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कोरोना से लड़ने के लिए भारत को अब तक की सबसे बड़ी मदद देने वाले वर्ल्ड बैंक का काम क्या है?

कोरोना वायरस के संकट से निपटने के लिए देश में 21 दिनों का लॉकडाउन है. इस बीच विश्व बैंक ने भारत को आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है. विश्व बैंक ने कोरोनो वायरस से निपटने के लिए भारत को 100 करोड़ डॉलर के आपातकालीन मदद को मंजूरी दी है. भारतीय रुपए के हिसाब से ये मदद 76 अरब 41 करोड़ 90 लाख रुपए की है. मोटा माटी 7600 करोड़ रुपए.  केंद्र सरकार ने मेडिकल सुविधाओं पर खर्च के लिए 15 हजार करोड़ रुपए का ऐलान किया था. यह फंड लगभग उसका आधा है.

कोरोना को लेकर विश्व बैंक की सहायता परियोजनाओं का पहला सेट 1.9 अरब डॉलर का है, जो 25 देशों की सहायता करेगा. इस फंड का सबसे बड़ा हिस्सा भारत को दिया गया है. यह वर्ल्ड बैंक की ओर से, भारत को स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए दिया गया अब तक का सबसे बड़ा समर्थन है. वहीं दक्षिण एशिया में विश्व बैंक ने पाकिस्तान के लिए 20 करोड़ डॉलर और अफगानिस्तान के लिए 10 करोड़ डॉलर को मंजूरी दी है.

ये तो हो गई खबर. जब हम इस खबर पर चर्चा कर रहे थे तो कई साथियों ने पूछा कि वर्ल्ड बैंक काम कैसे करता है? इसका उद्देश्य क्या है? साथ ही एक और संस्था का जिक्र आया. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF. लोगों ने ये भी पूछा कि IMF और वर्ल्ड बैंक में क्या अंतर है?  तो आइए समझते हैं वर्ल्ड बैंक और IMF को.

COVID-19 पर संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करते वर्ल्ड बैंक प्रेसिडेंट डेविड मालपास और IMF की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टलीना जॉर्जिवा (फोटो- डेविड मालपास/ट्विटर)
COVID-19 पर संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करते वर्ल्ड बैंक प्रेसिडेंट डेविड मालपास और IMF की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टलीना जॉर्जिवा (फोटो- डेविड मालपास/ट्विटर)

ब्रेटन वुड्स की जुड़वा संतानें

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान औद्योगिक राष्ट्रों की हालत खस्ता हो गई थी. 1939 से शुरू हुए युद्ध को पांच साल हो चुके थे और ये लगातार बढ़ता ही जा रहा था. ऐसे में अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करना एक बड़ी चुनौती थी. इसी चुनौती से निपटने के लिए एक से 22 जुलाई 1944 तक एक वैश्विक सम्मेलन का आयोजन किया गया. अमेरिका के ब्रेटन वुड्स शहर में. इस सम्मेलन में 45 देशों ने भाग लिया. इस सम्मेलन का उद्देश्य ‘अंतरराष्ट्रीय सहयोग’ बढ़ाना और मुद्रा और विनिमय दरों को ‘स्थिर’ करना था. इस सम्मेलन के बाद से ही दुनिया की हर मुद्रा की कीमत डॉलर के अधिकारिक विनिमय दर से तय की जाने लगी. पहले ये सोने के दाम से तय होता था. इस सम्मेलन में पूरी दुनिया के लिए सोने की बजाय डॉलर का मानक तय कर दिया गया. इसे ब्रेटन वुड्स सिस्टम कहा गया. इसी सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और वर्ल्ड बैंक की स्थापना की गई. इसलिए वर्ल्ड बैंक और IMF को ब्रेटन वुड्स की जुड़वा संतानें भी कहा जाता है.

वर्ल्ड बैंक
विश्व बैंक असल में 5 संस्‍थाओं का एक समूह है. ये संस्थाएं हैं –
इंटरनेशनल बैंक फॉर रिकन्सट्रक्शन एंड डिवेलपमेंट (IBRD)
इंटरनेशनल डिवेलपमेंट एसोसिएशन (IDA)
इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IFC)
मल्‍टीलेटरल इन्वेस्टमेंट गारंटी एजेंसी(MIGA)
इंटरनेशनल सेंटर फॉर द सेटलमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट डिस्प्यूट्स (ICFD)

इनमें से IBRD और IDA सबसे प्रमुख हैं. वर्ल्ड बैंक को इन्हीं दोनों अनूठी विकास संस्थाओं का संगम भी कहा जाता है. IBRD और IDA पर 188 सदस्य देशों का स्वामित्व है. ये सभी संस्‍थाएं मिलकर विकासशील देशों को अलग-अलग कामों के लिए कम ब्‍याज पर कर्ज, ब्‍याज मुक्‍त उधारी और अनुदान देती हैं. इन कामों में शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य, लोक प्रशासन, इंफ्रास्ट्रक्चर, फाइनेंस और प्राइवेट सेक्टर डेवलपमेंट, खेती, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन मैनेजमेंट में इन्वेस्ट शामिल है.

