Submit your post

Follow Us

आप पेट्रोल पर डूगना लगान देते रहे, पैसे वालों ने टैक्स चोरी के नए तरीके खोज लिए

पैंडोरा – ग्रीक मिथक बताते हैं कि पैंडोरा वो औरत थी, जिसे धरती पर सबसे पहले उतारा गया. उसे अलग-अलग देवताओं ने अपनी शक्तियों को मिलाकर बनाया था. इन शक्तियों के साथ जब पैंडोरा धरती पर आई तो उसे एक जिम्मेदारी भी दी गई. ये जिम्मेदारी थी एक खास बक्से को संभाल कर रखने की. असल में इस बक्से में देवताओं ने दुनियाभर की बुराईयों को बंद कर रखा था. देवताओं ने बक्से को न खोलने की हिदायत तो दी लेकिन ये नहीं बताया कि इसमें है क्या. ऐसे में पैंडोरा की जिज्ञासा कुलबुलाने लगी. उसे रह-रह कर खयाल आता कि देखा जाए कि इस बक्से में क्या है. ऐसे ही खयाल में एक दिन उसने बक्सा खोल दिया. फिर क्या था, दुनियाभर की बुराइयां बाहर आ गईं और अब तक इंसानों को परेशान कर रही हैं.

4 अक्टूबर, 2021. सुबह पैंडोरा का और बक्सा खुला. इससे निकली टैक्स चोरी से लेकर मनी लॉन्ड्रिंग जैसी बुराइयां. लगभग 12 मिलियन यानी 1 करोड़ 20 लाख लीक दस्तावेजों की जांच पर आधारित पैंडोरा पेपर्स (Pandora Papers) के खुलासे ने दुनियाभर में हलचल मचा दी. खुलासे में सामने आया कि कैसे दुनिया भर में धनी और प्रभावशाली लोग टैक्स ”बचाने” के लिए विदेशों में कंपनियां और ट्रस्ट खोलते हैं. जब एक स्कीम में खतरा बढ़ जाता है, तो टैक्स चोरी का एक नया तरीका खोजते हैं.

क्या है पैंडोरा पेपर लीक?

पैंडोरा पेपर्स लीक दुनियाभर के अमीरों के वित्तीय लेनदेन से जुड़ी 1 करोड़ से ज्यादा फाइलें है. दुनियाभर की 14 कॉर्पोरेट सर्विस देने वाली कंपनियों से संबंधित ये फाइलें 1996 से 2020 के बीच की हैं. इन फाइलों में छुपे हैं अमीरों की संपत्ति, टैक्स से बचने के तरीके, काले पैसे को सफेद करने जैसे राज़. लीक होकर ये फाइलें पहुंचीं इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) नाम की एक संस्था के पास. दुनियाभर के खोजी पत्रकार इस संस्था से जुड़े हुए हैं. इन सबने मिलकर इन दस्तावेज़ों के आधार पर पड़ताल शुरू की. 140 समाचार संस्थानों के 600 से ज़्यादा पत्रकार इस काम में जुटे. भारत और भारतीयों से संबंधित फाइलें मिलीं इंडियन एक्सप्रेस को. इन सबकी पड़ताल के नतीजे में सामने आया कि कैसे कम से कम 117 देशों के लोगों ने ”पैंडोरा टैक्स बचत स्कीम” का फायदा लिया

कितने भारतीयों के नाम हैं लिस्ट में?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पैंडोरा पेपर्स लीक में भारत की कम से कम 380 बड़ी हस्तियों के नाम हैं. जिनमें से 60 मशहूर शख्सियतों के बारे में जानकारी मौजूद है. इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट्स में अब तक जिन लोगों के नाम आए हैं उनमें शामिल हैं –
# बिजनेसमैन अनिल अंबानी
# क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर
# एक्टर जैकी श्रॉफ
# भगौड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी की बहन पूर्वी मोदी
# गौतम अडाणी के भाई विनोद अडाणी
# कॉर्पोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया
# कारोबारी समीर थापर
# दिवंगत कांग्रेस नेता सतीश शर्मा

