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क्या होता है जब एक लड़की, जिसकी नई शादी हुई है, नौकरी ढूंढने जाती है

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रश्मि प्रियदर्शिनी पांडे
रश्मि प्रियदर्शिनी पांडे

रश्मि प्रियदर्शिनी एक स्वतंत्र लेखक/पत्रकार हैं. मैथिली-भोजपुरी अकादमी की संचालन समिति की सदस्य हैं. उन्हें ज़ी नेटवर्क और हमार टीवी में पत्रकारिता का लंबा अनुभव प्राप्त है. कई मंचों से काव्य-पाठ करती आ रही हैं. आजकल ‘बिदेसिया फोरम’ नाम के डिजिटल प्लेटफॉर्म का संचालन कर रही हैं. दी लल्लनटॉप के लिए एक लंबी कहानी ‘शादी लड्डू मोतीचूर‘ लिख रही हैं. शादी लड्डू मोतीचूर कहानी शहर और गांव के बीच की रोचक यात्रा है. कहानी के केंद्र में है एक विवाहित जोड़ी जिन्होंने शादी का मोतीचूर अभी चखा ही है. प्रस्तुत है इसकी 18वीं किस्त-

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भाग 18- इंटर्नशिप मिलने के बाद भी परेशान थी पूनम

उसके लिए हर चीज़ नई थी. ऑफिस का माहौल, यहां के लोग, कैंटीन में खाने के तरीके, वॉशरूम के मैनर्स, लोगों से बात करने का अंदाज़. कितनी ही चीज़ें थीं जो उसे सीखनी थीं. कई दिनों तक तो उसने ऑफिस में पानी एकाध घूंट ही पिया ताकि उसे वॉशरूम न जाना पड़े. उसे डर लगता था. डर इस बात का कि उससे ऐसी कोई गलती न हो जाए कि वो हंसी का पात्र बन जाए, कि उसका “बिहारी” या “देहाती” कह कर मज़ाक न उड़ाया जाए. लोगों से बात भी वो बहुत सोच-समझकर करती. उस दिन वो बहुत खुश हुई जब उसे किसी ने ये कहा कि ‘अरे! आप बिहारी हैं? बातचीत से तो नहीं लगता!’

जल्दी ही ऑफिस के रंग-ढंग उसे समझ में आने लगे. सबके बारे में कुछ न कुछ किस्से, बातें, अफवाहें या फिर सच. वो जो प्रोड्यूसर हैं नीलिमा…उम्र में तो बड़ी हैं लेकिन आता-जाता कुछ नहीं उसे. बॉस की केबिन में ही अक्सर पाई जाती है, कभी लंच करती तो कभी गॉसिप करती. सभी बड़े और कम मेहनत वाले प्रोग्राम उसे ही मिलते हैं.

बॉस, जो कि मुश्किल से बत्तीस-पैंतीस साल का है, पर दिखने में सत्ताईस-अट्ठाइस से ज्यादा नहीं लगता. गोरा-चिट्टा, धाराप्रवाह अंग्रेज़ी धीमे लहजे में बोलता सुदर्शन व्यक्तित्व वाला. हालांकि लड़कियों के लिए वो अलग से सॉफ्ट कॉर्नर रखता है पर वैसे इतना बुरा या शातिर नहीं. आजकल नई एंकर हिमानी के साथ उसके किस्से ऑफिस में तैर रहे हैं. परसो ही किसी के बर्थडे के अवसर पर सबके आग्रह पर बॉस ने “मैं शायर तो नहीं” गाया और सबकी निगाहें हिमानी के चेहरे का एक्सरे करने लगीं. हिमानी भी शरमाई सी खड़ी गुलाबी होती रही.

वो कैमरामैन कई चैनल्स में काम कर चुके हैं, अनुभवी हैं पर हैं बहुत ही नीच! लड़कियों को घटिया मेसेजेस भेजते रहते हैं. जो रिपोर्टर उनके अनुसार नहीं रहते उनके शूट में कोई न कोई परेशानी खड़ी कर देते हैं. दूसरी तरफ वो झांसी वाली लड़की गायित्री. सब उसे ‘झांसी की रानी’ कह कर बुलाते और दूर से ही नमस्कार करते. सबसे पंगे लेती रहती है और अपने मतलब का काम निकालती रहती है. कभी आफिस की सीढ़ियों पर बैठी किसी के कंधे से लगी दुखड़ा रो रही है तो कभी खामाखा ही किसी से उलझ रही है.

