Submit your post

Follow Us

दिबांग हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट को लेकर अरुणाचल के लोग नाराज़ क्यों हैं?

अरुणाचल प्रदेश. भारत का सबसे पूर्वी राज्य. सबसे सुंदर प्रदेशों में से एक. उगते सूर्य का प्रदेश. यहां है दिबांग घाटी. दिबांग नदी के नाम पर इसका नाम है. दिबांग अरुणाचल प्रदेश से निकलने वाली नदी है. अरुणाचल में ही ये नदी सियांग में मिल जाती है. सियांग और दिबांग के मिलने के बाद नदी की जो धारा असम में जाती है, उसे ही ब्रह्मपुत्र कहते हैं.

पहले पूरा दिबांग एक ही जिला में था. बाद में इसे दो जिलों में बांटा गया. दिबांग घाटी और निचली दिबांग घाटी. दिबांग घाटी बोले, तो ऊपरी दिबांग. इसका बॉर्डर चीन से लगता है. इसका मतलब यह क्षेत्र सामरिक नजरिए से बहुत महत्वपूर्ण है. यहां के कुछ लोग केंद्र सरकार से नाराज हैं. दिबांग बचाओ अभियान चला रहे हैं. लेकिन क्यों? केंद्र सरकार यहां एक हाइड्रो प्रोजेक्ट बनाना चाहती है, लेकिन लोग विरोध में हैं. आइए जानते हैं कि क्या है दिबांग हाइड्रो प्रोजेक्ट और इसको लेकर अरुणाचल के लोग प्रोटेस्ट क्यों कर रहे हैं.

Dibang Valley Arunachal Pradesh
अरुणाचल प्रदेश का दिबांग क्षेत्र. (फोटो: गूगल मैप्स)

31 जनवरी 2008. भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अरुणाचल पहुंचे. दिबांग में उन्होंने दिबांग प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी. इस मौके पर उन्होंने कहा था-

अरुणाचल प्रदेश जल संसाधन में समृद्ध है. यहां हाइड्रो-इलेक्ट्रिक ऊर्जा की अपार संभावनाएं हैं. सिर्फ दिबांग प्रोजेक्ट से राज्य को 300 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व मिलेगा. साथ ही मुफ्त बिजली भी. अगर हम इस तरह के प्रोजेक्ट राज्य में और बनाते हैं, तो राज्य सालाना 3000-4000 करोड़ रुपये तक का सालाना राजस्व कमा सकता है. इस अकेले कदम से राज्य अपनी किस्मत बदल सकता है.

Manmohan Singh Dibang Valley
दिबांग हाइड्रो की आधारशिला रखते हुए पूर्व पीएम मनमोहन सिंह (फोटो: archivepmo)

आधारशिला रखने के दिन से ही विरोध शुरू हो गया था

इसका काम नेशनल हाइड्रोपावर कॉर्पोरेशन (NHPC) को दिया गया. स्थानीय लोग इस प्रोजेक्ट का विरोध करते रहे. ‘डाउन टू अर्थ’ की एक रिपोर्ट बताती है कि जिस दिन मनमोहन सिंह आधारशिला रख रहे थे, उसी दिन निचली दिबांग घाटी में इस मामले पर सुनवाई होनी थी, लेकिन खराब मौसम के कारण ऐसा नहीं हो सका था. इसके बाद भी विरोध होते रहे.

5 अक्टूबर, 2010 को पुलिस ने गोली चला दी. ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की रिपोर्ट बताती है कि नौ छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए. स्थानीय प्रशासन ने इसके बाद विरोध कर रहे इदु मिश्मी जनजाति के लोगों को माओवादी बता दिया.

लोगों का डर

घाटी में रहने आले इदु मिश्मी और आदि जनजाति के 12 हज़ार से अधिक लोगों को डर है कि बांध बनने से उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान और खतरा है. उन्हें डर है कि चारागाह की जमीन, मछली पकड़ने वाली जगहें, जमीन, सांस्कृतिक पहचान, सब खो सकती हैं. चावल के खेत और वन भूमि, जो आजीविका का साधन हैं, खत्म हो जाएंगी. विरोध करने वाले लोग कहते हैं कि इस प्रोजेक्ट के लिए अनिवार्य मंजूरी तक नहीं ली गई है.

