Submit your post

Follow Us

इस इंसान को थैंक्यू बोलिए, इसकी वजह से दुनिया में लाखों प्रेम कहानियां बनीं

कहते हैं कि ग्राहम बेल अपनी बीवी की एक तस्वीर साथ रखते थे. उस पर लिखा था- वो लड़की, जिसकी वजह से टेलिफोन का अविष्कार हुआ. ये है कहानी टेलिफोन बनने की.

साल 1949. हिंदुस्तान में एक फिल्म बनी. नाम था, पतंगा. डायरेक्टर एच एस रावली. इस फिल्म में एक गाना था. स्टेज पर पांच बालाएं. सफेद शर्ट. काली बेल्ट. कुछ हल्के रंग की स्कर्ट. सब थिरक रही हैं. स्टेज पर बाईं ओर एक शख्स खड़ा है. थुलथुल पेट. मुंह में सिगार. हाथ में चोंगा थामकर वो कहता है-

हैलो. हिंदुस्तान का देहरादून. हैलो. मैं रंगून से बोल रहा हूं. मैं अपनी बीवी रेणुका देवी से बात करना चाहता हूं.

फिर वो शख्स अपने सामने इठला रही बालाओं को देखता है. अपने थुलथुल से पेट को थोड़ा हिलाता है. शायद यूं नाचता है. फिर अपने मुंह से लगी सिगार से धकाधक धुआं निकालता है. और वहीं एक खंभे से टेक लगाकर खड़ा हो जाता है. अगले सीन में एक सलवार-कुर्ता पहने, चुन्नी ओढ़े एक युवती स्टेज पर नजर आती है. और फिर शमशाद बेगम की आवाज में एक गाना गूंजता है:

मेरे पिया गए रंगून, किया है वहां से टेलिफून… तुम्हारी याद सताती है… जिया में आग लगाती है…

इस गाने की थीम है टेलिफोन. ये आइडिया कि रंगून में बैठा पति देहरादून में अपनी पत्नी को फोन मिला रहा है. दोनों बातें कर रहे हैं. वो एक-दूसरे को मिस कर रहे हैं और ये बताने के लिए उनके पास टेलिफोन का सहारा है. आप प्रेम कहानियों में से टेलिफोन को हटा दीजिए और देखिए, कैसे आधी सहूलियत खत्म हो जाती है.
इस गाने की थीम है टेलिफोन. ये आइडिया कि रंगून में बैठा पति देहरादून में अपनी पत्नी को फोन मिला रहा है. वो एक-दूसरे को मिस कर रहे हैं और ये बताने के लिए उनके पास टेलिफोन का सहारा है.

7 मार्च को ही टेलिफोन का पेटेंट कराया था ग्राहम बेल ने
7 मार्च, 1876 को ग्राहम बेल ने टेलिफोन का पेटेंट कराया था. इस पर लिखते हुए इस गाने से बेहतर कुछ नहीं सूझा. सोचिए. टेलिफोन न होता, तो देहरादून में बैठी बीवी रंगून में बैठे अपने पिया से कैसे बात करती? बचपन में एक बार एक कहानी पढ़ी थी. चंपक वन का राजा शेर बड़ा मक्कार होता है. रोज किसी न किसी जानवर को मार डालता है. बेचारे जानवर बड़े त्रस्त रहते हैं. एक दिन गिल्लू गिलहरी शहर से जंगल लौटती है. वो एक सॉल्यूशन देती है. टेलिफोन. उसकी सलाह पर सारे जानवर फोन लगवा लेते हैं. शेर की गुफा के बाहर चिंची कोयल का घर होता है. जैसे ही शेर गुफा से निकलता है, चिंची बंटी बंदर को फोन मिला देती है. कहती है- शेर चला है, चंपत हो जा. फिर बंटी किसी और को बताता है. वो और किसी और को. एक फोन की वजह से सारे जानवरों का चैन-सुकून लौट आता है. उस कहानी का अंत अधूरा था मगर. आखिर में लिखा होना चाहिए था. कि चंपक वन के जानवरों ने टेलिफोन बनाने वाले वैज्ञानिक ग्राहम बेल को थैंक यू बोला.

एक टेलिफोन जाने कितनी कहानियों का नायक है. कई प्रेम कहानियां हैं. उनमें से टेलिफोन को हटा दीजिए. और देखिए कि कैसे प्रेम करने की सहूलियत कम हो जाती है. सोचिए, आपको कबूतर से संदेशा भेजना पड़े और वो किसी और के हाथ पड़ जाए. एक फोन के न होने से चीजें कितनी मुश्किल हो जाती हैं. इस टेलिफोन की कहानी के नायक हैं अलेक्जेंडर ग्राहम बेल.

