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वैक्सीन की किल्लत का ये सच आपको नहीं पता होगा!

आज बात करेंगे वैक्सीन की. 1 मई को देश 18 साल से ऊपर के व्यक्तियों का वैक्सीनेशन शुरू हुआ, लेकिन जल्द ही ये बात सामने आ गयी कि देश में वैक्सीन नहीं है. फिर वैक्सीन प्रोक्योर करने को लेकर देश के कई राज्यों ने अपना ग्लोबल टेंडर निकाल दिया था. क्या हुआ इन सबका मई के बीते 25 दिनों में? सब पर बात करेंगे. लेकिन सबसे पहले ताज़े अप्डेट्स की बात.

वैक्सीन हो या न हो, केंद्र सरकार ने 18 प्लस वर्ग के लिए कोविन पर रजिस्ट्रेशन की बाध्यता ख़त्म कर दी है. वो अब 45 प्लस वाले लोगों की तरह ही सीधे वैक्सीन केंद्र पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं, और वैक्सीन ले सकते हैं. और दूसरी तरफ़ बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने केंद्र सरकार और राज्यों को वैक्सीन देने में असमर्थता जतायी है.

सबसे पहले बात फ़ाइज़र की

इस साल 3 फ़रवरी को केंद्र सरकार ने वैक्सीन बनाने वाली कम्पनी फ़ाइज़र को भारत में इमरजेंसी यूज का ऑथरिज़ेशन देने से इंकार कर दिया. फ़ाइज़र ने अपना एप्लिकेशन वापिस ले लिया. फिर बाद में जब भारत में कोविड की दूसरी लहर आयी, तो भारत ने 13 अप्रैल को तुरंत फ़ाइज़र को अप्रूवल दे दिया. कहा कि फ़ाइज़र की वैक्सीन को देश में ट्रायल की ज़रूरत भी नहीं है. लेकिन इन पूरे कनफ़्यूजन के बाद हुआ ये है कि फ़ाइज़र के पास अब भारत के लिए वैक्सीन का ऑर्डर तो है, लेकिन भारत को सप्लाई करने के लिए वैक्सीन नहीं है.

वैक्सीन क्यों नहीं है?

क्योंकि फ़ाइज़र द्वारा वैक्सीन का निर्माण शुरू किए जाने के पहले ही अमरीका और यूरोपीय देशों ने भारी मात्रा में फ़ाइज़र को वैक्सीन का ऑर्डर और एडवांस दे दिया था. इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर की मानें तो अमरीका फ़ाइज़र से अब तक वैक्सीन के 30 करोड़ डोज़ ख़रीद चुका है, और 20 करोड़ डोज़ के एडवांस का आप्शन अभी भी खुला हुआ है. यानी फ़ाइज़र को अकेले अमरीका को 50 करोड़ डोज़ देने हैं. यूरोपियन यूनियन के साथ भी फ़ाइज़र का ऐसा ही सीन है. यूरोपियन यूनियन के देशों को फ़ाइज़र को 240 करोड़ डोज़ देने हैं. ये तो बड़े ऑर्डर हो गए. छोटे ऑर्डर की बात करें तो यूके 3 करोड़ और जापान 12 करोड़ डोज़ का ऑर्डर लेकर फ़ाइज़र की लाइन में लगा हुआ है. इसके अलावा WHO के विश्वव्यापी वैक्सीन प्रोग्राम कोवैक्स के लिए भी फ़ाइज़र ने 4 करोड़ कोरोना वैक्सीन के डोज़ का वादा किया हुआ है.