ये पहली लिस्ट है. ऐसी ही कुछ और लिस्ट आपके सामने आएंगी. इनसे खुलासा होगा कि पैसे को काले से सफेद और टैक्स एजेसियों की नजरों से बचाने के लिए किन धन-कुबेरों ने कंपनियों की सेवाएं लीं. एक बात समझने वाली है. वो ये कि विदेश में कंपनी खोलना और उसमें निवेश करना अपने-आप में गैर कानूनी नहीं है. गैरकानूनी है टैक्स की चोरी करना. पैंडोरा पेपर्स में नाम आने पर भी किसी को सीधे दोषी नहीं कहा जा सकता. ये बस एक संदिग्ध हरकत की पुष्टि करते हैं.

Sachin Pandora
पनामा पेपर लीक हुए 2016 के अप्रैल में. अगस्त में सचिन ने ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में अपनी कंपनी बंद कर दी.

भारत के अलावा दूसरे किन देशों के लोग इस लिस्ट में हैं?

खुलासे दुनियाभर के देशों में हुए हैं. भारत के अलावा पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भी पैंडोरा पेपर खुलासे से हलचल मच गई है. हो भी क्यों ना. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के करीबी लोगों और कुछ मंत्रियों समेत 700 से अधिक लोगों के नाम पैंडोरा पेपर मामले में सामने आए हैं. पाकिस्तानी समाचार चैनल जियो न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक ‘पैंडोरा पेपर’ के खुलासे में पाकिस्तान के वित्त मंत्री शौकत तारिन, जल संसाधन मंत्री मूनिस इलाही, सांसद फैसल वावड़ा, उद्योग और उत्पादन मंत्री खुसरो बख्तियार के परिवार सहित अन्य लोगों के विदेशी कंपनियों से लेन-देन के संबंध मिले. इस मामले में कुछ रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर्स, बिज़नेसमैन और मीडिया कंपनी के मालिकों के नाम भी सामने आए हैं.

इसके अलावा दुनिया की जिन बड़ी शख्सियतों के नाम इस खुलासे में शामिल हैं वो ये रहे:

# जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला द्वितीय
# ब्रिटेन के पूर्व पीएम टोनी ब्लेयर
# पॉप सिंगर शकीरा
# चेक रिपब्लिक के पीएम आंद्रेज बाबिस
# केन्या के प्रेसिडेंट उहुरू केन्याता
# इक्वाडोर के प्रेसिडेंट गुइलेर्मो लासो
# रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन का एक सहयोगी
# तुर्की के अरबपति कारोबारी एर्मन इलिकैक
# रेनॉल्ड्स एंड रेनॉल्ड्स सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी के पूर्व सीईओ रॉबर्ट टी. ब्रोकमैन

Prime Minister Of Pakistan Imran Khan
पाकिस्तान के पीएम इमरान खान के कुछ करीबी लोगों का नाम भी पैंडोरा पेपर लीक में सामने आया है.

पैंडोरा पेपर्स से क्या पता चला?

पैंडोरा पेपर्स की फाइलों से पता चलता है कि कैसे दुनिया के कुछ अमीर, प्रसिद्ध और प्रख्यात लोगों ने अपने पैसों को छुपाने के लिए गुप्त कंपनियों का इस्तेमाल किया. इन लोगों ने कंपनियां अपने मूल देश से बाहर यानी ऑफशोर बनाईं जिससे पैसों को छुपाने और सफेद करने में सहूलियत रहे. इन कंपनियों को इस तरह से बनाया गया कि एक तरफ से छुपाया हुआ पैसा इसमें डालिए, फिर घूमाफिर कर दूसरी तरफ से अपने ही दूसरे वेंचर में इसे इन्वेस्ट कर लीजिए.