उनकी मां सुन नहीं सकती थीं. मगर बहुत अच्छा पियानो बजाती थीं. ग्राहम बेल की जिंदगी में उनके आस-पास कई ऐसे लोग थे. जो सुन नहीं सकते थे. बचपन में, जवानी में, कॉलेज में बतौर प्रफेसर पढ़ाते हुए. हर कहीं. हर दौर में. उनकी पत्नी भी नहीं सुन सकती थीं.
उनकी मां सुन नहीं सकती थीं. मगर बहुत अच्छा पियानो बजाती थीं. उनकी पत्नी भी नहीं सुन सकती थीं. ग्राहम बेल की जिंदगी में उनके आस-पास कई ऐसे लोग थे. जो सुन नहीं सकते थे. बचपन में, जवानी में, कॉलेज में बतौर प्रफेसर पढ़ाते हुए. हर कहीं. हर दौर में.

इस कहानी में एक कुत्ता भी है
3 मार्च, 1847. ये ग्राहम की पैदाइश का दिन था. ब्रिटेन में एक एडिनबर्ग नाम की जगह है. वहीं पैदा हुए थे. उनके दादा, पापा सब बड़े जाने-माने लोग थे. जो लोग सुन नहीं सकते, उनके लिए और उनके साथ काम करते थे. यूं तो ग्राहम की मां भी थीं, जो सुन नहीं सकती थीं. मतलब समझिए कि बेल परिवार की रोजी-रोटी उन लोगों से चलती थी, जिनके लिए आवाज का कोई मतलब नहीं था. एक दिन ग्राहम के पापा ने कहा, तुम कोई बोलने वाली मशीन क्यों नहीं बनाते. ग्राहम को आइडिया अच्छा लगा. उनके पास तब एक कुत्ता था. ट्रोव. ग्राहम ने उसे ललचाने को खाने की अच्छी-अच्छी चीजें दीं. कुत्ते ललचाने के बाद कई तरह की अजीब-अजीब आवाजें निकालते हैं. तो ट्रोव भी यूं ही गुर्रा रहा था. ग्राहम ने उसका जबड़ा पकड़ा और उसे हिलाने लगे. जैसे पपेट को बुलवाते हैं, वैसे ही. ट्रोव के मुंह से निकली आवाज को सुनकर लगा, मानो वो बोल रहा हो. कि दादी, तुम कैसी हो? आगे चलकर जब ग्राहम बेल ने टेलिफोन बनाया, तो ये वाली बात उनको याद रही.

ग्राहम कोई ऐसी चीज बनाना चाहते थे, जो न सुन पाने वालों की मदद कर सके. ये ही लोग उनकी प्रेरणा थे. वो कहते थे:

आवाज की अहमियत पूछना ऐसा ही है, मानो कोई जिंदगी की अहमियत पूछ रहा हो.

‘जो सुन नहीं सकते, वो आवाज देख लें’
1870 आते-आते ग्राहम फोनाटोग्राफ जैसी कोई चीज बनाना चाहते थे. ये मशीननुमा चीज आवाज रिकॉर्ड करती थी. इसको सबसे शुरुआती वॉइस रिकॉर्डर समझिए. मगर इस फोनाटोग्राफ के डिजाइन में एक बड़ी मुश्किल थी. ये आवाज रिकॉर्ड तो करती थी, मगर इसमें कोई प्लेबैक नहीं था. ग्राहम इसी की तर्ज पर कुछ ऐसा बनाना चाहते थे. जिससे इंसान के कान ध्वनि तरंगों को संकेतों में बदल सकें. कुछ यूं मानो कोई बहरा इंसान शब्दों की आवाज को देख पाए. मतलब, बिना सुने भी उसे समझ पाए. क्योंकि वो आवाज को सुन नहीं सकता.

टेलिफोेन सयाना होकर मोबाइल बन गया. मगर आइडिया वो ही है. कि किसी से बात करने के लिए सशरीर उसके पास मौजूद होना जरूरी नहीं. दुनिया के किसी भी कोने से किसी भी कोने में बात की जा सकती है.
टेलिफोेन सयाना होकर मोबाइल बन गया. मगर आइडिया वो ही है. कि किसी से बात करने के लिए सशरीर उसके पास मौजूद होना जरूरी नहीं. दुनिया के किसी भी कोने से किसी भी कोने में बात की जा सकती है.

