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वैक्सीन के स्लॉट गायब होने के पीछे का खेल समझिए

आज बात कोरोना वैक्सीनेशन की. हमें देश के कई हिस्सों से मेल और मैसेज आ रहे हैं कि जब कोविन ऐप पर हम लोग कोरोना वैक्सीन के लिए स्लॉट बुक करने जाते हैं, कुछ मिलता ही नहीं. ख़ाली हाथ लौटना पड़ता है. स्लॉट एकदम भरे हुए दिखते हैं. और स्लॉट आते भी हैं तो चंद सेकंड्स में सारे स्लॉट ख़त्म हो जाते हैं.

सेकेंड्स में खाली स्लॉट्स के भर जाने के अलावा भी लोगों को स्लॉट बुकिंग में कई तरह की समस्याएं आ रही हैं. जैसे मुकेश शर्मा हैं. हमारे दर्शक हैं. वो बताते हैं-

“स्लॉट कब खुलेगा, इसके बारे में किसी को सूचना नहीं होती. जैसे ही स्लॉट बुक होने वाला होता है अपने आप लॉगआउट हो जाते हैं. स्लॉट में स्पेस दिखता है लेकिन confirm पर क्लिक ही नहीं होता. और स्पेस खतम हो जाता है.”

इसके अलावा बहुत सारे लोग कोविन में OTP की समस्या को फ़्लैग करते हैं. हमारे दर्शक प्रभात हमें लिखते हैं कि कोविन में पिन कोड डालकर देखने पर 18 साल से ऊपर के लोगों के लिए स्लॉट खाली दिखाता है. लेकिन जब लॉग-इन करते हैं तो पहले ओटीपी आने में दिक्कत होती है. ओटीपी आ भी जाती है तो सारे खाली स्लॉट गायब हो जाते हैं.

लखनऊ के सूरज ने बताते हैं कि उन्होंने बड़ी मुश्किल से अपने परिवार के लिए स्लॉट बुक किया था. लेकिन वैक्सीनेशन से तीन दिन पहले उनके पास मैसेज आया. मैसेज में लिखा था कि उनकी बुकिंग कैंसिल कर दी गई है. इसके लिए उन्हें कोई कारण नहीं बताया गया. अब जुगत है कि फिर से वैक्सीन का स्लॉट बुक किया जाए.

पूरी दिक़्क़त को समझने के लिए इंडिया के वैक्सीनेशन सिस्टम को समझिए

भारत का सिस्टम अभी सीधा-सा है. 16 जनवरी 2021 से देश में वैक्सीनेशन की प्रक्रिया शुरू हुई. पहले चरण में फ्रंटलाइन वर्कर्स को टीका लगाया गया. एक मार्च से टीकाकरण का दूसरा चरण शुरू हुआ. जिसमें 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों और 45 वर्ष से अधिक उम्र के उन लोगों को टीका लगना शुरू हुआ जो गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे.

दूसरा चरण शुरु हुआ तो सरकार ने रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी शुरू की. सरकार ने एक वेबसाइट सामने रख दी. कोविन. पूरा नाम कोविड वैक्सीन इंटेलिजेंस नेट्वर्क. वैक्सीन लेने के लिए पहले कोविन पोर्टल या आरोग्य सेतु ऐप पर रजिस्ट्रेशन करना होगा. अपना मोबाइल नंबर डालना होगा, जिस पर एक ओटीपी आएगा. जिसे भरकर वेरिफाई करना होगा. इसके बाद अपने पहचान पत्र से संबंधित जानकारी देनी होगी. और रजिस्ट्रेशन हो जाएगा. एक मोबाइल नंबर से चार लोगों का रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है.

रजिस्ट्रेशन हो जाने के बाद अपॉइंटमेंट का कैलेंडर आ जाता है. आपको जिस एरिया में वैक्सीन चाहिए वहां का पिन कोड डालकर या फिर डिस्ट्रिक्ट वाइज वैक्सीन की उपलब्धता के हिसाब से स्लॉट बुक कर सकते हैं. और फिर नियत दिन वैक्सीनेशन सेंटर पर जाकर वैक्सीन लगवा सकते हैं. लेकिन यहीं तो दिक़्क़त है. ये सब सुनने में जितना आसान और सहज लग रहा है, उतना है नहीं. उसी को लेकर शिकायतें हैं.

वैक्सीनेशन सिस्टम क्यों ध्वस्त हुआ?