ये कंपनियां बनाई गईं टैक्स हेवन मानी जाने वाली जगहों में. जैसे ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स, केमन आईलेंड्स आदि.

# लोगों ने अपनी वास्तविक पहचान छुपाई और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स जैसी जगहों पर जो कंपनियां बनाईं, उनसे खुद को दूर दिखाया. ऐसा होने से वो टैक्स अधिकारियों की नजर से आराम से बच गए.

# कैश, शेयर, अचल संपत्ति, आर्ट पीसेज़, विमान, नौकाओं और ऐसी दूसरी चीज़ों में इन कंपनियों के जरिए इन्वेस्टमेंट किया. इससे हुआ ये कि वो लेनदारों और ईडी जैसी एजेंसियों से बच गए. मिसाल के तौर पर अनिल अंबानी ने चीनी कंपनी की देनदारी से बचने के लिए लंदन की अदालत में कहा कि उनके पास पैसा चुकाने को फूटी कौड़ी नहीं है. लेकिन पैंडोरा फाइल्स में खुलासा हुआ है कि उन्होंने ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में हजारों करोड़ रुपए की कंपनियां खोल रखी थीं.

ये पूरा गोरखधंधा चलता कैसे है?

इस पूरे गोरखधंधे को समझने के लिए आपको कुछ शब्द अच्छी तरह समझने पड़ेंगे. ये हैं – ऑफशोर कंपनी, शेल कंपनी, ऑफ द शेल्फ कंपनी, ऑफ शोर सर्विसेज़ फर्म टैक्स हेवन.

ऑफशोर कंपनी

ऑफशोर कंपनी उस कंपनी को माना जाता है जो कोई भी नागरिक अपने मूल देश से बाहर जाकर खोलता है. मिसाल के तौर पर कोई शख्श भारत में टैक्स देता है और वो मॉरिशस में जाकर कोई कंपनी खोल ले, तो उसे ऑफशोर कंपनी कहा जाएगा. ये कोई गलत काम नहीं है. कोई भी इंसान दुनिया में कहीं भी बिजनेस करने के लिए आजाद है.

ऑफ द शेल्फ कंपनी

इस पूरे मामले में ट्विस्ट आता है ‘ऑफ द शेल्फ’ कंपनियों से. आपने दुकान से दांत का मंजन (ब्रश वाले हुए तो टूथपेस्ट) खरीदा होगा. जब आप मंजन मांगते हैं, तो दुकानदार उसे बनाने नहीं जाता. न ही कहीं से लाने जाता है. वो अपनी दुकान में बने शेल्फ से उठाकर आपको दे देता है. माने आप दुकान से मंजन ”ऑफ द शेल्फ” खरीदते हैं. ऐसी ही होती हैं ऑफ द शेल्फ कंपनियां. रेडीमेड.

आप कहेंगे कि कंपनी कैसे रेडिमेड होगी? उसके लिए तो पक्का पता चाहिए, ढेरों आवेदन लगाने होते हैं, अनुमतियां लेनी होती हैं. लेकिन जिस तरह दुनिया में हर तरह का काम करने वाले लोग होते हैं, वैसे ही रेडिमेड कंपनियां बनाने वाले भी होते हैं. और इनके पास कंपनियां रेडिमेड कंपनियों का पूरा स्टॉक तैयार रहता है. बिकने को तैयार. रेडीमेड कहने का मतलब ये पहले से रजिस्टर्ड कंपनियां होती हैं. लेकिन कोई बिजनेस नहीं कर रही होती हैं. जो चाहे, उन्हें खरीद ले. शास्त्रों में इन्हें ही ऑफ द शेल्फ कंपनियां या शेल कंपनियां कहा जाता है. ऐसी कंपनी, जो सिर्फ कागज़ पर है. कोई काम नहीं करता. किसी तरह का उत्पादन नहीं, किसी तरह की बिक्री नहीं. लेकिन बैंक खाता ज़रूर होता है. ताकि ‘लेनदेन’ हो सके. अगर किसी को जल्दी में भी अपने पैसे को ठिकाने लगाना है तो फिकर नॉट. रेडीमेड शेल कंपनी हाज़िर है. इसे खरीदिए और ”निवेश” कर डालिए. ये ऑफ द शेल्फ कंपनी ऑफ-शोर खोलिएगा. माने अपने देश से बाहर. वो भी यहां-वहां नहीं, टैक्स हेवन में. तब एजेंसियों को आप तक पहुंचने में और दिक्कत होगी. टैक्स हेवन क्या होता है, हम आपको बताने जा रहे हैं.