और फिर आया टेलिफोन बनाने का आइडिया
ग्राहम ने समझा कि इंसानी कान आवाज को कैसे सुन पाता है. अब वो इसी तर्ज पर एक ऐसी मशीन बनाने में लग गए जो ध्वनि तरंगों को एक किस्म की आवाज में बदल सके. इसी बीच उन्हें एक आइडिया आया. कि क्या ऐसी इलेक्ट्रिक तरंगें बन सकती हैं जो कि एक टेलिग्राफ तार की मदद लेकर आवाज को एक जगह से दूसरी जगह ले जाएं. ऐसे ही जैसे हवा ध्वनि तरंगों को बोलने वाले के पास से सुनने वाले के पास तक ले जाती है. और तभी उन्हें टेलिफोन जैसी किसी चीज को बनाने का खयाल आया. कि टेलिफोन का रिसीवर इंसान अपने कान से सटाए और ये एक किस्म के मुंह का काम करे. करंट के कारण रिसीवर के मेंब्रेन्स कांपेंगे. वो कंपन सुनने वाले के काम से टकराएगा. वहां भी कंपन होगा. और इस तरह एक के मुंह से निकली बात दूसरे के कानों तक पहुंच जाएगी.

उस दिन जादू हो गया…
10 मार्च, 1876. ग्राहम बेल का एक वर्कशॉप था. बॉस्टन में. उसके दो अलग-अलग कमरों में उन्होंने दो रिसीवर लगाए. रिसीवरों को तार से जोड़ा. उनमें बैट्री लगाई. एक रिसीवर के पास ग्राहम थे. एक के पास उनके सहायक थॉमस वॉटसन. ग्राहम ने रिसीवर उठाकर कहा:

मिस्टर वॉटसन, इधर आ जाइए. मुझे आपसे काम है.

ये टेलिफोन का शुरुआती डिजाइन है. वक्त बीतने के साथ इसका रूप-रंग बदला.
ये टेलिफोन का शुरुआती डिजाइन है. जिस शख्स ने हाथ में रिसीवर पकड़ा हुआ है, वो ग्राहम बेल हैं.

‘वो लड़की जिसकी वजह से टेलिफोन का अविष्कार हुआ’
जादू हो चुका था. इतिहास बन चुका था. ग्राहम की कही बात तारों से होती हुई वॉटसन तक पहुंच चुकी थी. उस दिन दोनों रातभर लगे रहे. कभी फोन पर ही एक-दूसरे को किताबें पढ़कर सुनाते. कभी गाना सुनाते. ग्राहम बेल ने जिंदगी भर ही बहरे लोगों के लिए काम किया. उनके लिए एक खास स्कूल बनाया. बॉस्टन यूनिवर्सिटी में ऑरेट्री के प्रफेसर बने. उन्होंने जिनसे शादी की, वो भी सुन नहीं सकती थीं. कहते हैं कि वो अपने पास अपनी पत्नी की एक तस्वीर रखते थे. जिस पर लिखा था: वो लड़की, जिसके लिए टेलिफोन का अविष्कार हुआ.

‘वो दिन आएगा, जब घर-घर में पहुंच जाएगा टेलिफोन’
1877 आते-आते ब्रिटेन के बड़े शहरों में फोन लगना शुरू हो गया. 20वीं सदी की शुरुआत होते-होते ये टेलिफोन ब्रिटेन के बाहर पहुंच चुका था. इस टेलिफोन ने जैसे लोगों की दुनिया ही बदल दी. एक शहर में बैठा आदमी दूसरे शहर में बैठे आदमी से बात कर सकता था. फिर टेलिफोन शहर और देश की सीमाओं से पार विदेश में बैठे इंसान से भी बातें करवाने लगा. जाने कितनी मुहब्बतें आबाद कीं इस टेलिफोन ने. जाने कितने दिलों को जोड़ा. जाने कितनी खुशखबरियां इसके सहारे ठिकाने पर पहुंचीं. जाने कितनों के काम आया ये. आज हम सोच भी नहीं सकते कि बिना फोन के कैसे जिया जाए? ये सब ग्राहम बेल की बदौलत. वॉटसन के साथ किए गए अपने प्रयोग के बाद ग्राहम बेल ने अपने पिता को एक खत भेजा. उसमें लिखा:

वो दिन भी आएगा, जब टेलिग्राफ की तारें हर घर में पहुंच जाएंगी. ऐसे ही, जैसे पानी और बिजली का कनेक्शन पहुंचता है. लोग अपने घर से बाहर निकले बिना अपने दोस्तों से बात कर सकेंगे.

