Submit your post

रोजाना लल्लनटॉप न्यूज चिट्ठी पाने के लिए अपना ईमेल आईडी बताएं !

Follow Us

वो कविता जिसके जरिए नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधा

1.03 K
शेयर्स

गुरुवार को बजट सत्र का और 16वीं का आखिरी दिन था. संसद की रवायत है कि सत्र के आखिरी दिन प्रधानमंत्री धन्यवाद भाषण देता है. नरेंद्र मोदी गुरुवार को इसी रस्म को निभा रहे थे. उन्होंने पौने दो घंटे का मैराथन भाषण दिया. उनके भाषण से ठीक पहले कांग्रेस संसदीय दल के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का भाषण हुआ. इस भाषण में उन्होंने सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता का एक हिस्सा पढ़ा जोकि इस तरह था-

“ये हुस्न ओ आब तो ठीक है लेकिन,

गुरुर क्यूं तुमको इस पर है 

मैंने सूरज को हर शाम इसी,

आसमां में ढ़लते देखा है”

इसके जवाब में नरेंद्र मोदी ने इस कविता का दूसरा हिस्सा पढ़ा, जोकि इस तरह था-

 

“जब कभी झूठ की बस्ती में,

सच को तड़पते देखा है ,

तब मैंने अपने भीतर किसी,

बच्चे को सिसकते देखा है”

संसद में चल रहे इस साहित्यिक हमले और जवाबी हमले के बीच हमने सोचा कि क्यों ना पूरी कविता आपको पढ़ा दी जाए. नज़र-ए-करम अता कीजिएगा-

 

‘जब कभी झूठ की बस्ती में, सच को तड़पते देखा है तब मैंने अपने भीतर किसी, बच्चे को सिसकते देखा है

माना तू सबसे आगे है, मगर न बैठ यहां अभी जाना है मैंने दो चार कदम पर मंजिल से, लोगों को भटकते देखा है

धन, दौलत, रिश्ते, शोहरत, मेरी जान भी कोई चीज नहीं मैंने इश्क की खातिर ख़ुल्द से भी, आदम को निकलते देखा है

ये हुस्न ओ आब तो ठीक है लेकिन, गुरुर क्यूं तुमको इस पर है मैंने सूरज को हर शाम इसी, आसमां में ढ़लते देखा है

अपने घर की चारदिवारी में, अब लिहाफ में भी सिहरन होती है जिस दिन से किसी को ग़ुर्बत में, सड़कों पर ठिठुरते देखा है

पहले छोटी छोटी खुशियों को, सब मिल कर साथ मनाते थे अब छोटे छोटे आंगन में, रिश्तों को सिमटते देखा है

तुम आज भी मेरे अपने हो, शायद इंसान हो और जमाने के वरना मौसमों से पहले हमने, अपनों को बदलते देखा है

किस बात पे तू इतराता है, यहां वक्त से बड़ा तो कुछ भी नहीं कभी तारों से जगमग आसमां में, सितारों को टूटते देखा है’

 

जाते-जाते एक और जानकारी देनी थी. सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की एक कविता का एक हिस्से का इस्तेमाल गुलजार ने भी किया था. कविता का नाम था , ‘बतूता का जूता’. इसी कविता के एक हिस्से को लेकर गुलज़ार ने इश्किया का गाना लिखा, “इब्ने बतूता, बगल में जूता.” यह कविता हम जल्द ही आपको एक कविता रोज में पढाएंगे. फिलहाल इसका एक हिस्सा आपकी जिज्ञासा शांत करने लिए यहां पसारकर जा रहे हैं.

 

“इब्नबतूता पहन के जूता
निकल पड़े तूफान में
थोड़ी हवा नाक में घुस गई
घुस गई थोड़ी कान में”


जॉर्ज फर्नांडिस की जिंदगी में क्यों लौट आईं लैला कबीर?

लल्लनटॉप न्यूज चिट्ठी पाने के लिए अपना ईमेल आईडी बताएं !

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें
PM Narendra modi in Parliament: Modi recites poem during budget session

कौन हो तुम

आजादी का फायदा उठाओ, रिपब्लिक इंडिया के बारे में बताओ

रिपब्लिक डे से लेकर 15 अगस्त तक. कई सवाल हैं, क्या आपको जवाब मालूम हैं? आइए, दीजिए जरा..

जानते हो ह्रतिक रोशन की पहली कमाई कितनी थी?

सलमान ने ऐसा क्या कह दिया था, जिससे हृतिक हो गए थे नाराज़? क्विज़ खेल लो. जान लो.

राजेश खन्ना ने किस हीरो के खिलाफ चुनाव लड़ा और जीता था?

राजेश खन्ना के कितने बड़े फैन हो, ये क्विज खेलो तो पता चलेगा.

सलमान खान के फैन, इधर आओ क्विज खेल के बताओ

क्विज में सही जवाब देने वाले के लिए एक खास इनाम है.

फवाद पर ये क्विज खेलना राष्ट्रद्रोह नहीं है

फवाद खान के बर्थडे पर सपेसल.

दुनिया की सबसे खूबसूरत महिला के बारे में 9 सवाल

कुछ ऐसी बातें, जो शायद आप नहीं जानते होंगे.

कोहिनूर वापस चाहते हो, लेकिन इसके बारे में जानते कितना हो?

आओ, ज्ञान चेक करने वाला खेल खेलते हैं.

कितनी 'प्यास' है, ये गुरु दत्त पर क्विज़ खेलकर बताओ

भारतीय सिनेमा के दिग्गज फिल्ममेकर्स में गिने जाते हैं गुरु दत्त.

इंडियन एयरफोर्स को कितना जानते हैं आप, चेक कीजिए

जो अपने आप को ज्यादा देशभक्त समझते हैं, वो तो जरूर ही खेलें.

इन्हीं सवालों के जवाब देकर बिनिता बनी थीं इस साल केबीसी की पहली करोड़पति

क्विज़ खेलकर चेक करिए आप कित्ते कमा पाते!