यहां शादी-पार्टियों और टैक्स चोरी के ऑर्डर लिए जाते हैं – ऑफ शोर सर्विसेज़ फर्म

अब ये रेडिमेड कंपनियां मिलती कहां हैं. इसके लिए भी एक खास तरह की कंपनी होती है. इनको कहते हैं ऑफ शोर सर्विसेज़ फर्म. ये कंपनियां खुद को ”लॉ फर्म” या ”कॉर्पोरेट सर्विस फर्म” का नाम देकर रखती हैं. लेकिन ये कंपनियां किसी ऐसी जगह शेल कंपनी, ट्रस्ट, फाउंडेशन या दूसरी तरह की कंपनी खोलने में माहिर होती हैं जहां टैक्स या तो बहुत कम है या कतई नहीं है. इन फर्म्स का काम होता है कि जो पैसा लगा रहा है उसकी पहचान को छुपाकर रखा जाए. इसके बदले ये अपने क्लाइंट से मोटी फीस वसूलती हैं. पनामा पेपर्स खुलासा हुआ था, तब पनामा की ”लॉ फर्म” मोज़ैक फोंसेका का नाम आया था. इस बार 14 फर्म्स का नाम है. पैंडोरा पेपर्स में बड़ी संख्या में खुलासे पनामा की ही अल्कोगल नाम की फर्म से जुड़े हैं. अल्कोगल खुद को एक लॉ फर्म बताती है. पूरा नाम है अलीमान, कॉर्देरो, गालिंदो एंड ली. इन्हीं शब्दों के पहले अक्षरों से ‘अल्कोगल’ शब्द बना है.

ये फर्म्स कुछ इस तरह से अमीरों का भला करती हैं. अनिल अंबानी का ही केस ले लें. ICIJ और इंडियन एक्सप्रेस द्वारा किए गए खुलासे के मुताबिक असल में अनिल अंबानी के एक प्रतिनिधि अनूप दलाल ने पहले 9 ऑफशोर कंपनियां बनाईं. फिर इनमें से 7 कंपनियों ने बैंकों से लोन लिए. इन सारी कंपनियों के कर्ज़ के लिए रिलायंस/अनिल अंबानी ने गारंटी दी. जब ये लोन मिल गया तो इसके बाद मिली हुई रकम को दूसरी कंपनियों में लोन के तौर पर घुमा दिया गया. ये कंपनियां भी किसी न किसी तरीके से अनिल अंबनी से ही जुड़ी हुई थीं. ये तो हुआ बस एक तरीका. दुनिया भर में कई ग्लोबल कॉर्पोरेट सर्विसेज फर्म हैं जो इस तरह के जुगाड़ू और टैक्स बचाऊ इन्वेस्टमेंट करने में अमीर और ताकतवर लोगों की मदद करती हैं.

असल में पैंडोरा पेपर्स के पास ये सारे लीक्स ऐसी ही 14 कंपनियों के जरिए मिले हैं. इन 14 कंपनियों से जुड़े सूत्रों ने 2.97 टेराबाइट का डेटा उपलब्ध कराया है. इसमें बहुत सारे डॉक्युमेंट्स, तस्वीरें, ईमेल, स्प्रेडशीट और प्रेजेंटेशन हैं. इन्हीं के भीतर डूब कर महीनों-महीनों की मेहनत से ये खुलासे किए गए.

