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ताकत, पैसे और सफलता के चरम पर एक ओलंपिक मेडलिस्ट के हत्यारोपी बन जाने की कहानी

“2010 की बात है. पहलवान सुशील कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीता था. भरे स्टेडियम उसे तिरंगा लहराते देख मेरे बेटे सागर के दिल में भी पहलवान बनने की हसरत पैदा हुई. बचपन के सारे शौक छोड़कर 15 बरस की उम्र में सागर मेरे साथ दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम पहुंच गया. महाबली सतपाल के साथ-साथ सुशील कुमार को भी उसने गुरु माना था.

सागर ने जब जूनियर नेशनल में गोल्ड जीता तो मुझे लगा कि एक दिन मेरा बेटा भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकेगा. लेकिन ऐसा हो नहीं सका. 4 मई 2021 को सागर को पीट-पीटकर मार डाला गया. हत्या का आरोप भी किस पर? उसी सुशील कुमार पर, जो मेरे बेटे का आदर्श था.”

अब तक आपने जो पढ़ा, वो शब्द हैं अशोक धनखड़ के. उन्होंने दैनिक भास्कर अख़बार से ये बातें कही थीं. अशोक पेशे से दिल्ली पुलिस में हेड कॉन्सटेबल हैं. और फिलहाल पहचान से एक युवा, होनहार पहलवान सागर धनखड़ के पिता. पिता, जिसे ऐतबार था कि बेटा एक रोज़ पहलवानी में किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा फहराएगा. पिता, जिसके बेटे की बीते 4 मई को दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. हत्या का इल्ज़ाम किस पर? लीजेंडरी रेसलर सुशील कुमार पर.

अब सुशील कुमार की पहचान कैसे कराऊं आपसे? दो बार के ओलंपिक मेडल विजेता सुशील कुमार. तीन बार के कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडलिस्ट सुशील कुमार. पद्म श्री, अर्जुन अवॉर्ड, राजीव गांधी खेल रत्न से सम्मानित सुशील कुमार. या फिर हत्यारोपी सुशील कुमार, जो पिछले एक पखवाड़े से ज्यादा समय तक पुलिस से बचते फिरे. जिनके सिर पर पुलिस ने एक लाख रुपए का इनाम रख दिया था. आज बात इस पूरे प्रकरण पर. तफ़्सील से.

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पहलवान सुशील कुमार हत्या के एक मामले में कई दिनों तक पुलिस से बचते रहे. (फाइल फोटो)

4 मई को क्या हुआ था?

4 मई 2021 की तारीख़. रात के करीब 11 बजे थे. दिल्ली के मॉडल टाउन के एम ब्लॉक इलाके में कुछ लोग एक फ्लैट पर पहुंचे. इन लोगों के हाथ में हॉकी स्टिक और डंडे थे. आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोप है कि इन लोगों ने यहां रहने वाले युवा रेसलर सागर धनखड़ और उसके साथियों को अगवा कर लिया. पीड़ितों ने पुलिस को जो बयान दिया है उसके मुताबिक, सुशील कुमार नीचे कार में बैठे थे हाथ में पिस्टल लिए. गन पॉइंट पर होंडा सिटी कार में सागर और उसके साथियों को छत्रसाल स्टेडियम ले जाया गया. वही छत्रसाल स्टेडियम, जिसे देश में कुश्ती के सबसे बड़े केंद्र के रूप में जाना जाता है. यहां से योगेश्वर दत्त और रवि दहिया जैसे पहलवान निकले हैं. वही छत्रसाल स्टेडियम जहां सुशील कुमार और उनके ससुर सतपाल की तूती बोलती है.

आरोप है कि यहां सागर और उसके साथियों को जमकर पीटा गया. सभी बुरी तरह घायल हुए. इन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां सागर ने दम तोड़ दिया. इस वारदात में, सागर और उसके साथियों को पीटने वालों में नाम आया ओलंपियन सुशील कुमार का. वारदात के समय दिल्ली पुलिस के DCP (नॉर्थ-वेस्ट) डॉ. गुरइकबाल सिंह सिद्धू ने बताया था,

“दिल्ली पुलिस के सब इंस्पेक्टर जितेंद्र सिंह द्वारा दर्ज FIR और शुरुआती जांच से पता चला है कि पहलवान सुशील कुमार और उनके साथी इस अपराध में शामिल हैं. मृतक सागर दिल्ली पुलिस के एक हेड कॉन्स्टेबल का बेटा था. हमने इस मामले में प्रिंस दलाल को गिरफ्तार कर लिया है.”

