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राहुल गांधी ने किनका हाथ पकड़ा है, जानकर मजाक उड़ाने वालों की बोलती बंद हो जाएगी

एक तस्वीर में राहुल गांधी एक महिला का हाथ थामे नज़र आ रहे हैं. इस तस्वीर का सोशल मीडिया पर खूब मज़ाक बन रहा है. इन 'मज़ाकिया' लोगों से हम कुछ कहना चाहते हैं.

ये बात राहुल गांधी की ट्रोलिंग के बारे में है. आम नहीं. एक बेहद खास तरह की ट्रोलिंग. जो उनके अविवाहित होने से जुड़ी है.

ट्रोलिंग हमारे लिए अब नई या हैरान करने वाली बात नहीं रह गई है. राहुल गांधी ट्रोल होते हैं क्योंकि एक बड़ी पार्टी के अध्यक्ष हैं और हालिया पोस्टर बॉय भी. ठीक इसी कारण से मोदी जी भी ट्रोल होते हैं. साथी मोदी जी के जीवन में भी नहीं है. लेकिन राहुल के ‘अकेले’ होने को लेकर जिस तरह का मज़ाक होता है और जितनी आसानी से पचाया जाता है, वो दोनों परेशान करते हैं.

6 अक्टूबर, 2018 को राहुल मध्यप्रदेश के मुरैना में जन आंदोलन रैली कर रहे थे. इस रैली में खींची उनकी एक तस्वीर खूब वायरल हो रही है. इसमें वो एक महिला को देख रहे हैं, उसका हाथ भी पकड़े हुए हैं. महिला का चेहरा तस्वीर में नहीं है. ट्रोलर इस तस्वीर पर यहां वहां गोले लगाकर शेयर कर रहे हैं. ये हमारे यहां का एक नया चलन है. साधारण सी तस्वीर पर आप एक लाल गोला लगा दीजिए. वो सनसनीखेज़ हो जाएगी. खैर, सबसे ज़्यादा गोले लग रहे हैं वहां जहां राहुल ने महिला का हाथ थामा हुआ है. कुछ तस्वीरें हैं जिनमें गोला नहीं बना है, लेकिन साथ लिखी पोस्ट मंशा साफ कर देती है. कुछ मिसालें देखिए –

इस पेज के नाम पर ध्यान दें. शेयर और लाइक पर भी.
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ट्रोलर ये कहना चाहते हैं कि राहुल गांधी महिला पर डोरे डाल रहे हैं. ये कहना सुविधाजनक भी है क्योंकि ये हमारे यहां आम मज़ाक है. और फिर जैसा कि हमने कहा भी, राहुल ने अपने सार्वजनिक जीवन में कभी नहीं कहा कि उनका कोई साथी है. साथी की व्याख्या भी कर दें. हमारे यहां साथी का एक ही मतलब स्वीकार्य है – धर्मपत्नी.

कांड शब्द पर ध्यान दें.
कांड शब्द पर ध्यान दें.

जानिए कि वो औरत थीं कौन?

इस तस्वीर में राहुल के साथ खड़ी महिला का परिचय जानेंगे तो आप दोबारा कभी इस तरह के ट्रोल पर ‘लाइक’ या ‘शेयर’ का बटन नहीं दबाएंगे. हुआ ये था कि मुरैना में 6 तारीख को हुई जनआंदोलन रैली में एकता परिषद के लोग भी पहुंचे थे और उन्हें मंच पर भी दावत दी गई थी. राहुल जिस पोडियम से बोले वहां भी एकता परिषद का बैनर लगा हुआ था. एकता परिषद आदिवासियों के लिए काम करने वाला एक संगठन है. एक लंबे अरसे से ये संगठन आदिवासियों की मांगें जनआंदोलन के ज़रिए उठाता रहा है, खासकर भूमि सुधार के मुद्दे पर. भूमि सुधार माने वंचित तबके के लोगों को गुज़र-बसर लायक ज़मीन के टुकड़े बांटना. ये ज़मीन सरकार या तो अपने पास से देती है, या तो उन लोगों से लेकर जिनके पास बहुत ज़्यादा ज़मीन है. आदिवासियों के मामले में भूमि सुधार पेचीदा होता है क्योंकि वो जंगल में या आस-पास बसते हैं और जंगल की ज़मीन को लेकर कानून बेहद सख्त होते हैं.