अब बारी आती है दूसरी कम्पनी मॉडर्ना की

मॉडर्ना की स्थिति भी कमोबेश फ़ाइज़र जैसी ही है. मॉडर्ना को भी अमरीका को 50 करोड़ डोज़, यूरोपियन यूनियन के देशों को 46 करोड़, यूके को 70 लाख, जापान को 5 करोड़, कनाडा को 4.4 करोड़, साउथ कोरिया को 4 करोड़, ऑस्ट्रेलिया को 2.5 करोड़ वैक्सीन के डोज़ देने हैं. इसके अलावा कोवैक्स में मॉडर्ना ने 3.4 करोड़ डोज़ का वादा किया हुआ है.

यानी इन दो अंतरर्राष्ट्रीय वैक्सीन निर्माताओं के हाथ भरे हुए हैं. इस बात को स्वास्थ्य मंत्रालय ने 24 मई को अपनी ब्रीफ़िंग में भी दबी ज़ुबान में स्वीकार भी किया था. स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा था,

“बात चाहे फ़ाइज़र की हो या मॉडर्ना की, हम केंद्र के स्तर पर बात कर रहे हैं. दोनों ही कम्पनियों के ऑर्डर फ़ुल हैं. अब इस ऑर्डर से अलग वो कितना उत्पादन करते हैं, इस पर तय होगा कि वो इंडिया को कितनी वैक्सीन दे सकते हैं. वो भारत सरकार के पास वापिस आएँगे और हम ये सुनिश्चित करेंगे कि उनके द्वारा दिए गए डोज़ राज्यों को मिल सकें.”

ध्यान दें कि ये सारी स्थिति उस समय सामने आ रही है, जब भारत के विदेश मंत्री ख़ुद इस समय अमरीका में है. ख़बरों के मुताबिक़ विदेश मंत्री एस जयशंकर तमाम कामधाम के साथ वैक्सीन बनाने वाली इन दो अमरीकी कम्पनियों के अधिकारियों से भी मुलाक़ात करेंगे. जो बाइडन की सरकार बनने के बाद भारत सरकार का ये पहला आधिकारिक अमरीका दौरा है, और जैसा जानकार मानते हैं कि भारत की प्राथमिकता वैक्सीन का ईज़ी फ़्लो सुनिश्चित करने की भी होगी. ये बात तो केंद्र की हो गयी.

Joe Biden
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन. (तस्वीर: एपी)

राज्यों के ग्लोबल टेंडर की क्या हालत है?

देश में वैक्सीन की भारी किल्लत को देखते हुए कई राज्यों ने ग्लोबल टेंडर निकालने का फैसला किया. हिंदी में कहें तो एक वैश्विक ठेका. बोली लगाइए. दाम तय करिए और सामान बेचिए. यही काम वैक्सीन के लिए भी हुआ. अब वैक्सीन के ग्लोबल टेंडर द्वारा अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को आमंत्रित किया जाता है कि वे सप्लाई के लिए बोली लगाएं. जिस कंपनी की बोली किफायती होती है उसे ठेका दे दिया जाता है. सबसे पहले उत्तर प्रदेश ने वैक्सीन के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया. इसके बाद महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल आदि राज्यों ने भी वैक्सीन के लिए ग्लोबल टेंडर निकाले. एक नजर इन राज्यों द्वारा निकाले ग्लोबल टेंडर्स की वर्तमान स्थिति पर डाल लेते हैं.

उत्तर प्रदेश

यूपी ने 7 मई को 4 करोड़ वैक्सीन की डोज के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया था. वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों ने स्टोरेज और सप्लाई के नियमों में कुछ छूट की मांग की थी. जिसके बाद सरकार ने नियमों में ढील दी. इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक, निविदा राशि को 16 करोड़ से घटाकर 8 करोड़ कर दिया गया. स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन के दौरान वैक्सीन किस तापमान पर होनी चाहिए इसमें भी ढील दी गई. टेक्निकल बिड के लिए अंतिम तारीख 31 मई तक के लिए बढ़ा दी गई है.