इसी कोविन पर ऑन द स्पॉट बुकिंग की सुविधा भी दी गई. यानी कि एक पहचान पत्र लेकर वैक्सीनेशन सेंटर पहुंचिए. सीधे वहीं रजिस्ट्रेशन कराइए और वैक्सीन लगवाइए. मुंबई, बेंगलुरु और नोएडा जैसे शहरों में तो ड्राइव थ्रू वैक्सीनेशन की व्यवस्था की गयी है. गाड़ी से आईए, गाड़ी में बैठे बैठे वैक्सीन लगवाकर चले जाइए. लेकिन इसी बीच 1 मई को देश में तीसरे चरण का वैक्सीनेशन शुरू हुआ. और वैक्सीनेशन का अधिकांश सिस्टम ध्वस्त हो गया. सरकार ने वैक्सीनेशन पोर्टल 18 साल से ऊपर के सभी लोगों के लिए खोल दिया. कहा गया कि 45 साल से ऊपर के लोगों का वैक्सीनेशन प्रोग्राम जैसे चल रहा था वैसे ही चलता रहेगा. उनके पास ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और ऑन द स्पॉट रजिस्ट्रेशन दोनों का विकल्प होगा. लेकिन 18 से 44 साल के बीच वाले लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाना ही होगा.

शुरू के एक-दो दिन कोविन पोर्टल अचानक उमड़ी भीड़ को झेल न सका. और जो दिक्कतें सामने आयीं, वो हमने आपको बता दीं. लेकिन इस सबके बीच बैकडोर एंट्री शुरू हो गयी है. आसान शब्दों में कहें तो कोरोना की वैक्सीन को लेकर हैकिंग के प्रयास सामने आने लगे हैं. हैकरों ने ऐसा तंत्र बना लिया है कि आपके हिस्से का वैक्सीन का स्लॉट एक कम्प्यूटर प्रोग्राम के तहत चुपके से उड़ा लिया जाता है.

जम्मू के रहने वाले हमारे एक दर्शक ने बताया कि कुछ लोग आरोग्य सेतु ऐप को हैक कर लेते हैं. बैकडोर से ये हैकर्स पहले ही स्लॉट बुक कर लेते हैं. जैसे ही स्लॉट खुलता है वो अपने आप भर जाता है. उन्होंने बताया कि उनके जानने वाले कुछ लोगों ने इसी तरह से वैक्सीनेशन करवाया है.

स्लॉट हैक हो रही हैं क्या?

6 मई को मनीकंट्रोल डॉट कॉम में छपी एक खबर के मुताबिक कुछ लोग एक खास तरह की प्रोग्रामिंग के जरिए कोविन को छका रहे हैं. ये लोग एक खास तरह की स्क्रिप्ट को इस ऐप पर चलाते हैं. स्क्रिप्ट यानी एक दूसरे प्रोग्राम के साथ चलने वाला एक छोटा सा प्रोग्राम. अब इस स्क्रिप्ट के इस्तेमाल से होता क्या है कि स्लॉट खुलते ही बुक हो जाता है. आम आदमी अपने कंप्यूटर या मोबाइल पर ‘फास्टेस्ट फिंगर फर्स्ट’ की तरह कोशिश करता रह जाता है.

अब ऐसा है नहीं कि आप इस प्रोग्राम को धता बता सकें. ये स्क्रिप्ट कोविन पर बार-बार वैक्सीन उपलब्ध होने की जानकारी अपने आप सर्च करता रहता है. हम और आप तो थककर स्लॉट खोजना बंद कर देते हैं. ये तो कंप्यूटर प्रोग्राम है तो यह थकता नहीं है. आम इंसान जहां दिन में 10-20 बार कोविन पर स्लॉट चेक कर सकता है, वहीं एक प्रोग्राम दिन भर में सैकड़ों बार कोविन को खंगाल सकता है. जैसे ही वैक्सीन आती है, हैकर को अलर्ट मिल जाता है. अब हैकर जो है, आम लोगों की तरह कोविन में पूरा डेटा भी नहीं भरता. उसका ये काम भी स्क्रिप्ट कर देता है. ये प्रोग्राम स्लॉट बुकिंग की सारी जानकारी अपने आप कोविन में भर देता है. इसके मुकाबले आम इंसान वैक्सीन उपलब्ध होने पर जब तक संभल पाता है, तब तक कंप्यूटर प्रोग्राम स्लॉट बुक कर देता है.

API का क्या झोल है?