एकता परिषद ने आदिवासियों से जुड़ी 10 मांगों को लेकर 2012 में ग्वालियर से दिल्ली तक जनसत्याग्रह यात्रा भी निकाली थी. हज़ारों आदिवासी 2 अक्टूबर को ग्वालियर से निकले और 27 दिन तक पैदल चलकर दिल्ली पहुंचे. यूपीए सरकार ने चार मांगें मान लीं. बाकी मांगों के लिए परिषद ने लगातार यात्राएं की हैं. एकता परिषद की यात्राएं इस मायने में अनोखी हैं कि उनमें भारी भीड़ होते हुए भी कभी हिंसा या तोड़-फोड़ की घटनाएं नहीं हुईं.

अक्टूबर 2018 में भी आदिवासियों की यात्रा ग्वालियर से निकली थी. मोदी सरकार की ओर से ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आदिवासियों को आश्वासन दिया और राहुल गांधी ने भी वादा किया कि वो जन सत्याग्रह की 10 की 10 मांगें सत्ता में आने पर मान लेंगे. तो 6 तारीख की रात (माने राहुल की सभा वाली रात) सत्याग्रह यात्रा स्थगित कर दी गई.

तस्वीर में दाईं तरफ खड़ी महिला की साड़ी के पैटर्न पर ध्यान दें. (फोटोः ट्विटर/कांग्रेस)
तस्वीर में दाईं तरफ खड़ी महिला की साड़ी के पैटर्न पर ध्यान दें. (फोटोः ट्विटर/कांग्रेस)

रैली के दौरान एकता परिषद की दो कार्यकर्ताओं को राहुल के मंच पर न्योता दिया गया था. इनके चेहरे आप उस तस्वीर में देख सकते हैं जिसमें राहुल और दूसरे कांग्रेस नेता गंगा सद्भावना यात्रा का पोस्टर पकड़े हुए हैं. इसमें दाईं तरफ खड़ी कार्यकर्ता की साड़ी पर ध्यान दीजिए. साड़ी का वही पैटर्न आपको राहुल की हाथ थामने वाली तस्वीर में खड़ी महिला का है.

पूरी बात जानने के लिए हमने मुरैना में इंडिया टुडे से जुड़े पत्रकार गिर्राज राजौरिया से बात की. उन्होंने बताया कि ये तस्वीर तब खींची गई जब आखिर में मंच पर खड़े सभी लोग एक दूसरे का हाथ पकड़कर तस्वीर खिंचवाने वाले थे. इसीलिए राहुल ने उस महिला कार्यकर्ता का हाथ पकड़ा था. ये तस्वीर ऐन उसी वक्त की है.

दी लल्लनटॉप ने एकता परिषद के अध्यक्ष रणसिंह परमार से भी बात की. उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि मंच पर खड़ी महिलाएं परिषद कार्यकर्ताएं हैं. इनके नाम हैं सागोबाई और श्रद्धा बहन. कांग्रेस के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल पर मुरैना की रैली का पूरा वीडियो है. इसमें आप राहुल को श्रद्धा बहन से बात करते हुए देख सकते हैं. तभी ट्रोलर्स के काम की ये तस्वीर खींच ली गई.