रिलायंस ग्रप के मुखिया अनिल अंबानी. उनकी गिनती एक समय दुनिया के सबसे अमीर लोगों में हुआ करती थी.
पैंडोरा पेपर्स लीक में ये बात सामने आई है कि अनिल अंबानी ने ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में हजारों करोड़ की कंपनियां खोलीं.

टैक्स हेवेनः जहां सब मुमकिन है

दुनिया भर में कई ऐसे छोटे देश हैं. जिनके पास देश चलाने के लिए संसाधन जैसे खेती या कारोबार जैसे विकल्प उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में उन्होंने अपने देश के बैंकिंग सिस्टम को ऐसे लोगों के लिए स्वर्ग में तब्दील कर दिया है जो अपना पैसा टैक्स एजेसियों से छुपाना चाहते हैं. ऐसा करने से दुनिया भर के अमीर उन देशों में पैसा इन्वेस्ट कर देते हैं. इसके कई उदाहरण हैं केमेन आइलेंड्स, मॉरिशिस, पनामा, बरम्यूडा, वगैरह. दुनिया में सारे बड़े देश अपने यहां किसी भी तरह के कारोबार पर कई तरह के कर लगाते हैं. व्यक्ति पैसा लगाए, उसपर भी कर देना होता है. लेकिन जिन देशों का ज़िक्र हमने अभी किया, वहां कई तरह के कर तो होते ही नहीं. जो होते भी हैं, वो भी नाम भर के लिए. कारोबार के नियम भी या तो बहुत उदार होते हैं, या तो होते ही नहीं. कंपनी खोलने वाला नागरिक हो, ये भी ज़रूरी नहीं. कंपनी को देश में दफ्तर खोलना पड़े, ये भी ज़रूरी नहीं. तो कंपनी खोलना बहुत आसान है. और कंपनी में जितने पैसे का निवेश हो या वो जितना पैसा कमाएगी, वो लगभग पूरा कंपनी के मालिकों की जेब में चला जाएगा.

इन्हीं में से एक देश है ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स. इसे शॉर्ट फॉर्म में कहते हैं BVI. आप भी जब पैंडोरा फाइल्स की दूसरी खबरें पढ़ेंगे तो आपको बार-बार बीवीआई कंपनी सुनने को मिलेगा. ऐसे में समझ जाइएगा कि ये वो कंपनियां हैं जो ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में खोली गई हैं. इसके नाम ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड से आप कंफ्यूज न हों. ये ब्रिटेन के आसपास नहीं, बल्कि अमेरिका के पास हैं. ये कैरेबियन आइलैंड्स का हिस्सा हैं. हालांकि इस पर राज ब्रिटेन का ही चलता है. यहां का शासन चलाने के लिए ब्रिटेन की क्वीन एक मेयर नियुक्त करती हैं. सुरक्षा और दूसरे काम ब्रिटेन ही देखता है. ये तकरीबन 54 आइलैंड्स का एक समूह है. इनमें से 4 बड़े द्वीप हैं, जिनका नाम है – टोरटोला, वर्जिन गोर्डा, एनेगाडा और जॉस्ट वैन डाइक. वैसे 16 और द्वीप हैं जिन पर लोग रहते हैं लेकिन बहुत कम. प्राकृतिक सुंदरता और मौसम के लिहाज से तो यह जगह स्वर्ग (Heaven) से कम नहीं है. लेकिन यहां के वित्तीय नियम कायदों ने इसे एक दूसरे तरह के हेवेन में भी तब्दील कर दिया है – टैक्स हेवेन.