वारदात की वजह क्या है?

वारदात क्यों हुई, सुशील कुमार से पूछताछ के बाद ही बातें पूरी तरह साफ हो पाएंगी. लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ बातें छन-छनकर सामने आ रही हैं. पहली वजह ये बताई जा रही है कि ये पैसों के लेनदेन का मामूली विवाद था. सागर जिस फ्लैट में रहता था, वो सुशील कुमार की पत्नी का था. बताया जा रहा है कि सागर ने दो महीने का किराया दिए बिना ही ये फ्लैट खाली कर दिया. सुशील ने सागर से किराया मांगा. सागर ने नहीं दिया. आरोप है कि इसी के बाद सुशील ने साथियों के साथ मिलकर सागर को बुरी तरह पीटा, जिससे उसकी मौत हो गई.

सागर के मामा आनंद ने दी लल्लनटॉप को बताया –

“4 मई की रात 11 बजे सागर को उसके फ्लैट से उठाया गया और छत्रसाल स्टेडियम ले जाकर पिटाई हुई. हो सकता है कि इसने एकाध महीने का रेंट नहीं दिया हो. रेंट कितना था ये नहीं पता. मेरा भांजा सुशील के फ्लैट में रह रहा था, लेकिन उसे नहीं पता था कि यह फ्लैट सुशील का है. जिसके ज़रिये सागर ने फ्लैट लिया था, उसने पूछा कि तुम्हें पता है कि ये फ्लैट किसका है? फिर उसे बताया गया कि सुशील की पत्नी का फ्लैट है. इस बात पर सागर ने कहा कि फ्लैट किसी का भी हो हमें तो किराया देना है और रहना है. हालांकि बाद में किराया देकर सागर ने वो फ्लैट छोड़ दिया. इसके बाद उसने दूसरा फ्लैट लिया. उस जगह पर जहां हॉस्पिटल था, क्योंकि उसकी कमर में दर्द रहता था और वो फिजियोथेरेपी ले रहा था.”

वहीं द प्रिंट वेबसाइट पर 7 मई को एक रिपोर्ट पब्लिश हुई. क्या कहती है ये रिपोर्ट? कि पुलिस की जांच में पता चला है कि सुशील, सागर से इसलिए नाराज़ था, क्योंकि सागर ने सुशील को खुलेआम बदमाश कहा था. सुशील को लग रहा था कि सागर उनकी छवि ख़राब कर रहा है और इसलिए वो सागर को सबक सिखाना चाहता था. रिपोर्ट में लिखा है कि वारदात वाले दिन सुशील ने कहा था कि

“मैं बताता हूं तुझे कि बदमाश कौन है.”

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सुशील कुमार ने खुद को इस मामले में निर्दोष बताया है. फोटो: ANI

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, छत्रसाल स्टेडियम में मौजूद एक लड़के ने मौके से भागकर पुलिस को फोन किया. पुलिस के आने की सूचना स्टेडियम के सिक्योरिटी गार्ड ने सुशील कुमार को पहले ही दे दी. सुशील कुमार वहां से निकल गए. यही रिपोर्ट कहती है कि मारपीट में सुशील कुमार के साथ लॉरेंस बिश्नोई और काला जठेड़ी गैंग के गुर्गे शामिल थे. हालांकि पुलिस ने किसी गैंग के शामिल होने को लेकर अब तक कुछ नहीं कहा है. लेकिन ये ज़रूर कहा है कि सागर को अगवा करने से लेकर उसकी हत्या तक में सुशील कुमार शामिल थे.

अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज

पुलिस के शिकंजे में आने से पहले पहलवान सुशील कुमार ने अग्रिम जमानत के लिए रोहिणी कोर्ट का रुख़ किया. सुशील के वकील ने कोर्ट के सामने तर्क रखे कि सुशील को साजिशन फंसाया जा रहा है. पुलिस ने इस मामले में छह घंटे देर से केस दर्ज किया. मर्डर का कोई ‘मोटिव’ नहीं है. और अपील की कि इन आधारों पर उनके मुवक्किल को अग्रिम जमानत दी जाए.