सबके किस्से एक तरफ और मीनाक्षी त्यागी एक तरफ. बड़ी-बड़ी आंखों वाली वो खूबसूरत और मेहनती लड़की जिसने रिपोर्टिंग से शुरूआत की, स्क्रिप्टिंग पर खूब मेहनत की और आज इस चैनल की सबसे काबिल एंकर है. आधा ऑफिस तो इसी चांद के पीछे चकोर बना घूमता है. हंसी तो अर्जुन की दीवानगी देखकर सबको आती है जो वहां मेकअप आर्टिस्ट है. अर्जुन, मीनाक्षी का मेकअप करता ज़रूर है, पर वो पूरे विश्वास से सबसे कहता कि मीनाक्षी को मेकअप को ज़रूरत कतई नहीं है.

पूनम जिस ग्रुप में थी उसमें एक मोनिका भी थी. मोनिका भल्ला जिसने पीकर पिछली पार्टी में इतना हो-हल्ला किया कि एक महीने तक ऑफिस में अफवाहों का बाज़ार गरम रहा. हल्ला तो उस थ्रीडी आर्टिस्ट का भी रातों-रात हो चुका था जिसने रात की शिफ्ट में आफिस में कुछ उटपटांग साइट्स सर्च की और न जाने कैसे ये खबर लीक हो गई. चर्चा इस बात की भी थी कि उसी थ्रीडी आर्टिस्ट ने कैफ़ेटरिया में किसी लड़की का रास्ता रोक लिया और उस लड़की ने उसे खींच के एक थप्पड़ रसीद कर दी. इस बात को उन दोनों ने तो किसी से नहीं कहा पर वहां मौजूद सीसीटीवी कैमरे ने इस खबर को हर एक तक पहुंचा दी. ये सारी खबरे पूनम को उसकी पहाड़ी सहकर्मी रौशनी देती.

पूनम इन किस्सों और अफवाहों से बहुत डरती थी. वो जानती थी कि जिस माहौल से वो आई है वहां ऐसी एक खबर उसकी जिंदगी भर के सुकून को निगल सकती है. वो बहुत कम बोलती और अपने काम से मतलब रखती. वो मन ही मन इस बात की शुक्रगुज़ार थी कि उसकी टीम बहुत सही है. सबसे ज़्यादा सपोर्टिव और ग़ज़ब के प्रतिभावान थे उसके बॉस सिन्हा सर. सिन्हा सर न सिर्फ कलम के बादशाह थे बल्कि सुर के भी बहुत तगड़े जानकार थे. किसी के भी जन्मदिन के अवसर पर उनकी स्वरलहरियां गूंजती और पूरा ऑफिस झूम जाता. सिन्हा सर थिएटर आर्टिस्ट भी रह चुके थे और शेरो, ग़ज़लों और कविताओं पर उनकी समान रूप से पकड़ थी. पर दाग किसमें नहीं…उनमें भी था. वो सिर्फ ‘सुर’ ही नही ‘सुरा’ के भी शौकीन थे. और ये सिर्फ शौक नहीं उनकी कमज़ोरी बन चुकी थी. इस चीज के लिए वो इस क़दर बदनाम हो चुके थे कि शाम के बाद कितना भी ज़रूरी हो, बॉस तक उनको फ़ोन नहीं करता.