दुनियाभर में वित्तीय अपराधों और टैक्स चोरी को पकड़ने के लिए अलग-अलग देशों की सरकारों ने आपस में समझौते कर रखे हैं. इनके तहत वो जानकारियां आपस में बांटते रहते हैं. लेकिन जो देश टैक्स हेवन बनना चाहते हैं, वो ऐसे समझौतों से दूर रहते हैं.

ज़रूरी नहीं कि हमेशा पूरा देश ही टैक्स हेवन हो. क्योंकि कई देश ऐसे भी हैं, जिनके अंदर कुछ ऐसे राज्य या शहर होते हैं, जहां के अपने अलग टैक्स क़ानून होते हैं, जो उन्हें ऊपर बताए गए मानकों के हिसाब से ‘टैक्स हेवन’ की श्रेणी में या उसके निकट ला देते हैं. आपको पता ही है कि ज़्यादातर मामलों में अमेरिका का एक राज्य का क़ानून दूसरे राज्य के क़ानून से बिलकुल अलग होता है. असल में इस तरह से टैक्स में रियायत देकर शहर, देश, राज्य और कई बार देशों का समूह व्यापार और पैसे को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. लेकिन यही ‘आकर्षित करने का चलन’ अगर एक सीमा से आगे निकल जाए तो दूसरे देशों, राज्यों, शहरों की सरकारों को दिक्कत होने लग जाती है. ऐसा इसलिए कि उनके यहां के धन-कुबेर अपना पैसा टैक्स हेवेन में छुपाना शुरू कर देते हैं. इसके साथ ही ‘टैक्स फ़्रॉड’ की संभावनाएं बहुत बढ़ जाती हैं.

हेवन माने स्वर्ग. लेकिन ये वाला हेवन दूसरा है. जिसकी स्पेलिंग heaven नहीं haven है. मतलब आश्रय. किनके लिए आश्रय? पैसों के लिए, कंपनियों के लिए, व्यापारियों के लिए, व्यापार के लिए.

इससे टैक्स हेवेन को क्या फायदा?

आपको लग सकता है कि अमीरे के इस रायते में क्यों ही कोई देश या राज्य पड़ेगा. लेकिन सोच कर देखिए – अगर किसी टैक्स हेवेन कंट्री में पैसों का लेनदेन होता हो, चाहे उस देश को इस लेन-देन का भले ही एक रुपया न मिले, फिर भी वहां पर बैंकिंग और फाइनेंशियल इंफ़्रास्ट्रक्चर खड़ा होगा ही होगा. इससे रोज़गार बढ़ेंगे और अर्थव्यवस्था का पहिया घूमेगा. और वो भी सरकार के बिना पैसे खर्च किए. आप ख़ुद सोचिए न आपके पास जितना ज़्यादा पैसा होगा उसपर लगने वाला ताला भी उतना ही महंगा होगा. तो ऐसे ही जिन लोगों का पैसा इन टैक्स हेवेन कंट्रीज़ में होगा वो सुनिश्चित करेंगे न कि पैसा सुरक्षित रहे? तो ये हो गया एक कमाई का साधन.

कितना अलग है पैंडोरा पेपर्स पहले के खुलासों से

इस तरह से पेपर लीक पहले भी हुए हैं. मिसाल के तौर पर पनामा पेपर लीक, पैराडाइज़ पेपर लीक्स आदि. लेकिन इस बार का लीक इन मायनों में पिछले लीक्स से अलग है.

# इसका साइज़ पहले के पेपर्स लीक से काफी ज्यादा है. 2017 के पैराडाइज पेपर लीक्स में सिर्फ 1.4 टेराबाइट का डेटा लीक हुआ था. इस बार ये उससे तकरीबन दुगना है.

# इस बार डेटा 14 अलग-अलग ऑफ शोर सर्विसेज प्रोवाइड करने वाली कंपनियों से लीक हुआ है. इस वजह से सबसे बड़ा चैलेंज था उसे समेटना. हर कंपनी अपने हिसाब से डेटा को स्टोर करती है. कोई क्लाइंट के नाम से , कोई कंपनी के नाम से तो कोई लोकेशन के नाम से. ऐसे में इसे खंगालना काफी मशक्कत भरा था.