महाराष्ट्र

महाराष्ट्र सरकार ने भी 5 करोड़ डोज के लिए ग्लोबल टेंडर निकाला था. आखिरी तारीख 26 मई है. इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन महाराष्ट्र के निदेशक एन रामास्वामी ने कहा था कि उन्होंने स्पूतनिक को मेल लिखा था लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया है. एक अधिकारी ने बताया कि वे मॉडर्ना, फाइजर और जॉनसन एंड जॉनसन तक भी पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं.

कर्नाटक

कर्नाटक सरकार ने पचास-पचास लाख की चार किश्तों में 2 करोड़ वैक्सीन डोज के लिए ग्लोबल टेंडर निकाला था. इसके लिए अंतिम तारीख 24 मई थी. द हिंदू में छपी खबर के मुताबिक दो वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों ने सरकार के ग्लोबल टेंडर का जवाब दिया है. लेकिन वो कौन सी कम्पनियाँ हैं और जवाब क्या है, इस बारे में कोई स्थिति नहीं साफ़ हो सकी है.

तमिलनाडु

तमिलनाडु चिकित्सा सेवा निगम ने 15 मई को 3.5 करोड़ वैक्सीन डोज की खरीद के लिए टेंडर निकाला था. इसकी अंतिम तारीख 5 जून है.

केरल

केरल सरकार ने 22 मई को वैक्सीन की तीन करोड़ डोज के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया. टेक्निकल बिड 5 जून को सामने आएगी.

राज्य देश में बन रही वैक्सीन नहीं प्रोक्योर कर पा रहे हैं?

इसके अलावा और भी कई राज्य वैक्सीन के लिए ग्लोबल टेंडर निकालने की तैयारी में हैं, ऐसी भी ख़बरें सुनाई देती हैं. लेकिन जिन हसरतों के साथ राज्यों ने ग्लोबल टेंडर निकाला था, वो हसरतें पूरी होती नहीं दिख रही हैं. फ़ाइज़र और मॉडर्ना जैसे वैक्सीन निर्माताओं ने राज्यों से कह दिया है कि वो उन्हें सीधे वैक्सीन सप्लाई नहीं करेंगी, बल्कि केंद्र के ज़रिए करेंगी. अब यहाँ पर राज्यों के सामने दोहरी दिक़्क़त है. एक तो राज्य देश में बन रही वैक्सीन नहीं प्रोक्योर कर पा रहे हैं, और दूसरी तरफ़ ग्लोबल टेंडर की जुगत भी फ़ेल होती दिख रही है. शायद इसी दिक़्क़त को देखते हुए कई राज्यों ने केंद्र सरकार से कहा है कि सभी राज्यों के लिए केंद्र सरकार ही वैक्सीन प्रोक्योर करे. ऐसा कहने के पीछे वैक्सीन के वितरण का वो बेढंगा मॉडल है, जिसे केंद्र सरकार अख़्तियार कर रही. एक तो देश में बन रहे वैक्सीन की आधी मात्रा केंद्र सरकार प्रोक्योर कर लेती है और बचे हुए आधे में से राज्यों और प्राइवेट अस्पतालों को काम चलाना पड़ता है. और राज्यों-प्राइवेट अस्पतालों को कितनी वैक्सीन मिलेगी, इसका कोटा भी केंद्र सरकार ही तय करती है.

बात बस फ़ाइज़र और मॉडर्ना की वैक्सीन पर ही जाकर ख़त्म नहीं होती है, लाइन में और भी वैक्सीन कैंडिडेट हैं. बात जॉनसन एंड जॉनसन के कोरोना वैक्सीन की. सिर्फ़ एक डोज़ वाली इस वैक्सीन को लेकर भारत में तैयारियाँ शुरू हो गयी हैं. हैदराबाद में मौजूद बायलॉजिकल ई नाम की कम्पनी जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन का निर्माण शुरू करने वाली है. रॉयटर्स की ख़बर की मानें तो बायलॉजिकल ई जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन के सालाना 60 करोड़ डोज़ बना सकती है. यानी हर महीने 5 करोड़ डोज़. जॉनसन एंड जॉनसन और वैक्सीन निर्माता कम्पनी ने भी इसकी पुष्टि की है. लेकिन अभी ये प्रोडक्शन शुरू होने में और सामने आने में समय लगेगा.

