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IIT जोधपुर का ने कौन सा नया MTech-Phd डुअल डिग्री प्रोग्राम लॉन्च किया है?

MTech प्रोग्राम स्टूडेंट्स को नये जमाने के IoT सिस्टम डिजाइन करने में ट्रेन करेगा.

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10 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 10 अगस्त 2022, 08:28 PM IST)
IIT Jodhpur
Phd-MTech डुअल डिग्री कोर्स में आखरी के 2 साल रिसर्च के लिये होंगे (फोटो- )
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IIT जोधपुर. देश में BTech की पढ़ाई के लिये टॉप कॉलेज में से एक. IIT जोधपुर ने हाल ही में MTech और Phd डुअल डिग्री के नये प्रोग्राम लांच किया है. ये प्रोग्राम सेंसर और इंटरनेट ऑफ थिंग्स(Sensor and IOT) की फील्ड में होगा. इंस्टिट्यूट की वेबसाइट के अनुसार ये प्रोग्राम स्किल्ड ग्रेजुएट्स तैयार करेगा जिन्हें सेंसर और IOT की समझ होगी.  

Sensor and IOT प्रोग्राम क्या है?

सेंसर और इंटरनेट ऑफ थिंग्स(Sensor and IOT,sIoT) में MTech प्रोग्राम स्टूडेंट्स को नये जमाने के सिस्टम डिजाइन करने में ट्रेन करेगा. यहां सेंसर और इंटरनेट ऑफ थिंग्स का मतलब क्या है, ये समझते हैं. उदाहरण के तौर पर जब हम ऑफिस से अपने घर पहुचते हैं और घर में घुसते ही एक कमांड पे सारी लाइट ऑन हो जाती हैं. जब आप कमरे में घुसते हैं तो एसी और टीवी भी चलने लगता है. इसके बाद जब आप फ्रेश होने के लिये वॉशरूम में जाते हैं तो गीजर में पानी आपके मुताबिक गर्म या थंडा मिलता है. इस पूरे प्रोसेस को sIoT कहा जाता है.

 ये प्रोग्राम ग्रेजुएट्स को स्मार्ट एग्रीकल्चर, ट्रांस्पोरटेशन, हेल्थकेयर, स्मार्ट वियरेबल जैसे डोमेन के लिये तैयार करेगा. वहीं MTech-Phd डुअल डिग्री प्रोग्राम का पहले दो साल का कोर्स MTech प्रोग्राम की तरह ही होगा. हालांकि, डुअल डिग्री प्रोग्राम नये तरह से डिजाइन किया गया है. प्रोग्राम BTech और MSc करने वाले स्टूडेंट्स को sIoT में Phd करने के लिये बढ़ावा देने के लिये डियाइन किया है.

ये प्रोग्राम स्टूडेंट्स की थ्योरिटिकल लर्निंग को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्रैक्टिकल समझ भी बढ़ायेगा. इसमें थ्योरी और लैब कोर्सेज दोनों ही कराये जायेंगे. प्रोग्राम में लाइव प्रोजेक्ट्स और एक्सपेरिमेंट भी शामिल होंगे. Phd-MTech डुअल डिग्री कोर्स में आखिरी के 2 साल रिसर्च के लिये होंगे.  

ये प्रोग्राम स्टूडेंट्स से मल्टीडिसिप्लेनरी अप्रोच की डिमांड करता है. प्रोग्राम में स्टूडेंट्स IoT सिस्टम के डिजाइन, डेवलपमेंट और इमप्लिमेंटेशन के बारे में सीखते हैं. इसके अलावा प्रोग्राम ये डिमांड करता है की स्टूडेंट्स हाई क्वालिटी एकेडमिक रिसर्च और इंडस्ट्रियल रिसर्च में स्किल्ड हों.

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