हमें इस तरह के बहुत सारे दावे सुनाई देते हैं. ये सब सम्भव कैसे है? इसके लिए शब्द है API. मतलब अप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफ़ेस. ऐसे समझिए कि ये वो पुल है जिसके ज़रिए दो सॉफ़्टवेयर या ऐप एक दूसरे से बात करते हैं. अब इसको आसान भाषा में जानिए. आप जाते हैं किसी होटल या रेस्तरां में खाना खाने. तो आपसे वेटर आपका ऑर्डर लेने आता है. आपका ऑर्डर लेकर वो किचन में जाता है. किचन से तैयार खाना लेकर आपकी टेबल पर आता है. तो ये जो वेटर है, वो आपका API है. वो आपके और किचन के बीच का सम्पर्क है. कंप्यूटर या मोबाइल की दुनिया में भी API यही काम करता है. संदेश और जानकारियां इधर से उधर ले जाने का. ये कोई ऐप नहीं होता, बल्कि दो ऐप्स या ऐप्स और सर्वर के बीच का पुल होता है.

अब जो हैकर वग़ैरह कोविन के सारे स्लॉट खा जा रहे हैं, वो इस API की वजह से सम्भव है. अब जो कोविन का API है, वो एकदम खुल्लमखुल्ला मिल रहा है. और कोविन बनाने वाले स्वास्थ्य मंत्रालय ने ख़ुद ही इस API को सार्वजनिक कर रखा है ताकि थर्ड पार्टी एप इसका लाभ उठाकर स्लॉट की उपलब्धता की जानकारी दे सकें. इसके सहारे से ही getjab क़िस्म की कई वेबसाइटें स्लॉट होने का एलर्ट देती हैं, और इसी API के सहारे से ही एलर्ट होने के बावजूद स्लॉट भर जा रहे हैं.

कईयों को याद होगा कि ऐसा काम पहले रेलवे की तत्काल बुकिंग कराने वाले एजेंट करते थे. वो IRCTC की वेबसाइट पर ऐसे ही प्रोग्राम के जरिए आम लोगों से पहले तत्काल टिकट बुक करके बेच देते थे. 10 बजे तत्काल का विंडो खुलता था तो वेटिंग टिकट ही मिलती थी. पुलिस ने ऐसे कई लोगों को गिरफ्तार भी किया था.

लेकिन तमाम बातें शिकायतों पर जाकर नहीं टिकती हैं. बात निवारण से भी जुड़ी हुई है. केंद्र सरकार ने एक वीडियो भी जारी कर दिया है. इस वीडियो के ज़रिए केंद्र ने ये कहने की कोशिश की है कि देखिए साहब, वैक्सीन का स्लॉट बुक करना कितना आसान है. लेकिन लोग शिकायत कर रहे हैं.

वैक्सीन का सिस्टम इतना कठिन क्यों है?

अब वैक्सीन के स्लॉट का पता करने के लिए तमाम चीज़ें आ चुकी हैं इंटरनेट पर. लेकिन हम एक बार नहीं, बार बार कह चुके हैं कि वैक्सीनेशन का ये तरीक़ा सिर्फ़ शहरी भारत के लिए नहीं होना चाहिए. वैक्सीन पर समाज के हरेक वर्ग और हरेक हिस्से का अधिकार है. ऐसे में क्या गांवों में जहाँ इंटरनेट की कनेक्टिविटी भी सवालों के घेरे में है, इस तेज़, कठिन और किंचित धूर्तता से भरे सेटअप में वैक्सीन कितनी उपलब्ध है?

अब हमें चाहिए क्या? क्या होना चाहिए वैक्सीनेशन का आदर्श सेटअप. कल को वैक्सीन आ भी गयी, क़िल्लत ख़त्म हो गयी तो भी क्या इसी लचर तरीक़े से लोगों को वैक्सीन लगायी जाएगी? रूस चलते हैं. यहां पर मॉल, पार्क हर जगह वैक्सीनेशन केंद्र खोल दिए गए हैं. रूस से चलते हैं UK. सबसे पहले वैक्सीनेशन शुरू करने वाले देशों में से एक. वहाँ पर वैक्सीन कैसे लगायी जा रही है? कमोबेश ऐसी ही स्थिति फ़्रांस की भी सुनाई पड़ती है.

ये सवाल उठे कि हम दूसरे देशों के बात क्यों करते हैं, उससे पहले ही हम ये बताएँगे कि हमें ख़ुद को फिर से आँकने देखने की ज़रूरत है. तमाम उपलब्ध पैमानों के साथ. अपने देश की नीतियों को समझने की ज़रूरत है. सवाल उठाने की ज़रूरत है. कि वैक्सीन सबको क्यों नहीं लग रही? वैक्सीन का सिस्टम इतना कठिन क्यों है? सबको वैक्सीन के दोनों डोज़ जल्द से जल्द देने की क्या योजना है?


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