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सबको कोरोना का टीका क्यों नहीं दे रही मोदी सरकार?

सरकार सबको वैक्सीन क्यों नहीं लगवा रही है? 45 साल से कम उम्र के लोगों को वैक्सीन क्यों नहीं दी जा रही? ऐसे सवाल मुखरता के साथ हर तरफ पूछे जा रहे हैं. सुझाव आ रहे हैं कि जवानों में ही ज्यादा कोरोना संक्रमण फैल रहा है तो उनको भी टीका लगाया जाए. महाराष्ट्र, दिल्ली जैसी कई राज्य ऐसी मोदी सरकार से कर रही हैं. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने चिट्ठी लिखकर पीएम मोदी से इसकी सिफारिश की है. लेकिन ऐसा कोई फैसला मोदी सरकार की तरफ से अभी नहीं हुआ है. जबकि कोरोना संक्रमण हर दिन नई रफ्तार से बढ़ रहा है. लॉकडाउन पर लौटना पड़ रहा है, जहां लॉकडाउन नहीं लगे हैं वहां कोर्ट सरकार को फटकार रहे हैं, लॉकडाउन लगाकर कोरोना रोकने के लिए कह रहे हैं. वो ही करना पड़ रहा है जो कोई भी नहीं करना चाहता. वैक्सीन वाली रणनीति अभी बैकसीट पर दिख रही है. क्यों ऐसा हो रहा है? क्या हमारे पास पर्याप्त टीके नहीं हैं, या फिर उतनी सुविधा नहीं हैं कि सबको टीके दिए जा सके हैं? और अगर ये दोनों ही वजह नहीं हैं तो क्या इसके पीछे कोई राजनीति है? तो तथ्यों के साथ इन बातों को समझेंगे.

पहले कोरोना के आंकड़ों का अपडेट

पिछले 24 घंटों में यानी सोमवार को देश में कुल 96 हज़ार 982 नए केस दर्ज किए गए. 446 लोगों की मौत हो गई. इन आंकड़ों को जोड़ दें तो पिछले साल से लेकर अब तक देश में कोरोना से 1 लाख 65 हज़ार 547 लोगों की मौत हो चुकी है. जबकि कोरोना के कुल मरीजों की संख्या 1 करोड़ 26 लाख 86 हज़ार है.

तो बात ये है कि 4 अप्रैल और 5 अप्रैल के नए मामलों में कोई ज़्यादा फर्क नहीं है. कोरोना की पहली लहर में पीक पर जितने आंकड़े रोज़ाना आ रहे थे, अब उतने ही आ नए केस रोज आने लगे हैं. और ये रोज़ बढ़ते आंकड़े राज्यों सरकारों की परेशानी बढ़ा रहे हैं. कल महाराष्ट्र ने वीकेंड लॉकडाउन से आगे बढ़कर हफ्ते के बाकी दिनों में पाबंदियां लगाने का ऐलान किया था. अब दिल्ली की सरकार ने भी 30 अप्रैल तक नाइट कर्फ्यू लागू किया है. रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक कर्फ्यू के नियम लागू रहेंगे. दिल्ली में सोमवार को 3 हज़ार 548 नए केस दर्ज हुए. इसके साथ ही कुल सक्रिय कोरोना मरीजों की संख्या बढ़कर 14 हज़ार 589 हो गई है. ये तो हुई बात दिल्ली की.

अब उस राज्य की बात जहां कोरोना के केस तो बढ़ रहे हैं, लेकिन कर्फ्यू नहीं लगाया. गुजरात की बात है. गुजरात के हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई है. एक पीआईएल पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा है कि लॉकडाउन जैसी पांबदियां लगाना बहुत जरूरी है. कोर्ट ने कहा है कि लॉकडाउन पर सरकार जल्द से जल्द फैसला ले. बेकाबू होते कोरोना संक्रमण की वजह से कोर्ट ने ये सख्ती दिखाई है. गुजरात में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 3 हजार 160 नए मामले दर्ज किए गए. 15 लोगों की मौत हुई. और अब गुजरात में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 16 हज़ार के पार चली गई है.

45 साल से कम उम्र के लोगों को वैक्सीन क्यों नहीं दी जा रही?