उस दिन पूनम अपनी टेबल पर झुकी कोई स्क्रिप्ट लिख रही थी. अचानक उसे लगा कि पीछे से कोई झांक रहा है. उसे बुरा लगा. उसने खुद को समेटा और लिखना जारी रखा पर पीछे कोई है ये उसे लगातार महसूस हो रहा था. उसने पलट कर देखा. चेहरे पर मुस्कान लिए ये…कौन है…कौन है? कहीं तो देखा है इसे! अचानक पूनम को याद आया- ‘अरे! ये तो वही है जिसने इंटरव्यू वाले दिन उसे रास्ता बताया था.’ कायदे से पूनम को उसे हाय/हेलो बोलना चाहिए था पर उसकी हरकत देख पूनम का मन न हुआ कि वो उससे बात करे. पता चला उसका नाम सुमित है और उसी टीम में असिस्टेंट प्रोड्यूसर है. उसे पता नही क्यों सुमित से चिढ़ सी होती. सबसे बोलता-बतियाता हमेशा मजाक के ही मूड में रहता वो. पूनम को बॉस ने अपने केबिन में बुलाया था. उसने बॉस की चर्चाएं सुन रखी थी. उसे बहुत डर लग रहा था. सुमित वही पास ही खड़ा था. उसने गौर से उसे देखते हुए पूछा- ‘क्या हुआ? सब ठीक?’

पूनम ने ऊपर से लापरवाही दिखाते हुए कहा- ‘जी..जी हां, सब ठीक है.’

‘आपको सर ने बुलाया है न! आप मिल के आ गईं?’

‘वो…हाँ मैं..जा ही रही हूं.’

सुमित ने उसे दो पल देखा और कहा- ‘पूनम जी, ये इंसान का व्यवहार होता है, उसका ऑरा होता है जिसकी वजह से उसे इज़्ज़त मिलती है या नहीं मिलती. अगर आपका ऑरा सशक्त है तो किसी की हिम्मत नहीं कि वो आपका बाल भी बांका करे. किसी से मत डरिए.

इतना कहकर सुमित बिना कोई जवाब सुने एडिट की तरफ चला गया. पूनम हैरान सी उसे कुछ पल देखती रही फिर सधे कदमों से बॉस के केबिन की तरफ चली. हल्के नॉक की आवाज़ पर बॉस ने उसे देखा और अंदर आने का इशारा किया. कुछ औपचारिक बातों के बाद बॉस ने सीधे ही अपनी बात कही- ‘पूनम, आपकी क्रिएटिविटी और सिन्सिएरिटी को देखते हुए मैनेजमेंट आपको ‘असिस्टेंट प्रोड्यूसर’ के रूप में इस चैनल में देखना चाहती है. आपको कोई ऐतराज तो नहीं?’

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पूनम की खुशी का ठिकाना ना रहा. वो ‘थैंक्यू,थैंक्यू सर’ कहती रह गई. बॉस ने मुस्कुराते हुए उसे हाथ मिलाकर बधाई दी. बाहर आते ही सबसे पहले उसकी निगाहें सुमित को ढूंढ़ने लगी. वो कहीं दिख नही रहा था. तब तक सिन्हा सर के साथ पूरी टीम ने उसे बधाइयां देनी शुरू कर दी. सबको जल्दी-जल्दी धन्यवाद देती पूनम एकांत पाना चाहती थी ताकि चन्दर को खुशखबरी दे.

‘हेलो…हां… लंच कर लिए क्या?’

जी मोहतरमा! कर लिए. आपके हाथ के बने काले चने और चावल के आटे की पुरियों ने तो आज कमाल कर दिया. मन तो करता है जिन हाथों ने बनाया है उन्हें…’

पूनम हंसती हुई उसे टोक पड़ी- ‘बस,बस. अच्छा सुनिए. एक खुशखबरी है.’

‘हां, हां बोलो ना…कौन सी खुशखबरी हमारी मोहतरमा को खुश कर रही है हम भी तो जानें!’

‘मुझे यहां अगले महीने से असिस्टेंट प्रोड्यूसर के पद पर काम करना है. मेरी इंटर्नशिप खत्म. हेलो-हेलो, आप सुन रहे हैं न?’

