Submit your post

Follow Us

जब चाहकर भी अपोलो अस्पताल में नहीं घुस पाई थीं जयललिता

तमिलनाडू की पूर्व मुख्यमंत्री और AIADMK की मुखिया रहीं जे जयललिता ने 5 दिसंबर 2016 को आखिरी सांस ली थी. उनकी मौत पर कई सवाल उठे जो आज उनकी पहली बरसी तक कायम हैं. 

अपोलो हॉस्पिटल. ये नाम आप पिछले एक साल से से टीवी पर बार बार सुन रहे हैं. चेन्नई का सबसे बड़ा हॉस्पिटल, जहां राज्य की मुख्यमंत्री जयराम जयललिता 73 दिन भर्ती रहीं और फिर यहीं उन्होंने अंतिम सांस ली. मगर, एक वक्त ऐसा भी था, जब राज्यसभा सांसद होने के बावजूद जयललिता इस अस्पताल में घुस नहीं पाई थीं. जबकि ऐसा करना उनके लिए जिंदगी और मौत के सवाल की तरह था. ये वाकया है साल 1984 का. जहां कुछ ही महीने के फासले पर पहले तो जयललिता की जिंदगी में बड़ी खुशी आई. और फिर और भी बड़ा गम.

जयललिता मोटापे का इलाज कराने गईं और वहां वो मिल गए.

इस फसाने सी हकीकत के इस पड़ाव की शुरुआत हुई 4 जून 1982 को. इस दिन जयललिता को पॉलिटिक्स में तुरुप का पत्ता होने का सबूत देना था. उन्हें पोन्डिचेरी के दक्षिणी इलाके कड्डेलोर में एक रैली को संबोधित करना था. पर वो यहां तक पहुंचीं कैसे.

अभी कुछ ही दिनों पहले तो वो अपने गुरु, मेंटर, गाइड और सब कुछ एमजीआर की पार्टी एआईएडीएमके में शामिल हुई थीं. जयललिता के विरोधियों के कल्ला कर रह गई थी. जिस औरत को वो अपने नेता के लिए शैतान समझते थे. वो उन्हीं के सामने एंट्री मार गई. जयललिता ने सरल रास्ता चुना. एक रुपया चुकाया और पार्टी की सामान्य कार्ड होल्डर बन गईं. मगर वो सामान्य कहां थीं. वो एक मशहूर एक्ट्रेस रह चुकी थीं. एमजीआर के साथ उनके अफेयर के चर्चों से पन्ने रंगे जा चुके थे. पर ये सब एक दशक पहले हुआ था. साल 1973 में दोनों के बीच सब कुछ खत्म मान लिया गया था. जयललिता किसी और फिल्मी बंदे के साथ देखी जाने लगीं और एमजीआर पॉलिटिक्स में रास्ता बनाने लगे.

जब एमजीआर दूसरी बार मुख्यमंत्री बने तब जयललिता का दूसरी या न जाने कितनीं बार दिल छला गया. उनकी दिमागी नहीं जिस्मानी सेहत भी हिचकोले खा रही थी. वजन तेजी से बढ़ रहा था. इसी दौरान वह अमेरिका गईं. अपनी मोटापे की सर्जरी करवाने. वहां पर एमजीआर भी एक सरकारी दौरे पर थे. दोनों के एक दोस्त ने मीटिंग तय की. जयललिता एमजीआर से मिलीं. अमू को देख एमजीआर 9 बरस के रंज भूल गए. वापस आए तो जयललिता की भी वापसी हो गई. मगर अब संवाद कैमरे के नहीं जनता के सामने बोलने थे. और उसके लिए ये पोंडिचेरी वाली रैली हुई. विरोधी पार्टी डीएमके ने इसका खूब मजाक उड़ाया. जयललिता पर भद्दे फिकरे कसे. रैली को कड्डेलोर कैबरे कहा गया. ये भी टीप जोड़ी गई कि अब एक चुकी हुई हीरोइन अपने शरीर के दम पर राजनीतिक रूप से नौजवानों को लुभाने आई है.

