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दिल्ली में अब प्रदूषण फैलाया तो 5 साल की कैद और एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लग सकता है

एयर पॉल्यूशन (Air Pollution). देश की राजधानी दिल्ली के लिए एक बेहद ज़रूरी मुद्दा, जो सभी लोगों को प्रभावित करता है. इससे निपटने के लिए केंद्र सरकार पिछले साल अक्टूबर महीने में एक अध्यादेश लेकर आई थी. अब उसे विधेयक के रूप में संसद से मंजूरी मिली है. राज्यसभा ने गुरुवार 5 अगस्त को ‘एयर क्वालिटी मैनेजमेंट इन नैशनल कैपिटल रीजन एंड एडजॉइनिंग एरियाज़ बिल, 2021’ पारित किया. हिंदी में कहें तो ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाक़ों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग विधेयक, 2021’. गुरुवार से पहले ये बिल बुधवार 4 अगस्त को लोकसभा में पारित किया गया था. आइए जानते हैं कि इस नए बिल में क्या प्रावधान हैं.

अलग आयोग का प्रावधान

विधेयक के उद्देश्यों और कारणों के विवरण में कहा गया है कि दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण से निपटने को लेकर केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों और अन्य पक्षों में सहयोगी दृष्टिकोण के अलावा एक स्थायी, समर्पित और भागीदारी तंत्र की भी कमी है.

बिल में उत्तर भारत के इस इलाक़े में पॉल्यूशन के कई कारण गिनाए गए हैं. जैसे उद्योग, वाहन, पराली और पटाखे जलाना. बिल कहता है कि इनके कारण दिल्ली-एनसीआर में लोगों को जहरीली हवा में सांस लेना पड़ती है. हालांकि अलग-अलग राज्यों ने कुछ उपाय किए हैं, लेकिन सभी के बीच समन्वय की कमी होने की वजह से कुछ खास बदलाव नहीं आया है.

बिल में दिल्ली में विशेष मौसम के दौरान वायु प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी के लिए पराली जलाने को खास तौर से जिम्मेदार माना गया है. सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने पर प्रतिबंध लगाया है, लेकिन जिन राज्यों में ऐसा होता है, वे इसे लागू करने में विफल रहे हैं.

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दिल्ली में ऐयर पोल्यूशन की तस्वीर. फ़ाइल फ़ोटो

बिल के मुताबिक़, दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए स्थायी समाधान की ज़रूरत है. इसके लिए एक सेल्फ रेग्युलेटिड और लोकतांत्रिक रूप से निगरानी करने वाले तंत्र को स्थापित करने की ज़रूरत है. ऐसे में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाक़ों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए एक आयोग स्थापित किया जाएगा. ये आयोग पुराने पैनलों की जगह लेगा और वायु प्रदूषण के नियंत्रण के लिए आम लोगों और विशेषज्ञों की भागीदारी, अंतर्राज्यीय सहयोग, रिसर्च और इनोवेशन को कारगर बनाने का काम करेगा.

इस आयोग का एक चेयरपर्सन नियुक्त किया जाएगा. सरकारी विभागों, ग़ैर-सरकारी संथाओं, ISRO और केंद्रीय पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड जैसी संस्थाओं के रीप्रेज़ेंटटिव इस आयोग के सदस्य होंगे. बिल के मुताबिक, आयोग की ये जिम्मेदारियां होंगी:

1) अधिनियम के नियम लागू करने के लिए दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सरकारों, आयोग के अधिकारियों और अन्य विभाग के अधिकारियों में समन्वय स्थापित करना.
2) वायु प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए विशेष क्षेत्रों को साथ लेकर योजना बनाना और उसे लागू करना.
3) हवा की गुणवत्ता से जुड़े विभिन्न मानदंड निर्धारित करना.
4) वायु गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले प्रदूषकों और उनके मानदंडों को निर्धारित करना.
5) आयोग किसी परिसर, संयंत्र, उपकरण, मशीनरी, निर्माण या अन्य परिसरों का निरीक्षण कर सकता है.
6) किसी क्षेत्र में वायु प्रदूषण की रोकथाम, नियंत्रण और उपाय करने से संबंधित नियमावली, कोड या दिशा-निर्देश तैयार करना.

वैसे तो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और इसकी राज्य शाखाओं के पास वायु, जल और भूमि प्रदूषण के लिए पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने की शक्तियां हैं, लेकिन इस बिल के आने से किसी भी विवाद या अधिकार क्षेत्र के टकराव के मामले में नए आयोग की बात का विशेष महत्व होगा. लेकिन केवल वायु प्रदूषण के मामले में.

5 साल की सजा, 1 करोड़ तक का जुर्माना

अब बात बिल के उन प्रावधानों की, जो इस रिपोर्ट को करने की सबसे बड़ी वजह हैं. बिल के इन प्रावधानों को लेकर संसद में सहमति और विरोध दोनों देखने को मिले. विशेषकर क्लॉज 14 और 15 को लेकर सांसद बंटे हुए दिखे. क्लॉज 14 के मुताबिक़, अधिनियम के नियमों या आयोग द्वारा जारी किसी आदेश का उल्लंघन करने पर 5 साल तक की कैद या 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना या दोनों ही होने का प्रावधान है. हालांकि इसमें वे किसान शामिल नहीं होंगे, जिनके पराली या कृषि अवशेष जलाने पर प्रदूषण फैलता है. उन पर अधिनियम का ये प्रावधान लागू नहीं होगा. इसे लेकर राजनीतिक पार्टियों में सहमति थी.

लेकिन बिल के क्लॉज़ 15 पर विरोध हुआ. इसके मुताबिक़, आयोग को पराली जलाने वाले किसानों से पर्यावरण मुआवजा वसूलने का अधिकार दिया गया है. मुआवजा कितना होगा, ये केंद्र सरकार तय करेगी. राज्यसभा में बहस के दौरान कई पार्टियों ने इस क्लॉज़ की वजह से बिल को ‘किसान विरोधी’ बताया.

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दिल्ली के केंद्रीय इलाक़े की तस्वीर. फ़ाइल फ़ोटो.

 

बिल के संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति के पास सहमति के लिए भेजा गया है. वहां से मंजूरी मिलने के बाद ये जल्दी ही कानून बन जाएगा.


वीडियो- संसद में विधेयक पारित करने को लेकर TMC सांसद ने जो कहा, उससे PM मोदी उखड़ गए! 

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