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यूपी बीजेपी में भगदड़, इस्तीफों के पीछे कौन?

यूपी में मची हुई है भगदड़. क्या नेता, क्या विधायक और क्या मंत्री, सब इधर से उधर हो रहे हैं. समाचार चैनल जब तक एक नेता की प्रोफाइल तैयार करते हैं, तब तक दूसरा नेता पार्टी बदल ले रहा है. आज हम कोशिश करेंगे इस आवती जावती में एक पैटर्न खोजने की. आखिर क्यों ज़्यादातर इस्तीफों में एक ही तरह की बात है. और क्या चुनाव के इतने करीब हो रहे इन इस्तीफों से भाजपा या सपा के प्रदर्शन पर कोई असर पड़ेगा?

उत्तर प्रदेश का चुनाव अब कायदे से चढ़ने लगा है. समाजवादी पार्टी और RLD गठबंधन ने प्रत्याशियों की पहली लिस्ट भी जारी कर दी है. 29 नामों की घोषणा हुई जिसमें 19 सीटें RLD यानि जयंत चौधरी के खाते में गई. मगर हलचल तो इस्तीफों से मची हुई है. इस्तीफा, इस्तीफा और इस्तीफा..एक शब्द मानों यूपी की राजनीति के आभामंडल से ऐसा उछला है कि वो अब हर किसी के कानों में गूंजने लगा है. चुनाव के मौसम में दलबदल का खेल पूरे रफ्तार से निकल पड़ा है. और हमारे दिमाग में फिराक साहब का वो शेर याद आ रहा है कि हम से क्या हो सका मोहब्बत में, खैर तुमने तो बेवफाई की.

जी ! यूपी चुनाव से ठीक पहले कई नेताओं की निष्ठाएं बदल गई, प्रतिष्ठाएं बदल गई और राजनीति के प्रतीक भी पूरी तरह से बदल चुके हैं. जिसका गया वो बेवफाई का इल्जाम लगा रहा है, जिसके यहां आया वो सामाजिक न्याय और सबके साथ का गीत गा रहा है.

आने-जाने का खेल हर तरफ से जारी है, मगर सबसे ज्यादा झटके सत्ताधारी दल बीजेपी को लगे हैं. तीन दिन में बैक टू बैक योगी सरकार के तीन बड़े मंत्रियों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया. शुरुआत स्वामी प्रसाद मौर्या ने की तो उनके पीछे  वन मंत्री दारा सिंह चौहान और आयुष मंत्री रहे धर्म सिंह सैनी भी हो लिए . सपा से भी कुछ नेता बीजेपी में गए. हुआ यूं कि – 2017 की तस्वीर कुछ ऐसी थी. स्वामी प्रसाद मौर्या, दारा सिंह चौहान और धर्म सिंह सैनी पहले योगी आदित्यनाथ की तरफ थे.

तो वहीं मुलायम सिंह यादव के समधि हरिओम यादव और आगरा की ऐतमादपुर सीट से सपा प्रत्याशी रहे धर्मपाल सिंह अखिलेश की तरफ थे. लेकिन वक्त बदला, जज्बाज बदल गए और हालात भी बदल ही गए. नेता इधर से उधर हो गए. अब खबर ये है कि कल यानि 14 जनवरी को सिरसागंज सीट से 3 बार के विधायक रहे हरिओम यादव बीजेपी में शामिल हो सकते हैं और स्वामी प्रसाद मौर्या के साथ दारा सिंह और धर्म सिंह सैनी 14 जनवरी को ही सपा में शामिल हो जाएंगे

14 जनवरी का  मतलब समझ रहे हैं. मतलब ये कि अभी हिंदू मान्यताओं में बुरा माने जाने वाला खरमास चल रहा है. 14 जनवरी को संक्राति के दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं और माना जाता है तब ही शुभ काम किए जाते हैं. तो नेताजी लोगों ने अपने-अपने मूहूर्त और पार्टियां तय कर ली है. लेकिन इस पूरी खबर को सार बीजेपी को बड़े झटके के तौर पर निकाला जा रहा है, क्योंकि उसके हाथ से 3 बड़े OBC नेता छिटक गए हैं. और अखिलेश यादव को नॉन यादव OBC चेहरे के तौर पर स्वामी प्रसाद मौर्य मिल गए हैं. कद्दावर छवि रही है, बसपा सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं और बीजेपी का का गेम गड़बड़ करने देने की बात भी करने लगे हैं

इतना नहीं 5 साल योगी सरकार में मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्या के तेवर अचानक से इतने बदल गए हैं कि ट्वीट कर लिख दिया. नाग रूपी आरएसएस एवं सांप रूपी भाजपा को स्वामी रूपी नेवला यू.पी. से खत्म करके ही दम लेगा.

