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तालिबान के वो चेहरे, जिनके दम पर उसने अफगानिस्तान पर राज कायम किया

अब ये तय हो चुका है कि अफगानिस्तान में तालिबान की ‘सरकार’ बनेगी भी और चलेगी भी. लेकिन ये ‘सरकार’ कैसी होगी, अभी स्पष्ट नहीं है. तालिबान ने जिस तरह तेजी से आगे बढ़कर अफगानिस्तान पर कब्जा किया और अफगान सरकार और सेना को घुटनों पर बैठने को मजबूर कर दिया, इससे उसके इरादे साफ हैं. आखिर वो लोग कौन हैं और कैसे उन्होंने तालिबान को इतना ताकतवर बना दिया कि अफगानिस्तान से आखिरकार अमेरिका और उसके साथी देशों के सैनिकों को जाना ही पड़ा. अब चर्चा इस बात की है कि तालिबान का कौन सा नेता अफगानिस्तान की गद्दी संभालेगा. आइए जानते हैं, तालिबान के प्रमुख चेहरों के बारे में.

हैबतुल्ला अखुंदजादा

बात सबसे पहले अखुंदजादा की. फिलहाल हैबतुल्ला अखुंदजादा तालिबान का सुप्रीम लीडर है. साल 2016 में मुल्ला मंसूर अख्तर एक अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया था. उसके बाद हैबतुल्ला को नेता चुना गया. अखुंदजादा को इस्लामी कानून पर भरोसा रखने वाला कहा जाता है. तालिबान में उसकी पहचान ‘वफादारों के नेता’ के रूप में है. अखुंदजादा की कही बातें तालिबान के राजनीतिक, धार्मिक और सेना के मामलों में अंतिम होती हैं.

मई 2016 से पहले 15 साल तक अखुंदजादा पाकिस्तान के कुलचक की मस्जिद में पढ़ाने का काम करता था. धार्मिक प्रचार में लगा रहता था. फिर एक रोज वो अचानक गायब हो गया. फिर उसके तालिबान में शामिल होने की खबरें आईं.  अखुंदजादा एक मामूली सा धार्मिक नेता था, जो तालिबान में शामिल होने के बाद संगठन में आगे बढ़ता चला गया और सुप्रीम लीडर बन गया.

Haibtulla
हैबतुल्ला अखुंदजादा. फाइल फोटो- रॉयटर्स

हैबतुल्ला ने तालिबान के लड़ाकों को एकजुट करने में वक्त गुजारा और संगठन को मजबूती दी. दरअसल मुल्ला उमर की मौत के बाद संगठन काफी कमजोर होने लगा था. गुटबाजी के कारण बिखराव की स्थिति पैदा हो गई थी. लेकिन ऐसा माना जाता है कि हैबतुल्ला ने तालिबान लड़ाकों को एकजुट किया, और संगठन को नई ताकत दी. वही ताकत, जिसके दम पर अब तालिबान ने अफगानिस्तान में अपना राज कायम कर लिया है.

अखुंदजादा को अल-कायदा के सरगना अयमान अल जवाहिरी का खास माना जाता था. जवाहिरी भी हैबतुल्ला की सार्वजनिक तारीफ करता था. इससे भी अखुंदजादा के नेतृत्व को स्वीकार्यता मिली और तालिबान लड़ाकों के बीच उसकी बात को वजनदार माना जाने लगा.

मुल्ला अब्दुल गनी बरादर

मुल्ला अब्दुल गनी बरादर, तालिबान के संस्थापकों में से एक है. कतर में तालिबान के नेता के रूप में बरादर की पहचान है. अब अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद तय कि शासन में उसकी काफी अहम भूमिका होगी. कहा तो यहां तक जा रहा है कि वह अफगानिस्तान का नया राष्ट्रपति भी बन सकता है. अमेरिका के साथ तालिबान का जो समझौता हुआ था, उसमें अब्दुल गनी बरादर भी शामिल था. तालिबान का संस्थापक मुल्ला उमर भी बरादर पर काफी भरोसा करता था. दोनों ने मिलकर अमेरिकी फौज को बहुत नुकसान पहुंचाया था.

Mulla Baradar
मुल्ला बारादर. फाइल फोटो- PTI

साल 2010 में बरादर को सुरक्षाबलों ने गिरफ्तार कर लिया था. साल 2018 में उसकी रिहाई हुई. इस दौरान वह पाकिस्तान की जेल में रहा. अमेरिका ने जब तालिबान के साथ शांति की बात करनी चाही तो बरादर को रिहा कर दिया गया. बरादर को गुरिल्ला वॉर में माहिर माना जाता है. तालिबानी लड़ाकों में भी उसकी बहुत इज्जत है. अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई के साथ भी उसकी नजदीकियां मानी जाती है. एक दिन पहले ही करजई की तालिबान के नेताओं के साथ बैठक हुई है. कहा जा रहा है कि जल्द ही वह बरादर से मुलाकात करेंगे.

Talibanleadership

सिराजुद्दीन हक्कानी

सिराजुद्दीन हक्कानी, प्रमुख मुजाहिदीन कमांडर जलालुद्दीन हक्कानी का बेटा है. जलालुद्दीन हक्कानी, हक्कानी नेटवर्क का मुखिया था. हक्कानी एक जमाने में अमेरिका का खास था क्योंकि वो सोवियत के खिलाफ उनकी मदद करता था. आज हक्कानी नेटवर्क एक ऐसा समूह है जो पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर तालिबान की वित्तीय और सैन्य संपत्ति की देखरेख के लिए जाना जाता है.

सिराजुद्दीन हक्कानी वर्तमान में तालिबान का डिप्टी लीडर है. जानकारों का मानना ​​​​है कि यह हक्कानी ही है जिसने अफगानिस्तान में आत्मघाती बमबारी की शुरुआत की थी. भारतीय दूतावास पर हुए हमले और अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई पर हुए आत्मघाती हमलों के पीछे हक्कानी का हाथ माना जाता है. पिछले 20 साल से अमेरिका और नाटों की सेनाओं पर होने वाले फिदायीन हमलों में भी इसी संगठन का हाथ बताया जाता है.

मुल्ला मुहम्मद याकूब

मुल्ला मुहम्मद याकूब, तालिबान के संस्थापक मुल्ला मुहम्मद उमर का बेटा है. मोहम्मद याकूब तालिबान के सैन्य अभियानों का जिम्मा संभालता है. मोहम्मद याकूब का नाम कई बार सर्वोच्च नेता के लिए प्रस्तावित किया गया लेकिन याकूब ने अखुंदजादा का नाम प्रस्तावित किया क्योंकि उसे लगा कि वह बहुत छोटा है और उसके पास युद्ध के मैदान का पर्याप्त अनुभव नहीं था.

याकूब करीब 31 साल का है. उसे साल 2020 में तालिबान का मिलिट्री चीफ नियुक्त किया गया था. ऐसा कहा जाता है कि याकूब उदारवादी खेमे से है, और शांति के लिए बातचीत में भरोसा रखता है. याकूब ने देश से बाहर जाती किसी भी सेना के ऊपर कोई हमला नहीं किया. हालांकि काफी लोग ऐसा भी मानते हैं कि याकूब केवल एक चेहरा मात्र है और उसकी नियुक्ति महज दिखावे के लिए की गई है.

तालिबान में कई नेता और हैं, जो समय-समय पर दिखते रहे हैं. इनमें शेर मोहम्मद अब्बास, मुल्ला अब्दुल हकीम इश्काजाई और मुल्ला इब्राहीम सदर शामिल हैं.


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