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खालिस्तानी आतंकी कीपा सिंह का भारत के हत्थे चढ़ना इतना जरूरी क्यों है?

भारत के कई बड़े नेताओं की हत्या की साजिश रचने के आरोपी कुलदीप सिंह को यूके की एक अदालत से बड़ी राहत मिली है. सोमवार 2 मार्च को वेस्टमिनिस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट ने भारत की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कुलदीप सिंह के प्रत्यर्पण की अपील की गई थी. कुलदीप सिंह भारत का रहने वाला है. लेकिन अब ब्रिटेन में ही रहता है. बताया जाता है कि भारतीय एजेंसियों ने उस पर नजर बनाई हुई है. वह देश के बाहर रहते हुए खालिस्तान के समर्थन में आंदोलन चला रहा है. आइए आपको इसकी कुंडली बताते हैं.

कुलदीप सिंह उर्फ कीपा

कुलदीप सिंह को ‘कीपा सिंह’ के नाम से भी जाना जाता है. वह एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन से ताल्लुक रखता है. भारत सरकार ने उसे यहां प्रत्यर्पित किए जाने की याचिका दायर की थी. लेकिन सोमवार को डिस्ट्रिक्ट जज गेरेथ ब्रैंस्टन ने इसे खारिज कर दिया. ब्रिटिश अदालत ने कहा कि अगर कीपा सिंह पर आरोप साबित होता है तो उसे भारत की जेल में उम्र कैद तक की सजा मिल सकती है. कोर्ट ने यह आशंका भी जताई कि उसे लंबे वक्त तक जेल में रखा जाएगा जो कि मानवाधिकार के खिलाफ है. कोर्ट ने भारत की तरफ से पेश किए गए सबूतों को भी कमजोर बताया. उसने कहा,

‘हालांकि कुलदीप सिंह पर बहुत ही गंभीर आरोप हैं. लेकिन इस बात का कोई सबूत नहीं है कि सिंह की किसी हरकत की वजह से असल में किसी को कोई नुकसान हुआ है या कोई मारा गया है.’

क्या हैं आरोप?

भारत का आरोप है कि 44 साल के कीपा सिंह ने 2015 से 2016 के बीच भारत में कई सिख नेताओं की हत्या की साजिश रची थी. इनमें पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उनके बेटे सुखबीर सिंह बादल शामिल हैं. इनके अलावा आरएसएस के नेता जगदीश गगनेजा, दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के मेंबर मनजिंदर सिंह सिरसा और गुरमीत सिंह नाम के एक शख्स को मारने की साजिश रची. आपको बता दें कि पंजाब में आरएसएस के बड़े नेता जगदीश गगनेजा पर अगस्त 2016 में दो बाइक सवारों ने गोलियां चलाईं थीं. एक महीने बाद उनकी मौत हो गई थी.

कीपा सिंह पर यह भी आरोप है कि उसने आतंकवादी वारदातों को अंजाम देने के लिए पैसे जमा किए और पंजाब के कई इलाकों में सीरियल ब्लास्ट की साजिश रची. भारत का कहना है कि कीपा ने यह साजिश ब्रिटेन में बैठे-बैठे इंटरनेट और वॉट्सऐप पर निर्देश देकर रची. सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि कीपा ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ हाथ मिला कर ये साजिशें रचीं.

Prakash Sukhbir Sirsa
कीपा सिंह पर आरोप है कि उसने ब्रिटेन में बैठे-बैठे प्रकाश सिंह बादल (लेफ्ट), सुखबीर सिंह बादल और मनजिंदर सिंह सिरसा (राइट) जैसे सिख नेताओं को मरवाने की साजिश रची.

आरोपों का आधार

अब सवाल उठता है कि कीपा सिंह पर इतने गंभीर आरोप लगाने का आधार क्या है? असल में पंजाब पुलिस ने 2016 में एक बड़ा ऑपरेशन कर एक गंभीर आतंकी साजिश का खुलासा किया था. तब पंजाब की काउंटर इंटेलिजेंस टीम ने खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (KZF) के तीन आतंकियों गुरपाल सिंह उर्फ पाला, मेजर सिंह और रछपाल सिंह को गिरफ्तार किया था. इनके कब्जे से दो पिस्तौल और 16 कारतूस बरामद किए गए थे. पुलिस ने आरोप लगाया था कि तीनों को पाकिस्तान और इंग्लैंड से फंडिंग हो रही थी. उसके मुताबिक, पाकिस्तान में बैठे पंजाब के आतंकियों ने इन्हें हथियार सप्लाई कर निर्देश दिए थे कि वे आतंक की बड़ी घटना को अंजाम दें.

तत्कालीन आईजी एमएफ फारुखी ने बताया था कि मेजर सिंह और गुरपाल सिंह ने माना था कि वे बेल्जियम में बैठे खालिस्तान कमांडो फोर्स के जगदीश सिंह उर्फ भूरा, इंग्लैंड में बैठे कुलदीप सिंह कीपा और जसबीर सिंह उर्फ जस्सी के संपर्क में थे. इस आधार पर ही पुलिस ने ब्रिटेन से कीपा सिंह के प्रत्यर्पण की गुहार लगाई थी.

जानकार मानते हैं कीपा सिंह उस बड़े प्लॉट का एक हिस्सा है जिसके जरिए खालिस्तान आंदोलन फिर से भारत में सिर उठाना चाहता है. कीपा के कनेक्शन न सिर्फ ब्रिटेन, बल्कि पाकिस्तान से भी जुड़े हुए हैं. खालिस्तान समर्थक आतंकी संगठनों का निशाना हमेशा उन बड़े नेताओं पर रहा है जो भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में शामिल होने की बात कहते हैं. चाहें फिर वह अकाली दल हो या गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पदाधिकारी.

किस संगठन से जुड़ा है कीपा?

इस सिलसिले में खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स यानी KZF नाम के संगठन का नाम लिया जाता है. यह संगठन 2008 से ही एक्टिव है और इसे चलाने वाले शख्स का नाम है रंजीत सिंह नीटा. वह जम्मू-कश्मीर का रहने वाला है. फिलहाल पाकिस्तान ने इसे पनाह दे रखी है. KZF यूरोपियन यूनियन और भारत में बैन है. भारत की सुरक्षा एजेंसियां लगातार KZF के खात्मे की कोशिश कर रही हैं. मोहाली के एनएसए कोर्ट ने नीटा के खिलाफ नॉन बेलेबल अरेस्ट वारंट भी जारी कर रखा है.

इस संगठन का ही एक करीबी एंगल कुलदीप सिंह कीपा है. बताया जाता है कि कीपा को ब्रिटेन में संगठन को जिंदा रखने की जिम्मेदारी दी गई है. साथ ही उस पर यह जिम्मेदारी भी डाली गई है कि वह खालिस्तान की आजादी के लिए युवाओं को संगठन में भर्ती करे. कीपा संगठन के लिए पैसे जमा करने का काम भी करता है. इन तमाम वजहों के चलते उसका भारत के हत्थे आना जरूरी था. लेकिन फिलहाल इन कोशिशों पर पानी फिर गया है.


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