उधर सन्नाटा था. पूनम को पल भर को लगा कॉल कहीं डिसकनेक्ट तो नहीं हो गई. उसने मोबाइल को कान से हटा कर देखा. कॉल अब सच में डिस्कनेक्ट कर दी गई थी. उसकी आंखें छलक उठी. वो सब समझ रही थी. आज ही नहीं पहले दिन से ही. वो बस चन्दर का इंतज़ार कर रही थी कि वो ईमानदारी से कह दे जो उसके दिल मे है. अगर उसे उसका जॉब करना पसंद नहीं तो भी कह दे. ये झूठ-मुठ का दिखावा न सिर्फ चन्दर को बल्कि पूनम को भी परेशान कर रहा है. शीशे की बड़ी सी खिड़की से दूर तक शहर दिख रहा था. उसने उसी शीशे की खिड़की पर अपना सर टिकाया और सिसक पड़ी. इस तरह आधी-अधूरी, कही-अनकही बातों के सहारे रहना मुश्किल है. वो आज ही खुल कर चन्दर से बात करेगी. उसने खुद को समझाया और जैसे ही पलटी सामने खड़े सुमित को देख चौंक गई. सुमित ने उसकी रोई-रोई आंखों पर गौर तो ज़रूर किया पर बधाई देते हुए कहा- ‘मैनें कहा था न पूनम जी! डरते नहीं किसी से. बधाइयां आपको ढेर.ढेर…ढेर…’

पूनम ने उसे बीच मे ही टोकते हुए ‘शुक्रिया’ कहा और आगे बढ़ने लगी. उसे आज भी ये पागल सा बंदा इरिटेटिंग लग रहा था. अगले ही पल सुमित फिर सामने था- ‘पूनम जी, आपको पता है न मुझे और आपको एक ही प्रोग्राम में रखा गया है.’

‘पर आप तो क्राइम में थे न!’

‘अरे क्या बात कर रही हैं मैडम! क्राइम में नहीं, क्राइम के प्रोग्राम में था. हां…हसीनाओं का दिल चुराना अगर क्राइम है तो..’

‘देखिए सुमित जी, मुझसे इस तरह की बातें कभी मत करिएगा.’ पूनम सुलग उठी. वैसे भी उसे ये लड़का सख्त नापसंद था.

‘अरे,अरे! आपको याद है आप आखिरी बार खुल के कब हँसी थीं पूनम जी? क्यों इतनी सख़्त हैं यार आप? थोड़ा हंस लेंगी न…तो ये जो रोई-रोई आंखें हैं उनका खारापन कम होगा. ज़िंदगी को हंसते हुए भी जिया जा सकता है.’ कहते हुए वो बाइक की चाभियां घुमाता जाने लगा.

पूनम कंफ्यूज सी वही खड़ी रह गई. उसे लगा कहीं उसने चन्दर का गुस्सा सुमित पर तो नहीं निकाल दिया. इससे पहले कि वो पर्स थामे घर की ओर चलती, वो जिन्न की तरह फिर हाज़िर था- ‘मेरा नंबर ले लीजिए. एक ही टीम में हैं हम और कल हमें नए प्रोग्राम के शूट पर साथ ही जाना है.’

पूनम ने पीछा छुड़ाने के लिये बेमन से उसका नंबर सेव किया. रास्ता भर वो सोचती रही कि आज चन्दर से खुल कर बात करेगी. वो हर रिश्ते में ईमानदारी की कायल थी फिर ये तो पति-पत्नी का रिश्ता है. वो पूछेगी कि उसे उसका जॉब करना पसंद है या नहीं. ये दोहरा किरदार अब वो नहीं झेलेगी. उधर चन्दर भी यही सोच रहा था. पहले तो उसने पूनम की जॉब को इतना सीरियसली लिया ही नहीं था कभी. उसे लगा एक दो दिनों का फितूर है बस. जब मेट्रो और ऑटो के धक्के खाएगी तो खुद ही नौकरी का नशा सर से उतर जाएगा.. पर पूनम तो संघर्षों की आंच में कंचन सी निखरती जा रही थी. चन्दर ने भी सोच लिया कि उसे क्या करना है अब.

‘तो…क्या सोचा है तुमने? अब तो ये नौकरी हो गई बाकायदा… कंटिन्यू करोगी?’ छ्त पर बैठे दोनों खाने के बाद चाय लेकर आमने-सामने थे. पूनम उसके सवाल से हैरान रह गई. पर उसने हड़बड़ा कर जवाब देने से बेहतर ये सोचा कि पहले चन्दर के मन में क्या है, ये जान ले.

