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यूपी पुलिस बस इन चार सवालों के जवाब दे दे, तो विकास दुबे के 'एनकाउंटर' का राज खुल जाए

विकास दुबे की मुठभेड़ में मौत के बाद कुछ सवाल उठ रहे हैं. वो सवाल, जो पुलिस से पूछे गए, तो जवाब नहीं मिला. और वो सवाल, जिनके जवाब पुलिस को देने ही होंगे. क्या हैं वे सवाल, आइए देखते हैं.

सबसे पहले घटनाक्रम

विकास दुबे. आज यानी 10 जुलाई की सुबह पुलिस मुठभेड़ में मारा गया. पुलिस ने कहा कि जब उसे कानपुर लाया जा रहा था, तो गाड़ी सड़क पर पलट गयी. इस गाड़ी में विकास दुबे और STF के साथ-साथ यूपी पुलिस के दूसरे पुलिसकर्मी बैठे हुए थे. पुलिस ने कहा कि विकास दुबे ने घायल पुलिसकर्मियों की बंदूक़ छीनकर भागने का प्रयास किया. पुलिस ने घेर लिया. विकास से सरेंडर करने के लिए कहा गया. विकास सरेंडर के लिए राज़ी नहीं हुआ. पुलिस ने कहा कि विकास ने पुलिस पर फ़ायरिंग की. पुलिस ने जवाबी फ़ायरिंग की. विकास के सीने में तीन और बांह में एक गोली लगी. विकास की मौत हो गयी.

पहला सवाल : मीडिया को क्यों रोका गया?

जिस जगह पर पुलिस की गाड़ी पलटी, उससे कुछ दूरी पर ‘इंडिया टुडे’ ग्रुप के पत्रकार अरविंद ओझा कैमरा टीम के साथ थे. ANI के हवाले से आए वीडियो की मानें, तो पुलिस ने रास्ता ब्लॉक कर दिया. सारी प्राइवेट गाड़ियों को जाने दिया जा रहा था, लेकिन मीडिया की गाड़ियों पर प्रतिबंध था. फिर पुलिस मीडिया की गाड़ियों की तलाशी लेने लगी. पत्रकारों ने वहां खड़े पुलिसकर्मियों से सवाल किया. क्यों मीडिया को रोका जा रहा है? इस पर पुलिस का जवाब चौंकाने वाला था. पुलिस ने कहा,

“किसी को रोका नहीं जा रहा है, सभी को जाने दिया जा रहा है. गाड़ी की तलाशी रुटीन चेकिंग है.”

कुछ देर पहले तक कैमरे में बस मीडिया की गाड़ियों को ही रोका जाते साफ़ देखा जा सकता था. थोड़ी देर बाद जब मीडियाकर्मियों को जाने दिया गया, तो उस जगह से दो-तीन मिनट की दूरी पर कानपुर नगर का भौंती आया. भौंती में महिंद्रा की TUV 300 पलटी हुई थी. अरविंद ओझा बताते हैं कि मीडिया के स्पॉट तक पहुंचने तक विकास दुबे का एनकाउंटर किया जा चुका था. क़यास लगाए जा रहे हैं कि जितनी देर मीडिया को आगे बढ़ने से रोका गया, उतनी देर में विकास दुबे को लेकर जाती गाड़ी का कथित एक्सिडेंट हुआ. उसने भागने की कोशिश की. और मुठभेड़ में मारा गया. इस बारे में मीडिया ने जब कानपुर के SSP दिनेश कुमार से बातचीत की, तो बहुत आश्चर्य से भरा जवाब आया,

“मुझे नहीं पता कि मीडिया को क्यों रोका गया था? ऐसे किसी आदेश के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है.”

कानपुर पुलिस मीडिया को आगे बढ़ने से रोक रही थी. और कानपुर पुलिस के एसएसपी ने ही ऐसे किसी आदेश की जानकारी से इनकार कर दिया. तो सवाल वही, क्यों रोका गया मीडिया की गाड़ी को?

दूसरा सवाल : पुलिस और विकास दुबे, अलग-अलग क्यों भर्ती किए गए?

विकास दुबे को मुठभेड़ में चार गोलियां मार दी गयीं, और उसे अस्पताल लाया गया. लेकिन ध्यान रहे कि पुलिस की गाड़ी पलट गयी थी. पुलिस ने कहा कि चार पुलिसवाले घायल हो गए थे. दो को गोली लगने की बात ख़ुद STF ने अपने आधिकारिक बयान में की. अब तक ये साफ़ नहीं हो सका है कि किसी पुलिस वाले या विकास दुबे को गाड़ी पलटने की वजह से कितनी और कहां चोट लगी. अब तक जिन भी चोटों का ब्योरा आ रहा है, उनमें गोली से लगने वाले घाव ही शामिल हैं.

अब आगे की बात. विकास दुबे को कानपुर के हैलेट अस्पताल लाया गया. लेकिन चार पुलिसवालों का कोई पता नहीं था. बहुत देर बाद IG मोहित अग्रवाल ने मीडिया से बातचीत में बताया कि चार पुलिसकर्मियों को कल्याणपुरी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया है.