तर्क पुलिस के वकील की ओर से भी रखे गए. कहा गया कि सुशील के खिलाफ दर्ज मामला संगीन है. जांच में कत्ल का मोटिव साफ हो चुका है. कि सागर, सुशील की पत्नी के फ्लैट में किराये पर रहता था. किराया नहीं चुकाया था इसलिए पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. पुलिस के पास मोबाइल में फुटेज हैं, जिसमें सुशील कुमार डंडा लेकर पीटते दिख रहे हैं. पुलिस की ओर से कोर्ट को ये भी बताया गया कि जांच के लिए सुशील कुमार का पासपोर्ट लिया है ताकि उन्हें देश से बाहर जाने से रोका जा सके. कस्टडी में सुशील से पूछताछ जरूरी है इसलिए उन्हें अग्रिम जमानत न दी जाए. दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद कोर्ट ने सुशील कुमार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी.

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तस्वीर 6 मई की है. सफेद टी शर्ट पहने व्यक्ति को सुशील कुमार बताया जा रहा है. फोटो- अरविंद ओझा आजतक

सागर का सपना, सपना ही रह गया

सुशील कुमार पर लगे आरोप और उनकी नियति अब कानून के, न्यायालय के जिम्मे है. लेकिन जिसकी हत्या की गई है, उस सागर को जानना भी ज़रूरी है. सागर धनखड़. 23 साल का पहलवान, जो जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में जीत चुका था. कई देशों में खेल चुका था. उसका सपना ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतने का था. लेकिन उसकी हत्या हो गई. सागर के मामा बताते हैं –

“सागर का एक ही लक्ष्य था- भारत के लिए मेडल लाना. कई मेडल लाया भी. कई देशों में खेला. उसे 10वीं करने के बाद ही 2012-13 में सुशील के पास छोड़ दिया था. सुशील और उसके ससुर सतपाल ने टेस्ट लिया. टेस्ट में ठीक निकला तो छत्रसाल के हॉस्टल में रख लिया. 2012-13 से लेकर अक्टूबर 2020 तक हॉस्टल में था. उसके बाद बाहर कमरा लिया. कमर में दर्द होने की वजह से इलाज के लिए. सागर के पिता ही खर्चा देते थे. घर में माता-पिता के अलावा एक छोटा भाई है.”

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पहलवान सागर की ओर से जीते हुए मेडल दिखाता परिवार. फोटो- आज तक

रोल मॉडल सुशील?

सिर्फ सागर ही क्यों, देश के तमाम युवा सुशील कुमार जैसा बनना चाहते थे. उनको देखकर न जाने कितनों ने पहलवानी का जुनून पाला. सुशील ने 2008 के बीजिंग ओलंपिक में कुश्ती में 66 किलो वर्ग में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता. 2012 के लंदन ओलंपिक में इस प्रदर्शन को एक स्तर और ऊपर ले गए. इस बार सिल्वर जीता. भारतीय कुश्ती को सुशील कुमार ने विश्व स्तर तक पहुंचा दिया था. वो रोल मॉडल बन चुके थे.

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सुशील कुमार की फाइल फोटो

इससे इतर सुशील दिल्ली सरकार के कर्मचारी भी हैं. वे छत्रसाल स्टेडियम में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर हैं. हत्या और अपहरण के मामले में नाम आने के बाद भी दिल्ली सरकार ने उन्हें अभी तक सस्पेंड नहीं किया है. सुशील का ऑफिस स्टेडियम के अंदर ही था. सुशील की जिम्मेदारी हॉस्टल में रह रहे पहलवानों के खान-पान से लेकर उनकी हर ज़रूरत का ध्यान रखने की थी. इन पहलवानों को तराशने की जिम्मेदारी थी. वे स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SGFI) के अध्यक्ष भी हैं. किसे पता था कि इन्हीं सुशील कुमार पर एक रोज़ एक उभरते पहलवान के कत्ल का आरोप लगेगा.

सागर के मामा आनंद कहते हैं –

“सागर की हत्या एक पहलवान की दादागिरी है. वो गुरु कातिल है, जिसने अपने शिष्य का कत्ल किया है. वो गुरु कहलाने के लायक नहीं है. छत्रसाल स्टेडियम की जो जिम्मेदारी इसे दी है, उससे हटाया जाए. हम चाहते हैं कि कातिल पकड़ा जाए. कानून के मुताबिक न्याय हो. लेकिन जो इतने हाई-फाई लेवल का इंसान है, पूरे इंडिया में छाया है उसका क्या होगा? पुलिस जहां भी छापा मारती है, उससे पहले ही वह निकल लेता है. कोई सुराग नहीं लग रहा है. प्रशासनिक और राजनीतिक कोई ना कोई इशारा इनको मिला हुआ है. पुलिस पीछे-पीछे लगी रहेगी और ये आगे-आगे.”