‘आपको क्या लगता है? क्या करना चाहिए?’

‘यार! हो गया न! तुमने देख लिया न कि हां, ऐसे होती है नौकरी. गांव जाकर बताना कि तुमने नौकरी भी की है.’

कुछ देर रुककर चन्दर आगे बढ़ता है- ‘नौकरी हमारी मजबूरी थोड़ी है पूनम? हमें पैसे की कमी तो है नहीं!’

सर हिलाती पूनम ने गहरी आंखों से चन्दर को देखते हुए अगला सवाल दागा- ‘अगर आपको यूं इंटर्नशिप के बाद जॉब ऑफर हुई होती तो आप छोड़ देते?’

‘मेरी बात अलग है यार. तुम्हें बस एक अनुभव ही तो लेना था न! ले लिया. अब घर पर रहो. घर का ध्यान दो. अम्मा भी कई बार खुशखबरी का पूछ चुकी है. हमें वो सब भी तो सोचना है न!’ कहते हुए चन्दर ने पूनम के हाथ पर हाथ रखा. अब तक पूनम के सब्र का घड़ा भर चुका था. बिजली की गति से उसके हाथ को हटाती, ज़ोर से आती सिसकियों को रोकती वो बेडरूम में भागती चली गई.

अचानक उसके मोबाइल पर वाट्सएप्प मैसेज आया. सुमित का मैसेज! आज ही तो उसका नंबर लिया था. पर अपना नंबर तो दिया नहीं था फिर कैसे मेसेज कर दिया उसने! इससे पहले कि वो आज का मेसेज पढ़ती, उसकी नजर सुमित के ही नंबर से एक महीना पहले आए मेसेज पर पड़ी. ‘ओह्ह, तो इंटरव्यू वाले दिन सुमित ने ही मेसेज किया था!’

वो हैरान रह गई. पूनम झिलमिलाती आंखों से आज का मेसेज पढ़ती है-

“ज़िन्दगी सोज़ बने साज़ न होने पाए”


…टू बी कंटीन्यूड!


भाग 1 दिल्ली वाले दामाद शादी के बाद पहली बार गांव आए हैं!

भाग 2 दुल्हन को दिल्ली लाने का वक़्त आ गया!

भाग 3 हंसती खिलखिलाती सालियां उसके इंतज़ार में बाहर ही बरसाती में खड़ी थीं

भाग 4 सालियों ने ठान रखा है जीजाजी को अनारकली की तरह नचाए बिना जाने नहीं देंगे

भाग 5 ये तो आंखें हैं किसी की… पर किसकी आंखें हैं?

भाग 6 डबडबाई आंखों को आंचल से पोंछती अम्मा, धीरे से कमरे से बाहर निकल गई!

भाग 7 घर-दुआर को डबडबाई आंखों से निहारती पूनम नए सफ़र पर जा रही थी

भाग 8 काश! उसने अम्मा की सुन ली होती

भाग 9 औरतों को मायके से मिले एक चम्मच से भी लगाव होता है

भाग 10 सजना-संवरना उसे भी पसंद था पर इतना साहस नहीं था कि होस्टल की बाउंडरी पार कर सके

भाग 11 ये पीने वाला पानी खरीद के आता है? यहां पानी बेचा जाता है?

भाग 12 जब देश में फैशन आता है तो सबसे पहले कमला नगर में माथा टेकते हुए आगे बढ़ता है

भाग 13 अगर बॉस को पता चला कि मैंने घूमने के लिए छुट्टी ली थी, तो हमेशा के लिए छुट्टी हो जाएगी

भाग 14 बचपन से उसकी एक ही तो इच्छा थी- ‘माइक हाथ में थामे धुंआधार रिपोर्टिंग करना’

भाग 15 उसे रिपोर्टर बनना था रिसेप्शनिस्ट नहीं

भाग 16 ज्यादा से ज्यादा क्या होगा? जॉब नहीं मिलेगी? यही न? बिंदास जा. इंटरव्यू दे. जो होगा, देखा जाएगा

भाग 17 इंटर्नशिप मिलने के बाद भी क्यों परेशान थी पूनम?


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