बात यहीं ख़त्म नहीं होती है. शुरुआत में सभी पुलिसवालों को अलग भर्ती तो किया गया, लेकिन कुछ देर बाद उन्हें भी उसी हैलेट अस्पताल में शिफ़्ट कर दिया गया. यानी पहले अलग और कम सुविधा वाले अस्पताल में भर्ती किया गया, फिर बड़ी सुविधा वाले अस्पताल में लाया गया. और आख़िर में बताया गया कि ग्रेज़िंग वुंड है, यानी गोली जो छूकर या शरीर से रगड़ खाकर निकल जाती है, बेधती नहीं है. तो सवाल उठता है कि विकास को जिस कानपुर के अधिक सुविधा वाले हैलेट अस्पताल लाया गया था, दूसरे पुलिसवालों को भी वहां क्यों नहीं लाया गया? दूसरे स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराने की क्या वजह थी?

तीसरा सवाल : गाड़ी कैसे बदल गयी?

कई मीडिया चैनल बता रहे हैं जिस समय आख़िरी टोल प्लाज़ा से STF का क़ाफ़िला गुज़रा, उस समय विकास दुबे टाटा सफ़ारी में बैठा हुआ था. इसकी पुष्टि ‘आज तक’ के पत्रकार अरविंद ओझा भी करते हैं, जो लगातार STF के क़ाफ़िले के साथ चल रहे थे.

लेकिन एनकाउंटर साइट पर खेल बदला हुआ था. गाड़ी बदली हुई थी. अब तक टाटा सफ़ारी चली आ रही थी, अब हो गयी महिंद्रा TUV 300. 

हमने ‘आज तक’ के रिपोर्टर अरविंद कुमार ओझा से बात की. उन्होंने बताया,

“हमने विकास दुबे की गाड़ी का पीछा किया. वो सफारी कार में मौजूद था. हमारे पास विजुअल्स हैं. आगे हमें रोक दिया गया. STF ने हमें भटकाने की कोशिश की. हम बाद में गए, तो एक गाड़ी पलटी मिली. पुलिस ने हमें बताया कि ये वही गाड़ी है, जिसमें विकास दुबे मौजूद था.”

पुलिस ने कार बदलने के सवाल पर क्या कहा? कानपुर रेंज आईजी मोहित अग्रवाल ने मीडिया से बातचीत में बताया,

“मेरी जानकारी में, जो मेरी बातचीत हुई पुलिसकर्मियों से, ये (विकास दुबे) उज्जैन से इसी गाड़ी में बैठा था, जिस गाड़ी में इसका एक्सिडेंट हुआ है. कोई गाड़ी बीच में बदली नहीं गई है. उसी गाड़ी में बैठकर उज्जैन से चला था, जिस गाड़ी में उसका एक्सिडेंट हुआ.”

लेकिन इधर फ़ुटेज और पत्रकारों का कहना साफ़ था कि विकास जिस गाड़ी से लौट रहा था, वो गाड़ी एनकाउंटर के ठीक पहले बदल दी गयी. क्यों किया गया ऐसा?

चौथा सवाल : गाड़ी कैसे पलटी?

जिस TUV 300 की बात हो रही है, वो पलटी मिली. थोड़ी देर बाद पुलिस अधिकारियों ने मीडियाकर्मियों को बताया कि गाड़ी रोड डिवाइडर से टकराकर पलट गयी. लेकिन इस ख़बर के लिखे जाने तक UP STF का आधिकारिक बयान आ गया. बयान में कहा गया सड़क गाय और भैंसों का झुंड दौड़ता हुआ आ गया. चालक लम्बी यात्रा से थका हुआ था.  इन जानवरों को दुर्घटना से बचाने के लिए गाड़ी मोड़ी, जो अनियंत्रित होकर पलट गयी. कॉन्स्टबल और गाड़ी में बैठे लोग बेहोश हो गए, जिसका फ़ायदा उठाकर विकास दुबे भागने की कोशिश करने लगा.

ध्यान रहे कि अब तक STF का आधिकारिक बयान आने के पहले तक कहीं भी गाड़ी पलटने के पीछे गाय और भैंस के झुंड का ज़िक्र नहीं था. एक वीडियो भी है, जिसमें एक शख़्स ANI से कह रहा है कि उसने गोली चलने की आवाज़ सुनी थी, गाड़ी पलटने की नहीं. और अब गाड़ी पलटने के पीछे की दो वजहें हैं. और है एक सवाल. जब सड़क और मिट्टी पर गाड़ी के घिसटने और टायर के निशान नहीं थे, तो गाड़ी कैसे पलटी? क्योंकि ‘आज तक’ और दूसरे समाचार चैनलों के फ़ुटेज की मानें, तो सड़क पर कोई निशान नहीं था.


लल्लनटॉप वीडियो : एनकाउंटर से ठीक पहले कुछ इस तरह रोक दी गईं मीडिया की गाड़ियां

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