विवाद और भी हैं..

सुशील को करीब से जानने वाले बताते हैं कि सुशील शौक-शौक में भी बंदूक निकाल लेते थे. मस्ती-मज़ाक में बंदूक चला भी देते थे. सुशील के बारे में कई खबरें चल रही हैं. आरोप सामने आ रहे हैं कि सुशील ने MCD के टोल का ठेका ले रखा था. सुंदर भाटी के गुंडे इसे ऑपरेट करते थे. हालांकि पुलिस ने इस मामले में कुछ नहीं बताया है. सुशील से जुड़े इस तरह के मामले पहले भी आए हैं लेकिन उसमें सुशील का नाम डायरेक्ट नहीं आया. हालांकि सुशील के गलत सोहबत में पड़ने की बातें होती रही हैं.

सुशील कुमार को नजदीक से जानने वाले एक पत्रकार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया –

“सुशील के टोल का काम पहले था. इसमें इनके लड़के होते थे. दो साल पहले ये बंद हो गया था. कुछ रिश्तेदारों के प्रेशर आ रहे थे कि बेकार का काम है और इसे बेनफिट भी नहीं हो रहा था. एंबियंस मॉल गुड़गांव के पास एक टोल था, उससे नाम जुड़ा था लेकिन अब नहीं है. कुछ लड़ाई-झगड़े हो गए थे. पुलिस की ओर से भी शिकायत आई थी कि आपके लड़के झगड़ते रहते हैं. इसलिए हटा लिया था.”

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अपने गुरु और ससुर सतपाल के साथ सुशील कुमार

सुशील के अलग-अलग चेहरे

सुशील को जानने वाले बताते हैं कि सुशील के अलग-अलग चेहरे हैं. एक पत्रकार ने दावा किया कि उनके सामने एक छोटा सा हादसा हुआ. सुशील गाड़ी में बैठे थे. उन्होंने सिर नीचे कर लिया, उनके बाउंसर कार से उतरे और सामने वाले को पीटकर वापस आ गए.

एक अन्य पत्रकार ने बताया कि सुशील लोगों की हेल्प करते हैं. मीडिया फ्रैंडली है. जब आप सुशील से बात कर रहे हैं तो आप ये नहीं देखेंगे कि उन्होंने आपके साथ बद्तमीजी कर दी. बड़ी उम्र के लोगों का पैर छूना, जर्नलिस्टों के पैर छूना, ये सब उनकी आदत में था. वह दूसरों की हेल्प करते थे. एडमिनिस्ट्रेशन वाले भी तारीफ करते हैं उनकी. ये वो इमेज है जो उन्होंने बनाई है. लेकिन एक दूसरी इमेज भी है. इमेज कि “तू जानता नहीं मैं कौन हूं.”

नरसिंह यादव विवाद

इस बार आरोप हत्या का है. काफी गंभीर है. लेकिन सुशील पर लगा ये कोई पहला आरोप नहीं है. मुंबई के पहलवान नरसिंह यादव का नाम आपको याद दिलाते हैं. 2010 के राष्ट्रमंडल खेल में स्वर्ण पदक विजेता रहे. 2014 के इंचियोन एशियाई खेलों में 74 किलो भार वर्ग में कांस्य जीता. नरसिंह ने 2015 में लास वेगास में आयोजित विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य जीता और इसी के साथ हासिल कर लिया रियो का टिकट भी.

फिर आया साल 2016. रियो ओलंपिक. पुरुषों के 74 किलो भार वर्ग में जाने के लिए नरसिंह और सुशील के बीच कड़ी टक्कर थी. सुशील ओलिंपिक क्वॉलिफायर्स में हिस्सा नहीं ले पाए थे. नरसिंह ने भारत के लिए कोटा स्थान हासिल किया था. भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) ने इन दोनों पहलवानों के बीच ट्रायल कराने का वादा किया, लेकिन बाद में मुकर गया. सुशील ने इसे अदालत में चुनौती दी, जहां उनकी ट्रायल की अपील खारिज हो गई. WFI ने नरसिंह को ओलिंपिक के लिए चुना क्योंकि उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में कांस्य जीतकर कोटा हासिल किया था.