मगर एमजीआर और जयललिता के दिमाग में अलग ही प्लानिंग थी. दरअसल दूसरी बार चुनाव जीतने के बाद भी एमजीआर शांति से नहीं बैठ पाए. कभी उनके जिगरी यार रहे स्क्रिप्ट राइटर से नेता बने करुणानिधि पूरे राज्य के दौरे कर रहे थे. एमजीआर पर हमले कर रहे थे. और मुख्यमंत्री प्रशासनिक कामों में मशगूल थे. ऐसे में उन्हें एक ऐसे साथी की जरूरत थी, जो हमले झेल भी सके और पलटवार भी कर सके. तभी अमरीका में उनका जया से रीयूनियन हो गया.

राजनीति की पाठशाला में पदार्पण

जयललिता अपनी पहली रैली में स्क्रीन इमेज या सोशल इमेज के उलट नजर आईं. भारी भरकम गहने और हैवी साड़ियों के बजाय उन्होंने सूत की साड़ी चुनी. सफेद रंग की. जिसका बॉर्डर पार्टी के झंडे वाले रंगों सा था. फिर दसियों बरस तक यही बाना जया की पहचान रहा. मगर सादगी का ये ढंग अपनाने पर भी उनकी अपील कहीं से कम नहीं हुई थी. रैली से पहले वह एक खुली जीप में शहर में घूमीं. फिर मंच पर पहुंचीं. और सधी हुई आवाज में करुणानिधि के धुर्रे उड़ाने शुरू कर दिए. सिनेमा की तरह यहां भी सब कुछ पूरी तैयारी से किया गया था. एक सीनियर जर्नलिस्ट सोलाई ने जयललिता की स्पीच तैयार करवाई थी. खुद जया भी शुरू से ही पढ़ने की बेहद शौकीन थीं. फिल्मों के सेट पर भी हर वक्त उनके हाथ में किताब होती थी. तो ये सब अब काम आने को था.

एक रैली के बाद दूसरी रैली. जया की पॉपुलैरिटी का पारा ऊपर उफनता हुआ चढ़ रहा था. और तभी एमजीआर ने उन्हें अपनी पार्टी का प्रचार सचिव बना दिया. पर्दे पर पैदा होकर लोगों तक पसरी केमिस्ट्री अब पॉलिटिकल लाइफ में भी जलवा दिखा रही थी. लोगों को लगा कि अन्ना (एमजीआर) के बाद अम्मा ही होंगी. आलम ये हुआ कि उन्हें अन्नी (अन्ना की पत्नी) भी कहा जाने लगा. मगर सब कुछ आनंद मंगल नहीं था. एमजीआर के कैबिनेट मंत्री आरएम वीरप्पन ये सब भयानक गुस्से से देख रहे थे. उन्हें जयललिता से नफरत थी. वो इस औरत को बरबाद कर देना चाहते थे. और इसके लिए उन्होंने पार्टी सहयोगियों के अलावा एमजीआर की पत्नी जानकी की भी मदद ली.

इन सबसे बचने के लिए एमजीआर ने जयललिता को दिल्ली रवाना कर दिया. राज्यसभा सांसद बनाकर. ये वाकया है मार्च 1984 का. जयललिता को पहला बड़ा काम दिया गया इंदिरा गांधी से मिलने का. मिलकर ये बताने का कि उन्हें राज्य में डीएमके नहीं बल्कि एआईएडीएमके संग गठबंधन करना चाहिए. इंदिरा ने मिलने के लिए 10 मिनट का वक्त दिया, मगर फिर 40 मिनट बतियाती रहीं. वो एमजीआर के प्रपोजल पर सहमत हो गई थीं. फौरन तमिलनाडु से आने वाले कांग्रेस नेता मूपनार को डील के डिटेल्स तय करने के लिए चेन्नई भी रवाना कर दिया गया. और यहीं जयललिता से चूक हो गई. जो उनके लिए बेहद बड़ी साबित हुई.