स्वामी खुद को नेवला, बीजेपी और आरएसएस को सांप बता रहे हैं

स्वामी प्रसाद का पाला बदलना वोटों के तौर पर कितना बीजेपी का कितना नुकसान करेगा ये तो 10 मार्च के नतीजे ही बताएंगे मगर एक बात तो साफ है कि बीजेपी को विधायकों के तौर पर पंजाब में जितना फायदा सीएम रहने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह नहीं कर पाए थे, उससे ज्यादा नुकसान बतौर मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या कर गए हैं. सीधी चोट OBC वोटों पर कर रहे हैं. क्योंकि बीजेपी छोड़ने वाले बाकी दोनों मंत्री भी स्वामी प्रसाद मौर्य की जुबानी ही बोल रहे हैं

पार्टी छोड़ते ही बीजेपी पर जमकर वार किया जा रहा है और मजे कि बात ये है कि इस्तीफा देने वाले मंत्रियों के इस्तीफा पत्र देखेंगे तो कमोबेश सब में एक जैसा ही कंटेट है. मसलन दलितों, पिछड़ों और किसानों की अनदेखी का आरोप. और लेटरपैड पड़कर यही यही मालूम चलता है कि बोल ये रहे हैं और शब्द किसी और के हैं. हो जो भी लेकिन लगातार हो रहे इस्तीफों ने यूपी की सियासत को हिलाकर तो जरूर रख दिया. जा समाजवादी पार्टी में रहे हैं तो माहौल भी उसी का बनाया जा रहा है. और वजह ये कि अब तक बीजेपी से जाने विधायकों की फेहरिस्त बड़ी लंबी हो चली है

पहला नंबर स्वामी प्रसाद मौर्य का, जो कुशीनगर की पडरौना सीट से विधायक थे. मौर्य समाज की नुमाइंदगी करते हैं और अंदरखाने बाद ये चल रही है कि बीजेपी से बेटे के लिए टिकट मांग रहे थे, नहीं मिला तो नाराज हो गए.

दूसरा नंबर दारा सिंह चौहान का है. 5 साल योगी सरकार में वन मंत्री रहे. मऊ की मधुबन सीट से आते हैं. स्वामी के करीबी हैं और कहा जा रहा है कि क्षेत्र मुख्तार अंसारी के बढ़ते प्रभाव की वजह से दल बदल लिया

तीसरे हैं धर्म सिंह सैनी…आयुष मंत्री रहे और अचानक से सरकार का स्वास्थ खराब करने के लिए पार्टी छोड़ दी. पिछली बार सहारनपुर की नकुर सीट से जीत के आए थे. करीबी मुकाबले में कांग्रेस के इमरान मसूद को हराया था. अब दोनों एक ही टीम से बल्लेबाजी करने जा रहे हैं

चौथे हैं बांदा जिले की तिंदवारी सीट से बृजेश प्रजापति, ये स्वामी प्रसाद मौर्य को अपना नेता बताते हुए इस्तीफा दे गए

पांचवें रोशन लाल वर्मा, शाहजहांपुर की तिलहर सीट से विधायक. जांइट किलर माने जाते हैं, मगर जितिन प्रसाद के बीजेपी में आने के बाद टिकट कटना तय था, तो पार्टी बदल ली

छठे विनय शाक्य हैं, औराया जिले की बिधुना सीट से चुनकर आए थे.

सातवें मुकेश वर्मा हैं, फिरोजाबाद की शिकोहाबाद सीट से विधायक थे

आठवें जय चौबे, पहले ही समाजवादी पार्टी में जा चुके हैं. पिछले महीने बीजेपी छोड़ी थी

नवें राकेश राठौर, सीतापुर सीट से विधायक थे, ये भी सपा में जा चुके हैं

दसवें नंबर पर बहराइज की नानपारा सीट से विधायक माधुरी वर्मा हैं. ये भी सपा में शामिल हो चुकी हैं

बदायूं की बिल्सी सीट से विधायक राधा कृष्ण शर्मा ये भी सपा में जा चुके हैं

12वें नंबर पर हैं भगवती प्रसाद सागर, कानपुर की बिल्हौर सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं, बीजेपी से इस्तीफा दे चुके हैं, अभी किसी पार्टी में शामिल नहीं हुए, लेकिन सपा में ही जाने की संभावना है

13वें नंबर का चेहरा दमदार है. नाम अवतार सिंह भड़ाना. मुजफ्फरनगर की मीरापुर सीट से विधायक हैं. प्रभाव वाले गुर्जर चेहरा माने जाते हैं. RLD में आ चुके हैं. और नोएडा की जेवर सीट से टिकट भी मिल गया.

14वें नंबर पर बाला अवस्थी हैं, लखीमपुर खीरी जिले की धौरहरा सीट से विधायक हैं, लखीमपुर कांड से बाद बीजेपी से जीतना मुश्किल लगा तो आज समाजवादी पार्टी के दफ्तर पहुंच गए.