इस बीच नरसिंह यादव की नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी यानी कि नाडा द्वारा रियो ओलिंपिक से 10 दिन पहले कराए गए डोप टेस्ट की रिपोर्ट आती है. नरसिंह डोप पॉज़िटिव पाए जाते हैं. यानी डोप टेस्ट में फेल. नाडा ने हालांकि उन्हें क्लीन चिट दे दी, लेकिन वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी (वाडा) ने न सिर्फ उन्हें ओलिंपिक में भाग लेने से रोक दिया, बल्कि चार साल के लिए निलंबित भी कर दिया.

पहलवान नरसिंह की फाइल फोटो
पहलवान नरसिंह की फाइल फोटो

उस समय नरसिंह ने आरोप लगाए थे कि उन्हें ओलंपिक में जाने से रोकने के लिए ये सब साजिश रची गई. उन्होंने खाने-पीने में मिलावट को लेकर सुशील कुमार पर आरोप लगाए थे.

2017 में सुशील फिर विवादों में आए. गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्‍थ गेम्स के ट्रायल के दौरान सुशील कुमार और रेसलर प्रवीण राणा के समर्थकों के बीच मारपीट हुई थी. प्रवीण राणा ने सुशील पर भी मारपीट के आरोप लगाए थे.

कुश्ती फेडरेशन में अपना अलग खेमा

सुशील को जानने वाले पत्रकार बताते हैं कि वो और उनके ससुर सतपाल भारतीय कुश्ती में अपने आप में एक खेमा हैं. कुश्ती फेडरेशन उन्हें पसंद नहीं करता. भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष और BJP सांसद बृजभूषण शरण से 2016 में ही सुशील की टसल शुरू हो गई थी, जब फेडरेशन ने सुशील की जगह नरसिंह को ओलंपिक के लिए चुन लिया था. पहलवान नरसिंह ने उस समय कहा था कि दो लोगों को छोड़कर सारा देश मेरे साथ है. नरसिंह ने बताया था कि उसके बाद सतपाल ने उनका फोन उठाना बंद कर दिया था.

विवाद पर फेडरेशन ने क्या कहा?

रेसलिंग फेडरेशन ऑफ़ इंडिया के उपाध्यक्ष दर्शन लाल ने BBC से बातचीत में कहा कि खेल जगत, ख़ासकर कुश्ती से जुड़े लोग इस घटना से आहत हैं. घटना से कुश्ती बदनाम हुई है. पहलवानों में आपस में थोड़ी बहुत नोक-झोंक होती रहती थी लेकिन इस तरह की घटनाएं नहीं होती थीं. उन्होंने कहा कि सुशील घटना में शामिल है या नहीं, ये तो जांच ही बताएगी, लेकिन सब लोग इस वक्त दुखी है. दर्शन लाल कहते हैं कि भगवान ही जानता है कि क्या हुआ कि नौबत यहां तक आ गई.

इस बीच नुकसान एक परिवार का हुआ है, जिसने जवान बेटा खो दिया. नुकसान एक खेल का हुआ है, जिसने एक रोल मॉडल खो दिया और भविष्य की एक आस भी खो दी. नुकसान एक भरोसे का हुआ है, जिस भरोसे के साथ मां-बाप अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए या किसी खेल के हुनर सीखने के लिए अपने से दूर किसी हॉस्टल में दाखिला दिलाकर आते हैं. हमने सागर के पिता की कही बातों से अपनी बातें शुरू की थीं. उन्हीं की बातों पर आपको छोड़े जाते हैं.

“आज मैं उस पल को कोस रहा हूं, जब सुशील कुमार को देखकर मेरे बेटे ने भी पहलवानी करने की ठानी थी. और मेरा बेटा ही क्यों, दो दशक से हज़ारों युवा उसे (सुशील को) देखकर ही तो पहलवान बने हैं. छत्रसाल स्टेडियम में सिर्फ मेरे बेटे की हत्या नहीं हुई, उन हज़ारों पहलवानों और उनके मां-बाप के सपनों की हत्या हुई है, जो स्टेडियम को गुरु-नगरी मानकर निश्चिंत होकर अपने बच्चों को वहां सीखने के लिए छोड़ आते हैं. हमारा भरोसा टूट गया है. मेरे बेटे को न्याय मिलना चाहिए.”


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