मीटिंग का नतीजा क्या रहा, ये जानने के लिए एमजीआर बेचैन थे. मगर जयललिता ने सोचा कि फोन पर क्या बताना. चेन्नई जाकर अगले दिन बता देंगे. एमजीआर तब तक मीटिंग में मौजूद एक पत्रकार से ब्यौरे ले चुके थे. उन्हें ये भी समझ आ गया कि जयललिता के पर कतरने का वक्त आ गया है. अगले रोज जयललिता पहुंचीं तो एमजीआर ने उनसे मुलाकात भी नहीं की. कुछ ही दिनों में उन्होंने जयललिता को पार्टी के प्रचार सचिव पद से भी बर्खास्त कर दिया. विरोधियों को लगा कि अम्मा की चार दिन की चांदनी बीत गई. उनकी खुशी में एक टीप और दर्ज हुई एक दुख के चलते. अक्टूबर 1984 के पहले हफ्ते में एमजीआर को स्ट्रोक पड़ा. उनकी आवाज चली गई. और तब उन्हें इलाज के लिए चेन्नई के अपोलो अस्पताल में दाखिल किया गया. एआईएडीएमके के नेताओं को लगा कि अगर बात बाहर चली गई तो बवाल मच जाएगा. जैसा इस वक्त चेन्नई में मचा हुआ है वैसा ही. और इसलिए अस्पताल पर पहरेदारी बैठा दी गई. किसी भी कार्यकर्ता को अंदर जाने की इजाज़त नहीं थी. और नेताओं में सिर्फ और सिर्फ जयललिता को इजाज़त नहीं थी. कमान अब वीरप्पन और जानकी के हाथ थी. जयललिता बेबसी में बिसूरती रहीं. उन्होंने एक बार जाने का पूरा मन फिर भी बना लिया. मगर नेताओं की तैयारी जयललिता को ऑपरेशन थिएटर के कॉरिडोर में भी मारपीट कर बेइजज्त करने की थी. अपोलो के मुखिया प्रताप रेड्डी को इसका पता चल गया. उन्होंने फोन कर जयललिता को आने से मना कर दिया.

कुछ दिनों बाद एमजीआर को अमेरिका शिफ्ट कर दिया गया. और तब जयललिता गलती पर गलती करती चली गईं. उन्होंने एमजीआर के आसपास की कोटरी और पत्नी जानकी पर कई सवाल उठाए. प्रेस में इंटरव्यू दिए. जयललिता को लग रहा था कि अब एमजीआर लौटेंगे नहीं और उनका राजनीतिक भविष्य खुद ही उन्हें संवारना होगा. वो गलत थीं. एमजीआर ठीक होकर लौटे. जयललिता उल्लास से भर उनका स्वागत करने मीनांबकम एयरपोर्ट पहुंचीं. मगर मुख्यमंत्री तो दूसरे एयरपोर्ट पर उतर घर चले गए. दिल से भी दूर चले गए जया के. वो एक साल तक मिन्नतें करती रहीं. मगर एमजीआर नहीं पसीजे. उन्हें जया का जानकी पर कमेंट करना पसंद नहीं आया. प्रेस में बयानबाजी करना भी नहीं. फिर जया ने एक छह पेज लंबा खत लिखा. अंतरंग बातें लिखीं. और फिर उनके बीच का अलगाव एक बार फिर खत्म हुआ. आखिरी बार के लिए. क्योंकि कुछ ही वक्त के बाद एमजीआर का देहांत हो गया.