Sputnik V Vaccine
14 मई से भारत में भी स्पूतनिक वी के टीके लगने शुरू हो गए हैं. (तस्वीर: एपी)

बात रूसी वैक्सीन स्पूतनिक वी की

स्पूतनिक वी की पहली खेप 1 मई को और दूसरी खेप 16 मई को इंडिया में पहुंची. कुछ राज्यों में अभी स्पूतनिक वी के जरिये वैक्सीनेशन शुरू किया जा चुका है. लेकिन सिर्फ़ इम्पोर्ट पर निर्भर न रहते हुए स्पूतनिक वी को लेकर वैक्सीन निर्माताओं ने एक और तैयारी की है. घरेलू उत्पादन. डॉ. रेड्डी समेत कुल 5 कम्पनियाँ इस वैक्सीन का उत्पादन करेंगी, जिनमें से पैनएशिया बायोटेक ने इस वैक्सीन का उत्पादन शुरू भी कर दिया है. ख़बरों की मानें तो पैनएशिया स्पूतनिक वी के साल में 85 करोड़ डोज़ बनाएगी. लेकिन प्रोडक्शन अभी शुरू हुआ है और वैक्सीन अभी आयी है, लिहाज़ा क़िल्लत का एक पुख़्ता इलाज होने में अभी समय लग सकता है.

अब बात कोविशील्ड और कोवैक्सीन की

रिपोर्ट्स की मानें तो हर महीने कोविशील्ड के 6.5 करोड़ और कोवैक्सीन के 2 करोड़ डोज़ बन रहे हैं. यानी लगभग 27 लाख डोज़ रोज़ाना बनाए जा रहे हैं. और पिछले 7 दिनों के दौरान औसतन साढ़े 14 लाख डोज़ ही रोज़ाना लोगों को लगाए जा रहे हैं. इसमें औसत में 23 मई का सबसे बुरा प्रदर्शन जो क़रीब 9 लाख डोज़ का है और 24 मई का अच्छा प्रदर्शन भी शामिल है, जिसमें क़रीब 24 लाख डोज़ का है. लेकिन औसत बुरा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक़ अगर इसी औसत से वैक्सीन लगायी जाए, तो एक महीने में लगभग 5 करोड़ डोज़ दिए जा सकेंगे. लेकिन बन तो रहे हैं लगभग 8.5 करोड़ डोज़, तो लगभग 3.5 करोड़ डोज़ का क्या हो रहा है? जानकार बताते हैं कि एक तो वैक्सीन की राशनिंग ठीक से नहीं हो रही है और प्राइवेट सेक्टर ने बहुत मुस्तैदी के साथ वैक्सीन का अपना कोटा नहीं उठाया है, जिसकी वजह से ये कमी दिखाई दे रही है.

तो वैक्सीन की क़िल्लत दूर कैसे होगी?

क्या तरीक़ा है कि हर तरह की वैक्सीन को देश में जल्द से जल्द लेकर आया जाए और इस क़िल्लत की भरपाई की जाए. जानकार बताते हैं कि सबसे पहले जो हमारे देश में जितनी वैक्सीन बन रही है, उसकी सही तरीक़े से राशनिंग की जाए.

जानकारों के मुताबिक़ वैक्सीन की क़िल्लत ख़त्म होने में अभी समय लगेगा. तब तक हम अपनी सुरक्षा के भरोसे ही सुरक्षित रह सकते हैं.


विडियो- 18 से 44 साल वालों को बिना रजिस्ट्रेशन के कोरोना वैक्सीन लेने के लिए क्या करना होगा?

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