आसान भाषा में कहें तो विश्व बैंक कर्ज देने वाली एक ऐसी संस्था है जो विकासशील देशों में गरीबी को खत्म करने और अलग-अलग देशों की अर्थव्यवस्थाओं को एक बड़ी ग्लोबल अर्थव्यवस्था में शामिल कराने के लिए प्रयासरत है. इसके लिए विश्व बैंक सदस्य देशों को जरूरी संसाधन और जानकारी मुहैया कराता है.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF)
IMF का मुख्य काम अंतरराष्ट्रीय वित्तीय एवं मौद्रिक स्थिरता को बनाए रखना है. इसके लिए IMF अपने सदस्य देशों की आर्थिक स्थिति पर नजर रखता है. अपने सदस्य देशों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मदद करता है, अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक सहयोग को बढ़ावा देता है. इसकी आवश्यकता क्यों पड़ती है?  क्योंकि कोई भी देश, अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक समस्याओं को अकेले हल नहीं कर सकता. इसके लिए प्रत्येक देश को एक दूसरे पर निर्भर रहना पड़ता है. दूसरे देश की नीतियों के हिसाब से चलना पड़ता है. ऐसे में IMF मौद्रिक सहयोग के लिए एक मंच तैयार करता है. अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक समस्याओं पर जरूरी सलाह देता है. जरूरत के हिसाब से आर्थिक और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराता है. और आपसी सहयोग को बनाए रखता है. ताकि अंतरराष्ट्रीय विनिमय दरों को स्थिर रखा जा सके.

ये विनिमय दर क्या है? विनिमय यानी कि अदला-बदली. जैसे मेरे पास गेहूं है और आप के पास चावल है. मुझे चावल की आवश्यकता है और आपको गेहूं की. तो हम दोनों ने आपस में अदला-बदली कर लिया. यानी कि विनिमय कर लिया. लेकिन गेहूं और चावल के दाम तो अलग-अलग हैं. तो ऐसे में विनिमय को आसान बनाने के लिए एक रेट तय किया गया. इसी को विनिमय दर या एक्सचेंज रेट कहते हैं. अंतरराष्ट्रीय विनिमय दर या एक्सचेंट रेट वो दर होती है जिस पर किन्ही दो मुद्राओं को आपस में बदला जाता है. जैसे हम हर रोज शाम को टीवी, रेडियो पर सुनते हैं कि आज डॉलर के मुकाबले रुपए का मूल्य इतना रहा. किसी दिन डॉलर के दाम में मजबूती आती है तो किसी दिन रुपए के. इसी दर को विनिमय दर कहते हैं. IMF के सदस्य देशों की कुल संख्या 187 है. आसान भाषा में कहें तो अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का काम वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में स्थिरता बनाए रखना है. और IMF ये काम तीन तरीके से करता है-

1 वैश्विक अर्थव्यवस्था और सदस्य देशों की अर्थव्यवस्था पर निगरानी रखकर
2 भुगतान संतुलन में कठिनाई वाले देशों को कर्ज देकर
3 सदस्यों को व्यवहारिक सहायता देकर

ब्रेटन वुड्स की जुड़वा संतानों में अंतर क्या है?

IMF और वर्ल्ड बैंक दोनों का मुख्यालय वॉशिंगटन डीसी में है. दोनों की साल में दो बार संयुक्त बैठक होती है. एक अप्रैल के महीने में और दूसरा अक्टूबर के महीने में. अक्टूबर की बैठक को वार्षिक बैठक कहते हैं. IMF और वर्ल्ड बैंक के बीच के मुख्य अंतर को कुछ इस तरह समझा जा सकता है कि IMF फायर ब्रिगेड की वो गाड़ी है जो तब काम आती है जब आपके घर में आग लगी हो. जबकि वर्ल्ड बैंक उस बैंक की तरह है जो आपको घर बनाने के लिए लोन देता है.

इसके अलावा-
# IMF का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय विनिमय दर को स्थिर करना है, ताकि संतुलन बना रहे. जबकि वर्ल्ड बैंक का काम गरीबी को खत्म करना.
# विश्व बैंक सदस्य देशों को दीर्घकाल यानी लंबे समय के लिए कर्ज देता है. जबकि आईएमएफ अल्पकालीन कर्ज देता है.
# विश्व बैंक केवल विकासशील देशों को लोन देता है. जबकि IMF विकासशील और विकसित दोनों तरह के देशों की मदद करता है.
# वर्ल्ड बैंक इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और शिक्षा-स्वास्थ्य के बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए पैसा देता है. जबकि IMF भारी वित्तीय समस्याओं को सुलझाने और भुगतान संतुलन को बनाए रखने के लिए.

जैसे 30 जून 2019 को विश्व बैंक ने पाकिस्तान को कराची में सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं के विकास के लिए 4978 करोड़ रुपए के कर्ज को मंजूरी दी. जबकि इसके 5 दिन बाद यानी 5 जुलाई को IMF ने 39 महीने के लिए 6 अरब डॉलर के कर्ज को मंजूरी दी. IMF ने कर्ज नकदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को वापस पटरी लाने के लिए दिया. जबकि वर्ल्ड बैंक ने सार्वजनिक परिवहन को दुरुस्त करने में स्थानीय सरकार की मदद के लिए कर्ज दिया.
इन दोनों कर्ज की तुलना करें तो हमें विश्व बैंक और IMF के कामों में अंतर आसानी से समझ आ जाएगा.


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