अब जयललिता अकेली थीं. और उन्हें अपनी लड़ाई बिना किसी सहारे या हिचक के लड़नी थी. एमजीआर की विरासत पर कब्जे की लड़ाई. पार्टी पर कब्जे की लड़ाई. जानकी के मुकाबले असली प्यार के दावे की लड़ाई. वीरप्पन की साजिशों के खिलाफ लड़ाई. और इन सबसे पार पा भी जाएं तो द्रमुक के रूप में करुणानिधि एंड साथियों के खिलाफ लड़ाई. तारीख जानती है कि कन्नड़ पिता और तमिल मां की इस बड़ी बेटी ने लड़ाई की और जीतकर लौटीं. बार बार लगातार. कभी कोर्ट से, तो कभी जनता की अदालत से.

इस वक़्त तमिलनाडु में खबरों से ज्यादा अफवाहें हैं. और है एक डर. जैसा एमजीआर के जाने के वक्त पसरा था. लोगों ने खुद को आग लगा ली. दंगा फसाद हुआ. तमिलनाडु ठिठक गया. जैसे अभी ठिठका है.

ठिठके हुए वक्त में हवा जोर से चलती है. और जब ये चलती है तो कई सूखे पत्ते भी आसमान में उतराते दिखते हैं. समझदार इसे बीते दिनों के किस्से कहते हैं. किस्से जो आपने ऊपर पढ़े.

Untitled design (63)

(जयललिता की जिंदगी की तमाम तफसीलों के लिए शुक्रिया सीनियर जर्नलिस्ट वसंथी का. उनकी किताब अम्मा कमाल की है. इसे छापा है जगरनॉट बुक्स ने. जयललिता में दिलचस्पी रखने वालों को जरूर पढ़नी चाहिए.)


‘अम्मा’ के बारे में सब कुछ

लोग इंतजार करते रहे, पर जीते-जी नहीं आई जयललिता की तस्वीर

जयललिता को मारने की जल्दी में क्यों थे UP बीजेपी अध्यक्ष केशव प्रसाद?

जयललिता के पहले फिल्मी सीन की कहानी

जयललिता का भाई पप्पू कौन था

अम्मा के लिए जान देते हैं लोग, और क्या जानना है?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

पहले स्पाइडरमैन टोबी मैग्वायर की कहानी, जिनका सबसे हिट रोल उनके लिए शाप बन गया

पहले स्पाइडरमैन टोबी मैग्वायर की कहानी, जिनका सबसे हिट रोल उनके लिए शाप बन गया

शुद्ध और असली स्पाइडरमैन टोबी मैग्वायर करियर ग्राफ़ बाद में गिरता ही चला गया.

10 साल पहले भी शाहरुख़ का समीर वानखेड़े से सामना हुआ था, समीर ने ठोका था तगड़ा जुर्माना

10 साल पहले भी शाहरुख़ का समीर वानखेड़े से सामना हुआ था, समीर ने ठोका था तगड़ा जुर्माना

जगह थी मुंबई एयरपोर्ट. अब दस साल बाद फिर से दोनों का नाम एक साथ सुर्ख़ियों में है.

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

अली का रोल करने वाले इंडियन एक्टर अनुपम त्रिपाठी का सलमान-शाहरुख़ कनेक्शन क्या है?

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

ईमानदारी से स्कोर भी बताते जाना. हम इंतज़ार करेंगे.

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

अलवारो मोर्टे ने वेटर तक का काम किया हुआ है. और एक वक्त तो ऐसा था कि बकौल उनके कैंसर से जान जाने वाली थी.

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

हीरो बनने आए शरत सक्सेना कैसे गुंडे का चमचा बनने पर मजबूर हुए?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

एक वक़्त इंडस्ट्री में टॉप पर थे कुणाल और उनके गाने पार्टियों की जान हुआ करते थे.

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

IPL स्कैंडल, मॉडल्स के आरोप, अंडरवर्ल्ड कनेक्शंस के आरोप, एक्स वाइफ के इल्ज़ाम सब हैं इस कहानी में.

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रेन्सन की कहानी, जहां भी गए तहलका मचा दिया.

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

पहला चुनाव हार गए थे, बीजेपी ने राज्य की जिम्मेदारी सौंपी है.