रैलियों के दौरान ये एक बड़ा आम तरीका है तस्वीर खिंचाने का. लेकिन ट्रोलर्स आम को खास बना देते हैं. (फोटोः इंडिया टुडे/गिर्राज राजौरिया)
रैलियों के दौरान ये एक बड़ा आम तरीका है तस्वीर खिंचाने का. लेकिन ट्रोलर्स आम को खास बना देते हैं. (फोटोः इंडिया टुडे/गिर्राज राजौरिया)

अब ये जानिए कि ये मंच पर पहुंची कैसे

पहले सागोबाई की कहानी जानिए. ग्वालियर के पास पड़ता है डबरा. यहां सरकार ने डबरा शुगर मिल चालू की थी. मिल के लिए गन्ने की खेती हो, इसके लिए सरकार ने 5000 एकड़ ज़मीन पट्टे पर दी. आज डबरा शुगर मिल बंद है लेकिन दबंगों ने सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा खाली नहीं किया है. सागोबाई इस ज़मीन को आदिवासियों को दिलाने के लिए पिछले 25 साल से संघर्ष कर रही हैं. आशा बहन, माने वो जिनका हाथ राहुल ने पकड़ा है, वो पटना से हैं. वहां रहकर दलितों के लिए काम कर रही हैं. और ये करते हुए उन्हें 15 साल से ज़्यादा हो गए हैं.

अब ट्रोल कीजिए इस तस्वीर को. अगर हिम्मत बची हो तो.

राहुल + औरत = ट्रोल

ये तो हुई इस एक मौके की बात. राहुल जब किसी तस्वीर में किसी औरत के इर्द गिर्द नज़र आते हैं, ट्रोल होने लगते हैं. याद कीजिए गुजरात चुनाव प्रचार के वक्त की वो तस्वीर जब राहुल ने एक लड़की के साथ सेल्फी खिंचवाई थी. तब भी इसी तरह का मज़ाक चला दिया गया था सोशल मीडिया पर.

राहुल गांधी ने इस लड़की के साथ फोटो खिंचाकर बहुत हिम्मत का काम किया है
गुजरात में राहुल इस सेल्फी के लिए बहुत ट्रोल हुए थे.
गुजरात में राहुल इस सेल्फी के लिए बहुत ट्रोल हुए थे.

औरत के साथ दिखना अपराध क्यों है?

पश्चिम में मुहावरा चला कि हर कामयाब मर्द के पीछे एक औरत का हाथ होता है. लेकिन भारत में औरत और कामयाबी का रिश्ता थोड़ा जटिल बताया गया है. कई धार्मिक मान्यताओं में औरत से दूरी को संयम और एकाग्रता से जोड़ा जाता है. इसीलिए जिन महान लोगों के जीवन में कोई साथी (धर्मपत्नी) नहीं था, उनकी महानता उन महान लोगों से ज़्यादा महान थी जिन्होंने किसी औरत के साथ घर बसा लिया था.

शराबखाने में बैठे राहुल गांधी की तस्वीरें वायरल, हम खुश भी हैं और दुखी भी

फिर जब कोई सिंगल आदमी किसी औरत के करीब नज़र आता है, तो अनायास ही लोगों का दिमाग ‘संभावनाओं’ पर विचार करने लगता है. इसीलिए राहुल जब एक विदेशी रेस्त्रां में कुछ दोस्तों (महिला) के साथ नज़र आते हैं, तो उनका वो नितांत निजी क्षण राजनीति के दंगल में घसीट लिया जाता है. क्यों? क्योंकि राहुल की शादी नहीं हुई है.

सुप्रीम कोर्ट औरतों को सबरीमाला में घुसा सकता है. लेकिन आपके दिमाग में इज़्ज़त नहीं दिला सकता. और यही बात आदमियों के सम्मान पर भी लागू होती है. इज़्ज़त आपको ही देनी होगी. जब तक नहीं देंगे, ओछी बातें करते रहेंगे, कभी राहुल के बारे में, कभी मोदी के बारे में.


वीडियो देखेंः संजय गांधी और सीताराम केसरी के खास रहे तारिक अनवर ने एनसीपी क्यों छोड़ी ?

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