिली.

जैस्मिन शाह

जैस्मिन शाह चुनावों की घोषणा से पहले ही दिल्ली सरकार में Dialogue and Development Commission of Delhi (DDCD) के वॉइस चेयरमैन बनाए गए थे. पिछले छह महीने में दिल्ली सरकार में जितनी पॉलिसी बनी हैं उसमें जैस्मिन शाह की बड़ी भूमिका रही. ये पॉलिसी कैसे लागू होगी. कैसे इसे पब्लिक के बीच में रखा जाएगा. चाहे वो डोर स्टेप डिलीवरी हो या अन्य योजनाएं. चुनाव की घोषणा से पहले ही पॉलिटिकल स्ट्रेटजी बनाने में इनकी भूमिका होती थी. राजनीतिक फैसले क्या लेने हैं? आम आदमी पार्टी को लेकर मीडिया में क्या चल रहा है? उसकी मॉनिटरिंग करना और फिर रणनीति बनाना. ये सब शाह का काम था. आम आदमी पार्टी के लिए जो घोषणा पत्र तैयार हुआ था उसमें भी जैस्मिन शाह ने मुख्य भूमिका निभाई थी.

संजय सिंह

राज्यसभा सांसद और आम आदमी पार्टी के प्रभारी. जिनके हाथों में दिल्ली के चुनाव की कमान थी. उन्हें शो रनर कह सकते हैं. जिन्होंने दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी का मैनेजमेंट अपने हाथों में रखा. और उसे अंजाम तक पहुंचाया. एक तरह से उन्हें आम आदमी पार्टी का चाणक्य कह सकते हैं. चुनाव के दौरान विपक्ष की रणनीति पर कैसे प्रहार करना है. बीजेपी की तरफ से आए बयानों का जवाब संजय सिंह देते थे. आम आदमी पार्टी में सबसे पहले रिक्शन देने वाले नेता संजय सिंह ही थे. हर मुद्दे पर खुलकर बोलते थे. पार्टी के बड़े नेताओं के लिए ढाल बनकर चलते थे.

मनीष सिसोदिया

आम आदमी पार्टी में नेतृत्व का चेहरा. कुशल प्रबंधक. दिल्ली के स्कूलों में रिफॉर्म लाने का श्रेय उन्हीं को जाता है. मीडिया और सोशल मीडिया में दिल्ली के स्कूलों की जो ग्लोरियस तस्वीरें सामने आईं उसके पीछे मनीष सिसोदिया ही थे. सीएम अरविंद केजरीवाल की अनुपस्थिति में आम आदमी पार्टी और सरकार दोनों का चेहरा बने. जब केजरीवाल पंजाब चुनाव में व्यस्त थे तो मनीष सिसोदिया सरकार और पार्टी दोनों की कमान संभाली थी. मीडिया में आम आदमी पार्टी की बात रखनी हो, सरकार की बात रखनी हो सिसोदिया को ही आगे कर दिया जाता था.  सरकार की योजनाओं का ऐलान करना हो. आम आदमी पार्टी की बात रखनी हो सिसोदिया ही मीडिया के सामने आते थे.

अरविंद केजरीवाल

आम आदमी पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा. इस चुनाव में केजरीवाल के नाम पर वोट पड़े. अगर ये कहें कि 70 सीटों पर केजरीवाल लड़ रहे थे तो गलत नहीं होगा. लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी की तरह दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी ने अरविंद केजरीवाल को एक चेहरे के रूप में प्रोजेक्ट किया. एक ऐसा चेहरा जिसके सामने बीजेपी कोई नेता नहीं उतार पाई. आम आदमी पार्टी ने केजरीवाल वर्सेज WHO के नैरेटिव पर चुनाव लड़ा. सीएम अरविंद केजरीवाल ने जमकर चुनाव प्रचार किया. रणनीति बनाई और उसे अंजाम तक पहुंचाया. आम आदमी पार्टी के विधायकों के काम से नाराज होने के बाद भी लोगों ने AAP को वोट दिया तो इसके पीछे वजह केजरीवाल ही थे. ये जीत कई मायनों में केजरीवाल की जीत है. दिल्ली की जनता ने केजरीवाल के चेहरे पर भरोसा जताया और आम आदमी पार्टी को एक बार फिर दिल्ली की सत्ता सौंप दी.


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