इदु मिश्मी समुदाय के लोग कहते हैं कि इससे हज़ारों लोग प्रभावित होंगे. वे कहते हैं- हमारे खेत बर्बाद हो जाएंगे. लाखों पेड़ कटेंगे. हम कहीं के नहीं रह जाएंगे. हम पहले से ही मुट्ठी भर लोग हैं और अगर इस तरह की बड़ी कंपनियां अरुणाचल में ऐसे प्रोजेक्ट के साथ आती हैं, तो हम सभी को अपना घर खाली करना होगा. हमारे अधिकार छिन जाएंगे.

Save Dibang
लोगों ने ट्विटर पर #SaveDibang का कैंपेन चलाया हुआ है. (फोटो: ट्विटर)

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर 278 मीटर के बांध से पानी छोड़ा जाता है, तो बहाव वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का क्या होगा? अगर बांध टूट जाता है, तो क्या होगा? डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क पर भी खतरा है.

केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय के वन सलाहकार समिति (FAC) ने पहली बार जून, 2013 में इस प्रोजेक्ट को रिजेक्ट कर दिया. पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की आशंका को देखते हुए इस प्रोजेक्ट को लंबे वक्त तक अथॉरिटी से मंजूरी नहीं मिली.

मोदी सरकार क्या चाहती है?

17 जुलाई, 2019 को केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावेडकर ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश में देश की सबसे बड़ी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट, दिबांग मल्टीपर्पस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गई है. यह 2800 मेगावॉट का प्रोजेक्ट है.

Praksh Javedkar Dibang Valley Tweet

इससे पहले प्रकाश जावड़ेकर के पर्यावरण और वन मंत्रालय ने 28 अगस्त, 2014 को दिबांग प्रोजेक्ट को रिजेक्ट कर दिया था और कहा था-

प्रस्तावित इलाके में जैव विविधता बहुत समृद्ध है. क्षेत्र का इकोसिस्टम बहुत सेंसिटिव है. उस जगह स्थानीय आबादी अच्छी खासी है. क्षेत्र में कई ऐसे पेड़-पौधे और जीव हैं, जो लुप्त होने के कगार पर हैं. ऐसे में वहां डैम बनाना ठीक नहीं.

2014 में नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव को लेकर अरुणाचल के पासीघाट पहुंचे थे. यहां उन्होंने कहा था –

मुझे पता है कि राज्य के लोग बड़े बांधों के निर्माण के खिलाफ हैं और मैं उनकी भावनाओं का आदर करता हूं. लेकिन पर्यावरण की रक्षा करते हुए एनवायरनमेंट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए छोटे-छोटे प्रोजेक्ट बनाकर बिजली पैदा की जा सकती है. सोलर, विंड, हाइड्रो एनर्जी से हम अरुणाचल को विकसित बना सकते हैं.

दिबांग प्रोजेक्ट को FAC ने दो बार रिजेक्ट कर दिया था. पहली बार 2013 में और दूसरी बार अप्रैल 2014 में. दूसरी बार तो पर्यावरण को होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से बताते हुए रिजेक्ट किया. सितंबर, 2014 में FAC को सरकारी दबाव के कारण झुकना पड़ा. इस दौरान कहा गया कि डैम की ऊंचाई में 10 मीटर की कटौती करनी होगी.

जुलाई, 2018 में सरकार की ओर से कहा गया कि इस प्रोजेक्ट को पूरा होने में नौ साल लगेंगे. कहा गया कि निर्धारित समय-सीमा इस बात का भी इशारा करती है कि जून, 2018 के अनुसार करीब 28 करोड़ रुपये की लागत संभावित रूप से बढ़ेगी. शुरुआत में करीब 16,000 करोड़ रुपये से बनने वाले इस प्रोजेक्ट को दिसंबर, 2017 तक बनकर तैयार हो जाना था. लेकिन अभी तक शुरू भी नहीं हो सका है. प्रकाश जावडेकर ने 18 जुलाई को बताया था कि विस्थापितों को मुआवजा, वन को हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति, सड़कों और पुलों के निर्माण के लिए पैसे खर्च किए जाएंगे.