मतबल अब तक बीजेपी के भीतर बड़ी सेंधमारी हो चुकी है. कुलमिलाकर अब तक 14 विधायक पार्टी छोड़ चुके हैं. मगर बीजेपी की तरफ से कहा जा रहा है कि कई नेताओं के टिकट कटने वाले थे. सो वो जा रहे हैं. मगर खींझ भी साफ दिख रही है

लालची, मलाई जैसे शब्द भले इस्तेमाल किए जाएं. मगर एक सच ये भी है कि  जाने वाले ज्यादातर OBC बिरादरी के हैं. पिछली बार नॉन यादव ओबीसी का एक तरफा वोट बीजेपी को मिला था तो क्या इस बार वो वोट बंट जाएगा. क्या स्वामी प्रसाद मौर्या कोई बड़ा नुकसान पहुंचाने जा रहे हैं ?

जनता की माने तो टक्कर तो हो गई है. वोटों की बंपर काट-मार होने वाली है. हर पार्टी जोर लगाए तो एक खबर कांग्रेस के खेमे से भी है. कांग्रेस ने आज यूपी में टिकटों का ऐलान कर दिया. खुद प्रियंका गांधी ने एक-एक नाम पढ़े और कांग्रेस के टिकट में ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ की झलक भी दिखी

यूपी में 125 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की

125 में से 50 महिलाओं को टिकट दिया गया

उन्नाव रेप पीड़िता की मां को उम्मीदवार बनाया गया

नोएडा से पंखुड़ी पाठक को मैदान में उतार दिया है तो

फर्रुखाबाद से सलमान खुर्शीद की पत्नी लुईस खुर्शीद को टिकट दिया गया

और CAA प्रोटेस्ट से चर्चा में आईं सदफ जफर को लखनऊ सेंट्रल मौका मिल गया

प्रियंका गांधी की तरफ से राजनीति को सेवा बताया गया और उन्नाव रेप पीड़िता की मां को टिकट देना चर्चा का विषय भी बना. कांग्रेस की सहानुभूति उनके साथ दिखी. बात रेप और पीड़िता की हुई तो अगली बड़ी खबर इसी से जुड़ी है. जगह वो जहां कांग्रेस की सरकार है.

अब रुख करते हैं राजस्थान का. राजस्थान के अलवर से एक बेहद परेशान करने वाली खबर आई है. सूबे के अलवर में एक 16 साल की लड़की की बच्ची के साथ गैंगरेप हुआ है. ये लड़की बोल और सुन नहीं सकती है. इसके माता-पिता मज़दूर हैं. 11 जनवरी को दोपहर करीब 12 के आसपास वो खेत के कच्चे रास्ते से होकर निकली थी.

इसके बाद उसे किसी ने नहीं देखा. रात 9 बजे के करीब खबर मिली कि अलवर के तिजारा फाटक ओवरब्रिज के पास एक बच्ची कमर से नीचे ज़ख्मी है और धीमे धीमे खिसक रही है. इसके बाद पुलिस वहां पहुंची और लड़की को अस्पताल ले जाया गया. देर रात परिजन भी अपनी बेटी को खोजते हुए अस्पताल पहुंच गए.

यहां मालूम चला कि लड़की के साथ रेप हुआ है. और उसके प्राइवेट पार्ट्स को किसी नुकीली चीज़ से ज़ख्मी किया गया है. लड़की को इलाज के लिए अलवर से जयपुर लाया गया है. यहां उसकी हालत गंभीर थी. जयपुर में 7 डॉक्टर्स की टीम ने 3 घंटे लंबा एक ऑपरेशन किया, उसके बाद जाकर उसकी हालत स्थिर हुई.

लड़की के चाचा ने पुलिस में शिकायत दर्ज तो करा दी है, लेकिन कहीं से भी बलात्कारियों को पकड़ लाने का दावा करने वाली राजस्थान पुलिस अब भी आरोपियों को पकड़ नहीं पाई है. पुलिस का कहना है कि वो आसपास के इलाके में सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है, लेकिन अब तक ये स्पष्ट रूप से मालूम नहीं चला है कि लड़की को किस गाड़ी से फेंका गया था. ये हालत तब है, जब पिछले साल आई NCRB की रिपोर्ट में राजस्थान में रेप के मामले में देश में अव्वल था.

राजस्थान में 5 हज़ार 310 एफआईआर दर्ज हुईं जिनमें 5 हज़ार 337 पीड़िताओं के मामले थे. राजस्थान के मंत्रियों के पास इस बात का यही जवाब है कि वहां की पुलिस सारे मामलों में एफआईआर दर्ज करती है, इसीलिए आंकड़े ज़्यादा हैं. लेकिन इस तर्क से भी ये जवाब तो नहीं ही मिलता, कि गहलोत सरकार ऐसी नज़ीर आखिर क्यों पेश नहीं कर पा रही कि आरोपियों ही हिम्मत दोबारा ऐसा करने की न हो. इस बात को राजस्थान में विपक्ष में बैठी भाजपा ने भी उठाया है. पार्टी ने अलवर वाली घटना पर एक जांच समीति का भी गठन किया है.


राष्ट्रीय युवा दिवस की बधाइयां देने वाले नेताओं और बेरोज़गार युवाओं से हमारा बड़ा सवाल

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