अब आते हैं मूल सवाल पर. वैक्सीन. जब हमारे पास वैक्सीन नहीं थी तो संक्रमण रोकने के लिए लॉकडाउन लगाया था. अब वैक्सीन है, तो भी लॉकडाउन ही एकमात्र उपाय क्यों दिख रहा है, ये सवाल हर तरफ पूछा जा रहा है. हम तो दुनियाभर में वैक्सीन बांटकर तारीफ बटोर रहे हैं लेकिन अपने ही घर में कोरोना का संक्रमण नहीं रोक पा रहे हैं. तो खामी क्या है? टीकाकरण से किसी बीमारी के उन्मूलन का पैमाना ये होता है कि आबादी के कम से कम 70 फीसदी लोगों को टीके दिए जाएं. कोरोना टीकाकरण के लिए भी लक्ष्य देश की इतनी ही आबादी है. लेकिन अभी ये बहुत दूर का लक्ष्य है. देश में 16 जनवरी से टीकाकरण शुरू हुआ था. करीब ढाई महीने में देश में 8 करोड़ 31 लाख 11 हज़ार डोज़ लगाए जा सके हैं. और उनकी संख्या तो और भी कम है जिन्हें दो डोज़ लग चुके हैं. यानी इस रफ्तार से देश के एक अरब लोगों को टीके लगाने में महीनों लग जाएंगे. सोमवार को एक दिन में करीब 43 लाख लोगों को टीके लगाए गए. ये टीकाकरण का अधिकतम आंकड़ा है. लेकिन ये रफ्तार भी लगातार बरकरार नहीं रह पाती है. पिछले कुछ दिनों में ही ये रफ्ताई बढ़ी है. इससे पहले औसतन 20 लाख लोगों को एक दिन में टीके लगाए जा रहे थे. इसके अलावा जिन लोगों को अभी टीके लगाए जा रहे हैं वो 45 साल से ऊपर के हैं. जबकि कोरोना की नई वेव में 45 साल से कम उम्र के भी बड़ी तादाद में मरीज. इसलिए सवाल उठ रहे हैं कि जब हमारे पास वैक्सीन है तो फिर सभी लोगों को तेज रफ्तार से टीके क्यों नहीं लगवा रहे हैं? टीकाकरण की मौजूदा रणनीति से हम संक्रमण कैसे रोक पाएंगे? ये सवाल अब कई हल्कों से मोदी सरकार के पास आ रहे हैं.

वैक्सीन केंद्र सरकार ही राज्यों को दे रही है. किस फेज में किस वर्ग के लोगों को दी जानी है ये भी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ही तय कर रहा है. और अब कई राज्य मोदी सरकार से मांग कर रहे हैं कि टीकाकरण की उम्र का क्राइटेरिया घटाएं. मसलन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सोमवार को पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी. कहा कि हमें 25 साल से ऊपर के सभी लोगों को टीके लगाने की परमिशन दें. दलील ये दी गई कि युवा और कामगार आबादी में ही अब ज्यादा कोरोना फैल रहा है. और इन्हें टीका लगाने से संक्रमण की रफ्तार रुकेगी. इससे पहले डिप्टी सीएम अजित पवार ने भी केंद्र सरकार से दरख्वास्त की थी. अजित पवार ने 18 साल से ऊपर के सभी लोगों को टीके लगाने की इजाज़त मांगी थी. हालांकि केंद्र सरकार ने इसका जवाब नहीं दिया.

केजरीवाल ने क्या लिखा है?

बात सिर्फ महाराष्ट्र की ही नहीं है. कुछ और भी राज्यों के नाम इस फेहरिस्त में है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी मोदी सरकार को एक चिट्ठी लिखी है. केजरीवाल ने टीकाकरण की उम्र में छूट की मांग की है. केजरीवाल ने कहा है कि दिल्ली में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, इसलिए बड़े स्तर पर सबका टीकाकरण करने की जरूरत है.

एक बारगी मान लेते हैं कि गैर बीजेपी शासित राज्यों में टीकाकरण को लेकर राजनीति हो रही हो. लेकिन गैर राजनीतिक मंचों से भी अब इसी तरह की सिफारिश हो रही है. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन यानी IMA,इसने आज पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी है. चिट्ठी में लिखा है कि टीकाकरण 18 साल से ज्यादा की उम्र के सभी लोगों के लिए खोल दीजिए. और ऐसा नियम कर दीजिए कि कोई सार्वजनिक जगहों पर सिर्फ टीकाकरण के सर्टिफिकेट के साथ ही आ सकता है. IMA ने सुझाव दिया है कि नज़दीकतम केंद्र पर वैक्सीन फ्री में उपलब्ध कराएं. प्राइवेट अस्पतालों के साथ साथ प्राइवेट फैमिली क्लिनिक पर भी वैक्सीन मिले. ताकि कोई भी जाकर आराम से टीका लगवा सके. टीकाकरण के साथ ही IMA ने एक बार संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए लॉकडाउन की भी सिफारिश की है.

FICCI यानी Federation of Indian Chambers of Commerce and Industry.इन्होंने भी सरकार को एक चिट्ठी लिखी है. चिट्ठी में कहा है कि 18 से 45 साल के लोगों के लिए भी टीकाकरण शुरू करिए. फिक्की ने कहा है कि युवाओं को ही तो सबसे ज्यादा कोरोना हो रहा है. उदाहरण दिया है तमिलनाडु का. वहां 51 फीसदी कोरोना मरीज 18 साल से 45 साल के बीच के हैं. फिक्की ने टेस्टिंग पर भी सवाल उठाए हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी चिट्ठी में लिखा है कि जनवरी में 15 लाख टेस्ट रोज़ाना होते थे. अभी 11 लाख ही हो रहे हैं. टेस्ट बढ़ाए जाएं.


विडियो- लॉकडाउन लगा रहे राज्यों की वैक्सीन वाली ये मांग मोदी सरकार मान क्यों नहीं रही?

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