कितनी सारी जरूरी चीजें हैं, जो हमें सीखनी नहीं पड़ीं. कोई और उसे खोज गया है. हमको पैदा होने के साथ ही उसके खोजे, उसके किए की विरासत मिल जाती है.
कितनी सारी जरूरी चीजें हैं, जो हमें सीखनी नहीं पड़ीं. कोई और उसे खोज गया है. हमको पैदा होने के साथ ही उसके खोजे, उसके किए की विरासत मिल जाती है. ये ग्राहम बेल के जवानी के दिनों की तस्वीर है. और ये उनके बनाए टेलिफोन की सबसे शुरुआती तस्वीरें.

कितने सारे लोग हैं शुक्रिया बोलने को
उनकी लिखी बात सच निकली. टेलिफोन था, तो मोबाइल आया. कल को कुछ और विकसित आएगा. मगर इसकी जड़ ग्राहम बेल से जुड़ी रहेंगी. जब ग्राहम बेल गुजरे, तो अमेरिका और कनाडा की सारी टेलिफोन सेवाएं एक मिनट के लिए बंद कर दी गईं. उस इंसान के सम्मान में, जिसने टेलिफोन बनाया था. बेल और उनके जैसे अनगिनत लोगों को शुक्रिया. जिस शख्स ने पहली बार दो पत्थरों को रगड़कर आग निकाली, उसको भी थैंक्यू. जिसने पहली बार ये जाना कि बीज बोने से अनाज-फल निकलते हैं. जिसने पहली बार कुआं खोदा. जिसने पहले-पहल पहिया बनाया. जिसने पहली नहर खोदी. जिसने पहला बांध बनाया. जिसने पहली बार सिर के ऊपर की छत बांधी. उनकी जिंदगी मुश्किल रही होगी. मगर हमें ये सब पका-पकाया मिल गया. उनकी वजह से हमारी जिंदगी कितनी आसान बन गई.


ये भी पढ़ें: 

एकाएक हार्ट अटैक आया, तो इस आदमी ने जान बचाने के लिए नोट उड़ा दिए

वीडियो: लिफ्ट में सूसू कर रहा था, लिफ्ट ने बदला ले लिया

18 फरवरी को शादी, 23 को गिफ्ट खोल रहे थे और हुआ भयानक विस्फोट…

ये लड़का अंडे दे रहा है और डॉक्टर दीदा फाड़कर देख रहे हैं

बत्तीसगामा: यहां जो दहेज लेता है, उसे समाज से निकाल देते हैं


चिप्स के पैकेट में हवा का जो कारण आपको पता है, वो आधा सच है

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

अलवारो मोर्टे ने वेटर तक का काम किया हुआ है. और एक वक्त तो ऐसा था कि बकौल उनके कैंसर से जान जाने वाली थी.

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

हीरो बनने आए शरत सक्सेना कैसे गुंडे का चमचा बनने पर मजबूर हुए?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

एक वक़्त इंडस्ट्री में टॉप पर थे कुणाल और उनके गाने पार्टियों की जान हुआ करते थे.

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

IPL स्कैंडल, मॉडल्स के आरोप, अंडरवर्ल्ड कनेक्शंस के आरोप, एक्स वाइफ के इल्ज़ाम सब हैं इस कहानी में.

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रेन्सन की कहानी, जहां भी गए तहलका मचा दिया.

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

पहला चुनाव हार गए थे, बीजेपी ने राज्य की जिम्मेदारी सौंपी है.

'तड़प-तड़प के' जैसा प्रेमियों का ब्रेकअप एंथम देने वाले सिंगर के के आजकल कहां हैं?

'तड़प-तड़प के' जैसा प्रेमियों का ब्रेकअप एंथम देने वाले सिंगर के के आजकल कहां हैं?

उनके गाए 'पल' गाने के बगैर आज भी किसी कॉलेज का फेयरवेल पूरा नहीं होता.

कर लिया योगा? अब क्विज खेलने से होगा

कर लिया योगा? अब क्विज खेलने से होगा

आन्हां, ऐसे नहीं कि योग बस किए, दिखाना पड़ेगा कि बुद्धिबल कित्ता बढ़ा.

तमिल जनता आखिर क्यों कर रही है 'फैमिली मैन-2' का विरोध, क्या है LTTE की पूरी कहानी?

तमिल जनता आखिर क्यों कर रही है 'फैमिली मैन-2' का विरोध, क्या है LTTE की पूरी कहानी?

जब ट्रेलर आया था, तबसे लगातार विरोध जारी है.

माधुरी से डायरेक्ट बोलो 'हम आपके हैं फैन'

माधुरी से डायरेक्ट बोलो 'हम आपके हैं फैन'

आज जानते हो किसका हैप्पी बड्डे है? माधुरी दीक्षित का. अपन आपका फैन मीटर जांचेंगे. ये क्विज खेलो.