18 जुलाई, 2019 को पीएम मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने दिबांग प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी थी.

एक प्रोजेक्ट, कई फायदे?

इस प्रोजेक्ट को मल्टीपर्पस कहा जाता है कि क्योंकि हाइड्रो इलेक्ट्रिक का भंडारण हो सकेगा. कहा जाता है कि इससे असम के बाढ़ को नियंत्रित किया जा सकेगा. सरकार के जुलाई, 2018 वाले बयान में कहा गया है कि अरुणाचल को मुफ्त में 13.46 मेगा यूनिट बिजली दी जाएगी, जो पूरे प्रोजेक्ट की बिजली का 12 फीसदी है. इसके अलावा, स्थानीय आबादी, स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (LADF) के जरिए मुफ्त में एक फीसदी बिजली दी जाएगी. अरुणाचल प्रदेश को मुफ्त बिजली और LDAF में योगदान का कुल मूल्य 40 साल के प्रोजेक्ट लाइफ का 26,785 करोड़ रुपये होगा.

दूसरा कारण. सरकार मानती है कि यहां पानी के भंडारण की पूरी क्षमता है. असम और अरुणाचल में आने वाले बाढ़ से भी इससे निजात मिल सकेगी.

तीसरा कारण. कई मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि चीन, तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी के पानी को रोकने के कई प्रयास कर रहा है. ऐसे में भारत उस खतरे को देखते हुए इस प्रोजेक्ट पर काम करना चाहता है.

Dibang Valley
दिबांग घाटी (फोटो: dibangvalley)

2019 में बांध सुरक्षा बिल पास किया गया. इसमें कहा गया कि यह विधेयक देशभर के सभी बांधों की निगरानी, निरीक्षण, संचालन, रख-रखाव, सुरक्षा का ध्यान रखेगा. राष्ट्रीय बांध सुरक्षा कमिटी और राष्ट्रीय बांध सुरक्षा अथॉरिटी बनाई जाएंगी. इसके तहत दोषी पाए जाने पर दो साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.

फायदा अधिक या नुकसान ज्यादा?

अप्रैल, 2020 की ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ की एक रिपोर्ट आई. इसमें कहा गया कि FAC 14 मई को दिबांग घाटी में हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को मंजूरी देगी. इसके तहत इस प्रोजेक्ट में 1150.08 हेक्टेयर वन भूमि का डायवर्जन और 2.7 लाख पेड़ों की कटाई शामिल होगी.

वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया (WII) ने अपनी स्टडी में कहा है कि प्रोजेक्ट क्षेत्र में 413 पौधे, 159 तितली, 113 मकड़ी की प्रजाति, 14 पानी और जमीन पर रहने वाले जीव, 31 रेंगने वाले जीव, 230 पक्षी, 21 स्तनधारी जीव हैं. WII ने इन जीव-जंतु को प्रोजेक्ट से होने वाले नुकसान के बारे में बताया है. साथ ही नुकसान को रोकने के लिए एक योजना की सिफारिश भी की है.

मई, 2015 में NHPC को भेजे गए पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी रिपोर्ट में कहा गया था कि प्रोजेक्ट के लिए 5349 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है. रिपोर्ट में कहा गया था कि इस 5349 हेक्टेयर जमीन में 4,577.84 हेक्टेयर गैर-वर्गीकृत राज्य वन है, 701.30 हेक्टेयर कम्युनिटी लैंड है और 70 हेक्टेयर पर चावल की खेती होती है. पानी में कुल 3,546 हेक्टेयर है, जिनमें से 1176 हेक्टेयर सिर्फ नदी की तलहटी है. प्रोजेक्ट का कुल एरिया 11,276 स्क्वायर किलोमीटर है.

सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के वरिष्ठ फेलो मंजू मेनन ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ से बातचीत करते हुए बताते हैं कि दुनिया जलवायु संकट से गुजर रही है, लेकिन FAC जैसे संस्थान इस बात से इनकार करते हैं कि अरुणाचल प्रदेश में वन, नदियां और जमीन इससे निपटने में मदद कर सकते हैं. ये संसाधन जलवायु परिवर्तन से व्यापक रूप से प्रभावित होंगे. मौजूदा वक्त में हम जिस पर्यावरण में हैं, उसके लिए हमारी असेसमेंट पूरी तरह से गलत है.

आधारशिला रखे हुए 12 साल हो गए हैं. लोग विरोध में हैं. सरकारों को खुद नहीं पता कि इस प्रोजेक्ट से कितना फायदा या नुकसान होगा. स्थानीय लोगों के साथ ही पर्यावरण विशेषज्ञ भी इस प्रोजेक्ट के विरोध में दिखते हैं. आगे जो भी अपडेट आएगा, हम आपको बताएंगे.


विडियो- क्या है अरुणाचल का परमानेंट रेजीडेंट सर्टिफिकेट विवाद?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

क्विज़: नुसरत फतेह अली खान को दिल से सुना है, तो इन सवालों का जवाब दो

क्विज़: नुसरत फतेह अली खान को दिल से सुना है, तो इन सवालों का जवाब दो

आज बड्डे है.

ये क्विज जीत नहीं पाए तो तुम्हारा बचपन बेकार गया

ये क्विज जीत नहीं पाए तो तुम्हारा बचपन बेकार गया

आज कार्टून नेटवर्क का हैपी बड्डे है.

रणबीर कपूर की मम्मी उन्हें किस नाम से बुलाती हैं?

रणबीर कपूर की मम्मी उन्हें किस नाम से बुलाती हैं?

आज यानी 28 सितंबर को उनका जन्मदिन होता है. खेलिए क्विज.

करीना कपूर के फैन हो तो इ वाला क्विज खेल के दिखाओ जरा

करीना कपूर के फैन हो तो इ वाला क्विज खेल के दिखाओ जरा

बेबो वो बेबो. क्विज उसकी खेलो. सवाल हम लिख लाए. गलत जवाब देकर डांट झेलो.

रवनीत सिंह बिट्टू, कांग्रेस का वो सांसद जिसने एक केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे का प्लॉट तैयार कर दिया!

रवनीत सिंह बिट्टू, कांग्रेस का वो सांसद जिसने एक केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे का प्लॉट तैयार कर दिया!

17 सितंबर को किसानों के मुद्दे पर बिट्टू ऐसा बोल गए कि सियासत में हलचल मच गई.

मोदी जी का बड्डे मना लिया? अब क्विज़ खेलकर देखो उनको कितना जानते हो मितरों

मोदी जी का बड्डे मना लिया? अब क्विज़ खेलकर देखो उनको कितना जानते हो मितरों

अच्छे नंबर चइये कि नइ चइये?

KBC में करोड़पति बनाने वाले इन सवालों का जवाब जानते हो कि नहीं, यहां चेक कर लो

KBC में करोड़पति बनाने वाले इन सवालों का जवाब जानते हो कि नहीं, यहां चेक कर लो

करोड़पति बनने का हुनर चेक कल्लो.

विधायक विजय मिश्रा, जिन्हें यूपी पुलिस लाने लगी तो बेटियां बोलीं- गाड़ी नहीं पलटनी चाहिए

विधायक विजय मिश्रा, जिन्हें यूपी पुलिस लाने लगी तो बेटियां बोलीं- गाड़ी नहीं पलटनी चाहिए

चलिए, विधायक जी की कन्नी-काटी जानते हैं.

नेशनल हैंडलूम डे: और ये है चित्र देखो, साड़ी पहचानो वाली क्विज

नेशनल हैंडलूम डे: और ये है चित्र देखो, साड़ी पहचानो वाली क्विज

कभी सोचा नहीं होगा कि लल्लन साड़ियों पर भी क्विज बना सकता है. खेलो औऱ स्कोर करो.

सौरव गांगुली पर क्विज़!

सौरव गांगुली पर क्विज़!

सौरव गांगुली पर क्विज़. अपना ज्ञान यहां चेक कल्लो!