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क्या सच में मोदी सरकार के बाद हमारे पासपोर्ट की रैंकिंग में सुधार आया है?

विदेश में ट्रेवल करने के लिए दो डॉक्यूमेंट्स की ज़रूरत होती है.

एक अपने देश से बाहर जाने की परमिशन देने वाला डॉक्यूमेंट और दूसरा दूसरे देश में घुसने की परमिशन देने वाला डॉक्यूमेंट. यही दरअसल मोटा-मोटी तौर पर क्रमशः पासपोर्ट और वीज़ा की परिभाषा है.


अब कुछ चीज़ें गौर कीजिए –

# वीज़ा होने के लिए पासपोर्ट की ज़रूरत होगी क्यूंकि आपको पहले घर से निकलने की इजाज़त चाहिए होगी फ़िर जाकर किसी दूसरे के घर में घुसने की परमिशन मिलेगी.

# पासपोर्ट आपको आपका देश इश्यू करेगा, क्यूंकि वो आपके देश से बाहर जाने की इजाज़त है. और वीज़ा वो देश इश्यू करेगा जहां पर आपने जाना है.

अब एक घरेलू उदाहरण देखिए, गांव में कई घर ऐसे होंगें जहां पर आपको अंदर जाने के लिए इजाज़त की ज़रूरत नहीं पड़ती होगी, क्यूंकि आप शर्मा जी के लड़के हैं, और जिस घर में आप घुसे वो आपको जानते हैं.

# इसी तरह दुनिया में कई देश ऐसे होंगे जहां पर किसी भारतीय को वीज़ा की ज़रूरत नहीं होगी, क्यूंकि उसके पास भारत का पासपोर्ट है. (माना ऐसे 5 देश हैं!)

# इसी तरह दुनिया में कई देश ऐसे होंगे जहां पर किसी जर्मन को वीज़ा की ज़रूरत नहीं होगी, केवल इस कारण के चलते क्यूंकि उसके पास जर्मनी का पासपोर्ट है. (माना ऐसे 10 देश हैं!)

तो इस तरह जिस पासपोर्ट को बिना वीज़ा के सबसे ज़्यादा देशों में जाने की इजाज़त होगी वो पासपोर्ट उतना ही मज़बूत या ताकतवर कहलाएगा. हमारे ऊपर वाले उदाहरण में जर्मनी का वीज़ा भारत के वीज़ा से ज़्यादा शक्तिशाली है.


भारत की दुनिया में स्थिति
भारत की दुनिया में स्थिति

हमने ऊपर ये सारी बातें इसलिए बताईं क्यूंकि हमें कई मेल और मैसेज प्राप्त हुए हैं, पूछते हुए कि क्या भारत की पासपोर्ट रैंकिंग मोदी सरकार के आने के बाद तेज़ी से सुधरी है? तो भाई पासपोर्ट की शक्ति का तो एक ही पैमाना होता है – ईज़ ऑफ़ वर्ल्ड ट्रेवल.

हेनली एंड पार्टनर्स वीज़ा रिसट्रिकशन इंडेक्स’ (एचवीआरआई) दुनिया भर के देशों के ‘यात्रा-स्वतंत्रता’ की रैंकिंग है. ‘यात्रा स्वतंत्रता’ रैंकिंग मतलब कौन से देश का नागरिक कितना ज़्यादा ‘स्वतंत्रता’ होकर दुनिया घूम सकता है.


तो इस रैंकिंग के हिसाब से –

# 2018 में भारत के पासपोर्ट की रैंकिंग है – 76, और ये 59 देशों में ‘वीज़ा फ्री’ एंट्री दिलवा सकता है.

# वहीं, 2014 में भारत के पासपोर्ट की रेंकिंग थी – 76, और ये 52 देशों में ‘वीज़ा फ्री’ एंट्री दिलवा सकता था.

# यानी मोदी सरकार के दौरान भारत की पासपोर्ट रैंकिंग में एक भी पॉइंट का बदलाव नहीं आया. बेशक ‘वीज़ा फ्री’ देशों की संख्या में इज़ाफा हुआ है.

# होने को 2014 के बाद भारत के पासपोर्ट की रैंकिंग में काफी उतार चढ़ाव आया. जैसे 2015 में इंडिया के पासपोर्ट की रैंक 88, 2016 में 85 और पिछले साल, यानी 2017 में ये 87 थी.

# 2018 में निम्न देशों के पासपोर्ट टॉप पर हैं –

1) – जापान | वीज़ा मुक्त देश – 189
2) – जर्मनी | वीज़ा मुक्त देश -188
3) – सिंगापुर | वीज़ा मुक्त देश -188
4) – डेनमार्क | वीज़ा मुक्त देश -187
5) – फिनलैंड | वीज़ा मुक्त देश -187

# 2018 में पाकिस्तान के पासपोर्ट की रैंकिंग 98, चाइना की 68, नेपाल की 95, बांग्लादेश की 94 और श्रीलंका के पासपोर्ट की रैंकिंग 93 है.

# पाकिस्तान का पासपोर्ट बॉटम 5 में आता है. और सबसे नीचे आता है अफगानिस्तान.


अगर इस रिपोर्ट से इत्तेफ़ाक नहीं रखते तो सेकेंड ओपिनियन के तौर पर ‘पासपोर्ट इंडेक्स’ की रैंकिंग मुलाईज़ा फरमाइए –

1) – सिंगापुर
2) – जर्मनी
3) – डेनमार्क, स्वीडन, फ़िनलैंड, लक्समबर्ग, इटली, फ्रांस, नॉर्वे, नीदरलैंड, स्पेन, जापान, साउथ कोरिया, अमेरिका,
71) – भारत


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