# पैंडोरा पेपर्स ने 27 हजार कंपनियों और 29 हजार तथाकथित लाभ उठाने वाली कंपनियों की पड़ताल की गई है. ये पनामा पेपर लीक्स के मुकाबले दुगना से भी ज्यादा है.

# पैंडोरा पेपर्स ने पनामा पेपर्स के मुकाबले दुगने राजनेता और पब्लिक ऑफिसर्स का खुलासा किया है. बता दें कि पैंडोरा पेपर्स में 90 देशों 330 राजनेताओं और पब्लिक ऑफिसर्स के नाम हैं जिसनें से 35 ऐसे हैं जो वर्तमान में अपने देश की सत्ताधीश में हैं या रह चुके हैं.

पनामा, पैराडाइज़ और अब पंडोरा पेपर्स ये बताते हैं कि टैक्स बचाने, पैसा बनाने या छुपाने के तरीके बदल रहे हैं. लोग पहले से स्मार्ट हो रहे हैं. क्योंकि पनामा पेपर्स के बाद बड़े पैमाने पर दुनियाभर में कानून सख्त किए गए थे. ऐसे ही पेपर्स आगे भी आते रहेंगे वो भी और ज्यादा मात्रा में. जिससे कम से कम दुनिया भर की आम जनता को पता चल सके कि अमीरों ने अपना पैसा कहां-कहां छुपा रखा है. इससे जुड़ी जो भी नई जानकारी मिलेगी वो हम आपके लिए लाते रहेंगे.


वीडियो – खर्चा पानी: अहमदाबाद में गैस सप्लाई को लेकर अडानी की कंपनी सुप्रीम कोर्ट में केस हारी

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

कहानी 'मनी हाइस्ट' के 'बर्लिन' की, जिनका इंडियन देवी-देवताओं से ख़ास कनेक्शन है

कहानी 'मनी हाइस्ट' के 'बर्लिन' की, जिनका इंडियन देवी-देवताओं से ख़ास कनेक्शन है

'बर्लिन' की लोकप्रियता का आलम ये था कि पब्लिक डिमांड पर उन्हें मौत के बाद भी शो का हिस्सा बनाया गया.

10 साल पहले भी शाहरुख़ का समीर वानखेड़े से सामना हुआ था, समीर ने ठोका था तगड़ा जुर्माना

10 साल पहले भी शाहरुख़ का समीर वानखेड़े से सामना हुआ था, समीर ने ठोका था तगड़ा जुर्माना

जगह थी मुंबई एयरपोर्ट. अब दस साल बाद फिर से दोनों का नाम एक साथ सुर्ख़ियों में है.

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

अली का रोल करने वाले इंडियन एक्टर अनुपम त्रिपाठी का सलमान-शाहरुख़ कनेक्शन क्या है?

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

ईमानदारी से स्कोर भी बताते जाना. हम इंतज़ार करेंगे.

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

अलवारो मोर्टे ने वेटर तक का काम किया हुआ है. और एक वक्त तो ऐसा था कि बकौल उनके कैंसर से जान जाने वाली थी.

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

हीरो बनने आए शरत सक्सेना कैसे गुंडे का चमचा बनने पर मजबूर हुए?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

एक वक़्त इंडस्ट्री में टॉप पर थे कुणाल और उनके गाने पार्टियों की जान हुआ करते थे.

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

IPL स्कैंडल, मॉडल्स के आरोप, अंडरवर्ल्ड कनेक्शंस के आरोप, एक्स वाइफ के इल्ज़ाम सब हैं इस कहानी में.

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रेन्सन की कहानी, जहां भी गए तहलका मचा दिया.

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

पहला चुनाव हार गए थे, बीजेपी ने राज्य की जिम्मेदारी सौंपी है.