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नतीजों से पहले बीजेपी से 15 करोड़ का ऑफर मिलने की बात करने वाले मुकेश अहलावत का क्या हुआ?

Mukesh Ahlawat Election Result: ये विवाद अहलावत तक ही सीमित नहीं था. Arvind Kejriwal ने भी इसे हवा दी थी. उन्होंने एक X पोस्ट के जरिए दावा किया था कि उनके 16 उम्मीदवारों को फोन आए थे, और भाजपा में शामिल होने के बदले 15-15 करोड़ रुपये और मंत्री पद के ऑफर दिए गए.

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8 फ़रवरी 2025 (अपडेटेड: 8 फ़रवरी 2025, 05:18 PM IST)
Mukesh Ahlawat and Arvind Kejriwal
मुकेश अहलावत ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए थे. (तस्वीर: इंडिया टुडे/PTI)
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आम आदमी पार्टी के विधायक मुकेश अहलावत (Mukesh Ahlawat), पिछले दिनों अचानक से चर्चा में आ गए. दरअसल, उन्होंने चुनाव के नतीजों से कुछ दिनों पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर AAP उम्मीदवारों की खरीद-फरोख्त के आरोप लगाए थे. अहलावत सुल्तानपुर माजरा की सीट से चुनावी मुकाबले में थे. चुनाव आयोग के अनुसार, यहां सभी 15 राउंड की गिनती हो गई है. अहलावत को इस सीट पर 17126 वोटों से जीत मिली है.

मुकेश अहलावत को कुल 58767 वोट मिले हैं. BJP उम्मीदवार करम सिंह कर्मा 41641 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर हैं. कांग्रेस उम्मीदवार जय किशन को मात्र 8688 वोट मिले हैं.

"15 करोड़ रुपये और मंत्री पद का ऑफर"

अहलावत ने एक नंबर साझा किया और दावा किया कि इसी नंबर से उनको फोन किया गया था. और भाजपा में शामिल होने के बदले करोड़ो रुपये और मंत्री पद का ऑफर दिया गया था. इंडिया टुडे ग्रुप ने उस नंबर पर संपर्क किया था. शख्स ने बताया कि उसका नाम नरेश राणा है और वो सुल्तानपुर माजरा का ही रहने वाला है. उसने कहा कि मुकेश अहलावत उनके विधायक हैं. उन्होंने कहा कि उनके मोबाइल पर विधायक अहलावत के दो मिस्ड कॉल थे, इसलिए उन्होंने वापस फोन किया था.

उन्होंने वादा किया कि वो मिस्ड कॉल के सबूत के लिए स्क्रीनशॉट भेजेंगे. लेकिन बाद में उनसे संपर्क नहीं हो सका.

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Arvind Kejriwal ने विवाद बढ़ाया

ये विवाद अहलावत तक ही सीमित नहीं था. AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी इसे हवा दी थी. उन्होंने एक X पोस्ट के जरिए दावा किया था कि उनके 16 उम्मीदवारों को फोन आए थे, और भाजपा में शामिल होने के बदले 15-15 करोड़ रुपये और मंत्री पद के ऑफर दिए गए. उन्होंने एग्जिट पोल्स को भी निशाना बनाया. उन्होंने लिखा,

अगर इनकी पार्टी की 55 से ज्यादा सीटें आ रहीं हैं तो हमारे उम्मीदवारों को फोन करने की क्या जरूरत है? जाहिर तौर पर ये फर्जी सर्वे (एग्जिट पोल्स) करवाए ही इसलिए गए हैं ताकि ये माहौल बनाकर कुछ उम्मीदवारों को तोड़ा जा सके. पर हमारा एक भी आदमी नहीं टूटेगा.

दरअसल, 10 प्रमुख एग्जिट पोल्स में से 8 में केजरीवाल की पार्टी की हार की भविष्यवाणी की गई थी. केजरीवाल इस बात से नाराज नजर आए थे. इस चुनाव में अधिकतर एग्जिट पोल्स के अनुमान सही साबित हुए हैं. 

केजरीवाल के साथ कुछ अन्य AAP नेताओं ने जब ऐसे ही आरोप लगाए, तो दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इस मामले की जांच के आदेश दे दिए. उन्होंने एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की तीन टीमों का गठन कर दिया. इसके बाद ACB की टीम केजरीवाल के घर पहुंची. इसके बाद AAP नेताओं ने हंगामा किया और ACB की टीम पूछताछ नहीं कर सकी.

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